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Famous Shiv Temples In Uttarakhand - उत्तराखंड मे महादेव के प्रसिद्ध मन्दिर

Started by एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720, July 27, 2008, 08:37:15 PM

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

       photo                                              Rudranath-
          Small temples at Rudranath       

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

       photo                                              Rudranath          Cave of Rudranathji.  About 2 ft tilted  Swyambu Lingam is inside the cave.       

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

       photo                                              Gopinath          Centuries   old (about 12th century) Trident (Trishul) about 5 ft., in the Gopinath   Temple courtyard at Gopeshwar.  It is believed that it is made of about   8 different metals, and any kind of wheather has no effect on it till   date. Even the forceful wind is unable to uproot it.  As per locals, the   trident was fixed at this place when Lord Shiva threw it at Kamdeva to   kill him.


(PHoto Dinesh Pundhir)
       

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720


कल्पेश्वर शिव मंदिर धराली (उत्तरकाशी)

कल्पकेदार एव भागीरथी के संगम तट पर स्थित एक मात्र कल्पेश्वर मंदिर अपनी भव्यता के साथ कड़ा है! इस मंदिर के सतह पर कल्पकेदार गंगा प्रवाहमान है सफटिक शिवलिंग प्रतिष्ठित है !  आषाड़ और सावन के महीने में बाहर का शिव लिंग डूब जाता है !

मंदिर में लगा कल्पवृक्ष सिधिदायक है!

विनोद सिंह गढ़िया

अपार श्रद्धा का केंद्र है बागनाथ मंदिर

सरयू एवं गोमती के पावन संगम पर स्थापित पौराणिक बागनाथ मंदिर क्षेत्र के लोगों के लिए अपार श्रद्धा का केंद्र है। उत्तरायणी पर्व हो, महाशिवरात्रि या अन्य पर्व, मंदिर में श्रद्धालुओं का हमेशा तांता लगा रहता है। लोगों का विश्वास है कि मंदिर में जो भी श्रद्धालु सच्चे मन से शीश नवाता है, भोलेनाथ सभी की मनोकामना पूरी कर देते हैं।
शिवपुराण के मानस खंड के अनुसार मुनिश्रेष्ठ वशिष्ठ जी पतित पावनी सरयू को नगर से होकर अयोध्या की तरफ ले जा रहे थे, यहां पहुंचने पर मार्कण्डेय ऋषि तपस्या में लीन थे। कल-कल छल-छल करती सरयू की जलधारा मुनि को तप में लीन देखकर आगे बढ़ने से रुक गई। वशिष्ठ मुनि को मार्कण्डेय की तप भंग होने का खतरा सताने लगा। उन्होंने भोलेनाथ की आराधना की। भगवान शंकर और माता पार्वती वहां पहुंचे। शिवजी ने पार्वती से गाय का रूप धारण करने को कहा और खुद व्याघ्र का रूप धारण कर वह गाय पर झपट पड़े। गाय के रम्भाने पर सुनकर मार्कण्डेय ऋषि की आंखें खुल गई। व्याघ्र द्वारा गाय को दबोचना उन्हें अखर गया, जैसे ही वह गाय को मुक्त करने दौड़े सरयू की धारा आगे बढ़ गई। भोलेनाथ मार्कण्डेय ऋषि को इच्छित वर देकर अंतरध्यान हो गए। शिवजी के बाघ का रूप धारण करने से इस नगर का नाम पूर्व में व्याघ्रेश्वर जो कालांतर में बागेश्वर हो गया। मार्कण्डेय ऋषि की यहां तपस्या करने से नगर को मार्कण्डेय ऋषि की तपोभूमि कहते हैं। बागनाथ जी का यहां पहले बहुत छोटा मंदिर था। १६०२ ईसवी में राजा लक्ष्मी चंद ने मंदिर को भव्य रूप दिया। पार्श्व में काल भैरवनाथ का मंदिर पुराना, लेकिन आधुनिक लगता है। उत्तर भाग में बाणेश्वर का भव्य मंदिर समकालीन लगता है। लोगों का विश्वास है कि जो भी लोग मंदिर में सच्चे मन से १०८ लोटा जल चढ़ाते हैं। भोलेनाथ उसकी सभी मनोकामना पूरी कर देते हैं।

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720


Koteshwar (Rudraprayag)
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This temple of Lord Shiva is 3 km ahead in East NOrth of Alak Nanda River. This place got the importance of Lord Shiva Penance Place.

As per the mythological stories, Pandavas got emancipation from the sins of killing their brothers in Mahabahrat battle.

Anil Arya / अनिल आर्य

टपकेश्वर महादेव, देहरादून, शंभू शिवलिंग दर्शन, ये फोटो आज की ही है और आज यहाँ पर श्रधालुओ की बहुत ही ज्यादा भीड़ है. सारे पास प्रातः मै ही समाप्त हो गए है. यहाँ फोटो ले सकते है. महाशिवरात्री के दिन की पौराणिक शिवलिंग की तस्वीर. . ~ ॐ श्री टपकेश्वाराय  नमः ~ 

Devbhoomi,Uttarakhand


Anil Arya / अनिल आर्य

जल और दूध से बाबा का अभिषेक अमर उजाला ब्यूरो देहरादून। महाशिवरात्रि पर राजधानी भगवान शिव शंकर के रंग में रंगी नजर आई। दून के विभिन्न शिवालयों में भक्तों का सैलाब उमड़ पड़ा। महादेव के जयकारों से मंदिर परिसर गूंजते रहे। देर शाम तक मंदिरों में भक्तों का तांता लगा रहा।  शिवरात्रि पर मंदिरों में जलाभिषेक का क्रम बुधवार रात डेढ़ बजे से ही शुरू हो गया था। हरिद्वार से गंगाजल लेकर आए कांवड़ मंदिरों में पहुंचने लगे थे। सुबह चार बजे से अन्य श्रद्धालु पूजन को पहुंच गए। टपकेश्वर मंदिर में मंगलवार रात दस बजे संकीर्तन का आयोजन किया गया। इसके बाद रात करीब बारह बजे से ही जलाभिषेक शुरू हो गया था। ब्रह्म मुहूर्त पर भक्त मंदिर में उमड़ने लगे।  दोपहर बारह बजे तक डेढ़ लाख की संख्या में भक्तों ने टपकेश्वर महादेव का जलाभिषेक कर लिया था। मंदिर के महंत कृष्णा गिरी महाराज ने बताया कि भगवान भोले नाथ को लगभग पांच कुंतल दूध से जलाभिषेक हुआ। पंद्रह किलो हलवे का प्रसाद भी चढ़ाया गया। इसके अलावा पूरे दिन चार स्थानों पर भंडारा भी चलता रहा।  इसके अलावा बल्लूपुर स्थित शिव मंदिर, एमडीडीए कालोनी स्थित नर्वदेश्वर महादेव मंदिर, डाकरा गढ़ी स्थित प्राचीन स्वयंभू लिंग श्री नागेश्वर महादेव मंदिर, प्रेमनगर स्थित सनातन धर्म मंदिर और केदार पुरम स्थित सिद्धेश्वर महादेव मंदिर में भी जलाभिषेक हुआ। उधर, कालिका मंदिर में सुबह जलाभिषेक के बाद रामचरित मानस का पाठ शुरू हुआ। उधर, प्रेमनगर, टपकेश्वर महादेव, बावड़ी मंदिर, चंद्रबनी में आयोजित मेलों में बड़ी संख्या में लोग पहुंचे।  सवा लाख शिवलिंग बनाए  माता वैष्णो देवी गुफा मंदिर में ग्यारह सौ श्रद्धालुओं ने चार दिन में 1.25 लाख पार्थिव शिवलिंगों का निर्माण किया गया। इसके बाद विधिवत रुद्राभिषेक और जलाभिषेक किया गया। शिवलिंग पांच मार्च तक मंदिर में ही रहेंगे।  जल और दूध से बाबा का अभिषेक अमर उजाला ब्यूरो देहरादून। महाशिवरात्रि पर राजधानी भगवान शिव शंकर के रंग में रंगी नजर आई। दून के विभिन्न शिवालयों में भक्तों का सैलाब उमड़ पड़ा। महादेव के जयकारों से मंदिर परिसर गूंजते रहे। देर शाम तक मंदिरों में भक्तों का तांता लगा रहा।  शिवरात्रि पर मंदिरों में जलाभिषेक का क्रम बुधवार रात डेढ़ बजे से ही शुरू हो गया था। हरिद्वार से गंगाजल लेकर आए कांवड़ मंदिरों में पहुंचने लगे थे। सुबह चार बजे से अन्य श्रद्धालु पूजन को पहुंच गए। टपकेश्वर मंदिर में मंगलवार रात दस बजे संकीर्तन का आयोजन किया गया। इसके बाद रात करीब बारह बजे से ही जलाभिषेक शुरू हो गया था। ब्रह्म मुहूर्त पर भक्त मंदिर में उमड़ने लगे।  दोपहर बारह बजे तक डेढ़ लाख की संख्या में भक्तों ने टपकेश्वर महादेव का जलाभिषेक कर लिया था। मंदिर के महंत कृष्णा गिरी महाराज ने बताया कि भगवान भोले नाथ को लगभग पांच कुंतल दूध से जलाभिषेक हुआ। पंद्रह किलो हलवे का प्रसाद भी चढ़ाया गया। इसके अलावा पूरे दिन चार स्थानों पर भंडारा भी चलता रहा।  इसके अलावा बल्लूपुर स्थित शिव मंदिर, एमडीडीए कालोनी स्थित नर्वदेश्वर महादेव मंदिर, डाकरा गढ़ी स्थित प्राचीन स्वयंभू लिंग श्री नागेश्वर महादेव मंदिर, प्रेमनगर स्थित सनातन धर्म मंदिर और केदार पुरम स्थित सिद्धेश्वर महादेव मंदिर में भी जलाभिषेक हुआ। उधर, कालिका मंदिर में सुबह जलाभिषेक के बाद रामचरित मानस का पाठ शुरू हुआ। उधर, प्रेमनगर, टपकेश्वर महादेव, बावड़ी मंदिर, चंद्रबनी में आयोजित मेलों में बड़ी संख्या में लोग पहुंचे।  सवा लाख शिवलिंग बनाए  माता वैष्णो देवी गुफा मंदिर में ग्यारह सौ श्रद्धालुओं ने चार दिन में 1.25 लाख पार्थिव शिवलिंगों का निर्माण किया गया। इसके बाद विधिवत रुद्राभिषेक और जलाभिषेक किया गया। शिवलिंग पांच मार्च तक मंदिर में ही रहेंगे।  जल और दूध से बाबा का अभिषेक अमर उजाला ब्यूरो देहरादून। महाशिवरात्रि पर राजधानी भगवान शिव शंकर के रंग में रंगी नजर आई। दून के विभिन्न शिवालयों में भक्तों का सैलाब उमड़ पड़ा। महादेव के जयकारों से मंदिर परिसर गूंजते रहे। देर शाम तक मंदिरों में भक्तों का तांता लगा रहा।  शिवरात्रि पर मंदिरों में जलाभिषेक का क्रम बुधवार रात डेढ़ बजे से ही शुरू हो गया था। हरिद्वार से गंगाजल लेकर आए कांवड़ मंदिरों में पहुंचने लगे थे। सुबह चार बजे से अन्य श्रद्धालु पूजन को पहुंच गए। टपकेश्वर मंदिर में मंगलवार रात दस बजे संकीर्तन का आयोजन किया गया। इसके बाद रात करीब बारह बजे से ही जलाभिषेक शुरू हो गया था। ब्रह्म मुहूर्त पर भक्त मंदिर में उमड़ने लगे।  दोपहर बारह बजे तक डेढ़ लाख की संख्या में भक्तों ने टपकेश्वर महादेव का जलाभिषेक कर लिया था। मंदिर के महंत कृष्णा गिरी महाराज ने बताया कि भगवान भोले नाथ को लगभग पांच कुंतल दूध से जलाभिषेक हुआ। पंद्रह किलो हलवे का प्रसाद भी चढ़ाया गया। इसके अलावा पूरे दिन चार स्थानों पर भंडारा भी चलता रहा।  इसके अलावा बल्लूपुर स्थित शिव मंदिर, एमडीडीए कालोनी स्थित नर्वदेश्वर महादेव मंदिर, डाकरा गढ़ी स्थित प्राचीन स्वयंभू लिंग श्री नागेश्वर महादेव मंदिर, प्रेमनगर स्थित सनातन धर्म मंदिर और केदार पुरम स्थित सिद्धेश्वर महादेव मंदिर में भी जलाभिषेक हुआ। उधर, कालिका मंदिर में सुबह जलाभिषेक के बाद रामचरित मानस का पाठ शुरू हुआ। उधर, प्रेमनगर, टपकेश्वर महादेव, बावड़ी मंदिर, चंद्रबनी में आयोजित मेलों में बड़ी संख्या में लोग पहुंचे।  सवा लाख शिवलिंग बनाए  माता वैष्णो देवी गुफा मंदिर में ग्यारह सौ श्रद्धालुओं ने चार दिन में 1.25 लाख पार्थिव शिवलिंगों का निर्माण किया गया। इसके बाद विधिवत रुद्राभिषेक और जलाभिषेक किया गया। शिवलिंग पांच मार्च तक मंदिर में ही रहेंगे। epaper.amarujala
Quote from: Anil Arya on March 02, 2011, 12:31:07 PM
टपकेश्वर महादेव, देहरादून, शंभू शिवलिंग दर्शन, ये फोटो आज की ही है और आज यहाँ पर श्रधालुओ की बहुत ही ज्यादा भीड़ है. सारे पास प्रातः मै ही समाप्त हो गए है. यहाँ फोटो ले सकते है. महाशिवरात्री के दिन की पौराणिक शिवलिंग की तस्वीर. . ~ ॐ श्री टपकेश्वाराय  नमः ~ 

Anil Arya / अनिल आर्य