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Martyrs Of UK Movement - उत्तराखण्ड राज्य आन्दोलन के अमर शहीद एवं आन्दोलनकारी

Started by पंकज सिंह महर, May 06, 2009, 10:52:35 AM

पंकज सिंह महर

साथियो,
      उत्तराखण्ड राज्य का गठन 9 नवम्बर, 2000 को देश के 27 वें राज्य के रुप में किया गया। यहां पर यह उल्लेखनीय है कि उत्तराखण्ड राज्य का गठन बहुत लम्बे संघर्ष और अनेकों बलिदानों के फलस्वरुप हुआ। उत्तराखण्ड राज्य की मांग सर्वप्रथम 1897 में उठी और धीरे-धीरे यह मांग अनेक समयों पर उठती रही। 1994 में इस मांग ने जनांदोलन का रुप ले लिया और आखिरकार हम राज्य प्राप्त करने में सफल रहे।
      लेकिन इस सफलता में कई नाम ऎसे भी थे, जिन्होंने हमारे बेहतर कल के लिये अपने वर्तमान को दांव पर लगा दिया और पुलिस के दमन और उसकी कायर गोलियों से आगे हंसते-हंसते अपनी जान कुर्बान कर दी। मेरा पहाड़ इन महान और अमर शहीदों का परिचय आप लोगों से कराने का प्रयास करेगा।
        इसके अतिरिक्त हम यह भी प्रयास करेंगे कि इस आन्दोलन में सक्रिय आन्दोलनकारी, जिन्हें जेल जाना पड़ा और पुलिसिया दमन के शिकार हुये, उनसे भी आप लोगों को रुबरु करा सकें।

पंकज सिंह महर

दिनांक 2 अगस्त, 1994 को उत्तराखण्ड के गांधी स्व० श्री इन्द्रमणी बड़ोनी जी के नेतृत्व में पौड़ी शहर में आमरण अनशन किया गया। इस आन्दोलन के व्यापक रुप से फैलाव होने से परेशान प्रशासन ने दिनांक 8 अगस्त, 1994 को उत्तराखण्ड में पहला गोलीकांड किया।
    इस गोलीकांड में आन्दोलनकारी आर०पी० नौटियाल घायल हो गये और फायर ब्रिगेड़ की गाड़ी के चालक श्री जीत बहादुर गुरुंग की मौत हो गई।
    इस दिन से पुलिस प्रशासन ने गोलीबारी का जो सिलसिला शुरु किया, वह पूरे साल उत्तराखण्ड में चला और जगह-जगह आन्दोलनकारियों का दमन इसी तारीख से शुरु हुआ। इसीलिये अगस्त माह को "उत्तराखण्ड राज्य आन्दोलन की अगस्त क्रान्ति" माना जाता है।

पंकज सिंह महर

खटीमा गोलीकाण्ड


1 सितम्बर, 1994 को उत्तराखण्ड राज्य आन्दोलन का काला दिन माना जाता है, क्योंकि इस दिन की जैसी पुलिस बर्बरता की कार्यवाही इससे पहले कहीं और देखने को नहीं मिली थी। पुलिस द्वारा बिना चेतावनी दिये ही आन्दोलनकारियों के ऊपर अंधाधुंध फायरिंग की गई, जिसके परिणामस्वरुप सात आन्दोलनकारियों की मृत्यु हो गई।

१- अमर शहीद स्व० भगवान सिंह सिरौला, ग्राम श्रीपुर बिछुवा, खटीमा।
२- अमर शहीद स्व० प्रताप सिंह, खटीमा।
३- अमर शहीद स्व० सलीम अहमद, खटीमा।
४- अमर शहीद स्व० गोपीचन्द, ग्राम-रतनपुर फुलैया, खटीमा।
५- अमर शहीद स्व० धर्मानन्द भट्ट, ग्राम-अमरकलां, खटीमा
६- अमर शहीद स्व० परमजीत सिंह, राजीवनगर, खटीमा।
७- अमर शहीद स्व० रामपाल, निवासी-बरेली।


**अमर शहीद स्व० श्री भगवान सिंह सिरोला, सात बहनों के अकेले भाई थे और अमर शहीद स्व० श्री परमजीत सिंह अपने मां-बाप की इकलौती संतान....।

इस पुलिस फायरिंग में बिचपुरी निवासी श्री बहादुर सिंह, श्रीपुर बिछुवा के पूरन चन्द्र भी गंभीर रुप से घायल हुये थे।





पंकज सिंह महर

मसूरी गोलीकाण्ड

2 सितम्बर, 1994 को खटीमा गोलीकांड के विरोध में मौन जुलूस निकाल रहे लोगों पर एक बार फिर पुलिसिया कहर टूटा। प्रशासन से बातचीत करने गई दो सगी बहनों को पुलिस ने झूलाघर स्थित आन्दोलनकारियों के कार्यालय में गोली मार दी गई। इसका विरोध करने पर पुलिस द्वारा अंधाधुंध फायरिंग कर दी गई, जिसमें कई लोगों को (लगभग 21) को गोली लगी और इसमें से तीन आन्दोलनकारियों की अस्पताल में मृत्यु हो गई।

मसूरी गोलीकांड में शहीद-



१- अमर शहीद स्व० बेलमती चौहान(48), पत्नी श्री धर्म सिंह चौहान, ग्राम-खलोन, पट्टी घाट, अकोदया, टिहरी।
२- अमर शहीद स्व० हंसा धनई(45), पत्नी श्री भगवान सिंह धनई, ग्राम-बंगधार, पट्टी धारमंडल, टिहरी।
३- अमर शहीद स्व० बलबीर सिंह(22), पुत्र श्री भगवान सिंह नेगी, लक्ष्मी मिष्ठान्न, लाइब्रेरी, मसूरी।
४- अमर शहीद स्व० धनपत सिंह(50), ग्राम-गंगवाड़ा, पट्टी-गंगवाड़स्यू, गढ़वाल।
५- अमर शहीद स्व० मदन मोहन ममगई(45), नागजली, कुलड़ी, मसूरी।
६- अमर शहीद स्व० राय सिंह बंगारी(54), ग्राम तोडेरा, पट्टी-पूर्वी भरदार, टिहरी।







पंकज सिंह महर

मुजफ्फरनगर (रामपुर तिराहा) गोलीकाण्ड

1-2 अक्टूबर, 1994 की रात्रि को दिल्ली रैली में जा रहे आन्दोलनकारियों का रामपुर तिराहा, मुजफ्फरनगर में पुलिस-प्रशासन ने जैसा दमन किया, उसका उदारहण किसी भी लोकतांत्रिक देश तो क्या किसी तानाशाह ने भी आज तक दुनिया में नहीं दिया कि निहत्थे आन्दोलनकारियॊं को रात के अंधेरे में चारों तरफ से घेरकर गोलियां बरसाई गई और पहाड़ की सीधी-सादी महिलाओं के साथ दुर्व्यवहार तक किया गया। इस गोलीकांड में हमारे 7 आन्दोलनकारी शहीद हो गये थे।

शहीदों के नाम


१- अमर शहीद स्व० सूर्यप्रकाश थपलियाल(20), पुत्र श्री चिंतामणि थपलियाल, चौदहबीघा, मुनि की रेती, ऋषिकेश।
२- अमर शहीद स्व० राजेश लखेड़ा(24), पुत्र श्री दर्शन सिंह लखेड़ा, अजबपुर कलां, देहरादून।
३- अमर शहीद स्व० रविन्द्र सिंह रावत(22), पुत्र श्री कुंदन सिंह रावत, बी-20, नेहरु कालोनी, देहरादून।
४- अमर शहीद स्व० राजेश नेगी(20), पुत्र श्री महावीर सिंह नेगी, भानिया वाला, देहरादून।
५- अमर शहीद स्व० सतेन्द्र चौहान(16), पुत्र श्री जोध सिंह चौहान, ग्राम हरिपुर, सेलाकुईं, देहरादून।
६- अमर शहीद स्व० गिरीश भद्री(21), पुत्र श्री वाचस्पति भद्री, अजबपुर खुर्द, देहरादून।
७- अमर शहीद स्व० अशोक कुमारे कैशिव, पुत्र श्री शिव प्रसाद, मंदिर मार्ग, ऊखीमठ, रुद्रप्रयाग।







पंकज सिंह महर

देहरादून गोलीकाण्ड

3 अक्टूबर, 1994 को मुजफ्फरनगर कांड की सूचना देहरादून में पहुंचते ही लोगों का उग्र होना स्वाभाविक था, इसी बीच इस कांड में शहीद स्व० श्री रविन्द्र सिंह रावत की शवयात्रा पर पुलिस के लाठीचार्ज के बाद स्थित उग्र हो गई, लोगों ने पूरे देहरादून में इसके विरोध में प्रदर्शन किया, जिसमें पहले से ही जनाक्रोश को किसी भी हालत में दबाने के लिये तैयार पुलिस ने फायरिंग कर दी, जिसने तीन लोगों को और इस आन्दोलन में शहीद कर दिया।

१- अमर शहीद स्व० बलवन्त सिंह सजवाण(45), पुत्र श्री भगवान सिंह, ग्राम-मल्हान, नयागांव, देहरादून।
२- अमर शहीद स्व० राजेश रावत(19), पुत्र श्रीमती आनंदी देवी, 27-चंदर रोड, नई बस्ती, देहरादून।**
३- अमर शहीद स्व० दीपक वालिया(27), पुत्र श्री ओम प्रकाश वालिया, ग्राम बद्रीपुर, देहरादून।


**स्व० राजेश रावत की मृत्यु तत्कालीन सपा नेता सूर्यकांत धस्माना के घर से हुई फायरिंग में हुई थी।



पंकज सिंह महर

कोटद्वार काण्ड

3 अक्टूबर, 1994 को पूरा उत्तराखण्ड मुजफ्फरनगर कांड के विरोध में उबला हुआ था और पुलिस-प्रशासन इनके किसी भी प्रकार से दमन के लिये तैयार था, इसी कड़ी में कोट्द्वार में भी आन्दोलन हुआ, जिसमें दो आन्दोलनकारियों को पुलिस कर्मियों द्वारा राइफल के बटों व डन्डों से पीट-पीटकर मार डाला।

कोटद्वार में शहीद आन्दोलनकारी-


१- अमर शहीद स्व० श्री राकेश देवरानी।
२- अमर शहीद स्व० श्री पृथ्वी सिंह बिष्ट, मानपुर, कोटद्वार।



पंकज सिंह महर

नैनीताल गोलीकाण्ड

नैनीताल में भी विरोध चरम पर था, लेकिन इसका नेतृत्व बुद्धिजीवियों के हाथ में होने के कारण पुलिस कुछ कर नहीं पाई, लेकिन इसकी भड़ास उन्होने निकाली प्रशान्त होटल में काम करने वाले प्रताप सिंह के ऊपर। आर०ए०एफ० के सिपाहियों ने इसे होटल से खींचा और जब यह बचने के लिये मेघदूत होटल की तरफ भागा, तो इनकी गर्दन में गोली मारकर हत्या कर दी गई।

नैनीताल गोलीकांड में शहीद


१- अमर शहीद स्व० श्री प्रताप सिंह।

पंकज सिंह महर

श्रीयंत्र टापू (श्रीनगर) काण्ड

श्रीनगर शहर से २ कि०मी० दूर स्थित श्री यंत्र टापू पर आंदोलनकारियों ने 7 नवम्बर, 1994 से इन सभी दमनकारी घटनाओं के विरोध और पृथक उत्तराखण्ड राज्य हेतु आमरण अनशन शुरु किया। 10 नवम्बर, 1994 को पुलिस ने इस टापू में पहुंचकर अपना कहर बरपाया, जिसमें कई लोगों को गंभीर चोटें भी आई, इसी क्रम में पुलिस ने दो युवकों को राइफलों के बट और लाठी-डंडों से मारकर अलकनन्दा नदी में फेंक दिया और उनके ऊपर पत्थरों की बरसात कर दी, जिससे इन दोनों की मृत्यु हो गई।

श्रीयंत्र टापू के शहीद-

१- अमर शहीद स्व० श्री राजेश रावत।
२- अमर शहीद स्व० श्री यशोधर बेंजवाल।


**इन दोनों शहीदों के शव 14 नवम्बर को बागवान के समीप अलकनंदा में तैरते हुये पाये गये थे, उसी पल का यह चित्र है।



Lalit Mohan Pandey

पंकज दा, अमर शहीद स्व० भगवान सिंह सिरौला, मूल रूप से, ग्राम सभा सिरौली ब्लाक कनालीछीना के रहने वाले थे.  मुझे आज भी याद है वो दिन, तब मै कनालीछीना स्कूल मै, 12th मै पड़ता था, और हम लोगु ने इस हत्याकांड के खिलाफ, स्थानीय ब्यापारियु, भूतपूर्व फैजियु (भूतपूर्व फैजियु का एक संगटन हुआ करता था) , और बुधिजीवियु के साथ मिलकर कनालीछीना बाजार बंद करवाई थी और ब्लाक मुख्यालय जा के ज्ञापन दिया था. तथा कुछ लोगु के एक पर्तिनिधि मंडल ने पिथोरागढ़ आ के DM को भी  ज्ञापन दिया था.
Quote from: पंकज सिंह महर on May 06, 2009, 11:35:21 AM

१- अमर शहीद स्व० भगवान सिंह सिरौला, ग्राम श्रीपुर बिछुवा, खटीमा।