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उत्तराखण्ड के क्रांतिवीर-स्व० श्री विपिन चन्द्र त्रिपाठी/ Vipin Chandra Tripathi

Started by पंकज सिंह महर, August 14, 2008, 01:30:02 PM

हेम पन्त

उक्रांद के थिंक टैंक स्व० विपिन चन्द्र त्रिपाठी ने गैरसैण ही क्यों का तर्क देते हुए कहा था कि प्रस्तावित राजधानी स्थल गैरसैण, पाण्डुवाखाल से दीवालीखाल तक २५ किमी० लम्बाई एवं दूधातोली से नारायणबगड के ऊपर की चोटी तक २० कि०मी० की चौडाई क्षेत्र में फैला है जिसमें लगभग ३ हजार एकड यानि ६० हजार नाली वृक्षविहीन नजूल व बेनाप भूमि स्थित है। इसके अतिरिक्त भमराडीसैंण, नागचूलाखाल, पाण्डुवाखाल, रीठिया स्टेट सरीखे चारों ओर फैले खुबसूरत मैदान, बुग्याल स्थित हैं। यह पूरा क्षेत्र छोटी-बडी नौ पहाडियों व उनके बीच स्थित घाटियों में फैला है। अतः मध्य हिमालयी राज्यों में सर्वाधिक खूबसूरत राजधानी बनेगी। गैरसैण में राजधानी बनने से इसके चारों ओर के ५००० गांवों के विकास में भी इसका सीधा लाभ मिलेगा।
भूगर्भीय संरचना की दृश्टि से रियेक्टर स्केल पैमाने पर यह उत्तराखण्ड के अन्य जोनों से सबसे कम खतरे पर है। चारों ओर खूबसूरत वनाच्छादित क्षेत्र हैं। राजधानी निर्माण में पर्यावरण का ०.५ प्रतिषत से क्षति नहीं होगी।
स्व० विपिन चन्द्र त्रिपाठी ने लिखा है कि यदि राजधानी के चयन में तनिक भी भूल की गयी या राजनैतिक स्वार्थो के दबाव में गलत निर्णय लिया गया तो भविश्य में इसके गंभीर परिणाम होगे। १९७९ में उत्तराखण्ड क्रांति दल की स्थापना ही राज्य प्राप्ति हेतु हुई थी। अपनी स्थापना से यह दल एकमात्र क्षेत्रीय दल के रुप में उत्तराखण्ड राज्य के लिए संघर्श करता रहा है। उक्रांद के प्रयासों से तत्कालीन उत्तर प्रदेष सरकार ने उत्तराखण्ड राज्य निर्माण की संभावनाओं हेतु वर्श १९९२ में ६ सदस्यीय कैबिनेट समिति कौषिक समिति का गठन किया। उक्त सरकारी समिति ने अल्मोडा, पौडी, काषीपुर, लखनऊ में बैठकें कर उत्तराखण्ड के सांसदों, विधायकों, जिला पंचायत अध्यक्षों, ब्लाक प्रमुखों, बुद्धिजीवियों एवं आम जनता की राय, अभिमत, उत्तराखण्ड राज्य निर्माण एवं राजधानी के संदर्भ में लिया था तथा प्रस्तावित राज्य की राजधानी हेतु जनमत संग्रह करवाया था। कौषिक समिति द्वारा करवाये गये जनमत संग्रह में ६७ प्रतिषत से अधिक जनता ने गैरसैण- चन्द्रनगर जनपद चमोली को राजधानी के रुप में स्वीकार किया। बाद में उत्तर प्रदेष के तत्कालीन राज्यपाल श्री मोतीलाल बोरा द्वारा गठित एक्सपर्ट कमेटी ने भी अपने व्यापक सर्वेक्षण के बाद गैरसैण क्षेत्र को राजधानी हेतु सर्वाधिक उपयुक्त पाया।
स्व० श्री विपिन चन्द्र त्रिपाठी ने दस्तावेज में लिखा है कि गैरसैण (चमोली) को राजधानी के रुप में चयनित करने हेतु उत्तराखण्ड की ७५ प्रतिषत से अधिक जनता ने अपनी सहमति दी है। उत्तराखण्ड में कार्यरत किसी भी राजनैतिक दल ने गैरसैण का विरोध नहीं किया है। पेषावर काण्ड के महानायक उत्तराखण्ड की धरती के सपूत वीर चन्द्र सिंह गढवाली का निरंतर यही प्रयास रहा कि दूधातोली से लेकर गैरसैंण के मध्य भावी उत्तराखण्ड राज्य की राजधानी स्थापित की जाय। जीवन के अन्तिम क्षणों में भी उस वीर सेनानी की यही अन्तिम इच्छा थी।
गैरसैण समूचे उत्तराखण्ड का केन्द्र बिन्दु है। उत्तराखण्ड के अन्तिम छोर से लेकर धारचूला, मुनस्यारी विकास खण्डों की अन्तिम सीमा से गैरसैण की दूरी लगभग बराबर है। कुमाऊॅ कमिष्नरी नैनीताल एवं गढवाल कमिष्नरी मुख्यालय पौडी से गैरसैण की दूरी समान है। उत्तराखण्ड के १३ जनपदों के जिला मुख्यालयों से गैरसैण तक बस द्वारा आसानी से ६ से १० घण्टों में सीधे गैरसैण पहुंचा जा सकता है।
यहीं नहीं कर्णप्रयाग से रामनगर तक तथा रानीखेत तक मोटर मार्ग का चौडीकरण करने के पष्चात यह दूरी और कम समय में पूरी की जा सकती है। जनपद पिथौरागढ के धारचूला मुनस्यारी से प्रस्तावित गरूड- धौणाई- तडागताल मोटर मार्ग के पूर्ण हो जाने पर इस क्षेत्र से गैरसैण की दूरी लगभग १०० किमी० कम हो जायेगी। हरिद्वार -कोटद्वार- रामनगर बीच के प्रस्तावित मोटर मार्ग के बन जाने से उत्तरकाषी, टिहरी व देहरादून जनपदों से भी गैरसैंण की दूरी ८० से १०० कि०मी० कम हो जायेगी। उत्तरकाषी, टिहरी से वाया श्रीनगर, रुद्रप्रयाग होते हुए गैरसैण की दूरी मात्र ८ से १० घण्टों में आसानी से तय की जाती है। पौडी कमिष्नरी मुख्यालय से गैरसैण की दूरी अभी मात्र ६ से ७ घण्टे की है। यदि पौडी से मराडीसैण-धौरसैण का निर्माण कर दिया जाए तो यह दूरी और कम हो जायेगी।
गैरसैण हरिद्वार-बद्रीनाथ मोटर मार्ग पर कर्णप्रयाग से मात्र ४६ किमी० की दूरी पर पक्के मोटर मार्ग से जुडा है। पिथौरागढ जनपद से वाया थल-बागेष्वर-गरूड-ग्वालदम होते हुए सिमली से गैरसैण पक्के मोटर मार्ग से जुडा है। अल्मोडा-सोमेष्वर-द्वाराहाट होते हुए गैरसैण पक्के मोटर मार्ग से सम्बद्ध है। रूद्रपुर-हल्द्वानी- रानीखेत-द्वाराहाट-चौखुटिया होते हुए गैरसैण सीधे मोटर मार्ग से जुडा है। काषीपुर-रामनगर-भतरौंजखान भिकियासैण होते हुए वाया चौखुटिया गैरसैण तक पक्के मोटर मार्ग से सम्बद्ध है। इस तरह गैरसैण चारों ओर से मोटर मार्गो से जुडा है।
गैरसैण -चन्द्रनगर- में राजधानी निर्माण पर आने वाला वित्तीय भार
उत्तराखड की जनता की जनभावनाओं का सम्मान करते हुए यदि गैरसैण में राजधानी का निर्माण किया जाता है तो वित्तीय भार इस प्रकार होगा।
१- विधानसभा निर्माण- २५ करोड, २- सचिवालय निर्माण- २० करोड, ३-मुख्यमंत्री व मंत्रियों के आवास- ५ करोड ४-७१ विधायकों के आवास- १०.६५ करोड, ५-प्रमुख सचिव, सचिव, अपर सचिव, संयुक्त सचिव, उपसचिव कुल १५० सचिव' २२.५० करोड, ६- सरकारी स्टाफ क्वाटर्स- ५० करोड, ७- राज्यपाल भवन- ध्यान रहे कि गैरसैण से ८ से १० किमी० की हवाई दूरी पर नैनीताल में राज्यपाल भवन स्थित है- १ करोड, ८- विभिन्न विभागों के विभागाध्यक्षों के आवास- १५ करोड, ९- विभागाध्यक्षों का स्टाफ- १० करोड, १०- पुलिस विभाग- २१ करोड, ११- राजधानी में बाजार व्यवस्था- १० करोड, १२- हैलीपैड व्यवस्था- ०.५० करोड, १३- १० हजार आबादी पर पावर हाऊस- २५ करोड, १४- पिंडर नदी, नयार, रामगंगा किसी एक से पम्पिंग पेयजल योजना- नोट- वर्तमान में गैरसैण के चारों ओर पर्याप्त पानी उपलब्ध है- ५० करोड, १५- भूमि व्यवस्था- ३० करोड- नोट- गैरसैण के चारों ओर स्थित ९ पहाडयों के मध्य ३००० तीन हजार एकड से अधिक नजूल व भारत सरकार की वृक्ष विहीन भूमि है, १००० एकड से अधिक भूमि पूर्व चाय बागानों व स्टेटों की है, भमराडी सैण से नागचूलाखाल, रीठिया स्टेट से दिवालीखाल व गैरसैण से पाण्डुवाखाल तक कृशकों की सहमति से ५०० एकड भूमि क्रय की जा सकती है।
१६- यातायात व्यवस्था- गैरसैण से कर्णप्रयाग ५० किमी०- १० करोड, गैरसैण से रानीखेत- ८० किमी०- १६ करोड, गैरसैण से ग्वालदम-गरूड- १०० किमी०- २० करोड, गैरसैण से रामनगर १२० किमी०- २४ करोड, रामनगर-कोटद्वार- ३५ करोड, राजधानी क्षेत्र में २०० किमी० नई सडकों का निर्माण- ७० करोड
१७- राजधानी क्षेत्र में राजकीय महाविद्यालयों व अन्य षिक्षा संस्थानों की स्थापना- १० करोड
१८- पर्यटक आवास गृहों, विश्राम भवनों, परिवहन व्यवस्था हेतु बस स्टेषनों, पार्को, खेल मैदानों आदि की व्यवस्था हेतु- २५ करोड, १९- राजधानी, सचिवालय व अन्य कार्योलयों की साज सज्जा व फर्नीचर आदि हेतु व्यय- २५ करोड
इस तरह उक्रांद के थिंक टैंक श्री विपिन चन्द्र त्रिपाठी ने कुल पांच सौ पचास करोड पैसठ लाख अनुमानित व्यय का खाका खींच कर एक आदर्ष व सुविधा सम्पन्न राजधानी का सपना देखा था।

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720


The concept of Late Vipin ji for Uttarakhand state capital was very genuine. Gairsain being centre point from all corner of Uttarakhand, it is the ideal location also. Majority of people from Uttarakhand also wish that the Capital of Uttarakhand should be in Gairsain. Unfortunately, whosoever party ruled in the State never paid any attention toward this crucial issue.

Now it is time, public must take this issue through agitation, like we had for state. However, many people are trying to divide the people on this.



Quote from: हेम पन्त on January 18, 2011, 05:08:34 AM
उक्रांद के थिंक टैंक स्व० विपिन चन्द्र त्रिपाठी ने गैरसैण ही क्यों का तर्क देते हुए कहा था कि प्रस्तावित राजधानी स्थल गैरसैण, पाण्डुवाखाल से दीवालीखाल तक २५ किमी० लम्बाई एवं दूधातोली से नारायणबगड के ऊपर की चोटी तक २० कि०मी० की चौडाई क्षेत्र में फैला है जिसमें लगभग ३ हजार एकड यानि ६० हजार नाली वृक्षविहीन नजूल व बेनाप भूमि स्थित है। इसके अतिरिक्त भमराडीसैंण, नागचूलाखाल, पाण्डुवाखाल, रीठिया स्टेट सरीखे चारों ओर फैले खुबसूरत मैदान, बुग्याल स्थित हैं। यह पूरा क्षेत्र छोटी-बडी नौ पहाडियों व उनके बीच स्थित घाटियों में फैला है। अतः मध्य हिमालयी राज्यों में सर्वाधिक खूबसूरत राजधानी बनेगी। गैरसैण में राजधानी बनने से इसके चारों ओर के ५००० गांवों के विकास में भी इसका सीधा लाभ मिलेगा।
भूगर्भीय संरचना की दृश्टि से रियेक्टर स्केल पैमाने पर यह उत्तराखण्ड के अन्य जोनों से सबसे कम खतरे पर है। चारों ओर खूबसूरत वनाच्छादित क्षेत्र हैं। राजधानी निर्माण में पर्यावरण का ०.५ प्रतिषत से क्षति नहीं होगी।
स्व० विपिन चन्द्र त्रिपाठी ने लिखा है कि यदि राजधानी के चयन में तनिक भी भूल की गयी या राजनैतिक स्वार्थो के दबाव में गलत निर्णय लिया गया तो भविश्य में इसके गंभीर परिणाम होगे। १९७९ में उत्तराखण्ड क्रांति दल की स्थापना ही राज्य प्राप्ति हेतु हुई थी। अपनी स्थापना से यह दल एकमात्र क्षेत्रीय दल के रुप में उत्तराखण्ड राज्य के लिए संघर्श करता रहा है। उक्रांद के प्रयासों से तत्कालीन उत्तर प्रदेष सरकार ने उत्तराखण्ड राज्य निर्माण की संभावनाओं हेतु वर्श १९९२ में ६ सदस्यीय कैबिनेट समिति कौषिक समिति का गठन किया। उक्त सरकारी समिति ने अल्मोडा, पौडी, काषीपुर, लखनऊ में बैठकें कर उत्तराखण्ड के सांसदों, विधायकों, जिला पंचायत अध्यक्षों, ब्लाक प्रमुखों, बुद्धिजीवियों एवं आम जनता की राय, अभिमत, उत्तराखण्ड राज्य निर्माण एवं राजधानी के संदर्भ में लिया था तथा प्रस्तावित राज्य की राजधानी हेतु जनमत संग्रह करवाया था। कौषिक समिति द्वारा करवाये गये जनमत संग्रह में ६७ प्रतिषत से अधिक जनता ने गैरसैण- चन्द्रनगर जनपद चमोली को राजधानी के रुप में स्वीकार किया। बाद में उत्तर प्रदेष के तत्कालीन राज्यपाल श्री मोतीलाल बोरा द्वारा गठित एक्सपर्ट कमेटी ने भी अपने व्यापक सर्वेक्षण के बाद गैरसैण क्षेत्र को राजधानी हेतु सर्वाधिक उपयुक्त पाया।
स्व० श्री विपिन चन्द्र त्रिपाठी ने दस्तावेज में लिखा है कि गैरसैण (चमोली) को राजधानी के रुप में चयनित करने हेतु उत्तराखण्ड की ७५ प्रतिषत से अधिक जनता ने अपनी सहमति दी है। उत्तराखण्ड में कार्यरत किसी भी राजनैतिक दल ने गैरसैण का विरोध नहीं किया है। पेषावर काण्ड के महानायक उत्तराखण्ड की धरती के सपूत वीर चन्द्र सिंह गढवाली का निरंतर यही प्रयास रहा कि दूधातोली से लेकर गैरसैंण के मध्य भावी उत्तराखण्ड राज्य की राजधानी स्थापित की जाय। जीवन के अन्तिम क्षणों में भी उस वीर सेनानी की यही अन्तिम इच्छा थी।
गैरसैण समूचे उत्तराखण्ड का केन्द्र बिन्दु है। उत्तराखण्ड के अन्तिम छोर से लेकर धारचूला, मुनस्यारी विकास खण्डों की अन्तिम सीमा से गैरसैण की दूरी लगभग बराबर है। कुमाऊॅ कमिष्नरी नैनीताल एवं गढवाल कमिष्नरी मुख्यालय पौडी से गैरसैण की दूरी समान है। उत्तराखण्ड के १३ जनपदों के जिला मुख्यालयों से गैरसैण तक बस द्वारा आसानी से ६ से १० घण्टों में सीधे गैरसैण पहुंचा जा सकता है।
यहीं नहीं कर्णप्रयाग से रामनगर तक तथा रानीखेत तक मोटर मार्ग का चौडीकरण करने के पष्चात यह दूरी और कम समय में पूरी की जा सकती है। जनपद पिथौरागढ के धारचूला मुनस्यारी से प्रस्तावित गरूड- धौणाई- तडागताल मोटर मार्ग के पूर्ण हो जाने पर इस क्षेत्र से गैरसैण की दूरी लगभग १०० किमी० कम हो जायेगी। हरिद्वार -कोटद्वार- रामनगर बीच के प्रस्तावित मोटर मार्ग के बन जाने से उत्तरकाषी, टिहरी व देहरादून जनपदों से भी गैरसैंण की दूरी ८० से १०० कि०मी० कम हो जायेगी। उत्तरकाषी, टिहरी से वाया श्रीनगर, रुद्रप्रयाग होते हुए गैरसैण की दूरी मात्र ८ से १० घण्टों में आसानी से तय की जाती है। पौडी कमिष्नरी मुख्यालय से गैरसैण की दूरी अभी मात्र ६ से ७ घण्टे की है। यदि पौडी से मराडीसैण-धौरसैण का निर्माण कर दिया जाए तो यह दूरी और कम हो जायेगी।
गैरसैण हरिद्वार-बद्रीनाथ मोटर मार्ग पर कर्णप्रयाग से मात्र ४६ किमी० की दूरी पर पक्के मोटर मार्ग से जुडा है। पिथौरागढ जनपद से वाया थल-बागेष्वर-गरूड-ग्वालदम होते हुए सिमली से गैरसैण पक्के मोटर मार्ग से जुडा है। अल्मोडा-सोमेष्वर-द्वाराहाट होते हुए गैरसैण पक्के मोटर मार्ग से सम्बद्ध है। रूद्रपुर-हल्द्वानी- रानीखेत-द्वाराहाट-चौखुटिया होते हुए गैरसैण सीधे मोटर मार्ग से जुडा है। काषीपुर-रामनगर-भतरौंजखान भिकियासैण होते हुए वाया चौखुटिया गैरसैण तक पक्के मोटर मार्ग से सम्बद्ध है। इस तरह गैरसैण चारों ओर से मोटर मार्गो से जुडा है।
गैरसैण -चन्द्रनगर- में राजधानी निर्माण पर आने वाला वित्तीय भार
उत्तराखड की जनता की जनभावनाओं का सम्मान करते हुए यदि गैरसैण में राजधानी का निर्माण किया जाता है तो वित्तीय भार इस प्रकार होगा।
१- विधानसभा निर्माण- २५ करोड, २- सचिवालय निर्माण- २० करोड, ३-मुख्यमंत्री व मंत्रियों के आवास- ५ करोड ४-७१ विधायकों के आवास- १०.६५ करोड, ५-प्रमुख सचिव, सचिव, अपर सचिव, संयुक्त सचिव, उपसचिव कुल १५० सचिव' २२.५० करोड, ६- सरकारी स्टाफ क्वाटर्स- ५० करोड, ७- राज्यपाल भवन- ध्यान रहे कि गैरसैण से ८ से १० किमी० की हवाई दूरी पर नैनीताल में राज्यपाल भवन स्थित है- १ करोड, ८- विभिन्न विभागों के विभागाध्यक्षों के आवास- १५ करोड, ९- विभागाध्यक्षों का स्टाफ- १० करोड, १०- पुलिस विभाग- २१ करोड, ११- राजधानी में बाजार व्यवस्था- १० करोड, १२- हैलीपैड व्यवस्था- ०.५० करोड, १३- १० हजार आबादी पर पावर हाऊस- २५ करोड, १४- पिंडर नदी, नयार, रामगंगा किसी एक से पम्पिंग पेयजल योजना- नोट- वर्तमान में गैरसैण के चारों ओर पर्याप्त पानी उपलब्ध है- ५० करोड, १५- भूमि व्यवस्था- ३० करोड- नोट- गैरसैण के चारों ओर स्थित ९ पहाडयों के मध्य ३००० तीन हजार एकड से अधिक नजूल व भारत सरकार की वृक्ष विहीन भूमि है, १००० एकड से अधिक भूमि पूर्व चाय बागानों व स्टेटों की है, भमराडी सैण से नागचूलाखाल, रीठिया स्टेट से दिवालीखाल व गैरसैण से पाण्डुवाखाल तक कृशकों की सहमति से ५०० एकड भूमि क्रय की जा सकती है।
१६- यातायात व्यवस्था- गैरसैण से कर्णप्रयाग ५० किमी०- १० करोड, गैरसैण से रानीखेत- ८० किमी०- १६ करोड, गैरसैण से ग्वालदम-गरूड- १०० किमी०- २० करोड, गैरसैण से रामनगर १२० किमी०- २४ करोड, रामनगर-कोटद्वार- ३५ करोड, राजधानी क्षेत्र में २०० किमी० नई सडकों का निर्माण- ७० करोड
१७- राजधानी क्षेत्र में राजकीय महाविद्यालयों व अन्य षिक्षा संस्थानों की स्थापना- १० करोड
१८- पर्यटक आवास गृहों, विश्राम भवनों, परिवहन व्यवस्था हेतु बस स्टेषनों, पार्को, खेल मैदानों आदि की व्यवस्था हेतु- २५ करोड, १९- राजधानी, सचिवालय व अन्य कार्योलयों की साज सज्जा व फर्नीचर आदि हेतु व्यय- २५ करोड
इस तरह उक्रांद के थिंक टैंक श्री विपिन चन्द्र त्रिपाठी ने कुल पांच सौ पचास करोड पैसठ लाख अनुमानित व्यय का खाका खींच कर एक आदर्ष व सुविधा सम्पन्न राजधानी का सपना देखा था।


पंकज सिंह महर



आपातकाल में जेल से रिहा होने के बाद जब विपिन्दा बाहर आये तो जनता स्वागत को उमड़ पड़ी. वह सबसे अधिक समय तक जेल में रहे, बाईस महीने .....यह दुर्लभ फोटो चारु तिवारी के सौजन्य

हेम पन्त

नारायण दत्त तिवारी से उनके उत्तराखंड मुख्यमंत्री कार्यकाल के दौरान जनहितकारी विकास कार्यों पर चर्चा करते हुए बिपिन दा..


विनोद सिंह गढ़िया

जुझारू जन नेता थे विपिन त्रिपाठी

31 अगस्त 2004 की दोपहर में जब द्वाराहाट से जन नेता स्व. विपिन त्रिपाठी की अंतिम यात्रा विमांडेश्वर घाट के लिए रवाना हुई तो उसमें अभूतपूर्व जनसैलाब था। घरों की छतों में खड़ी महिलाएं रो रही थी। वाहनों का लंबा कारवां गुजर रहा था। साधनहीन गरीब, मजदूर, किसान और उम्रदराज लोग शव यात्रा के पीछे नौ किमी लंबे इस रास्ते पर बदहवास हालत में पैदल ही दौड़ पड़े थे।जन नेता के रूप में स्व. विपिन त्रिपाठी की यह लोकप्रियता उनके लंबे सार्वजनिक जीवन की संचित निधि थी। 23 फरवरी 1945 को द्वाराहाट के दैरी गांव में पं. मथुरादत्त त्रिपाठी के घर में जन्मे विपिन त्रिपाठी ने आईटीआई और स्नातक की परीक्षा उत्तीर्ण की और 22 साल की आयु में 1967 में उन्होंने लोहिया और नरेंद्र देव जैसे नेताओं के प्रभाव में आकर समाजवादी आंदोलन के साथ राजनैतिक सफर शुरू किया । 1969 में उन्होंने तराई में भूमिहीनों के आंदोलन में जेल की यातना सही। 1968 में हल्द्वानी से युवजन मशाल नामक साप्ताहिक पत्र का प्रकाशन किया। 1971 में द्वाराहाट से द्रोणांचल प्रहरी का प्रकाशन किया। श्री त्रिपाठी पत्रकार और जननेता के रूप में हमेशा ही शोषण, उत्पीड़न और तमाम बुराइयों के खिलाफ मुखर रहे। 1975 में आपातकाल की मुखालफत के कारण उन्हें दो साल के सश्रम कारावास की सजा हुई और प्रेस की कुर्की कर दी गई। 1984 के नशा नहीं रोजगार दो आंदोलन में 40 दिनों तक वह जेल में रहे। वन अधिनियम के खिलाफ 1988 में हुए आंदोलन में वह 10 दिनों तक तथा भासी-नौबाड़ा सड़क के लिए 1989 में हुए आंदोलन में वह 38 दिनों तक जेल में रहे। 1980 में उक्रांद के गठन के बाद से ही दल की मजबूती के लिए वह समर्पित भाव से कार्य करते रहे। वह लगातार विधानसभा के चुनाव लड़े, किंतु उन्होंने वोटों के लिए कभी भी तुष्टीकरण का रास्ता नहीं अपनाया और चुनाव की पराजय को चुनौती के रूप में स्वीकार किया। 1989 में वह द्वाराहाट के ब्लाक प्रमुख बने। उत्तराखंड आंदोलन के दौरान उन्होंने यह पद भी त्याग दिया। द्वाराहाट में कुमाऊं इंजीनियरिंग कालेज सहित क्षेत्र तथा उत्तराखंड के हितों के लिए उन्होंने कई आंदोलन किए। साधनों के घोर अभावों के बीच वह रात दिन पहाड़ और उत्तराखंड के लिए लड़ते रहे, इसके लिए उन्होंने अपने स्वास्थ्य की भी परवाह नहीं की। अलग राज्य बनने के बाद 2002 में वह पहली बार विधायक चुने गए। स्थायी राजधानी सहित तमाम सवालों पर वह पहले की तरह मुखर थे किंतु 30 अगस्त 2004 को उनके असामयिक निधन के साथ उत्तराखंड की आंचलिक राजनीति में एक गहरा शून्य पैदा हो गया। जिसे आज तक भरा नहीं जा सका है।


साभार : अमर उजाला

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720


विपिन दा .. को उनके पुण्य तिथि पर मेरापहाड़ कम्युनिटी की श्रधांजलि!

उत्तराखंड के इस अमर सपूत को कभी बुलाया नहीं जा सकता! आज अगर विपिन दा जिन्दा होते, उत्तराखंड का राजधानी का मुद्दा इस तरह राजनीतिक गलियारों में नहीं उलझा होता !

उनकी असामयिक निधन ... बहुत बड़ा आघात है.....


एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

विपिनदा के सिद्धांतों से मिटेगा भ्रष्टाचार: ऐरी द्वाराहाट: जननायक स्व.विपिन त्रिपाठी की आठवीं पुण्यतिथि यहां शीतलापुष्कर मैदान सहित समूचे क्षेत्र में समारोह पूर्वक मनाई गई। मुख्य समारोह में वक्ताओं ने कहा कि उत्तराखंड को भ्रष्टाचार से मुक्त करने के लिए स्व.विपिन त्रिपाठी के सिद्धांतों के अनुसार कार्य करना होगा।
शीतलापुष्कर मैदान में समारोह का शुभारम्भ दीप प्रज्वलित कर मुख्य अतिथि एवं उक्रांद के शीर्ष नेता पूर्व विधायक काशी सिंह ऐरी ने किया। बाद में सैकड़ों लोगों ने वैदिक मंत्रोच्चारों के बीच स्व.त्रिपाठी के चित्र पर पुष्प अर्पित किए। इस मौके पर विकास की अवधारणा और यथार्थ विषय पर आयोजित गोष्ठी को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि श्री ऐरी ने कहा कि उत्तराखंड के क्रमबद्ध विकास के लिए भ्रष्टाचार के खिलाफ, जो आवाज 60 व 70 के दशक में स्व.विपिन त्रिपाठी ने उठाई, उसकी प्रासंगिकता आज के परिप्रेक्ष्य में बढ़ गई है। उत्तराखंड लोक वाहिनी के केन्द्रीय अध्यक्ष डा.शमशेर सिंह बिष्ट, उत्तराखंड परिवर्तन पार्टी के केन्द्रीय अध्यक्ष पीसी तिवारी, द्वाराहाट के विधायक पुष्पेश त्रिपाठी, वरिष्ठ पत्रकार चारू तिवारी, उदय किरौला, दिनेश तिवारी ने कहा कि भ्रष्टाचार मुक्त समाज ही स्व.त्रिपाठी को सच्ची श्रद्धांजलि होगी। उन्होंने कहा कि चिपको, वन अधिनियम, शराब विरोधी व राज्य आंदोलन सहित दर्जनों आंदोलनों के अगुवा रहे स्व.त्रिपाठी ने उत्तराखंड को जो दशा व दिशा दी, उसी के अनुरूप चलकर भ्रष्टाचार मुक्त समाज का निर्माण व राज्य का विकास हो सकता है। गोष्ठी को पुष्कर पाल सिंह, हेम रावत, केपीएस अधिकारी, सुभाष पांडे सहित कई अन्य लोगों ने संबोधित किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता नगर पंचायत अध्यक्ष विनोद जोशी व संचालन जगदीश बुधानी व अनिल चौधरी ने किया।
इस अवसर पर ललित करगेती, रणजीत सिंह राणा, पान सिंह रावत, गजेन्द्र नेगी, श्याम सिंह डोभाल, गिरीश साह आदि बड़ी संख्या में लोग उपस्थित थे। उधर एमडी तिवारी हाईस्कूल, सुभाष माडर्न हाईस्कूल सहित अन्य स्थानों पर स्व.त्रिपाठी की पुण्यतिथि पर कार्यक्रम आयोजित हुए। एमडी तिवारी हाईस्कूल में अध्यक्ष दीवान सिंह रौतेला, प्रधानाचार्य लक्ष्मण सिंह बिष्ट व सुभाष माडर्न हाईस्कूल में व्यवस्थापक मनोज अधिकारी, पूरन पांडे आदि ने पुष्प अर्पित कर श्रद्धासुमन अर्पित किए।
संस्थान में देर तक कार्यक्रम
द्वाराहाट: विपिन त्रिपाठी कुमाऊं प्रौद्यागिकी संस्थान द्वाराहाट में भी पुण्य तिथि समारोह देर रात तक चला। कार्यक्रम में हल्द्वानी की शैलनट संस्था के कलाकारों द्वारा कई नाट्य प्रस्तुतियां दी जा रही हैं। वहीं संस्थान के छात्र-छात्राओं द्वारा भी अन्य कार्यक्रम पेश किए जा रहे हैं।



http://in.jagran.yahoo.com/news/local/uttranchal/4_5_8134900.html

   

हेम पन्त

30 अगस्त 2011  को बिपिन दा की दसवीं पुण्यतिथि पर द्वाराहाट में आयोजित श्रद्धांजली सभा की कुछ फोटो ..


हेम पन्त


एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

उत्तराखंड राज्य आन्दोनन के क्रांतिवीर विपिन चन्द्र त्रिपाठी जी को श्रधांजलि! आज उत्तराखंड में राज करने वाले नेता इस महान क्रांतिकारी नेता के सपनो का उत्तराखंड बनाने में नाकाम साबित हुए है!  समय नवयुवको जा जागना अब जरुरी है और बिपिन दा के सपनो सपनो को साकार करना है! जय भारत, जय उत्तराखंड! जय हिंद!