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Holy Mantras Related To Our Culture - हमारी संस्कृति से संबंधित मंत्र

Started by पंकज सिंह महर, March 18, 2009, 02:07:02 PM

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Quote
Quote from: पंकज सिंह महर on March 31, 2009, 04:32:12 PM
इन मंत्रो के लिये धन्यवाद, कृपया निम्न के लिये मंत्र बता दें-

१- स्वयं को, पत्नी को एवं बच्चों (कन्या एवं बालक दोनों के लिये)
* परदेश में रह रहे लोगों को पंडित जी के अभाव में इन मंत्रों की आवश्यकता होती है।
२- भोजन मंत्र
३- स्नान तथा ध्यान (संध्या) हेतु कुछ मंत्र


भोजन मन्त्र -

१- ब्रहार्पणं ब्रह्म हविर्ब्रह्माग्नौ ब्रह्मणा हुतम् |
    ब्रह्मैव तेन गन्तव्यं ब्रह्मकर्मसमाधिना ||

२- त्वदीयं अस्तु गोविन्दं समर्पयामि  |     

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स्नान मन्त्र-

१- नंदिनी नलिनी सीता मालती महापगा |
    विष्णुपादाब्जसम्भूता गंगा त्रिपथगामिनी ||
    भागीरथी भोगवती जान्हवी त्रिदशेश्वरी |
    द्वादशैतानि नामानि यत्र यत्र जलाशये  ||
    स्नानोद्यतः स्मरेंनित्यम तत्र तत्र वसाम्यहम् |
   

२- गंगे च यमुने चैव, गोदावरी, सरस्वती |
   नर्मदे, सिन्धु, कावेरी, जलेऽस्मिन सन्निधिं कुरू.||
   


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संध्या की तो पूरी विधि है जिसमें प्राणायाम, शाप विमोचन ,गायत्री मन्त्र आदि सभी शामिल है. वैसे कुछ समय बाद मैं संक्षिप्त रू से नित्य पूजन विधि देना चाहता हूँ, जिसे आज के व्यस्त समय में भी कामकाजी व्यक्ति पालन कर सकते हैं. यहाँ पर गायत्री माता  का ध्यन और गायत्री मन्त्र दे रहा हूँ.-


गायत्रीमाता का ध्यान -

ॐ बालां विद्यां तु गायत्रीं लोहितां  चतुराननाम् |
रक्ताम्बरद्वयोपेतामक्षसूत्रकरां            तथा ||
कमण्डलुधरां देवीं        हंसवाहनसंस्थिताम्  |
ब्रह्माणीं ब्रह्मदैवत्यां       बह्मलोकनिवासिनीम् ||
मंत्रेणावाहयेद्देवीमायान्तीं        सूर्यमण्डलात्


गायत्री मन्त्र -


ॐ भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि | धियो यो नः प्रचोदयात् | 

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तकनीकी सुधार के लिए हेम पन्त जी को धन्यवाद.

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घंटा पूजन मन्त्र -

आगमार्थं तु देवानां गमनार्थं च रक्षसाम् |
कुरु घण्टे वरं नादं   देवतास्थानसंनिधौ ||


शंखपूजन मन्त्र -

पृथिव्यां यानि तीर्थानि स्थावराणि चराणि च |
तानि तीर्थानि शंखेऽस्मिन् विशन्तु ब्रह्मशासनात् ||

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गणेश स्मरण -

[सुमुखश्चैकदन्तश्च   कपिलो  गजकर्णकः |
लम्बोदरश्च विकटो विघ्ननाशो विनायकः ||       
धूम्रकेतुर्गणाध्यक्षो भालचन्द्रो  गजाननः |
द्वादशैतानि नामानि यः  पठेच्छृणुयादपि ||
विद्यारम्भे विवाहे च प्रवेशे निर्गमे तथा |
सग्रामे संकटे चैव विघ्नस्तस्य न जायते ||   

ॐ श्रीमन्महागणाधिपतये नमः | लक्ष्मीनारायणाभ्यां नमः |  उमामहेश्वराभ्यां नमः | वाणीहिरण्यगर्भाभ्यां नमः | शचीपुरन्दराभ्यां  नमः | मातृपितृगुरुचरणकमलेभ्यो नमः | इष्टदेवताभ्यो नमः | कुलदेवताभ्यो नमः | ग्रामदेवताभ्यो नमः | वास्तुदेवताभ्यो नमः |  स्थानदेवताभ्यो नमः | सर्वेभ्योदेवेभ्यो नमः | सर्वेभ्योतीर्थेभ्यो नमः | सिद्धिबुद्धिसहिताय विघ्नवल्लीकुठाराय श्रीमन्महागणाधिपतये नमः |     

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धूप-अगरबत्ती लगाने हेतु मन्त्र -



वनस्पतिरसोद्भूतो गन्धाढ्यो गन्ध उत्तमः |
आघ्रेयः सर्वदेवानां धूपोऽयं  प्रतिगृह्यताम् ||


मन्त्रपुष्पांजलि-

श्रद्धया सिक्तया भक्त्या हार्दप्रेम्णा समर्पितः |
मन्त्र पुष्पाञ्ज़लिश्चायं कृपया प्रतिगृह्यताम ||


आरती मन्त्र -

कदलीगर्भसम्भूतं कर्पूरं तु प्रादीपितम् |
अरार्तिकमहं कुर्वे पश्य मे वरदो भव || 


प्रदक्षिणा मन्त्र -

यानि कानि च पापानि जन्मान्तरकृतानि च |
तानि  सर्वाणि  नश्यन्तु  प्रदक्षिणपदे  पदे ||

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चरणामृत   ग्रहण करने का मन्त्र -


अकालमृत्युहरणं      सर्वव्याधिविनाशनम् |
विष्णुपादोदकं  पीत्वा  पुनर्जन्म न विद्यते || 

पंकज सिंह महर

कहीं आने-जाने के लिये दिशाओं का बहुत ख्याल रखा जाता है, जिसके लिये निम्न श्लोक भी कहा जाता है-


उत्तरे बुध भौमे च, रवि शुक्रे तु पश्चिमे।
पूर्वे शनि सोमे च, दक्षिणे तु वृहस्पति॥


भावार्थ- मंगल, बुधवार को उत्तर यात्रा, रविवार व शुक्रवार को पश्चिम न जाना, शनिवार और सोमवार को पूर्व की यात्रा और वृहस्पति को दक्षिण दिशा की यात्रा का निषेध है।

पंकज सिंह महर

उत्तराखण्ड के कई मंदिरों में बकरे की बलि दी जाती है, बलिदान के समय बकरे को रोली लगाते हैं, उसको पुष्प चढ़ाते हैं और फिर उस पर पानी छिड़का (पनधार- पानी हाथ में लेकर सिर से पूंछ तक) जाता है और यह मंत्र बकरे के कान में पढ़ा जाता है-


"अश्वं नैव, गजं नैव, सिंहं नैव च नैव च।
अजा पुत्र बलिं दद्दात, देवो दुर्बल घातकः॥


अर्थात- हे बकरे! तू न हाथी है, न घोड़ा, न शेर, तू सिर्फ बकरे का बच्चा है, मैं तेरी बलि चढा़ता हूं, देवता दुर्बल का नाश करते हैं।

      पानी के छींटों से जब बकरा अपने को हिलाता है (बरक जाता है) तो माना जाता है कि देवता ने बलि को स्वीकार कर लिया है। तब खुखरी से या अन्य अस्त्र से उसकी गर्दन को काटा जाता है और उसकी पूंछ काटकर उसके मुंह में डाला जाता है।