• Welcome to MeraPahad Community Of Uttarakhand Lovers.
 

उत्तराखंड पर लिखी गयी विभन्न किताबे - VARIOUS BOOKS WRITTEN ON UTTARAKHAND !

Started by एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720, October 10, 2007, 01:34:03 PM

हेम पन्त

Where Gods Dwell: Central Himalayan Folktales and Legends, Kusum Budhwar, Penguin Books, Pp 271(PB), Rs 299.00

INDIA is rich in folktales, much like several other communities in the world. But what distinguishes us is that these are even today part of our lives, beliefs and rituals. Every region in the country boasts of its local gods and their deeds and adventures.

Kusum Budhwar, with her deep bonds with the Kumaon region has compiled the folktales and legends of Central Himalaya under the title Where Gods Dwell. As such the Himalayas enjoy a pre-eminent status in our history, it being worshipped, with an additional aura of being the father of Parvati, Shiva's consort. Kailash is in the Himalayas and several Hindu pilgrimage centres are strewn on it. And hence, the folktales of the Kumaon-Garhwal region have an enormous presence of Shiva and related deities. Most of these stories are sung and recited as ballads during special occasions and perpetuated through the tradition of katha vachak.

No doubt the stories have a high content of human emotion among the deities, like anger, spite, revenge and malice. But then that is what makes the people feel closer to the heroes of the ballads. And then there is a moral to be learnt from all the stories.

Budhwar, who has authored books and written several travel articles, has arranged the stories in different clutches, like Nanda Devi Stories, Local Deities, Romantic Sagas and Legendary Places. Nanda is considered the presiding deity of the region, a daughter of the Himalayas.

Inseparably inter-twined with the stories are the local culture, traditions and rituals that add a special flavour to them. An interesting read that takes us through the romance, battles and reconciliations of the gods who are benign on us.

(Penguin Books, 11, Community Centre, Panchsheel Park, New Delhi 110 049)

Source - http://www.organiser.org/dynamic/modules.php?name=Content&pa=showpage&pid=388&page=26



एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

उत्तराखंड हिमालय के चांचड़ी गीत एवं नृत्य, चांचड़ी झमाको
Author : नंद किशोर हटवाल[/t][/t]
Our Price$ 17.00 
ISBN8186844619
ISBN139788186844618
PublisherWinsar Publishing Co.
Published In2009
BindingHardback
Enquire about this book

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

विस्तृत पठन
थपलियाल रेखा। १९९१ प्राचीन मध्य हिमालय कुमाऊँ का इतिहास : सांस्कृतिक भूगोल : नृवंशीय अध्यया। नई दिल्ली; नॉर्दन बुक सेन्टर।
पाण्डे बद्रीदत्त १९९० कुमाऊँ का इतिहास। अल्मोड़ा; श्याम प्रकाशन श्री अल्मोड़ा बुक डिपो।
जोशी महेश्वर प्रसाद १९९४ उतराञ्चल हिमालय समाज, संस्कृति, इतिहास एवं पुरात्व। अल्मोड़ा; श्री अल्मोड़ा बुक डिपो।
बालदिए, के. एस. १९९८ कुमाऊँ (लैंड एण्ड प्यूपिल)। नैनीताल; ज्ञानोदय प्रकाशन।
नौटियाल शिवानन्द १९९८ कुमाऊँ दर्शन। लखनऊ; सुलभ प्रकाशन।
सक्सेना कौशल किशोर १९९४ कुमाऊँ कला, शिल्प और संस्कृति। अल्मोड़ा; श्री अल्मोड़ा बुक डिपो।
वाजपेयी श्री कृष्णदत्त १९६२ उत्तर प्रदेश का सांस्कृतिक इतिहास। आगरा; शिवलाल अग्रवाल एण्ड कम्पनी (प्रा.) लि.।
पाठक शेखर १९९२ पहाड़ हिमालयी समाज, संस्कृति, इतिहास तथा पर्यावरण पर केन्द्रित। डी. के फाईन आर्ट प्रेस।
वर्मा विमला १९८७ उत्तर प्रदेश की लोककला, भूमि और भिप्ति अलंकरण। दिल्ली; जय श्री प्रकाशन।
मठपाल यशोधर १९९७ उत्तराखण्ड का काष्ठशिल्प। देहरादून; शिवा ऑफसेट प्रेस।
अग्रवाल, डी.पी. एवं एम.पी. जोशी १९७८ "रॉक पेंटिंग इन कुमाऊँ"। मैन एण्ड इन्वायरनमेंट भा. इंडियन सोसायटी फॉर प्रीहिस्ट्री एण्ड क्वार्टनरी स्टडीज (अहमदाबाद)।
त्रिवेदी विपिन बिहारी १९८७ उत्तर प्रदेश साहित्य, संस्कृति एवं कला। नई दिल्ली; एस. चन्द एण्ड कम्पनी (प्रा.) लि.।
उप्रेती नाथूराम १९७७ कुमाऊँ की लोककला, कुमाऊँनी संस्कृति। रुद्रपुर; उपयोगी प्रकाशन।
एटकिन्सन, ईयटीय १९७३ द हिमालयन गजेटियर वा. क्ष् व क्ष्क्ष्। दिल्ली; कास्मो पब्लिकेशन।
कठोच यशवंत सिंह १९८१ सध्य हिमालय का पुरातत्व। लखनऊ; रोहिताश्व प्रिन्टर्स।
गरोला, टी.डी. १९३४ हिमालयन फोकलोर। इलाहाबाद।
जैन कमल कुमार १९८३ उत्तराखण्ड के देवलयों का परिक्षण। लखनऊ; ध्यानम पब्लिकेशन।
जोशी, एम.पी. १९९२ उत्तराञ्चल (कुमाऊँ - गढ़वाल हिमालय)। अल्मोड़ा; श्री अल्मोड़ा बुक डिपो।
जोशी प्रयाग १९९० कुमाऊँनी लोक गाथाएँ : एक सास्कृतिक अध्ययन। बरेली; प्रकाश बुक डिपो।
डबराल शिव प्रसाद १९९० उत्तराखण्ड का इतिहास। गढ़वाल; वीर गाथा प्रकाशन।
पोखरिया देव सिंह १९८९ "कुमाऊँ के लोकनृत्य", उत्तराखण्ड भाग - ३। उत्तराखंड शोध संस्थान।
प्रसाद जगदीश्वरी १९८९ कुमाऊँ के देवालय। अल्मोड़ा; उत्तराखण्ड सेवा निधि ।
पांडे त्रिलोचन १९७७ कुमाऊँनी भाषा और उसका साहित्य। लखनऊ; उ.प्र. हिन्दी संस्थान।
फ्रुैंगर, ए.सी. १९९० दि जागर : हिमालय पास्ट एण्ड प्रजेन्ट। अल्मोड़ा; श्री अल्मोड़ा बुक डिपो।
बैराठी कृष्णा एवं सत्येन्द्र कुश १९९२ कुमाऊँ की लोक कला, संस्कृति और परम्परा। अल्मोड़ा; श्री अल्मोड़ा बुक डिपो।
बाजरोयी कृष्णदत्त १९९० भारतीय वास्तुकला का इतिहास। लखनऊ; उ.प्र. हिन्दी संस्थान।
नौटियाल, के.पी. १९६९ आर्कीयौलॉजी ऑफ कुमाऊँ इन्कलूडिंग। वाराणसी; चौखम्बा संस्कृत सीरीज।
भ मदन चन्द्र १९८१ उत्तराखण्ड का "पुरातत्व विशेषांक"।
मठपाल यशोधर १९८७ उत्तराखण्ड की संस्कृति की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि उत्तराखण्ड वार्षिकी, उत्तराखण्ड शोध संस्थान।
वैष्णव यमुनादत्त १९८३ कुमाऊँ का इतिहास, "खस कस्साइट जाति के परिपेक्ष्य में"। अल्मोड़ा; श्री अल्मोड़ा बुक डिपो।
पाण्डे, पी.सी. १९९० इथनोबौटनी ऑफ कुमाऊँ हिमालया, हिमालय इन्वायरनमेंट एण्ड डबलपमेट। अल्मोड़ा; श्री अल्मोड़ा बुक डिपो।
सर्राफ, डी.एन. १९८२ एंडियन क्राफ्ट्स। दिल्ली; विकाल पब्लिकिंशग हाऊस, अनसारी रोड।
पाण्डे गिरिश चन्द्र १९७७ उत्तराखण्ड की अर्थव्यवस्था। नैनीताल; कंसल पब्लिशर्स।
पालीवाल, नारायण दत्त १९८५ कुमाऊँनी - हिन्दी शब्दकोश। दिल्ली; तक्षशिला प्रकाशन।
पाण्डे, चारु चन्द्र १९८५ कुमाऊँनी कवि 'गोर्दा' का काव्य दर्शन। अल्मोड़ा; देशभक्त प्रेस।
वैष्णव शालिग्राम १९२३ उत्तराखण्ड रहस्य। नागपुर-चमोली; पुष्कराश्रम।
सांकृत्यायन राहुल १९५३ हिमालय परिचय। इलाहाबाद; लॉ जर्नल प्रेस।
सिंह वीर १९८९ खेती और पशु : पहाड़ी खेती के आधार। नैनीताल; संपादक व प्रकाशक पाठक।
जोशी, एम.पी. १९७४ सम रेअर स्कल्पचर्स फ्राम कुमाऊँ हिल्स संग्रहालय पुरातत्व पत्रिका।


एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

Upreti, Ganga Dutt (1894). Proverbs & folklore of Kumaun and Garhwal. Lodiana Mission Press. http://www.archive.org/stream/cu31924089930774#page/n7/mode/2up. 
Govind Chatak-"Garhwali bhasha", Lokbharti Prakashan, Dehradun, 1959.
Haridutt Bhatt 'Shailesh'- "Garhwali bhasha aur uska sahitya", Hindi Samiti, UP, 1976.
Abodhbandhu Bahuguna- "Garhwali bhasha ka vyakaran", Garhwali Prakashan, New Delhi.

Rajni Kukreti- "Garhwali bhasha ka Vyakaran", Winsar Pub.,Dehradun,2010.

Govind Chatak- "Garhwali Lokgeet", Sahitya Akademi, New Delhi, 2000.

Yashwant Singh Kathoch- "Uttarakhand ka Naveen Itihaas", Winsar Pub, Dehradun, 2006.

Pati Ram Bahadur- "Garhwal:Ancient and Modern", Pahar Publications, 2010


एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720


    खैरी दुःख विपदा छन त्वैकू भारी.
    जनु भी होलू हे हिक्मत ना हारी..
    धन धन हे मेरा पहाडा की नारी...

    भेलू पखाण, डांडी कांठी घासा कु जांदी.
    स्वामी जी की खुद मा, बाजूबंद लगान्दी.
    सासु बेटी ब्वारी होली पहाडा घस्यारी..
    धन धन हे मेरा पहाडा की नारी...

    रौली गदिन्युं छ्वाल्या मा पाणी कु जांदी.
    बांजा जाड्यूं कु ठंडो मीठो पाणी ल्यांदी.
    मुंडमा धैरी कसेरी आणी होली पन्यारी..
    धन धन हे मेरा पहाडा की नारी...

    सारी पुन्गिदयूं मा रोपणी कु जाणु.
    दुध्याल नौन्याल थे ऐकि बुथ्याणु.
    काम काज होलू न्यरी द्वि सारी..
    धन धन हे मेरा पहाडा की नारी...

    प्याज पिरन्यां कंडली की भुज्जी पकाली.
    कुशल रख्यां स्वामी परदेश देवतों मनाली.
    बौडी आला स्वामी अबकी बारी..
    धन धन हे मेरा पहाडा की नारी...

    हर रूप मा तेरु ही नौ चा हे लथ्याली.
    माँ बेटी ब्वारी बोडी काकी अर स्याली.
    तीलू रामी गोरा ह्वेन यख महान नारी..
    धन धन हे मेरा पहाडा की नारी...

    सर्वाधिकार सुरक्षित © अनूप सिंह रावत
    " गढ़वाली इंडियन " दिनांक - १७-०१-२०१२
    इंदिरापुरम, गाजियाबाद (उत्तर प्रदेश)

http://rawatmusic.blogspot.in/2012/01/blog-post_17.html