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India wins first indiviual event gold in Olymipcs:Abhinav Bindra an Uttarakhandi

Started by कमल, August 11, 2008, 10:13:16 AM

पंकज सिंह महर

ओलम्पिक में भारत को स्वर्ण पदक मिलने पर खुशियां मनाई

देहरादून,11अगस्त। बीजिंग में चल रहे ओलंपिक खेलों के दौरान दस मीटर एयर राइफल प्रतियोगिता में निशानेबाज अभिनव बिंद्रा द्वारा भारत को गोल्ड मैडल दिलाने पर उत्तराखण्ड में भी खुशी की लहर दौड़ गयी। खासकर दून में जश्न का माहौल रहा। गौरतलब है कि भारत को एयर राफल प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक दिलाने वाला ओलम्पिक खिलाड़ी अभिनव बिन्द्रा की कक्षा पांच तक की पढ़ाई दून के रिवल डेल स्कूल में हुयी। आज जैसे ही स्कूल मेंउसकी इस कामयाबी का पतालगा तो पूरे स्कूल में खुशी की लहर दौड़ गयी। स्कूल में अध्यापकों और बच्चों ने खुशियां मनायी औरमिष्ठान वितरित किया। विद्यालय के प्रधानाचार्य सुरजीत आहलूवालिया एवं अध्यापिकाओं ने हर्ष व्यक्त करते हुए बताया कि अभिनव बचपन से ही होनहार था। विद्यालय में पढ़ाई के दौरान वह अक्सर ही टीचरों के लिए फूल लाता था। दून में आज कई स्थानोंपर भी अभिनव के गोल्ड मैडल लाने पर खुशियां मनायी गयी।
हल्द्वानी-

यहां दिशा सामाजिक संगठन ने मिष्ठान वितरण कर खुशियांमनायी। अठारह वर्ष बाद पहला स्वर्ण पदक भारत को दस मीटर एयर राइफल एकल प्रतियोगिता में मिलने पर तमाम लोग खुशी से झूम उठे। दिशा सामाजिक संगठन की ओर से इस खुशी के मौके पर मिष्ठान वितरण किया गया। इस दौरान संस्था के अध्यक्ष राजीव अग्रवालने कहा कि अभिनव ब्रिंदा जो कि उत्तराखण्ड में जन्मेहैं,ने इतिहास रच दिया है। आशा है कि अभी और भी स्वर्ण पदक उन्हें मिलेंगे। महासचिव विपिन वर्मा ने कहा कि अभिनव बिंद्रा देश का गौरव है उसने प्रत्येक देशवासी का सिर गर्व से उंचा कर दियाहै। खुशियां मनाने वालों में अमरपाल सिंह, गुरूचरनसिंह प्रिंस, कमल वर्मा, अंकुर अग्रवाल, निषि वर्मा, संजय वर्मा, सोनागाछी, बाबुल शेख, प्रमोद कुमार, रविन्द्र सिंह मिक्की, गिरीश वर्मा, विनोद कुमार, अमरजीत सिंह,भुवन,सुखदेव सिंह,हरिमोहनअरोरा, आदि थे।

साभार- http://uttaranchal.indopia.in  (उत्तरांचल दर्पण)

पंकज सिंह महर

देहरादून। 'होनहार वीरवान के होत चिकने पात' यह मुहावरा ओलंपिक में भारत के लिए पहला स्वर्ण पदक जीतने वाले अभिनव बिंद्रा पर बिलकुल सटीक बैठता है। बचपन से ही अभिनव का शूटिंग के प्रति रुझान बढ़ने लगा था। उनके इस रुझान को देखते हुए उनके पिता एएस बिंद्रा ने घर में ही एक शूटिंग रेंज खोल दिया, जहां स्कूल से आकर वह घंटों अभ्यास करते थे। इसी अथक परिश्रम और लगन का नतीजा है कि उन्होंने ओलंपिक में वह मुकाम हासिल किया, जो भारत के खेल इतिहास में कोई भी हासिल नहीं कर पाया है।

ओलंपिक में जैसे ही अभिनव बिंद्रा अपना अंतिम शाट लेने के लिए तैयार हो रहे थे उस समय पूरा भारत सांसे थाम कर उनकी सफलता के लिए प्रार्थना कर रहा था। जैसे ही उनका शाट बुल्स आई पर लगा वैसे ही पूरा देश खुशी से नाच उठा। दून में भी अभिनव के चाहने वाले उनकी इस सफलता पर खुशी से झूम उठे। आखिर होते भी क्यों नहीं, भारत के इस सपूत ने इसी देवभूमि की माटी में जन्म लेकर यहीं से अपने स्वर्णिम अभियान की शुरुआत की थी। अभिनव बिंद्रा का बचपन हरिद्वार रोड, गढ़ निवास स्थित बिंद्रा हाउस में गुजरा। बचपन से ही उन्हें शूटिंग का शौक था। पांच वर्ष की उम्र से ही वह शूटिंग करने लगे थे। उनके पिता ने शूटिंग के प्रति उनकी रुचि को देखते हुए उन्हें एक बंदूक खरीद कर दी। इस बंदूक से वह घर के बल्ब और पेड़ों में बैठी चिड़ियाओं को अपना निशाना बनाते थे। यहां तक की वह किसी के भी सिर पर गुब्बारा रख सटीक निशाना लगा फोड़ देते थे। उनकी प्रतिभा को देखते हुए पिता ने घर में ही शूटिंग रेंज खोल दी थी। अभिनव का देहरादून से काफी लगाव रहा है, वह समय-समय में दून आते रहते हैं। बिंद्रा फार्म के मैनेजर स्वर्ण सिंह कहते हैं कि बचपन से ही अभिनव को शूटिंग का काफी शौक था, मगर उन्होंने प्रोफेशनल शूटिंग चंडीगढ़ से शुरू की। वह तकरीबन छह माह पूर्व देहरादून आए थे और यहां भी हमेशा उनका अधिकांश समय शूटिंग रेंज में ही बीतता था।

पंकज सिंह महर

देहरादून। बीजिंग ओलंपिक में स्वर्ण पदक जीतने वाले निशानेबाज अभिनव बिंद्रा को प्रदेश सरकार ने ग्यारह लाख रुपये देने का एलान किया है। राज्यपाल बीएल जोशी तथा मुख्यमंत्री बीसी खंडूड़ी इस जीत पर बिंद्रा को बधाई दी है।

राज्यपाल ने अपने संदेश में कहा कि बिंद्रा की उपलब्धि ऐतिहासिक है। बिंद्रा की इस उपलब्धि से प्रेरित होकर अन्य खिलाड़ी भी देश का नाम रोशन करेंगे। मुख्यमंत्री ने अपने संदेश में कहा कि बिंद्रा ने ओलंपिक में स्वर्ण पदक जीतकर पूरे देश का नाम रोशन किया है। ओलंपिक खेलों में बिंद्रा ने पहली बार किसी भी व्यक्तिगत स्पद्र्धा में देश को स्वर्ण पदक दिलाया है। सरकार ने सम्मान स्वरूप ग्यारह लाख रुपये देने का निर्णय भी लिया है। इधर, बीजिंग गए सांसद विजय बहुगुणा ने भी बिंद्रा को मुबारकबाद दी है।

Meena Pandey


Dinesh Bijalwan

बधाइ  महाराज - पहले गोल्ड और दून और पहाड से अभिनव के रिस्ते के बारे मे जानक्र खुशी दोगुनी हो  गई

हेम पन्त

Abhinav's father A.S. Bindra today said he would open a hotel in Dehra Dun to celebrate his son's victory, setting off light-hearted speculation in the Uttarakhand capital about its possible name.

"Would it be Olympian or Abhinav? We don't know yet. Anyway, it would be a gift to Dehra Dun," said Ravish Pant, a BJP leader close to Uttarakhand tourism minister Prakash Pant.

Uttarakhand chief minister B.C. Khanduri has sent a congratulatory message to Abhinav.

Rajen

दून का सोना: देवभूमि में जन्मा, बीजिंग में चमका:  Aug 12, 12:41 am

देहरादून। 'होनहार वीरवान के होत चिकने पात' यह मुहावरा ओलंपिक में भारत के लिए पहला स्वर्ण पदक जीतने वाले अभिनव बिंद्रा पर बिलकुल सटीक बैठता है। बचपन से ही अभिनव का शूटिंग के प्रति रुझान बढ़ने लगा था। उनके इस रुझान को देखते हुए उनके पिता एएस बिंद्रा ने घर में ही एक शूटिंग रेंज खोल दिया, जहां स्कूल से आकर वह घंटों अभ्यास करते थे। इसी अथक परिश्रम और लगन का नतीजा है कि उन्होंने ओलंपिक में वह मुकाम हासिल किया, जो भारत के खेल इतिहास में कोई भी हासिल नहीं कर पाया है।

ओलंपिक में जैसे ही अभिनव बिंद्रा अपना अंतिम शाट लेने के लिए तैयार हो रहे थे उस समय पूरा भारत सांसे थाम कर उनकी सफलता के लिए प्रार्थना कर रहा था। जैसे ही उनका शाट बुल्स आई पर लगा वैसे ही पूरा देश खुशी से नाच उठा। दून में भी अभिनव के चाहने वाले उनकी इस सफलता पर खुशी से झूम उठे। आखिर होते भी क्यों नहीं, भारत के इस सपूत ने इसी देवभूमि की माटी में जन्म लेकर यहीं से अपने स्वर्णिम अभियान की शुरुआत की थी। अभिनव बिंद्रा का बचपन हरिद्वार रोड, गढ़ निवास स्थित बिंद्रा हाउस में गुजरा। बचपन से ही उन्हें शूटिंग का शौक था। पांच वर्ष की उम्र से ही वह शूटिंग करने लगे थे। उनके पिता ने शूटिंग के प्रति उनकी रुचि को देखते हुए उन्हें एक बंदूक खरीद कर दी। इस बंदूक से वह घर के बल्ब और पेड़ों में बैठी चिड़ियाओं को अपना निशाना बनाते थे। यहां तक की वह किसी के भी सिर पर गुब्बारा रख सटीक निशाना लगा फोड़ देते थे। उनकी प्रतिभा को देखते हुए पिता ने घर में ही शूटिंग रेंज खोल दी थी। अभिनव का देहरादून से काफी लगाव रहा है, वह समय-समय में दून आते रहते हैं। बिंद्रा फार्म के मैनेजर स्वर्ण सिंह कहते हैं कि बचपन से ही अभिनव को शूटिंग का काफी शौक था, मगर उन्होंने प्रोफेशनल शूटिंग चंडीगढ़ से शुरू की। वह तकरीबन छह माह पूर्व देहरादून आए थे और यहां भी हमेशा उनका अधिकांश समय शूटिंग रेंज में ही बीतता था।

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

BEIJING: Freestyle wrestler Sushil Kumar gave India its second medal in the on going Olympics when he defeated the Kazak opponent.

Earlier, Sushil Kumar lost to Ukrainian Andriy Stadnik on points after being pegged down 3-8 on technical points.

While the luck of the draw gave Sushil a bye in the first round, giving him a start straightaway in the quarterfinals, Standnik had to beat 2007 world no. 5 American Doug Schwab in the round of 16 to move further.

In the quarters, Stadnik, a former World Cup winner and 2006 World Championship bronze medallist, out-played the Indian. As Stadnik, quarterfinalist at the 2007 World Championships, moved into the final, all those who lost to him came through to the Repechage, which will decide the two bronze medallists.

In the Repechage first round, Sushil meets Schwab and their winner will meet Belarussian Albert Batyrov. Sushil will need to win a third bout after that to get himself a bronze.

Schwab was fifth at the last World Championships, where Sushil was seventh.

Coming through to the final from the other half of the category is Turkish wrestler Ramazan Shahin, who won the gold medal in the 2007 World Championships, besides claiming the first place in the 2008 European meet.

हेम पन्त

देहरादून। ओलंपिक के स्वर्ण पदक विजेता अभिनव बिंद्रा ने रविवार को मुख्यमंत्री भुवनचंद्र खंडूड़ी से उनके सरकारी आवास पर भेंट की। अभिनव को सरकार की ओर से 11 लाख की राशि का चेक भेंट किया गया। श्री खंडूड़ी ने कहा कि अभिनव ने अपने प्रदर्शन से देश व प्रदेश का नाम रोशन किया है। उन्होंने कहा कि राज्य में खेलों को प्रोत्साहन देने को स्कूलों व खेल विभाग में समन्वय स्थापित किया जाएगा।

अभिनव को शुभकामनाएं देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि जनसंख्या में चीन के बाद दूसरे स्थान पर होते हुए भी भारत खेलों में पीछे है। अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में स्वर्ण पदकों के अकाल को अभिनव ने दूर किया। उनकी उपलब्धि से देश व प्रदेश गौरवान्वित हुआ है। भविष्य में भी वह इस सफलता को दोहराएंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में खेलों को प्रोत्साहित करने को स्कूलों में खेल को बतौर विषय स्थापित करने की आवश्यकता है। इसमें प्रत्येक खेल शामिल होना चाहिए। खेलों के प्रोत्साहन के लिए बनने वाले स्टेडियमों का सदुपयोग करने पर उन्होंने जोर दिया। उन्होंने कहा कि देहरादून के निकट पौंधा में शूटिंग रेंज में राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। खेलों के लिए बजट की पर्याप्त व्यवस्था कर प्रतिभाओं में खेलों को लेकर जागृति उत्पन्न की जाएगी।