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Martyrs Of UK Movement - उत्तराखण्ड राज्य आन्दोलन के अमर शहीद एवं आन्दोलनकारी

Started by पंकज सिंह महर, May 06, 2009, 10:52:35 AM

हेम पन्त

उत्तराखण्ड आन्दोलन में श्रीयन्त्र टापू पर 1995 में शहीद हुए श्री यशोधर बेंजवाल जी



Quote from: एम.एस. मेहता /M S Mehta on December 17, 2009, 08:11:33 AM
यशोधर बेंजवाल

शहीद यशोधर बेंजवाल भारत के एक उत्तराखण्ड आन्दोलनकारी थे। वे पृथक उत्तराञ्चल प्रदेश के निर्माण हेतु संघर्षरत संगठन उत्तराखण्ड क्रान्ति दल (उक्रांद) (जो कि वर्तमान में उत्तरांचल का एक क्षेत्रीय राजनीतिक दल है) के सदस्य थे। आन्दोलन के दौरान पुलिस के हाथों उन्हें अपनी जान गंवानी पड़ी।

यशोधर का जन्म उत्तरांचल (जो कि उस समय उत्तर प्रदेश का हिस्सा था) के रुद्रप्रयाग जिले के बेंजी नामक गाँव में हुआ था। छात्र जीवन से ही वे राजनीति में सक्रिय थे। बाद में वे पृथक उत्तराखण्ड प्रदेश के निर्माण के आन्दोलन से जुड़ गये। इसी आन्दोलन के दौरान एक बार वे अपने साथियों सहित श्रीनगर के श्रीयंत्र टापू पर धरने पर बैठे थे। पुलिस ने उन्हें दो साथियों सहित गिरफ्तार कर लिया। काफी दिन तक तीनों युवकों को यातना देने के बाद मार डाला गया।


http://hi.wikipedia.org/

हेम पन्त

श्रीयन्त्र टापू काण्ड के शहीद यशोधर बेंजवाल..


Devbhoomi,Uttarakhand

स्वतंत्रता सेनानियों के परिवार राष्ट्रीय परिवार घोषित हों
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रानीखेत: स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के परिवारों को राष्ट्रीय परिवार घोषित करने की मांग उठाते हुए स्वतंत्रता संग्राम सेनानी उत्तराधिकारी समिति ने इस संबंध में भारत सरकार से वार्ता करने का निर्णय लिया है। इधर रानीखेत के हिमांशु उपाध्याय को समिति का प्रदेश अध्यक्ष बना दिया गया है, जबकि रघुनंदन वैला को रानीखेत नगर अध्यक्ष नामित किया गया है।

अखिल भारतीय स्वतंत्रता संग्राम सेनानी उत्तराधिकारी संगठन की एक बैठक यहां केन्द्रीय संयोजक उमेश पांडे की अध्यक्षता में सम्पन्न हुई। जिसमें संगठनात्मक बिंदुओं व समस्याओं पर चर्चा हुई। सर्वसम्मति से इस मांग का प्रस्ताव पारित किया गया कि स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के परिवारों को राष्ट्रीय परिवार घोषित किया जाय। इस संबंध में केन्द्र सरकार से वार्ता करने का निर्णय लिया गया। इसके अलावा प्रदेश में स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के उत्तराधिकारियों को अविलम्ब परिचय पत्र जारी करने की मांग की गई। बैठक में सर्वसम्मति से रानीखेत निवासी स्वतंत्रता संग्राम सेनानी स्व.मदन मोहन उपाध्याय के पुत्र हिमांशु उपाध्याय को समिति का प्रदेश अध्यक्ष नामित किया गया जबकि स्वतंत्रता संग्राम सेनानी स्व.जय दत्त वैला के पुत्र रघुनंदन वैला को रानीखेत नगर अध्यक्ष नियुक्त किया है। बैठक में हिमांशु उपाध्याय, रघुनंदन वैला, मोहन चंद्र तेवाड़ी, कृष्णानंद दुम्का, कैलाश फुलारा, तारा लाल साह, बिट्टू तेवाड़ी, राम सिंह रौतेला व कुंदन सिंह रौतेला आदि कई लोग उपस्थित थे।

Dainik jagran news


Anil Arya / अनिल आर्य

राहत बांड प्राप्त महिला आंदोलनकारियों के लिए सरकार का फैसला
'आश्रितों' को भी मिलेगा आरक्षण
देहरादून। मुजफ्फरनगर कांड में राहत बांड प्राप्त आंदोलनकारी महिलाओं के आश्रित को भी नौकरी में आरक्षण का फैसला राज्य सरकार ने लिया है। इस संबंध में गृह विभाग ने जीओ जारी कर दिया है।
अपर सचिव गृह, भास्करानंद ने बताया कि मुजफ्फरनगर कांड में राहत बांड पाने वाली महिलाओं के किसी एक आश्रित को इस जीओ का लाभ मिलेगा। यह सुविधा 11 अगस्त 2004 के शासनादेश के अनुसार राज्य आंदोलनकारियों को दिए जा रहे 10 प्रतिशत के क्षैतिज आरक्षण की परिधि में समाहित करते हुए दी गई है। उत्तराखंड आंदोलन के दौरान दो अक्तूबर 1994 को मुजफ्फरनगर कांड हुआ था। बाद में पीड़ित महिलाओं को सरकार की ओर से दस-दस लाख रुपये का राहत बांड घोषित हुआ था। उत्तराखंड बनने के बाद प्रदेश सरकार ने राज्य आंदोलनकारियों के लिए नौकरियों में 10 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण की सुविधा दी है। जो नौकरी नहीं चाहता, उसके लिए 3000 रुपये मासिक पेंशन की व्यवस्था दी है।
राज्य आंदोलनकारियों को आरक्षण के अंतर्गत ही दिया जाएगा लाभ epaper.amarujala

Devbhoomi,Uttarakhand

राज्य आंदोलनकारियों का आमरण अनशन शुरू
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उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी अपनी विभिन्न मांगों को लेकर बड़कोट तहसील प्रांगण में आमरण अनशन और क्रमिक अनशन पर बैठ गये हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री को ज्ञापन प्रेषित कर मांगे पूरी न होने तक आंदोलन जारी रखने की चेतावनी दी है।

पूर्व तय कार्यक्रम के अनुसार गुरुवार को राज्य निर्माण आंदोलनकारियों में कंसेरू निवासी हरिमोहन सिंह भूख हड़ताल पर और अन्य आंदोलनकारी क्रमिक अनशन पर बैठ गये हैं। आंदोलनकारियों में विशालमणी बंधानी, भगवती भद्री, सुभाष उनियाल, विजय सिंह, जयभगवान गुप्ता, प्रदीप, चैन सिंह, वासवानंद डिमरी, किताब सिंह आदि का कहना है कि जिन आंदोलनकारियों ने राज्य निर्माण के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, उन्हें अब अपनी जायज मांगों के लिए बार-बार आंदोलन करने को विवश होना पड़ रहा है। आंदोलनकारियों ने उपजिलाधिकारी के माध्यम से मुख्यमंत्री को ज्ञापन प्रेषित कर 50 वर्ष की आयु पूरी करने वालों को पेंशन और कम उम्र वालों को योग्यतानुसार नौकरी, आंदोलनकारियों के उतराधिकारियों को सरकारी सेवाओं में 10 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण की तय सीमा समाप्त कर हमेशा के लिए स्थाई किया जाय, चिकित्सा सुविधा, सरकारी बसों में फ्री यात्रा, आदि से अवगत कराते हुए लिखा है कि जब तक मांगे पूरी नहीं होती है, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।


Source Dainik jagran

Pooran Chandra Kandpal

हम सबको उस टीम का हार्दिक आभार व्यक्त करना चाहिए जिसने उत्तराखंड के अमर शहीदों की नामावली को हमारे लिए
प्रस्तुत किया है और आन्दोलन के उस इतिहास को जीवंत रखा है जिसको वर्त्तमान और भविष्य की पीढियां पढ़ेंगी, देखेगी
और समझेगी.  देश में उत्तराखंड ही एक ऐसा राज्य है जिसे अपने अस्तित्व  में आने के लिए तीन दर्जन उत्तराखंडियों को
शहीद होना पड़ा.  हमारे कल के लिए अपना आज कुर्बान करने वाले इन शहीदों को कोटिश: नमन. पूरन चन्द्र कांडपाल