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Life Style Of Pahad In Earlier Days - क्या थी बीते दिनों पहाडो की जिन्दगी

Started by एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720, November 19, 2008, 01:08:52 PM

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720



क्या थी बीते दिनों पहाडो की जिन्दगी : LIFE OF GONE DAYS IN PAHAD

दोस्तों,

आज यहाँ पर हम पहाड़ के उस समय की बात करेंगे और उन परम्पराओं की चर्चा करंगे जो आधुनिकता की दौर समाप्त हो चुके है!  हम पहाड़ के उन पहलों पर भी नजर डालेंगे जब पहाडो मे बहुत सी जन सुविधाए नही जी और लोग किस प्रकार अपना जीवन यापन करते थे !

इस विषय हम दो column बना रहे है

बीते दिनों का पहाड़
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आज का पहाड
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I am sure we will be to compare some changes that which have taken place in race of modernization. As the coomn tendecy of human is to run after comfort, happiness etc, in this race we forget our past too.

By sharing the some old facts of pahad, you will come know how people used to lead life in extreme  geographical conditions.

एम् एस मेहता

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720



बीते दिनों का पहाड़
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मुझे याद है बचपन के वो दिन जब लोगो के पास आग जलाने का साधन नही था तो लोग किस प्रकार आग जलाते थे !  थिनुक ( हा थिनुक) ! मै एक बार बचपन मे जानवरों को चराने गया था मे बगल गाव के एक बूडे व्यक्ति से मिला वह दो पथ्थरो को आपस मे रगड़ कर आग जलाने की कोशिश कर रहा था ! जब वह दो पथ्थरो को आपस मे रगड़ता था जो उसमे से चिंगारी आती थी और वही पर उसने बकौल नाम घास के पत्ते रखे थे जो आसानी से आग पकड़ लेते थे ! ये पत्थर भी कुछ विशेष प्रकार के थे ! इस system इस व्यक्ति ने कहा यह थिनुक है जिसे आग जलाया जाता है!

शायद आप मे से बहुत से लोग इसे पहली बार सुन रहे हुंगे !


आज का पहाड
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आज कल जी भाई मर्चिस , lighter etc .

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

बीते दिनों का पहाड़
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पहले समय में लोग दूध दही, मखन्न आदि को काठ के बर्तनों मे रखा जाता था! जिन्हें पाई, ठेकी , न्या आदि कहते थे ! इसी प्रकार चावल के लिए भी माण (चार मुठी) नायी आदि बनाई जाते थे ! ये वर्तन के काठ के होते थे !

आज का पहाड
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आजकल सब आधुनिकता की दौर में सब बदल गया ! स्टील के वर्तन आदि

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

बीते दिनों का पहाड़
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सिचाई के लिए जब लोगो के पास प्याप (पाइप) होते थे तब लोग लकड़ी का तरड बनाते थे ! एक लम्बी लकड़ी के बीच के आधे हिस्से कोर से पानी जानी के लिए जगह बनाई जाती है और इसे लोग गधेरों आदि मे लगाते थे !

आज का पहाड
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अब पाइप आ गए है ! There is no such problems.  Canals are also being made.

खीमसिंह रावत

लाइ (सरसों) का तेल निकालने के लिए कोल (कोल्हू) जिसको एक बैल से चलते थे /
आज लाइ के बदले दुकानदार तेल दे देता है /

खीमसिंह रावत

कपडे सिलाने के लिए दरजी होते थे जिन्हें सिलाई के बदले में अनाज दिया जाता था साल में सिर्फ़ दो बार / एक गेहूं की फसल पर, दूसरा धान, मडुवा की फसल पर/

आज रेडिमेड कपडे है या रुपयों में सिलाओ

खीमसिंह रावत

गानों वाले गाय भैस का दूध नही बेचते थे/ मेहमानों को भी सुबह शाम दूध पीने को दिया जाता था/
आज डेयरी में सारा दूध चला जाता है अपने बच्चो को भी नही मिलता है दूध पीने को/

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720



छिलके

बीते दिनों पहाडो में लोग जब किसी के पास मर्चिस नही होती थी तो छिलके से एक घर से आग जला कर ले जाते थे!   

Anubhav / अनुभव उपाध्याय

Yeh sab to aadhunikata ka prateek hai ki aaj kal humare bhai bandhuon ko un samasyaon se do chaar nahi hona padta jinse woh aaj se 20-30 saal pahle hote the.

Risky Pathak

Old Days:

Gehu Se Aata Nikaalne Ke Liye Jataar Ka Istemaal kiya jata tha, jise ghar ki aurate chalaati thi.

Dheere dheere iske sthaan pe Ghat(Pan Chakki) aayi..

These Days:

Aajkal to Diesel se chalne waali chakki aa gyi hai