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Started by एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720, October 10, 2007, 01:13:01 PM

Bhishma Kukreti

हिन्दू राष्ट्र किलै जरूरी च?
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सरोज शर्मा-जनप्रिय लेख श्रृंखला
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(यु मत हिन्दू जागरण समिति क च)
अपण पद, पक्ष,संघटना, जाति, संप्रदाय, आदि भेदभाव भूलिक हिन्दुओ क संगठित करण और हिन्दु राष्ट्र की स्थापना करण उदेश्य च।हिन्दू राष्ट्र किलै जरूरी च?
विश्व मा ईसाई क 157 ,मुसलमानो का 52,बौद्धो का 12 ,जबकि यहूदियों क एक राष्ट्र च।
हिन्दुओ क ऐ सौरमंडल मा राष्ट्र कख च?
हां हिन्दुओ क एक सनातन राष्ट्र 1947 तक यीं धरती मा छाई, आज ऐ राष्ट्र की क्या स्थिती च?
स्वतंत्रता क समय और आज क भारत!
1947 मा जख एक पैसा कु ऋण नि छा, वै भारत म आज प्रत्येक नागरिक अपण मुंडम 32,812 रूप्यों क ऋण क भार ब्वकणू च ।1947 मा 33%से ज्यादा निर्यात कन वल भारत आज 1%से भि कम निर्यात कनू च।जख ज्यादा से ज्यादा 10,20 विदेशी प्रतिष्ठान छाई, वै भारत म आज 5,000 से भि ज्यादा विदेशी प्रतिष्ठान थैं मुंडमा उठाणा छन ,जख एक भि संवेदनशील जनपद नि छा, वै भारत मा आज 300 से भि ज्यादा संवेदनशील जनपद बणि गैन ।जख प्रति नागरिक एक द्वी गौ हूंदी छै वै भारत मा अंधाधुंध गोहत्या क कारण 12लोगों मा एक गौडी च ।विदेश म जाकि आत्याचारी कर्जन वाइली, ओडवायर जना शाशको थैं ईसावासी करणवल भारत आज संसद पर आक्रमण करणवला अफजल थैं फांसी दीण मा कतगा साल लगिन,
देशाभिमान जागृत रखणवल भारत से, देशाभिमान गिरवी रखणवल भारत, निम्नतम भ्रष्टाचार करणवल भारत से भ्रष्टाचार की उच्चतम सीमा वल भारत,
सीमा म झंडा फैलाणव भारत से आज नि त भोल कश्मीर से हाथ ध्वै कि बैठणा कि प्रतीक्षा करणवल भारत...ई सूची लिखदा समय भि मन आक्रोशित ह्वै जांद। पर गण कि त दूर, मनकी भी लज्जा नि रखणवला, शाशनकर्ता सर्वत्र गर्व से छाती ताणिक घुमणा छन।
मुसलमान आक्रमणकारियों और धूर्त ब्रिटिशो न भि भारतीय जनता थैं इतगा त्रसत नि कैर वै से ज्यादा सैकड़ो गुणा लोकतंत्र से उपहार स्वरूप मिलीं यूं शाशनकर्ताओ न मात्र छै दशक मा कैर दयाई !
लोगो द्वारा लोगों के लिए ,लोगो का शाशन, लोकतंत्र कि इन व्याख्या, भारत जन विश्व का सबसे बढ़ देश खुण स्वारथियो द्वारा स्वार्थ खुण चयनित (निर्वाचित) स्वार्थी शाशनकर्ताओ कु शाशन, इन ह्वै ग्या ।ऐ लेखमाला म भारत की अनेक समस्या वर्णित छन। यूं समस्याओ थैं पैड़िक लोगों क मन मा संदेह ह्वाल कि हिन्दू राष्ट्र मा ई समस्या कनकै दूर ह्वैलि?क्या इतिहास म कभी इन ह्वाई, इन समझण वला लोग ई समझ लीं कि हां इतिहास म इन ह्वाई च। छत्रपति शिवाजी महाराज क हिन्दू राष्ट्र (हिन्दवी स्वराज्य)स्थापित हूंदा हि वै समय कि समस्याएं दूर ह्वीं।
छत्रपति शिवाजी क हिन्दू राष्ट्र स्थापित हूंद ही सब कुशल मंगल!
छत्रपति शिवाजी का जन्म हूण से पैल भि आज क समान ही हिन्दू स्त्रीयों क शील सुरक्षित नि छा, प्रत्यक्ष जीजामाता कि जिठणि थैं पाणि लाणदा यवन सरदार न अगवा कैर द्या, वै समय भि मंदिर भ्रष्ट किये जांद छाई, गोमाता की गर्दन म कब कसै कु छुरा चल जा कुछ पता नि हूंद छा, महाराजा क हिन्दू राष्ट्र स्थापित हूंदा हि मंदिर ढहाण बंद ह्वै गिन, इतगा हि न, अपितु मंदिर ढहा कि बणी मस्जिद पूर्वत मंदिर बणै गैन, गौ मातायें भि गोहत्या बंद हूण से आनंदित ह्वै गिन। गोहत्या बंद कारो इन हस्ताक्षर कभि नि भेजै गैन, महाराज न क्वी गोहत्या प्रतिबंधक बिधेयक मंत्रीमंडल म प्रस्तुत नि कैर। आज हमथैं मंहगाई दिखेणी च क्या कभि पाढ़ भि च कि महाराज क शाशन काल मा कभि जनता मंहगाई से त्रस्त छै?
जय जवान जै किसान कि घोषणा करणवला शाशनकर्ता आज जवान और किसान द्वीयो की नृशंस हत्या करवाणा छन। महाराज थैं त किसानो का प्राण ही न कि ऊंकि फसल भि अमूल्य लगदी छै, ऊन आज्ञा दे कि किसानो द्वारा उपजयी फसल क डंठल थैं भि क्वी हाथ नि लगाया महाराज न किसानो जन जवानो थै भि संभाल, वु लडै क समय सैनिको थैं पुरस्कार क दगड़ सोना का आभूषण भि इनाम मिलदा छा, कारगिल युद्ध म वीरगति प्राप्त करणवल सैनिको कि विधवाओ खुण वर्ष 2010 म आदर्श सोसाइटी बणै ग्या, पर वै मा भि एक भि आसैनिक क की विधवा फ्लैट नि मिल, भ्रष्टाचारी लोगो न ही सब हडप दिनी ।
ऐ का विपरीत महाराज न सिहगढ क युद्ध मा वीरगति प्राप्त करणवल तानाजी क नौना क ब्या कैरिक ऊंका परिवार थैं सान्त्वना दे!
हिन्दू राष्ट्र म भारत थैं परेशान करणवली भैर कि समस्या भि दूर ह्वैलि।
हिन्दू राष्ट्र म आन्तरिक समस्या भि दूर ह्वै जालि, और भैर कि समस्या त दूर ह्वै ही जाली। यूं समस्याओ म मुख्य च पाकिस्तान और चीन से संभावित आक्रमण। शिवकाल म भि ई समस्या छै औरंगजेब शिवा क छवटु सि राज्य नष्ट करण पर तुल्यूं छाई;पर महाराज क राज्यभिषेक और विधिवत हिन्दू राष्ट्र स्थापित ह्वै।
ई सुणदा ही वैका पैरों की जमीन खिसक गै, महाराज क मरणतक वू महाराष्ट्र मा हि न अपितु दक्षिण मा ही नि ऐ ।
एक बार हिन्दू राष्ट्र कि स्थापना हूण क बाद सब्या पड़ोसी मुल्क अफ्वी सीधा हवै जाला,
हिन्दू राष्ट्र क विषय निकलदा हि तथाकथित धर्म निरपेक्षतावादियों द्वारा सवाल उठये जांद हिन्दू राष्ट्र म मुसलमानो दगड़ कन व्यवहार किए जाल?वास्तव म ई प्रश्न मुसलमानो से पुछै जाण चैंद। जु बव्लदिन हंस के लिया पाकिस्तान लड़ के लेंगे हिन्दुस्तान!ऐ प्रश्न क क्वी उत्तर च?
हिन्दू राष्ट्र म मुसलमानो से ही न और भि पंथियो से इनि व्यवहार किऐ जाल जन शिव क राज्य मा किऐ ग्या ।
संक्षेप मा सूर्योदय हूण से पैल सर्वत्र अंधकार हूंद पर सूर्य क उगदा हि अंधकार अफ्वी नष्ट ह्वै जांद। आज भारत म समस्या रूपी अंधकार हिन्दू राष्ट्र स्थापित हूंदा हि समाप्त ह्वै जाल। धर्माचरणी शाशनकर्ताओ क कारण भारत कि सब्या समस्याओ न दूर ह्वै जाण। और सदाचार क कारण सरया जनता भि सुखी ह्वै जालि।
कै एक द्वी समस्याओ क विरोध क अपेक्षा हिन्दू राष्ट्र स्थापित करण ह्वाल। हिन्दू राष्ट्र भारत क लोगों खुण ही न अपितु समस्त मानव जाति क कल्याण हेतु स्थापित किए जाणवल हिन्दू राष्ट्र सहज स्थापित नि ह्वै सकद।
पांडव मात्र पांच गौं मंगणा छाया वी भि सहजता से कख मिलिन। हमथैं कश्मीर से कन्याकुमारी तक अखंड हिन्दू राष्ट्र चयैंद। ऐ खुण भौत संघर्ष कि आवश्यकता च।भारत कि एक द्वी समस्याओ (गोहत्या, धर्मान्तरण, गंगा प्रदूषण, कश्मीर समस्या, राममंदिर, स्वभाषा रक्षा आदि)क विरोध म अलग अलग लड़ना कि अपेक्षा सर्व समविचारी व्यक्ति और संस्थायें मिलिक हिन्दू राष्ट्र स्थापना खुण संघर्ष कारण चैंद। स्वामी विवेकानंद, योगी अरविंद, वीर सावरकर, पं गोलवलकर जी जना हिन्दू धर्म क महान योद्धाओ थैं अपेक्षित धर्माधारित हिन्दू राष्ट्र स्थापित हूण खुण आवश्यक शारीरिक, मानसिक, बौध्दिक और आध्यात्मिक सामर्थ्य हिन्दूनिष्ठो थैं मिल या हि प्रार्थना च।


Bhishma Kukreti

जंदरौ प्रारम्भिक इत्यास (चक्की इतिहास )
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उषा बिज्ल्वाण
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-एक ग्रिस्टमिल (भी: ग्रिस्ट मिल , कॉर्न मिल , आटा चक्की , फीड मिल या फीडमिल ) अनाज का दाणौ तै आटा और मिडलिंग में पीसदी छ । यू शब्द य त पीसणा की क्रियाविधि या येतै धारण करण वाली इमारत तै संदर्भित कर करदू। पीस अनाज छा जैतै पीसणी की तैयारी म येका भूसा से अलग किए जांदू ।
पीसण वाली मिलौं का प्रकार
• पवनचक्की , पवन चालित
• पनचक्की , जल चालित
• घोड़े की चक्की , पशु संचालित
• ट्रेडव्हील , मानव संचालित (पुरातन: "ट्रेडमिल")
• शिप मिल , नदी का किनारा या पुल का पास तैरदी छ।
• Arrastra , पीसण तै साधारण चक्की (आमतौर पर) सोना या चांदी का अयस्क।
• रोलर मिल , सिलेंडर कू उपयोग करीक अनाज और अन्य कच्चा माल तै पीसण एक उपकरण
• स्टाम्प मिल , आगे की प्रक्रिया तै या अन्य सामग्रियों तै भंग करनक अयस्क तै पाउडर मा कम करनक तै एक विशेष मशीन
• निर्माण की वस्तु बणौणक व्यवसाय कू स्थान। मिल शब्द एक कारखाना तै एक बार आम उपयोग मा थौ कीक की औद्योगिक क्रांति का शुरुआती चरणों मा कई कारखाना एक तरबूज द्वारा संचालित था, लेकिन आजकल येकू उपयोग केवल कुछ विशिष्ट संदर्भों मा ही होन्दू उदाहरण तै,
o बार्क मिल टेनरियों तै टैनबार्क कू उत्पादन करदी।
o साइडर मिल सेब तै कुचलीक साइडर देंदू।
o ग्रिस्टमिल अनाज तै पीसीक आटा मा बदल देंदू।
o ऑयल मिल , एक्सपेलर प्रेसिंग , एक्सट्रूज़न देखा
o पेपर मिल कागज कू उत्पादन करदी
o सॉमिल लकड़ी काटदू
o स्टार्च मिल
o स्टील मिल स्टील बणौदू
o चीनी मिल (जैतै चीनी रिफाइनरी भी बोले जांदू ) चुकंदर या गन्ना तै विभिन्न तैयार उत्पादौं मा संसाधित करदू
o कपड़ा कू कारखाना
 रेशम मिल , रेशम तै
 सन मिल , सन तै
 कपास मिल , कपास तै
o चावल तै हल करनक हलर (जैतै चावल मिल या चावल की भूसी भी बोले जांदू) कू उपयोग होंदू
o पाउडर मिल बारूद कू उत्पादन करदी
• बॉल मिल
• मनका मिल
• कॉफ़ी की मिल
• कोलाइड मिल
• शंक्वाकार चक्की
• फाड़नवाला
• डिस्क मिल
• एज मिल
• ग्रिस्टमिल , जैतै आटा चक्की या मकई मिल भी बोले जांदू
• हैमर मिल
• इसामिल
चक्की कु प्रारम्भिक इत्यास –
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यूनानी भूगोलवेत्ता स्ट्रैबो रिपोर्ट भूगोल एक पानी संचालित अनाज चक्की राजा का महल का पास ही अस्तित्व मा छ। Mithradates छठी Eupator पर Cabira , एशिया माइनर , येसे पैली ७१ ई.पू.। [1]
एक पुरानी स्वीडिश आटा चक्की मा पीसणा की व्यवस्था
शुरुआती मिलों मा क्षैतिज चप्पू का पहिये था, एक व्यवस्था जैतै बाद मा " नॉर्स व्हील " का रूप मा जाणे जाण लगी , जन कि स्कैंडिनेविया मा पाए गै थौ। [२] चप्पू कू पहिया एक शाफ्ट से जुड्यूं होंदू थौ, जू बदला मा, चक्की का केंद्र से जुड्यूं होंदू थौ जैतै "धावक पत्थर" बोले जांदू थौ।
। पैडल पर पाणी द्वारा उत्पादित टर्निंग फोर्स तै सीधा रनर स्टोन मा स्थानांतरित कर दिए गै , जैसे यू एक स्थिर " बिस्तर ", समान आकार और आकार का पत्थर का खिलाफ पीस गे । [२] इं सरल व्यवस्था मा गियर की आवश्यकता नी थै लेकिन नुकसान यू थौ कि पत्थर का घूमणा की गति उपलब्ध पाणी की मात्रा और प्रवाह पर निर्भर थौ और केवल तेज बगण वाली धाराओं वाला पहाड़ी क्षेत्रों मा उपयोग तै उपयुक्त थै। [२] पानी का प्रवाह की मात्रा और गति पर निर्भरता कू मतलब यू भी थौ कि पत्थर का घूमणा की गति अत्यधिक परिवर्तनशील थै और इष्टतम पीसण की गति तै हमेशा बणैक नी रखे जै सकदू थौ। [2]
पहली शताब्दी ईसा पूर्व का अंत तक रोमन साम्राज्य मा ऊर्ध्वाधर पहिया उपयोग मा था , और यैकू वर्णन विट्रुवियस द्वारा किए गै थौ । [३] रोमन तकनीक का शिखर शायद बरबेगल एक्वाडक्ट और मिल छन जहां १९ मीटर की गिरावट का साथ पाणी सोलह पाणी का पहिया चलौंदू , जू प्रति दिन २८ टन की अनुमानित क्षमता देंदू। [४] यन प्रतीत होंदू कि रोमन काल का बाद का दौरान जल मिलों का उपयोग जारी थौ।


Bhishma Kukreti

हिन्दू राष्ट्र आखिर क्या च?
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सरोज शर्मा-जनप्रिय लेख श्रृंखला

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हिन्दू राष्ट्र आखिर क्या च? ई वु जुमला च जु राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का विचारो से सहमति नी रखणवलों थैं परेशान करद,
पर सवाल ई च कि कि वूंकि चिंता वाजिब च,
जब राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का प्रमुख मोहन भागवत बव्लदिन कि हिन्दुस्तान हिन्दू राष्ट्र च त वूंक ब्वलयूं क मतलब क्या च,
यख सवाल ई बणद कि हिन्दू और राष्ट्र शब्द न भागवत क्या ब्वलण चंदिन,
दूसर शब्द पर पैल प्रकाश डलदौं. राष्ट्र क मतलब देश से च साधारण तौर पर ऐ कु मतलब राज्य या सरकार से लिऐ जांद,
हिन्दू राष्ट्र कि त एक स्पष्ट अवधारणा च किलै कि धार्मिक ग्रंथो मा बतऐ ग्या कि ऐकु ढांच कन हूण चैंद.
साल 2008 तक नेपाल धरती क एकमात्र हिन्दू राष्ट्र छाई, बख क्षत्रिय राजवंश क खात्मा ह्वाई और 2008 मा नेपाल गणतंत्र बण ग्या,
सवाल ई च कि नेपाल थैं हिन्दू राष्ट्र किलै ब्वलेजांद छा, किलैकि हिन्दू संहिता मनुस्मृति क अनुसार कार्यकारी सत्ता क राजा हूंद, क्या नेपाल हिन्दू राष्ट्र केवल ऐ कारण छाई,
धार्मिक ग्रन्थ कि क्वी बात नेपाल म लागू नि किऐ जा सकदि छै किलैकि ई मानवाधिकारो की सार्वभौम घोषणा क खिलाफ हूंद,
आर एस एस न ई मांग नि कैर कि भारतीय राज्य जाति क आधार पर बणयै जा, इलै हम मनदा छौं कि राष्ट्र क मतलब देश से च,
नेशन शब्द क अर्थ च कि कै भि देश या क्षेत्र म रैंण वल जनसमुदाय जैका पूर्वज, भाषा, संस्कृति या इतिहास एक जना ह्वा,
अब हम हिन्दू शब्द पर अंदौं, भारत सिंधू और हिन्दू क मिलन बेशक भौत पुरण च और हमन सिकंदर और पौरूष कि लड़ै क बार मा भि सुणयू च, हम मेगास्थनीज क इंडिका क बार मा भि जणद छौं,
हलांकि 'हिन्दुस्तान हिन्दू राष्ट्र, च वला बयान म ई तीन लफ्ज़ो कि बात करण बेमानि च किलैकि तब हिन्दुस्तान क मतलब भारतीय राष्ट्र ह्वाल और ई एक ही बात थैं द्वी बार ब्वलण जन ह्वाल,
एक व्याख्या ई भि च कि भारतीयो थैं हिन्दू मने जा, किलैकि ऊंकि पछयाण हिन्दू कि च और ऐकि जड़ ऊंकि सांस्कृतिक अभिव्यक्ति च,
भारत म इस्लाम और इसाईयत कु जु स्वरूप च वु कुछ हद तक हिन्दुस्तानि संस्कृति क ही रूप च और दिखै जा कि दुनिया का दुसर हिस्सो मा यूं धर्मो का तौर तरीका अलग हूण चंदिन,
हिन्दू शब्द क इस्तेमाल जब भौगोलिक संदर्भो म किए जांद तब संघ थैं कई तबकों क समर्थन मिलद, ऐ मा कुछ अल्पसंख्यक भि छन जु ऐ परिभाषा से सहमत छन,
भारतीय जनता पार्टी क नेता और गोवा क उप-मुख्यमंत्री फ्रांसिस डिसूज़ा न अंग्रेजी क अखबार टाइम्स ऑफ इंडिया थैं दियूं एक इंटरव्यू मा ब्वाल कि भारत एक हिन्दू राष्ट्र च ऐ मा क्वी शक नी ई हमेशा से हिन्दू राष्ट्र छाई और हमेशा हिन्दू राष्ट्र रालु, आपथैं क्वी हिन्दू राष्ट्र नि बणाण,
जब ऐकि व्याख्या करण कु ब्वले ग्या तब ऊंक जवाब छा कि-हिन्दुस्तान म रैणवला सब्या भारतीय हिन्दू छन, यूं मा एक मि भि छौं मि एक ईसाई हिन्दू छौं, मि एक हिन्दुस्तानी छौं,
भाजपा क अल्पसंख्यक मोर्चा क अध्यक्ष रशीद अंसारी भि ऐ से इत्तफाक रखदिन, समाचार एजेंसी पीटीआई थैं दियां एक इंटरव्यू म ऊंन अल्लामा इकबाल कि एक नज्म क हवाला द्या, सारे जहाँ से अच्छा से मशहूर च, ऐ गीत म इकबाल भारतीयो थैं हिंदी ब्वलदिन, हिन्दी हैं हम, वतन है हिन्दुस्तां हमारा,
अंसारी न ब्वाल कि भागवत जी न जु भी ब्वाल वैक एक सामाजिक संदर्भ च, ब्वलण क मतलब ई नी कि दूसर धर्मो के लोग धार्मिक लिहाज से हिन्दू छन, ऊंकी टिप्पणी थैं सामाजिक नजरिया से देख्ये जाण चैंद, और ऐ पर आपत्ति नि हूण चैंद,
एक मुस्लिम नेता अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री नजमा हेपत्ल्लुलाह न भि हिन्दुस्तान टाइम्स मा एक इंटरव्यू मा भागवत क बचाव कैर, जब वूं से पुछै ग्या कि भारत म अल्पसंख्यको थैं हिन्दू मुस्लिम और इसाई थैं हिन्दू इसाई ब्वलण क्या उचित च, तब हेपत्ल्लुलाह कु जवाब छा कि ई शै या गलत हूण कि बात नी एकु संबंध इतिहास से च अगर कुछ लोग मुसलमानो थैं हिंदी या हिन्दू बव्लदिन त ऐ बात थैं संजीदगी से नि लींण चैंद किलैकि ऐ से मजहब मा क्वी फर्क नि पव्ड़द, उदाहरण क तौर पर अरब जगत भारत थैं अल-हिन्द क नाम से जिक्र करद, मोहम्मद साहब क एक रिश्तेदार क नाम हिंदा छाई, और अरब की सबसे बड़या तलवार क नौ भि हिंदा च , बस इतगा ही।


Bhishma Kukreti

इंडोनेशिया क आकर्षक हिन्दू मंदिर
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सरोज शर्मा-जनप्रिय लेखन संसार

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इंडोनेशिया अपण खूबसूरती क कारण ज्यादातर लोगों कि मनपसंद टूरिस्ट डेस्टिनेशन मनै जांद। यख ज्यादातर मुस्लिम आबादी च पर फिर भि यख हिन्दू संस्कृति कि छाप देखणक मिलद, यख हिन्दुओ का कई प्रसिद्ध मंदिर भि छन, यखक जावा दीप मा एक इन मंदिर स्थित च जख कई सालों पुरण शिवलिंग च, जानकारी क अनुसार ई शिवलिंग स्फटिक से बण्यू च। जैक भितर क तरल जल थैं स्थानीय निवासी पवित्र मनदा छन
इंडोनेशिया का प्रसिद्ध और खूबसूरत मंदिर
तनह लोट मंदिर ,बाली: ई मंदिर भगवान विष्णु थैं समर्पित च। बाली घुमणक जांणवला पर्यटक ऐ मंदिर क दर्शन करणा नि भूलदा।
मनै जांद कि ऐ मंदिर क निर्माण 16 वीं शताब्दी क आसपास ह्वाई।
अपणी खूबसूरती क कारण ई मंदिर इंडोनेशिया क प्रमुख दर्शनीय स्थलो म आंद।
पुरा बेसकिह मंदिर:ऐ मंदिर थैं 1995 मा यूनेस्को द्वारा विश्व धरोहर घोषित कियै ग्या। ई मंदिर भौत पुरण च जख हिन्दू देव देवताओ कि प्रतिमा छन। ऐ खूबसूरत मंदिर थैं द्यखण कु दुनियाभर से लोग अंदिन।
रा तमन सरस्वती मंदिर:ई मंदिर ज्ञान कि देवी सरस्वती थैं समर्पित च। ऐ मंदिर म बणया सुंदर कुंड यखक प्रमुख आकर्षण क केन्द्र छन ।ऐ मंदिर म रोज संगीत क आयोजन किऐ जांद। ऐ मंदिर मा सरस्वती देवी कि पूजा संगीत और ज्ञान कि देवी रूप मा हूंद।
सिंघसरी शिव मंदिर
मनै जांद कि ऐ मंदिर क स्थापना 13वीं शताब्दि क करीब ह्वाई यख भगवान शिव क अलौकिक रूप द्यखण कु मिलद, ऐ मंदिर म भगवान शिव क त्यौहार धूमधाम से मनयै जंदिन।
प्रम्बानन मंदिर: ई मंदिर भगवान विष्णु, शिव, और ब्रह्मा जी थैं समर्पित च। ई मंदिर भि यूनेस्को द्वारा विश्व धरोहर घोषित च। यख त्रिदेवो क दगड़ ऊंका वाहनो खुण भि अलग अलग मंदिर बंणया छन।


Bhishma Kukreti

मुरूगन मंदिर मलेशिया
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सरोज शर्मा- जनप्रिय लेखन श्रंखला

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भारत मा हिन्दू देव देवताओ का कै इन मंदिर छन जु पौराणिक कहानियों और रहस्यों थैं अफमा समेटयां छन।
पर इन मंदिर भारत म हि ना भारत क सीमा क भैर भि विश्व का अन्य देशों मा भि पयै जंदिन।
मलेशिया कि राजधानी कुआला लम्पूर क गोम्बैक जिला म चूना क पत्थर कि प्राकृतिक बाटु गुफा च जख भगवान मुरूगन क मंदिर च (Malaysia Murugan temple) .बतंदीन कि ऐ मंदिर थैं सुब्रमण्यम स्वामी मंदिर नाम से भि जंणै जांद।
बाटु गुफाओं क इतिहास आज से 40 करोड़ वर्ष प्राचीन मने जांद। ऐ गुफा कि खोज सर्व प्रथम साल 1878 म अमेरिकन प्रकृति विज्ञानी विलियम होनार्ड न कैर।
तथ्यों कि मनौ त पुरण समै मा तेमुअन जनजाति क लोग अपण रैंण खुण यूं गुफाओं क प्रयोग करद छा। ई गुफाएं मलेशिया की राजधानी कुआलालम्पुर बटिक 13 किलोमीटर की दूरी पर छन।
ऐ गुफा क नौ बाटु ऐ क पिछनै बैंणवली नदी क नाम पर च। यखिम मंदिरो कि श्रंखलाएं ( batu Cave Temple) छन। जखम भगवान मुरूगन क मंदिर च, सबसे खास बात ई च कि यख मा आण से इन नि लगदू कि हम भारत क भैर छौं।ई क्षेत्र तमिल लोगों खुण विषेश हिन्दू धार्मिक स्थलों म मनै जांद।
मलेशिया मुरूगन मंदिर क इतिहास यखक गुफाओं से जुडयूं च ,करीब 40 करोड़ वर्ष पुरणि गुफा कि खोज क बाद यख तमिल व्यापारी के थम्बूस्वामी पिल्लै आया छा,के थम्बूस्वामी थैं गुफा क द्वार पर भगवान मुरूगन क भाला क जन प्रतीत ह्वाई, द्वार खव्लदा हि ऊंक मन म मंदिर बणयै जाण क विचार ऐ, और वर्ष 1891 म तमिल व्यापारी न भगवान मुरूगन कि प्रतिमा यख स्थापित कैर।
देखदा-देखदा ई स्थान पवित्र तीर्थ म तब्दील ह्वै ग्या। और तमिल लोगों क तीर्थस्थल मनै ग्या। ई मंदिर हिन्दू धर्म क तमिल लोगों क प्रमुख तीर्थ च।
जानकारि खुण बतै दियूं कि भगवान मुरूगन कि स्थापना क एक वर्ष बाद हि ऐ स्थान मा थाईपुसम त्योहार मनै जाण लग। जु भगवान मुरूगन क जन्मदिवस क रूप मा मनयै जांद। ऐ त्योहार म हजारों कि संख्या म यख तमिल आबादी पौंचद ।
मलेशिया क मुरूगन मंदिर कि वास्तुकला ,मलेशिया क हिन्दू मंदिर मुरूगन चूना पत्थरो वली गुफाओ कि श्रंखला मौजूद छन।
मंदिर तक पौंछण कु करीब 272 सीढियों म चढ़ण पव्ड़द। ऐ मूर्ती कि ऊंचै लगभग 140 फुट च।मूर्ति निर्माण म करीब तीन वर्ष क समय लग। और प्रतिमा थैं बणाण वास्ता 15 कारीगर बुलये गैं।
भगवान मुरूगन से जुड़ी पौराणिक कथा जै क अनुसार शिव न पार्वती दगड़ नृत्य कैर वै दिन हि पार्वती क ज्येष्ठ पुत्र कुमार कार्तिकेय (मुरूगन स्वामी) थैं अपणि मां से भाला कि प्राप्ति ह्वै


Bhishma Kukreti

महासू देवता मंदिर, हनोल, चकरोता, जनपद देहरादून
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सरोज शर्मा कु जनप्रिय लेख श्रृंखला
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प्रकृति कि गोद मा मनोरम और सुरम्य वातावरण म उत्तरकाशी का सीमांत क्षेत्र म टौंस नदी क तट पर बसयूं हनोल स्थित महासू देवता मंदिर कला और संसकृति की अनमोल धरोहर च।
लम्बा समय से हुयीं उकताहट और दुर्गम रस्ता से हुंई थकान मंदिर म पौंछदा ही छूमंतर ह्वै जांद। एक नै ऊर्जा क संचार ह्वै जांद।
महासू एक देवता ना बल्कि चार देवताओ क सामूहिक नौ च।
स्थानीय भाषा म महासू महाशिव क अपभ्रंश च।चारों महासू भाईयो क नौ बासिक महासू, पबासिक महासू, बूठिया महासू, (बैठा महासू) ,और चालदा महासू च।
जु कि भगवान शिव क हि रूप च।
उत्तराखंड का उत्तरकाशी, संपूर्ण जौनसार-बावर क्षेत्र, रंवाई परगना क साथ साथ हिमाचल प्रदेश क सिरमौर, सोलन, शिमला, बिशैहर और जुब्बल तक महासू देवता कि पूजा हूंद। यूं क्षेत्र मा महासू न्याय क देवता और मंदिर न्यायालय मनै जांद ।
आज भि महासू देवता क उपासक मंदिर म न्याय कि गुहार और अपणि समस्याओ क समाधान मंगदा देखै जाला।
महासू देवता का उत्तराखंड और हिमाचल मा कई मंदिर छन, जौंमा अलग अलग रूपों और स्थानो म पूजा हूंद।
टौंस नदी क बांय तट पर बावर क्षेत्र म हनोल मंदिर म बूठिया महासू और मैन्द्रथ नौ क स्थान म महासू कि पूजा हूंद। पबासिक महासू कि पूजा टौंस नदी क दैण तट पर बंगाण क्षेत्र म स्थित ठरियार, जनपद उत्तरकाशी नौ का स्थान पर हूंद। मंदिर क पुजरी श्री सूतराम जोशी और मंदिर समिति सदस्य श्री बलिराम शर्मा क अनुसार टौंस नदी क बांय तट पर बावर क्षेत्र क हनोल स्थित मंदिर चारों महासू देवताओ क मुख्य मंदिर च और ऐ मंदिर म मुख्य रूप से बूठिया महासू तथा हनोल से दस किलोमीटर दूर मैन्द्रथ नौ क स्थान पर बासिक महासू कि पूजा हूंद, पबासिक महासू कि पूजा टौंस नदी क दैंण तट पर बंगाण क्षेत्र मा स्थित ठडियार, जनपद उत्तरकाशी नौ क स्थान म हूंद। सूरतराम जोशी और पंडित बलिराम शर्मा पुजारी क अनुसार मंदिर म सुबेर और शाम नौबत बजद। और दिया बत्ती किए जांद। मंदिर क पुजारी खुण कठोर नियम छन जौंकु पुजारी थैं पालन करण पव्ड़द। पुजरी एक समय ही भोजन करद।बूठिया महासू क हनोल मंदिर म निनुस, पुट्टाड़ और चातरा गौं का पुजरी पूजा करदिन जबकि मैन्द्रथ स्थित बासिक महासू मंदिर म निनुस, बागी और मैन्द्रथ गौं क पुजरी पूजा करदिन। द्विया मंदिर म प्रतेक गौं का पुजरी क्रम से एक एक मैना पूजा करदिन। और ऊंथैं सब्या नियमों क पालन करण पव्ड़द। टौंस नदी क दैण तरफ वल तट पर उत्तरकाशी का बंगाण क्षेत्र का ठडियार स्थित पबासिक महासू क मंदिर म केवल डगलू गौं क पुजरी ही पूजा करद। चालदा महासू भ्रमण प्रिय देव छन, इलै यूंकि अलग अलग स्थानो म पूजा हूंद। जैखुण निनुस, पुट्टाड़, चातरा और मैन्द्रथ गौ का पुजरी क्रमानुसार देव डोलि क साथ चलदिन और उपासना स्थलो म विधि विधान से पूजा अर्चना करदिन।
हनोल मंदिर तीन कक्षो म बणयूं च मंदिर म प्रवेश करदा हि पैल कक्ष (मण्डप) एक आयताकार हाॅल च जैमा बैठिक बाजगी और नौबत बजयेजांद, किलैकि मंदिर क मुख्य मण्डप म महिलाओ क प्रवेश वर्जित च इलै महिलाए ऐ कक्ष म बैठिक ही महासू देवता का दर्शन पूजा अर्चन क बाद प्रसाद ग्रहण करदिन। ऐ कक्ष कि आंतरिक दीवार म एक छवट सि द्वार च जैसे पुरुष ही मण्डप म प्रवेश कैर सकदन,
मुख्य मण्डप एक बढ़ वर्गाकार कमरा च, जैका बांया तरफ महासूओ का चारों वीर कफला वीर, (बासिक महासू) गुडारू वीर (पबासिक महासू) कैलू वीर (बूठिया महासू) और शैडकुडिया वीर (चालदा महासू) का छवट छवट मंदिर स्थित छन ऐ कक्ष म मंदिर क पुजरी और अन्य पश्वा ( वु लोग जौं पर महासू देवता आंद और भक्तो कि समस्याओ क समाधान करद) बैठदा छन। मंदिर क ऐ कक्ष म ही गर्भ गृह खुण छवटु सि दरवजा च जैमा केवल पुजरी ही प्रवेश कैर सकद। गर्भ गृह म भगवान शिव क प्रतिरूप महासू देवता की मूर्ती स्थापित च गर्भ गृह म एक स्वच्छ अविरल जलधारा बगणीं रैंद भक्तो थैं ई जल प्रसाद क रूप म दिऐ जांद। ऐका अलावा एक दिव्य ज्योति सदैव जलणी रैंद गर्भ गृह पूर्णतया पौराणिक च। पुरातत्व विभाग क अनुसार ऐकु छत्र नागर शैली क बणयूं च। ऐका अलावा मण्डप और मुख्य मण्डप क निर्माण बाद मा किऐ ग्या ।
ऐ मंदिर कि निर्माण शैली उत्तराखंड क मंदिरो से भिन्न भिन्न और विशिष्ट करद। किलैकि ऐ कि सब्या लकड़ी और धातु न निर्मित अलंकृत छतरियों से युक्त च। वासतुकला कि दृष्टि से मंदिर निर्माण नौवीं शताब्दी म मनै जांद।
मंदिर म प्रसाद क रूप म आटु और गुढ़ चढै जांद, स्थानीय भाषा म कड़ाह
बवलदिन कडाह क दगड़ 24 रूप्या कि भेंट चढ़ै जांद। कई श्रद्धालु मंदिर म बकरा बि अर्पित करदिन, परन्तु बकरा अर्पित कनक द्वी रूप छन पैल पैल ई कि बकरा पर अभिमंत्रित जल छिड़किक सिरहन देकि देवता थैं अर्पित किए जांद। ऐ थैं स्थानीय भाषा म धूण बवलदिन, जैसे मनै जांद कि देवता न भेंट स्वीकार कैर याल वैक बाद वै थैं जीवित छोड़ दिऐ जांद। इन बकरा मंदिर क परिसर और हनोल गौं मा इनै वुनै घुमदा दिखै जंदिन। यूं बकरों थैं घाण्डुआ बवलदिन। और यूं थैं देवता क जीवित भंडार मनै जांद। अब देवता जन भि राख पर यूं थैं हथियार से नि मरै जांद। दुसर रूप म बलि दिऐ जांद ऐका बारा म लोग बवलदिन मंदिर म बलि प्रथा खत्म ह्वै ग्या और कुछ बवलदिन कि बलि मंदिर परिसर क भैर दिऐ जांद। महासू देवता शिव का प्रतिरूप छन और शिव थैं कखि भी बलि नि दिऐ जांद ।

Bhishma Kukreti

सिंगापुर क लोकप्रिय हिन्दू मंदिर
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सरोज शर्मा  क जनप्रिय लेखन श्रंखला

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सिंगापुर कि लगभग 10 %आबादि म भारतीय छन, इलै ही वख बहुसंख्यक हिन्दू धर्म अनुयाई छन। इलै स्पष्ट च कि हिन्दू हुणक नाता वु हिन्दू मंदिर मा पूजा भि करण चैंदिन, ई कारण च कि ऐ द्वीप मा कई मान्यताप्राप्त हिन्दू मंदिर छन।
भारतीय हिन्दुओं क अलावा नेपाल कि हिन्दू आबादि क बड़ हिस्सा सिंगापुर म रैंद, और वखक मंदिरो मा जंदिन,
सिंगापुर क नौ हिन्दू मंदिर
सिंगापुर म अधिकांश भारतीय दक्षिण भारत से छन, इलै यखका पुरणा मंदिर ठेठ द्रविड़ और तमिल वास्तु कला थैं दर्शांदा छन। वु लम्बा गोपुरम, अलंकृत नक्काशि और मंदिर म जीवंत रंगों कि उपस्थित शामिल च।
हालांकि दिलचस्प बात च कि सिंगापुर म जीवंत वास्तुशिल्प रूप से समृद्ध हिन्दू मंदिर पर्यटकों क स्वागत करद, जु हिन्दू नि छन, वु सब्या धर्म क लोगों क स्वागत करदिन,
जु ऐ राष्ट्र क पता लगाणकि कोशिश करदिन,
यख शीर्ष दस मंदिरो कि सूची दिऐ ग्या, जौं थैं आप सिंगापुर यात्रा क दौरान देख सकदो, हिन्दू छवा त पूजा भि कैर सकदौ।
1- श्री मरिअम्मन मंदिर
रायण पिल्लई द्वारा वर्ष 1827 म निर्मित, श्री मरिअम्मन मंदिर सिंगापुर म एक हिन्दू मंदिर क रूप म अपणि प्रतिष्ठा और मान्यता रखद, 244 साउथ ब्रज रोड म स्थित द्रविड शैली म बणयूं च।
2- श्री वीरमकालीमान मंदिर
सिंगापुर क सबसे पुरण मंदिर म एक च, ऐकु निर्माण प्रवासी भारतीयो न करै, जु वख काम करण कु और बाद मा वखी बस गैं, ई मंदिर श्री वीरमकालीमान या काली थैं समर्पित च, जौं थैं बुरै क नाश करणवली मनै जांद,
3- श्री श्रीनिवास पेरूमल मंदिर
1885 मा निर्मित, श्रीनिवास पेरूमल मंदिर सबसे पुरण मंदिरो म आंद, दक्षिण भारतीय वास्तुकला न प्रेरित शैली म निर्मित ई मंदिर क गोपुरम भगवान विष्णु क अवतार मनै जांद।
4 - विनायक मंदिर
सिंगापुर क सिलोन रोड म स्थित, श्री सेनापाग विनायगर मंदिर गणेश भगवान थैं समर्पित च, ऐ मंदिर म धार्मिक विश्वास क चलदा हजारों यात्रीगण अंदिन, ई चोल शैली क सिंगापुर क सबसे पुरण मंदिरो म आंद,
5- शिव मंदिर
1850 कि शुरूआत म एक ठोस संरचना क रूप म निर्मित, श्री शिव मंदिर म शिवलिंग देवता क निवास च,
ई मंदिर सड़क नेटवर्क क माध्यम से सब्या हिस्सो से जुडयूं च,
6- चेट्टियारस मंदिर
ई मंदिर टैंकरोड मंदिर क रूप म लोकप्रिय च, श्री थेंडायुथपानी मंदिर सिंगापुर क डरावना मंदिरो म एक च, जु पर्यटकों क आकर्षक क केन्द्र च,राष्ट्रीय स्मारक क रूप म सूचीबध्द ऐ मंदिर क निर्माण 1859 म भारत का एक नट्टुकोट्टई चेट्टियार समुदाय क एक प्रवासी भारतीय द्वारा किए ग्या।
7- श्री वैराविमदा कालीमन मंदिर
सिंगापुर कु सबसे पुरण हिन्दू मंदिरो म एक, यख हिन्दूओ द्वारा पूरा साल यात्रा कियै जांद, 1860 म ई बंणयै ग्या,
8- श्री रूद्र कालिम्मन मंदिर
सिंगापुर म श्री रूद्र कालिम्मन मंदिर देवी काली थैं समर्पित च।
9- पवित्र वृक्ष श्री बालासुब्रमणर मंदिर भि एक प्रसिद्ध मंदिर च प्रतिदिन भक्त गण यख अंदिन।


Bhishma Kukreti

लक्ष्मण सिद्ध मंदिर देहरादून
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सरोज शर्मा जनप्रिय लेखन श्रंखला


देहरादून म चार प्रसिद्ध सिद्ध मंदिर छन, और चारों कूणों म स्थापित छन,
देहरादून क चार सिद्ध मंदिरो म लक्ष्मण सिद्ध, कालू सिद्ध, मानक सिद्ध, और मांडु सिद्ध छन।
यूं थैं देहरादून क चार धाम ब्वलदिन, ई चार सिद्ध मंदिर देहरादून क चारो कोणा म स्थित छन,
बाबा कालू सिद्ध कि समाधि देहरादून क कालुवला जंगल म स्थित च,
मानक सिद्ध मंदिर प्रेम नगर क पास क्वारी गौं म स्थित च,
और मंडु सिद्ध कि समाधि पौधा और आमवला क जंगल म च,
और बाबा लक्ष्मण सिद्ध कि समाधि कुवांवाला गौं क नजदीक जंगल म स्थित च,
मांडुसिदध म बसंत पंचमी क दिन मेला लगद।
देहरादून से 12 किलोमीटर दूर ऋषिकेश मार्ग म लक्ष्मण सिद्ध मंदिर, लक्ष्मण बाबा क भक्तो क आस्था क केन्द्र च,इन मान्यता च कि भगवान दत्तात्रेय न लोककल्याण खुण 84 शिष्य बणै, और ऊंथैं अपणि सब्या शक्ति प्रदान करिन, कालांतर म ई 84 शिष्य ,चौरासी सिद्ध क नाम से जंणै गैन,और यूं का समाधि स्थल सिद्ध पीठ मंदिर बण गैन, यूं सिद्ध पीठ म देहरादून का चार सिद्ध पीठ भि छन।
एक अन्य पौराणिक कथा क अनुसार भगवान राम क अनुज लक्ष्मण न रावण और मेघनाथ कि ब्रह्म हत्या क पाप से मुक्ति खुण यख तपस्या कैर। इन ब्वलेजांद कि यख मंगी मन्नत पूर्ण हुंदिन, हर एत्वार् यख भारी भीड़ हूंद। प्रसाद म गुढ़ चढ़यै जांद, यू मंदिर गुरूपरम्परा पर आधारित च।महंत ही संपूर्ण व्यवस्था द्यखद।
सिद्ध पीठ परिसर म ब्रह्मलीन हुयां सब्या संतों कि समाधि स्थित छन, यख हर साल अप्रैल क अंतिम रविवार मा भव्य म्याला लगद, सिद्ध पीठ म रूद्राक्ष क एक 200 साल पुरण वृक्ष भि च ऐ मा एकमुखी से सोलह मुखी रूद्राक्ष मिल जंदिन।


Bhishma Kukreti

बिखोत कि विविधता

सरोज शर्मा कु जनप्रिय लेखन श्रंखला


बैशाखी क मतलब वैशाख माह क त्यौहार, ई वैशाख सौर मास क पैल दिन हूंद, बैसाखी वैशाखि कु ही अपभ्रंश च,
ऐ दिन गंगा नदी म स्नान कु भौत महत्व च,हरिद्वार और ऋषिकेश म ऐ दिन भारी मेला लगद,
बैसाखी क दिन सूर्य मेष राशि म संक्रमण करद, इलै ऐ थैं मेष संक्रान्ति भि ब्वलदिन,
ऐ पर्व थैं विषुवत संक्रान्ति भी ब्वलेजांद,
बैसाखी पारंपरिक रूप न 13 या 14 अप्रैल मा मनयै जांद,
यू त्यौहार हिन्दुओ, बौद्ध ,और सिखों खुण महत्वपूर्ण च,
वैशाख क पैला दिन सरया भारत का अनेक क्षेत्रो मा नववर्ष क त्यौहार जन जुड़ शीतल, पोहेला वैशाख, बोहाग बहुत,विशु, पुथ्नडु,मनयै जंदिन।
वैशाखी क पर्व कि शुरुआत भारत क पंजाब प्रांत से ह्वै, और ऐ थैं रबी कि फसल कि कटै शुरू हूणकि सफलता मा मनयै जांद,
पंजाब और हरियाणा क अलावा उत्तर भारत म भि वैशाखी कु भौत महत्व च,
ऐ दिन गेंहूं, तिलहन,,गन्ना आदि कि फसल कि कटै शुरुआत हूंद,
वैशाखी गुरू अमरदास द्वारा चुनै ग्या तीन हिन्दू त्यौहार मा एक च,जैथैं सिख समुदाय द्वारा मनयै जांद,
प्रत्येक सिख वैशाखी त्यौहार, सिख आदेश क जन्म क स्मरण च, जु नौवां गुरू तेगबहादुर क बाद शुरू ह्वै, जब ऊन इस्लाम धर्म परिवर्तन खुण इंकार कैर द्या, तब मुगल सम्राट औरंगजेब न ऊंक शिरच्छेद क आदेश दयाई, और शिरच्छेद करेग्याई,
गुरू कि शहीदी न सिख धर्म क दसवां गुरू या अंतिम गुरू क राज्याभिषेक और खालसा क संत सिपाही क गठन कैर, द्विया वैशाखी का दिन ही शुरू ह्वीं ।
क्षेत्रीय विविधता
केरल मा ई त्यौहार विशु ब्वलेजांद, ऐ दिन नया कपड़ा खरीदै जंदिन, आतिशबाजी हूंद, और 'विशु कानी ,सजयै जांद ऐ मा फल फूल, अनाज ,वस्त्र, सोना, आदि सजयै जांद, और सुबेर जल्दी ऐ का दर्शन कियै जांद, ऐ दर्शन से सुख समृद्धि कि कामना किये जांद।
बिखोरी उत्सव
उत्तराखंड म बिखोति महोत्सव मा पवित्र नदियों मा डुबकि लगाण कि प्रथा च,
ऐ लोक
प्रथा म प्रतीकात्मक राक्षसो थैं पत्थर मरणा कि परंपरा च,
ऐ दिन एक मैना से देली मा फूल डलण क समापन हूंद, और वसंत पंचमी सानि वरात क गीत, नाटक नृत्य रस्म भि समापन हुंदिन,
विशु
विशु वैशाखी क ही दिन केरल म हिन्दू नववर्ष मनयै जांद, और मलयाली महीना मेदाम क पैल दिन मनयै जांद ।
बोहाग बिहू
बोहाग बिहू या रंगली बिहू 13 अप्रैल म असमिया नववर्ष कि शुरुआत क रूप म मनयै जांद,
ऐथैं सात दिन खुण विशुव संक्रांति (मेष संक्रांति)वैशाख मैना या बोहग क रूप म मनयै जांद।
महा विषुव संक्रांति
ओडिशा मा ई नै साल क प्रतीक च,समारोह म विभिन्न लोकनृत्य और शास्त्रीय नृत्य शामिल हूंदिन,जनकि शिव संबंधित छाऊ नृत्य,
पाहेला वैशाख
बंगाली नै साल 14 अप्रैल म पाहेला वैशाख क रूप म मनंदिन, ऐ दिन पश्चिम बंगाल, त्रिपुरा, और बंग्लादेश मा मंगल शोभायात्रा क आयोजन किऐ जांद, ई उत्सव 2016 म यूनेस्को द्वारा मानवता संस्कृतिक विरासत क रूप मा सूचीबध्द किऐ ग्या।
पुत्थानडु
पुत्थानडु जैथैं पुथुवरूषम या तमिल नै वर्ष भि ब्वलेजांद, तमिल कलैंडर चिथिराई मास क पैल दिन च,
बिहार म जुरशीतल
बिहार और नेपाल क मिथिल क्षेत्र म नै साल जुरशीतल क रूप मा मनये जांद ई मैथली क पंचांग क पैल दिन च, परिवार म लाल चाणा सत्तू और जौ और अन्य अनाज से प्राप्त आटू से भोजन करयै जांद ।


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देहरादून क मानक सिद्ध मंदिर
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सरोज शर्मा क जनप्रिय लेखन श्रंखला
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मानक सिद्ध बाबा सहसपुर ब्लाक क शिमला बायपास रोड म कारबारी ग्रांट म स्थित च,
कारबारी ग्रांट कभि ठाकुर दास क जमींदारा छा,जौंल ई जमींदारा डुमराव स्टेट का रामारण विजय सिंह थैं बेच द्या, स्थानीय निवासी अमर बहादुर शाही बतदंन कि राणा जय-विजय सिंह थैं साथ लेकि बढ़ आन्दोलन चल जैमा ग्राम वासियों कि जीत ह्वै, अमर बहादुर शाही अगनै बतंदीन कि मानक सिद्ध मंदिर जख आज स्थित च यख ऐकि स्थापना 1930 क लगभग ह्वै, ऐ से पैल मानक सिद्ध क स्थान ऐ मंदिर से लगभग द्वी ढाई किलोमीटर दूर जंगल मा छाई, सहूलियत क हिसाब से और मंदिर क विस्तार खुण जंगल बटेन कुछ शिलाओं थैं यख लैकि स्थापना किऐ ग्या।
ई काफी रमणीक स्थान च, यख ईंटो क एक चबूतरा म एक शिला पीतल कु नाग, व शिवलिंग रखयां छन। जंजीरो क साथ त्रिशूल भि च, साल का घैणा जंगल क बीच यख बड़ा बड़ा आमुका डाला भि छन। जु निश्चित तौर म कै आदिम न हि लगै ह्वाला, एक आमु क डाला कि तना कि मोटैय साढ़े चार मीटर छै ऐ से ई जगा कि प्राचीनता क पता चलद। यखी से कुछ पाषाण शिला और मूर्ति नया मानक सिद्ध मंदिर का गर्भ गृह म रखीं छन। ऐ मंदिर म साधु रैंदिन, आज भि ई स्थान ग्रामीणो कि आस्था क केन्द्र च। हर साल द्विया मंदिरो मा भंडारा हुंदिन, बड़ी संख्या मा स्थानीय लोग शामिल हूंदिन।