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Songs On Bird Ghughuti - घुघुती पक्षी पर रचित उत्तराखंड के सबसे ज्यादे गाने

Started by एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720, March 05, 2009, 12:59:43 PM

dayal pandey/ दयाल पाण्डे

एक पुराना गाना यह भी है जिसको मेरा पहाड़ के शेखर शर्मा एक्सर गाते हैं-
ओ घुघूती जहाँ बसिए म्योर पहाडा रे , मेरी सुवा सुनैली जावी डार मारिली रे
हो हो हो ........................
जंगला घाहूँ जली बडैली घस्यारा, घर ऐ बेर रवत पकली बडैली रीसारा,
बडैली रिसार तू झन बसिए रे म्योर सुवा सुनैली .....................
हो हो हो ..................
धान बोया धन्याड़ी  में ग्यों बोया गिलैमा, नि बुलाली झंन बुलाइये, में तेरो दिलै मा
में तेरो दिलै मां तू झंन बसिए रे मेरी सुवा सुनैली .................
ओ घुघूती .................

dayal pandey/ दयाल पाण्डे

मेरा पहाड़ के ओडियो  एल्बम  में भी घुघूती का जिक्र है -
घुघूती बासैं छै जब  आम वोट डाई, मैकू तेरी याद ऐन्छ लागी छै नराई
बाट तेरी चान - चान आँख भर आई, सुख चैन लुटा मेरी नीद ली हराई
एक बाना निठुरी उ याद ऐसी आई ........... 

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

पराणी झुरि गे .



पराणी झुरि गे
घुघुति घुरि गे
पराणी झुरि गे
नै बास घुघुती तू नै बास च्यापणी
नै चमका मेरो मन नि कर निखाणी
सुध बुध उडिगे
पराणी झुरि गे
आंसु लीजा खेडि दियै उनरि बाखई
नै आग भुराण कभै नि लागी बाटुई
फाम कपोरिगे
पराणी झुरि गे
उडि जा उनरि दिसि वां बांस धैं ट्वाला
कै दिये रिंगोई घूई कतुक बचुला
उमरा पुरी गे
पराणी झुरि गे
कावा का जै दिन भागी मैल त पुरूणा
उचाट लगूंछ घू घू कै तेरो घुरूणा
कलेजु कोरिगे
पराणी झुरि गे

(Provided by our Member Rajen Ji)

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

घुघूती

घुघूती तो बास
ये ऊँचा डंणड़ीयुं मा
घुगुती तो बास

तेरी घुग सुने की
याद आणों ये पहाड़
मण पन्हुचगे रुतैला
मुल्क म्यार गढ़वाल
घुगुती तो बास

हीमखंड को शिला यख च 
देबतूं को निवाशा
बद्री- केदार कपाट यख
हमरु धन धन भागा
घुगुती तो बास

तेरी घुगे तेरी घुगे
तन उडों ये आकाशा
याद येगै बाबा बोई की
अन्खोयुं निकले धारा
घुगुती तो बास

याद येगै छुटपन की
दागडीयुओं का खेला
ओ हीन्शोलों का डाला
टीपैकी मील जोंला खोंला
घुगुती तो बास

पन्त्दैर का कीबलाटा
घ्स्यरी गीतों गूंजती डंडी
बल्दों की जोड़ी का घंडा
लै जांदी मयारा गों का बाटा
घुगुती तो बास

उख होली उभी मेरी जी
हिरणी होली मेर बाटा
आम की डाई मा बैठिकी
झट दोडी लै आजा संदेसा
घुगुती तो बास

घुघूती तो बास
ये ऊँचा डंणड़ीयुं मा
घुगुती तो बास

बालकृष्ण डी ध्यानी
देवभूमि बद्री-केदारनाथ
मेरा ब्लोग्स
http:// balkrishna_dhyani.blogspot.com
मै पूर्व प्रकाशीत हैं -सर्वाधिकार सुरक्षीत

Devbhoomi,Uttarakhand

फोजी ललित मोहन ने भी घुघुती पर ये गाना बहुत सुरीले स्वर में अपनी एल्बम मीठी बोली में गाया  है !



ना बासा घुघुती रूख मा,इजू हनेली दुख मा
ना बासा घुघुती रूख मा,इजू हनेली दुख मा !

तेरी घुर-घुर होली,कुर्सी हानियों मा, टप-टप आंसू होली इजू अंखियों मा

ना बासा घुघुती रूख मा,इजू हनेली दुख मा
ना बासा घुघुती रूख मा,इजू हनेली दुख मा !

  बिराणा मुलुक इजा तंख बोलुन्ला,ना रो मेरी इजू में लौटी ओला
ना बासा घुघुती रूख मा,इजू हनेली दुख मा
ना बासा घुघुती रूख मा,इजू हनेली दुख मा !

नानी बै तू नानि कनी तू मैत बुलाये,नि बुलाली जब इजू तूवाग भुरिये

ना बासा घुघुती रूख मा,इजू हनेली दुख मा
ना बासा घुघुती रूख मा,इजू हनेली दुख मा !

सोची-सोची याद ओंछी,रोई-रोई आंसू,इजू पहाड़ छोड़ी परदेश गेयुं !

ना बासा घुघुती रूख मा,इजू हनेली दुख मा
ना बासा घुघुती रूख मा,इजू हनेली दुख मा !


यम यस जाखी

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

प्रयाग पाण्डेJanuary 14घुघुतिक त्यार  और " घुघूती चडी " !

ए नि बासा घुघूती रुन झुन ,
म्यार मैता का देसा रुन झुन ,
मेरी ईजु सुणौली रुन झुन ,
ए नि बासा घुघूती रुन झुन।
कै चांणछी पगली तु ऊडी ?
तेरि दासा देखी लागि जाँछी ,
मैं निसासा घुघूती रुन झुन ,
ए नि बासा घुघूती रुन झुन ।
काटी खांछ गाड को सुसाट  ,
मैं चानै रै गयुं वीको बाट ,
रवे उठी छ परानी सुवै की ,
मैं उदासा घुघूती रुन झुन ,
ए नि बासा घुघूती रुन झुन।
मेरी ईजु सुणौली रुन झुन ,
म्यार मैता का देसा रुन झुन ,
खेडी खांछी भागी तेरी वाणी ,
रवेइ मरी इकली परानी ,
को बतालो मेरी हइ गेछ ,
कसि दासा घुघूती रुन झुन ,
ए नि बासा घुघूती रुन झुन ,
म्यार मैता का देसा रुन झुन ,
मेरी ईजु सुणौली रुन झुना ।

(कुमाऊँ का लोक साहित्य )

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

From - प्रयाग पाण्डे सबहूँ पैलि आपूं  सब दगडियों कें  घुघूती  त्यरैकी  बधाई ! हमार पहाडाक  लोक जीवन में " घुघूती " भौत महत्व छू । उ घुघूती त्यार  हो या "घुघूती चडि "। पैलि  जमान  में जब  संचाराक आज जास  साधन नि छी । उ जमान  में पहाड़ाक चेली - बौडी " घुघूती चडि "  द्वारा आपण   सुख - दुःख मैत पुजूछी ।  " घुघूती चडि " कुहुकैल चेली - बौडी उदास लै  है जान्छी । " घुघूती चडिक " कूक  उनार मन कें  व्याकुल ली कर दी छी और सुख लै । आज घुघूती त्याराक मौक में  एक भौते पुराण कुमाऊँनी लोक गीतक आनन्द लीजियो :-

ए  नि बासा घुघूती रुन झुन ,
म्यार मैता  का देसा रुन  झुन ,
मेरी ईजु  सुणौली रुन झुन ,
ए  नि बासा घुघूती रुन झुन।
कै चांणछी पगली तु ऊडी ?
तेरि दासा  देखी लागि जाँछी ,
मैं निसासा घुघूती रुन  झुन ,
ए  नि बासा घुघूती रुन झुन ।
काटी खांछ  गाड  को सुसात ,
मैं चानै रै गयुं वीको  बाट ,
रवे उठी छ परानी सुवै की ,
मैं उदासा घुघूती रुन झुन ,
ए  नि बासा घुघूती रुन झुन।
मेरी ईजु  सुणौली रुन झुन ,
म्यार मैता  का देसा रुन  झुन ,
खेडी खांछी  भागी तेरी वाणी ,
रवेइ मरी इकली परानी ,
को बतालो  मेरी हइ गेछ ,
कसि दासा  घुघूती रुन झुन ,
ए  नि बासा घुघूती रुन झुन ,
म्यार मैता  का देसा रुन  झुन ,
मेरी ईजु  सुणौली रुन झुना ।

(कुमाऊँ का लोक साहित्य )

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

घुगतीन बियाती मोण ला घुगल (एक हंसौड़ा लोकनृत्य गीत )
स्रोत्र - शिवा नन्द नौटियाल , गढ़वाल के लोकनृत्य
इंटरनेट प्रस्तुति - भीष्म कुकरेती
फुर घुगती फुर
सड़कूँ का खोल
घुगतीन बियाण ला घुगती मोल। फुर घुगती फुर-
आंखी लाइ ऐना
घुगती न बियाण तै चैत का मैना। फुर घुगती फुर-
नाऊँ धारो गूजा
घुगती बिये गय , कौरा बधाण बालण की पूजा। फुर घुगती फुर-
लागी जाली खूद
कन घुगती तौंकी छई , माणा दूद। फुर घुगती फुर-
काटी जाली खाईं , काटी जाली खाईं
तुमड़ी को पर्या अर भंगल्यट की राई। फुर घुगती फुर-
बल्द धारे जुऊ ,
घुगती छांछ छोळे , छोळण सेर घीऊ। फुर घुगती फुर-
काटी जाली लौकी ,
छोळण सेर घिऊ बोदन , कन घुगती तौंकी। फुर घुगती फुर-
एखी मारी भेखी ,
घुगती घुगती बोदन , आंख्युंन नी देखी।फुर घुगती फुर-
तिमलो को पात ,
छोळण सेर घिऊ बोदन , क्या च बक्की बात। फुर घुगती फुर-
कफू बासो जेठ ,
घुगती बचीं रैली , हम ह्वे जौंला सेठ। फुर घुगती फुर-
ढंडी धोळे जाळा,
गौड़ी -भैंसी बेचीं द्यावा , तैं घुगती पाळा। फुर घुगती फुर-
झंगोरा की धाण ,
घुगती बचीं रैली हमारी , घी दूद खाण। फुर घुगती फुर-
बुति जाली राई ,
घुगतीन दूद दे , कन जमानो आई। फुर घुगती फुर-
कुयेड़ि सी लौंकी ,
चल दीद्यो देखी औंला , कन घुगती तौंकी। फुर घुगती फुर-
खाई जाली बेरा ,
फुर घुगती उड़े , पदानो सेरा। फुर घुगती फुर-
गाड़ी जाला गैणा ,
कैकि घुगती होली , हमन मारी दीणा। फुर घुगती फुर-
गाड़े जालो सैरा।
त्वै तैं मारी देला , औउ घुगती घैरा। फुर घुगती फुर-