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Chholiya Dance - छोलिया नृत्य: युद्ध का प्रतीक नृत्य

Started by पंकज सिंह महर, September 04, 2008, 01:22:37 PM

kundan singh kulyal

छलिया नृत्य हमारे पहाड़ों सबसे लोकप्रिय हैं खास तौर पर शादी विवाह के मौके पर परन्तु आज समय बदलता जा रहा हैं खास तौर मैं शहरी इलाकों मैं जहाँ बैण्ड बाजों ने इसकी जगह ले ली हैं आज का युवा पहाड़ी निर्त्य भूल चुका हैं पंजाबी भांगड़ा या फिर फ़िल्मी धुन मैं नाचने मैं अपनी शान समझाने लगा हैं पिचले दिन चम्पावत मैं एक मित्र की शादी की पार्टी मैं गया था वहां डीजे मैं हिंदी या फिर पंजाबी गाने ही बज रहे थे मैंने अपने एक मित्र से पूछा पहाड़ी गाने क्यों नहीं लग रहे हैं उनका उत्तर था मैं आजकल कौन नाचता हैं पहाड़ी गानों मैं अब लोग मोर्डन हो चुके हैं एक आप हो आज भी पुराने ज़माने मैं जी रहे हो मैं मन ही मन ये सोचने लगा क्या पंजाबी लोग नाचंगे क्या पहाड़ी गानों मैं या फिर गुजरती मराठी जब हम लोग ही अपने संगीत को नकार रहे हैं तो कौन बचाएगा हमारी धरोहरों को जिस पर हमारे पूर्वज नाज किया करते थे इस बीच मै अपनी लाधिया घाटी मैं भी कई शादियों मैं गया वहां देखकर कुछ सकून हुवा सभी शादियों मैं छलिया नृत्य देखने को मिला डीजे मैं भी पहाड़ी गाने बज रहे थे.....