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गिरीश चन्द्र तिवारी "गिर्दा" और उनकी कविताये: GIRDA & HIS POEMS

Started by पंकज सिंह महर, May 18, 2009, 03:51:58 PM

Devbhoomi,Uttarakhand

गिरीदा की यादें अब इन कविताओं ही रह गयी हैं !


हेम पन्त



एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720


हम लड़ते रैयाँ भुलू हम लड़े रूंलो
कृष्ण कूंछौ अर्जुन थैं -
''सारि दुनी भै रणभूमी तौ-रण कॉ बचूंलो।
हम लड़ते रैयाँ भुलू हम लड़े रूंलो।।
ऐलघातै की रण छू आब उत्तराखण्ड ल्यूंलो -
यो रण लणूंलो भुलू! लड़ि बेरै जितूंलो।।
रणभूमी की महिमा यारो सबनैलै बखानी
शतुर-मितुर, झुट कि साँचा यैं पछ्यांणी जानी
धैं यो रण में को कां देखीं
हमलैकी देखूंलो-रण लड़ी जितूंलो भुलू !
उत्तराखण्ड ल्ह्यूलो।।
धन मयेड़ी छति उनरी, धन त्यारा उं लाल
बलिदानै की जोत जगै ढोलिगे जो उज्याल
खटीमा, मसूरी,मुजफ्फ कैं हम के भुलि जूलो
उत्तराखण्ड ल्ह्यूलो बैणो।
उत्तराखण्ड ल्ह्यूलो।।
कस होलो उत्तराखण्ड, कास हमारा नेता,
कसि होली विकासै नीति, कसि होली व्यवस्था।
जड़ि-कंजड़ि उखेलि भलीकै
पुरि बहस करूंने-उत्तराखण्ड ल्ह्यूलो बिकै
मनकसो बंणूलो।।
बैणी फांसी नी खाली जां, रौ नि पड़ाल भाई,

मेरि बाली उमर नि माजैलि तलिउंना कढ़ाई।
रम, रैफल, ल्यैफ्ट-रैट
कसि हंुछौ बतूंलो - उत्तराखण्ड ल्ह्यंूलो ज्वानो !
उत्तराखण्ड ल्ह्यंालो।।
लुछालूछ कछेरि में नि हौ, ब्लौकन में लूट,
मरी भैंसा का कान काटि खांणैकी नि हौ छूट।
कुकरीगांसै नियत नि हौ
यौस जनत करूं लो - उत्तराखण्ड ल्ह्यूंलो विकै
मनकसो बंणूलो।।
सांच नि मराल् झुरि-झुरी 'जां, झुट नि डौंरी पाला,
लिस, लाकाड़, बजरी चोर जां नि फौरी पाला।
जै दिन ज लै यौस नि है जौ
हम सड़ते रूं लो - उत्तराखण्ड ल्ह्यूंलो बिकैं
मनकसी बणूंलो।ं
मैसन हंू घर - कुड़ि हौ, भैंसन हूं खाल,
गोरू - बाछन हूं गोनर हौ, चाड़ - प्वाथन हूं डाल
धुर - जंगल फूल फुलौ
यौस मुलुक बंणूलो - उत्तराखण्ड ल्ह्यूंलो विकै
ब्यौल जै छजूंलो।।
सार मुलुक छजै आपुण उन कै देखूंलो -
उत्तराखण्ड ल्ह्यूंलो परू ! उत्तराखण्ड ल्ह्यूंलो।।
- 'गिर्दा'


एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720


Famous Poem of Girda

जैंता एक दिन त आलो
ततुक नी लगा उदेख
धुनन मुनई नी टेक
जैंता एक दिन त आलो
वो दिन यो दुनि में,
जै दिन कठुली रात ब्याली
फौ फटला कौ कड़ाल,
जैंता एक दिन त आलो
जै दिन चोर नी फलाली
कैकै जोर नी चलौल
जैंता एक दिन......
जै दिन नान-ठुलौ नि रौलो
जै दिन त्यौर-म्यौर नि होलो
जैंता एक दिन त आलो...
चाहे हम नि लै सकौं,
चाहे तुम नि लै सकौं
जैंता क्वे न क्वे त ल्यालो,
वो दिन ये दुनि में
चाहे बुब नि लै सकौं
चाहे बाबा नि लै सकौं
म्यारा नाना तिना त ल्याला
वो दिन ये दुनि में
ऊ दिन हम नि होला
लेकिन हम लई ऊ दिन होला
वो दिन ये दुनि मां -गिर्दा

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

Poem on "Nadi Bachao Aandolan:"

किसका है अधिकार
चलो नदी तट व्वार चलो रे
चलो नदी तट पार चलो रे
करें यात्रा नदियों की
नदी व्चार तट पार चलो रे
करें यात्रा नदियों की
इन नदियों के अगल-बगल ही
जीवन का विस्तार
चलों रे करें यात्रा.......
आज इन्हीं नदियों के ऊपर
पड़ी है मारामार
चलो रे करें यात्रा.........
टुकड़ा-टुकड़ा नदी दिख रही
बूंद-बूंद जलधार
चलो रे करें यात्रा.......
गांव हमारे नदी किनारे
सूखा कंठ हमार, चलो रे करें .........
जल में बोतल, बोतल में जल
प्यासा है संसार
चलो रे करें यात्रा.......
सूखा-गीला-बादल- बिजरी
सबकी हम पर मार
चलो रे करें यात्रा..........
प्रश्न यही कि नदी पर पहला
किसका है अधिकार
चलो रे करें यात्रा.......
नहीं किसी की नदी मौरूसी
हम पहले हकदार, चलो रे करें.........
बहता पानी चलता जीवन
थमा कि हाहाकार, चलो रे करें.......
-गिर्दा


एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720


इस व्यापारी को प्यास बहुत है
एक तरफ बरबाद बस्तियां
एक तरफ हो तुम
एक तरफ डूबती कश्तियां
एक तरफ हो तुम
एक तरफ हैं सूखी नदियां
एक तरफ हो तुम
अजी वाह क्या बात तुम्हारी
तुम हो पानी के व्यापारी
खेल तुम्हारा तुम्ही खिलाड़ी
बिछी हुई ये बिसात तुम्हारी
सारा पानी चूस रहो हो
नदी समन्दर लूट रहो हो
गंगा-यमुना की छाती पर कंकड़-पत्थर कूट रहो हो
उऽफ ! तुम्हारी ये खुदगर्जी
चलेगी कब तक ये मनमर्जी
जिस दिन डोलेगी ये धरती
सर से निकलेगी सब मस्ती
सारा पानी चूस रहो हो
नदी समन्दर लूट रहो हो
लेकिन जब डोलेगी धरती सर से निकलेगी सब मस्तीबूंद-
बूंद को तरसोगे जब
बोल व्यापारी तब क्या होगा


वर्ल्ड बैंक के टोकन धारी
तब क्या होगा
योजनाकारी तब क्या होगा
नकद उधारी तब क्या होगा
जिस दिन डोलेगी ये धरती,
बोल व्यापारी तब क्या होगा
महल तुम्हारे बह जाएंगे
खाली रोखड़ रह जाएंगे
बूंद-बूंद को तरसोगे जब
बोल व्यापारी तब क्या होगा
नकद उधारी तब क्या होगा
आज भले ही मौज उड़ालो
नदियों को प्यासा तड़पालो
गंगा को कीचड़ कर डालेा
लेकिन डोलेगीे जब धरती
बोल व्यापारी तब क्या होगा
वर्ल्ड बैंक के टोकन धारी
तब क्या होगा
योजनाकारी तब क्या होगा
नकद उधारी तब क्या होगा
एक तरफ है सूखी नदिया
एक तरफ हो तुम...
एक तरफ है प्यासी दुनिया


हेम पन्त

"नैनीताल समाचार" के ताजा अंक में प्रकाशित गिर्दा की कविता,,

बात बुनियादी उठी

बात ये फिलवक्त की है साथियो ! इस देश में,
ये उदासी ऊपरी है साथियो इस देश में।

आप अब तक शक्ल हिन्दोस्तां की जो समझा किये,
सिर्फ वैसा ही नहीं है साथियो ! इस देश में।

गांधी-गौतम के फरेबी फलसफे को चीर कर,
हुआ पैदा नक्सली है साथियो ! इस देश में।

लाठी-गोली-चार्ज-एनकाउण्टरों की हकीकतें,
गर जमाना जान ले क्या हाल हो इस देश में।

वह आजादी सैंतालीसी किसने दी किसको मिली,
बात बुनियादी उठी रे शासको ! इस देश में।

मुक्त होकर ही रहेगा देश अपना क्योंकि अब,
हर गुलामी देख ली है साथियो ! इस देश में

साथियो ! यह देश कैसा तब बनेगा होगी जब,
सर्वहारा की हुकूमत सोचिये इस देश में।

- गिर्दा

Source - http://www.nainitalsamachar.in/fundamental-rights-and-democracy-a-poem-by-girda/

Devbhoomi,Uttarakhand

गिर्दा व निर्मल को समर्पित रहेगा होली महोत्सव
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नैनीताल: सरोवर नगरी की प्रसिद्ध नाट्य संस्था युगमंच 15वां होली महोत्सव 16 से 18 मार्च तक धूमधाम से मनायेगा। इसमें कुमाऊं भर के होल्यार रंग बिखेरेंगे। अबकी महोत्सव दिवंगत रंगकर्मी एवं जनकवि गिरीश तिवारी 'गिर्दा' तथा सिने अभिनेता निर्मल पांडे को समर्पित रहेगा।

युगमंच के अध्यक्ष जहूर आलम ने बताया, संस्था पिछले 14 वर्षो से महोत्सव आयोजित करती आ रही है। इस बार 15वें होली महोत्सव में कुमाऊं भर के होल्यारों को आमंत्रित किया जा रहा है। इस दौरान होल्यार नगर का भ्रमण कर जगह-जगह होली गीत गायेंगे।

महोत्सव में गीत एवं नाटं्य प्रभाग के कलाकार, महिला मंडली व विभिन्न विद्यालयों के छात्र-छात्राएं भी खड़ी व बैठी होली का गायन करेंगी।

युगमंच की ओर से बुजुर्ग व महिला होल्यारों को सम्मानित भी किया जाएगा। महोत्सव को सफल बनाने के लिए श्रीराम सेवक सभा, नयना देवी ट्रस्ट, नैनीताल समाचार समेत नगर के विभिन्न विद्यालयों से संपर्क कर तैयारियां शुरू कर दी गयी हैं। श्री आलम ने नगर की जनता से होली महोत्सव को सफल बनाने की अपील की है।


http://in.jagran.yahoo.com/news/local/uttranchal/4_5_7402296.html