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Articles By Shri Pooran Chandra Kandpal :श्री पूरन चन्द कांडपाल जी के लेख

Started by एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720, August 03, 2009, 09:34:13 PM

Pooran Chandra Kandpal

३१ मई २०१०
   आज विश्व तम्बाकू निषेध दिवस
   आज विश्व धूम्रपान/तम्बाकू निषेध दिवस है.  आप से अनुरोध है कि निम्न तथ्यों
   को समाज तक पहुँचाने में सहयोग करें.  यदि हम तनिक भी जागरूकता  फैला सके
   तो हमारी सामाजिक उपयोगिता सार्थक हो सकेगी.-

   १.विश्व में प्रति दस सेकंड में तथा भारत में प्रति चालीस सेकंड में एक व्यक्ति की
      तम्बाकू सेवन से मृत्यु होती है.
   २. भारत में ६५% पुरुष तम्बाकू उत्पाद का सेवन करते हैं तथा ३% महिलाएं
      धूम्रपान एवं २२% महिलाएं तम्बाकू उत्पाद का सेवन करती हैं.
   ३. एक सिगरेट ५ से १५ मिनट आयु कम कर देती है.
   ४. तम्बाकू कंपनियों को प्रतिदिन ग्यारह हजार नए सेवनकर्ता चाहिए क्योंकि
       पुराने अकाल मृत्यु का ग्रास बन गए होते हैं.
   ५.जलती हुयी सिगरेट का तापमान ८०० डिग्री सेल्सियस होता है जिसमें हर कश
       के साथ सैकड़ों रसायन धूम्रपानकर्ता के शरीर में पहुँचते हैं, मानव शरीर का
       सामान्य तापमान ३६.८ डिग्री सेल्सियस होता है.
   ६.भारत में प्रतिदिन पांच हजार पांच सौ नए बच्चे धूम्रपान आरम्भ करते हैं.
   ७. तम्बाकू में लगभग चार हजार रसायनिक तत्त्व होते हैं जो केंसर सहित विभिन्न
       प्रकार के रोगों को जन्म देतें हैं, जिसमें अधिकांश हृदय और श्वास सम्बन्धी रोग होते हैं.
   ८.बीडी सिगरेट से ढाई गुना अधिक जहरीली एवं घातक है.
   ९. तम्बाकू सेवन से प्रतिवर्ष एक लाख व्यक्तियों को मुंह का केंसर होता है. भारत में
       आज प्रतिवर्ष नए केंसर रोगियों की संख्या लगभग दो लाख है.
   १०.एक साधारण धूम्रपानकर्ता / गुटखा खाने वाला ४०००/-  रुपये तथा अधिक धूम्रपानकर्ता
       ७०००/-से १००००/- रुपये प्रतिवर्ष बीडी,सिगरेट या खनी-गुटखा में भष्म करता है और
       बदले में दिल, दिमाग, कलेजा, गुर्दे, दन्त, मसूड़े ,जीभ-गला सहित पूरे शरीर को गर्त में
       पहुंचा देता है.
                मित्र, मैं आपको यह इसलिए  बता रहा हूँ ताकि आप कम से कम एक आदमी
   को तो धूम्रपान /गुटखा /खैनी /जर्दा/तम्बाकू से मुक्ति दिलाओ.
                 'गुटखा तम्बाकू धूम्रपान ,
                  लहू तेरा पी रही सुनसान,
                  खैनी गुटखा पान मसाला
                  चूना कत्था  जर्दा वाला ,
                   पुडिया तम्बाकू मुंह में उड़ेले
                  कब जागेगा तू इंसान.  गुटखा...'
    पूरन चन्द्र कांडपाल (लेखक -शराब, धूम्रपान और आप)

(net kharab hone se yah lekh 31.05.2010 ko nahi likh saka)

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720


Thank you Kandpal g..

Very good information.

Quote from: Pooran Chandra Kandpal on June 02, 2010, 09:39:37 PM
३१ मई २०१०
   आज विश्व तम्बाकू निषेध दिवस
   आज विश्व धूम्रपान/तम्बाकू निषेध दिवस है.  आप से अनुरोध है कि निम्न तथ्यों
   को समाज तक पहुँचाने में सहयोग करें.  यदि हम तनिक भी जागरूकता  फैला सके
   तो हमारी सामाजिक उपयोगिता सार्थक हो सकेगी.-

   १.विश्व में प्रति दस सेकंड में तथा भारत में प्रति चालीस सेकंड में एक व्यक्ति की
      तम्बाकू सेवन से मृत्यु होती है.
   २. भारत में ६५% पुरुष तम्बाकू उत्पाद का सेवन करते हैं तथा ३% महिलाएं
      धूम्रपान एवं २२% महिलाएं तम्बाकू उत्पाद का सेवन करती हैं.
   ३. एक सिगरेट ५ से १५ मिनट आयु कम कर देती है.
   ४. तम्बाकू कंपनियों को प्रतिदिन ग्यारह हजार नए सेवनकर्ता चाहिए क्योंकि
       पुराने अकाल मृत्यु का ग्रास बन गए होते हैं.
   ५.जलती हुयी सिगरेट का तापमान ८०० डिग्री सेल्सियस होता है जिसमें हर कश
       के साथ सैकड़ों रसायन धूम्रपानकर्ता के शरीर में पहुँचते हैं, मानव शरीर का
       सामान्य तापमान ३६.८ डिग्री सेल्सियस होता है.
   ६.भारत में प्रतिदिन पांच हजार पांच सौ नए बच्चे धूम्रपान आरम्भ करते हैं.
   ७. तम्बाकू में लगभग चार हजार रसायनिक तत्त्व होते हैं जो केंसर सहित विभिन्न
       प्रकार के रोगों को जन्म देतें हैं, जिसमें अधिकांश हृदय और श्वास सम्बन्धी रोग होते हैं.
   ८.बीडी सिगरेट से ढाई गुना अधिक जहरीली एवं घातक है.
   ९. तम्बाकू सेवन से प्रतिवर्ष एक लाख व्यक्तियों को मुंह का केंसर होता है. भारत में
       आज प्रतिवर्ष नए केंसर रोगियों की संख्या लगभग दो लाख है.
   १०.एक साधारण धूम्रपानकर्ता / गुटखा खाने वाला ४०००/-  रुपये तथा अधिक धूम्रपानकर्ता
       ७०००/-से १००००/- रुपये प्रतिवर्ष बीडी,सिगरेट या खनी-गुटखा में भष्म करता है और
       बदले में दिल, दिमाग, कलेजा, गुर्दे, दन्त, मसूड़े ,जीभ-गला सहित पूरे शरीर को गर्त में
       पहुंचा देता है.
                मित्र, मैं आपको यह इसलिए  बता रहा हूँ ताकि आप कम से कम एक आदमी
   को तो धूम्रपान /गुटखा /खैनी /जर्दा/तम्बाकू से मुक्ति दिलाओ.
                 'गुटखा तम्बाकू धूम्रपान ,
                  लहू तेरा पी रही सुनसान,
                  खैनी गुटखा पान मसाला
                  चूना कत्था  जर्दा वाला ,
                   पुडिया तम्बाकू मुंह में उड़ेले
                  कब जागेगा तू इंसान.  गुटखा...'
    पूरन चन्द्र कांडपाल (लेखक -शराब, धूम्रपान और आप)

(net kharab hone se yah lekh 31.05.2010 ko nahi likh saka)


dayal pandey/ दयाल पाण्डे

Namaskar Kandpal Ji
bahut achchhi jankari pradan ki hai , isaka ashar samaj main jajur dikhai dega, vastav main yadi tambaku ka sevan nahi kiya jay to cancer, TB , dil aur jigar ki  jaan lewa bimariyun se bacha ja sakta hai.
bahut bahut dhanyabaad

Pooran Chandra Kandpal

व्यथित पर्यावरण 
(पर्यावरण दिवस (५ जून  पर विशेष )

तूने मेरे पर्वतों को खोद कर झुका दिया,
वर्फीली चोटियों को हीन हिम से कर दिया,
दिनोदिन मेरे शिखर का रूप बिखरने है  लगा,
निहारने निराली छटा जन तरसने है लगा.

चीर कर तन तूने मेरा रंग हरित उड़ा दिया,
कर अगिनत घाव  तन पर श्रृंगार है छुड़ा दिया,
तरुस्थल को मेरे तूने मरुस्थल है बना दिया,
जल जमीन जंगल खजाना सारा दोहन कर दिया.

जल, मल से रंग रहा है, देख पलकें खोल कर,
पी रहा हर घूंट में तू विष के बूटी घोल कर,
लालसा मृदु पेय जल की  मन में तेरे रह गई,
लुप्त होती शुष्क सरिता खुद हूँ प्यासी कह गई.

बन  के दानव जंगलों को रौंदता तू जा रहा,
फटती छाती को तू मेरी कौंधता ही आ रहा,
काट वन-कानन तो तू कंक्रीट वन  बना रहा,
उखाड़ उपवनों को मेरे ईट तरु लगा रहा.

कंद फल जड़ी बूटियां नित लुप्त होते जा रहे,
जीव मेरे वक्षस्थल के गुप्त होते जा रहे,
पिक बयां भ्रमर  गुंजन को तरसता रह जायेगा,
प्रकृति के स्वस्थ संतुलन की
जो सोच तू  ना कर पायेगा.

चाहता तू जी सके इस धरा में अमन चैन से,
वृक्ष बंधु मान ले लगा ले अपने नैन से,
कोटि पुण्य पा जायेगा एक वृक्ष के जमाव से,
स्वच्छ  पर्यावरण में फिर जी सकेगा चाव से.

बर्बादी वह है तेरी जिसे तरक्की कह रहा,
पर्यावरण की पर्त पर कहर तू वरपा रहा,
संभल जा नहीं तेरा अस्तित्व  ही मिट जायेगा,
कर प्रदूषित मेरा तन तू कहाँ टिक पायेगा.
                   ***********
पूरन चन्द्र कांडपाल
(लेखक- स्मृति लहर 'व्यथित पर्यावरण')



Pooran Chandra Kandpal


 
साहित्यकार पूरन चन्द्र कांडपाल
को साहित्य सम्मान
" हिंदी अकादेमी राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली सरकार ने हिंदी
साहित्य की विविध विधाओं पर ११ मई २०१० को दिल्ली सरकार
सचिवालय सभागार दिल्ली में कई साहित्यकारों को सम्मानित किया.
  सभी साहित्यकारों को दिल्ली की संस्कृति मंत्री डा. किरण वालिया,
सरस्वती सम्मान विजेता साहित्यकार डा. जे.पी दास , हिंदी अकादेमी
के उपाध्यक्ष प्रो.अशोक चक्रधर के सानिध्य में दिल्ली की मुख्य
मंत्री श्रीमती शीला दीक्षित ने सम्मानित किया.  उत्तराखंड के मूलनिवासी
साहित्यकार पूरन चन्द्र कांडपाल को बाल एवं किशोर साहित्य सम्मान
वर्ष २००७-२००८ के लिए सम्मानित किया गया.  यह सम्मान उन्हें
उनकी पुस्तक 'बचपन की बुनियाद' के लिए प्रदान किया गया.  इस
अवसर पर कई जाने माने साहित्यकार, कवि, लेखक, पत्रकार तथा
बुद्धिजीवी उपस्थित थे."
(samachar in Janpaksh aajkal,Hil sandesh, Devbhumi ki pukar and in all
   Rashtriya News papers)


Pooran Chandra Kandpal

साहित्य सम्मान

मेरी पुस्तक (बच्चों के व्यक्तित्व विकास पर)
'बचपन की बुनियाद' को साहित्य सम्मान मिला.
मेरे शब्दों का सम्मान हुआ, अच्छा लगा.  मैं  समझता हूँ
कि यह सम्मान उत्तराखंड को मिला है.  जब सभागार में
दिल्ली की मुख्मंत्री श्रीमती शीला दीक्षित ने मुझे सम्मान
अर्पण किया और उत्तराखंड का नाम लिया गया तो सभागार
में उपस्थित उत्तराखंडी मित्रों ने विशेष करतल ध्वनि करके
अत्यंत ख़ुशी  जाहिर की. सभागार में उपस्थित  दर्शकों ने
सभी साहित्यकारों का सत्कार किया. मैं उन सभी मित्रों
का विशेष आभार प्रकट करता हूँ जिन्होंने मुझे व्यक्तिगत
तौर से बधाई दी.     धन्यवाद.             पूरन चन्द्र कांडपाल

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720


Kandpal ji. Bahut-2 badhayee.

Quote from: Pooran Chandra Kandpal on June 16, 2010, 09:20:01 PM

 
साहित्यकार पूरन चन्द्र कांडपाल
को साहित्य सम्मान
" हिंदी अकादेमी राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली सरकार ने हिंदी
साहित्य की विविध विधाओं पर ११ मई २०१० को दिल्ली सरकार
सचिवालय सभागार दिल्ली में कई साहित्यकारों को सम्मानित किया.
  सभी साहित्यकारों को दिल्ली की संस्कृति मंत्री डा. किरण वालिया,
सरस्वती सम्मान विजेता साहित्यकार डा. जे.पी दास , हिंदी अकादेमी
के उपाध्यक्ष प्रो.अशोक चक्रधर के सानिध्य में दिल्ली की मुख्य
मंत्री श्रीमती शीला दीक्षित ने सम्मानित किया.  उत्तराखंड के मूलनिवासी
साहित्यकार पूरन चन्द्र कांडपाल को बाल एवं किशोर साहित्य सम्मान
वर्ष २००७-२००८ के लिए सम्मानित किया गया.  यह सम्मान उन्हें
उनकी पुस्तक 'बचपन की बुनियाद' के लिए प्रदान किया गया.  इस
अवसर पर कई जाने माने साहित्यकार, कवि, लेखक, पत्रकार तथा
बुद्धिजीवी उपस्थित थे."
(samachar in Janpaksh aajkal,Hil sandesh, Devbhumi ki pukar and in all
   Rashtriya News papers)



Pooran Chandra Kandpal

शराब,तम्बाकू ,गुटखा
सभी दुश्मन 

शराब और धूम्रपान (तम्बाकू ,खैनी, गुटखा, जर्दा, पान मशाला, बीडी ,सिगरेट
नशवार, सुरती अर्थात सभी तम्बाकू पदार्थ) हमें बर्बाद कर देते हैं.  मुझ से
मेरे एक मित्र ने कहा 'डाक्टर भी तो पीते हैं'.  मैंने कहा 'पीते हैं ,मैंने भी
सुना है. परन्तु वे एक पैग अधिकृत शराब में चार पैग पानी मिलाते हैं और
इसे पीने में कम से कम एक घंटा लगाते हैं. कुछ न कुछ प्रोटीन या सलाद
या स्नेक्स साथ में लेते हैं.

   आम आदमी ऐसा नहीं करता. वह दो-तीन पैग (बड़ा) बिना पानी या बहुत
कम पानी मिलाकर दो मिनट में बिना किसी स्नेक्स के गटक जाता . पार्टी या
न्युतेर में मैंने इसप्रकार के लोगों का खूब तमाशा देखा है जब भूत बन गए
पियक्करों को देख कर पार्टी देने वाला कह उठता है 'यह पार्टी मैंने नहीं देनी
थी . मुझे क्या पता था कि लोगों को पीने का सलीका/सहूर मालूम नहीं है.

   गुटखा ,धूम्रपान ,तम्बाकू,   शराब से अधिक नुकसान करते हैं. एक पैग शराब में
चार पैग पानी मिलाने से शराब अधिक हानि नहीं पहुंचाती . शराब २४ घंटे के
अन्दर मूत्र के साथ उत्सर्जित हो जाती है परन्तु धूम्रपान और तम्बाकू पदार्थों
के साथ लिया गया निकोटिन जहर शरीर से बहार नहीं निकलता.  यह एक दिन
अल्सर बनेगा फिर कैंसर बनेगा.   तब दर्दनीय अकाल मृत्यु ही होगी.  अधिक शराब
से भी सिरोसिस ऑफ़ लीवर (कलेजे में अंगूर जैसे दानों के गुच्छे बन जाते हैं)
हो सकता  है. सोचिये मत.  अपना मनोबल उच्च कीजिये  और सभी मादक पदार्थों
से अलबिदा कहिये .
पूरन चन्द्र कांडपाल  (लेखक शराब, धूम्रपान और आप).

Anubhav / अनुभव उपाध्याय

कांडपाल जी साहित्य सम्मान के लिए आपको मेरा पहाड़ परिवार की हार्दिक बधाई.

Quote from: Pooran Chandra Kandpal on June 16, 2010, 09:41:24 PM
साहित्य सम्मान

मेरी पुस्तक (बच्चों के व्यक्तित्व विकास पर)
'बचपन की बुनियाद' को साहित्य सम्मान मिला.
मेरे शब्दों का सम्मान हुआ, अच्छा लगा.  मैं  समझता हूँ
कि यह सम्मान उत्तराखंड को मिला है.  जब सभागार में
दिल्ली की मुख्मंत्री श्रीमती शीला दीक्षित ने मुझे सम्मान
अर्पण किया और उत्तराखंड का नाम लिया गया तो सभागार
में उपस्थित उत्तराखंडी मित्रों ने विशेष करतल ध्वनि करके
अत्यंत ख़ुशी  जाहिर की. सभागार में उपस्थित  दर्शकों ने
सभी साहित्यकारों का सत्कार किया. मैं उन सभी मित्रों
का विशेष आभार प्रकट करता हूँ जिन्होंने मुझे व्यक्तिगत
तौर से बधाई दी.     धन्यवाद.             पूरन चन्द्र कांडपाल


Pooran Chandra Kandpal

                                                  मुख्यमंत्री जी किसी गाँव में जाएँ
   
        एक समाचारपत्र में छपी खबर के अनुसार मुख्यमंत्री डा निशंक जी कुम्भ में
   वेष बदल कर गए थे.  मेरा निवेदन है कि वे एक बार उत्तराखंड के किसी गाँव,
      सरकारी दफ्तर या स्कूल में भी  वेष बदल कर जाएँ. 

            यदि वे ऐसा कर सके तो उन्हें सत्य का साक्षात्कार होगा. उत्तराखंड के गांवों में
   समाचारपत्र  नहीं पहुँचते जिनमें सरकार के पूरे पृष्ठ के विज्ञापन छपते हैं. ऊपर से
   नीचे तक के सभी सरकारी साहबान  सड़क   के किनारे खड़े होकर  अनुमान  लगा
   लेते हैं कि सब कुछ ठीक ठाक चल रहा है और उसके पश्चात विश्राम गृह की ओर
   चल देते हैं.  यथार्थ का आईना तो सड़क से दूर है.  उसमें देखने कौन जायेगा
   क्योंकि वहां सड़क नहीं जाती.  सडकों के किनारे बसे कस्बों को देख कर पूरे
   राज्य को 'फीलगुड' नहीं समझा जा सकता.

        दूसरी बात यह है कि 'देवभूमि -देवभूमि' रटने से उत्तराखंड का भला नहीं
   हो सकता.  नदियों में दूध बहा कर हम लोंगों को क्या सन्देश देना चाहते
   हैं , यह विचारणीय प्रश्न है.  यह दूध उन गरीब बच्चों  में वितरित किया जाता
   तो अच्छा था जो दूध की दो बूँद के लिए तरस रहे हैं.

         मुख्यमंत्री जी जब 'देवभूमि' की चर्चा अपने भाषण में करते हैं तो एक बार
   नशामुक्ति की अपील भी करने का कष्ट करें. तभी उत्तराखंड के लोग शराब,
   गुटखा, धूम्रपान और सुल्पे से मुक्ति पाने की सोचेंगे.  ऐसी अपील कुम्भ से
   होती तो उत्तराखंड सहित पूरे देश का भला होता. आदर्श राज्य बनाने का
   लक्ष्य यदि है तो उस ओर कदम भी तो बढ़ाएं.
                                                                               पूरन चन्द्र कांडपाल