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Articles By Shri Pooran Chandra Kandpal :श्री पूरन चन्द कांडपाल जी के लेख

Started by एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720, August 03, 2009, 09:34:13 PM

Pooran Chandra Kandpal

वसंत की महक 

कवियों ने खूब कहा वसंत
संगीत में झूम बहा वसंत ,
मादक बन कर ऋतुराज खड़ा
वीरों के पाग बंधा वसंत.

कोयल की कूक में छाये वसंत
फूलों पर रंग बिखराए वसंत,
कलियों पर भोंरे मंडराए
तितली संग उड़कर  आया वसंत.

चिड़ियाँ चहके डाली डाली
गाएँ राग बसंती मतवाली,
स्वागत करतीं बरसायें फाग
नाचे लहराती हरियाली.

तरु-तरु पर नईं कोपलें खिलीं
मुस्काने लगी नन्हीं सी कली,
चहुँ ओर वसंती यौवन देख
मदमाती वसंती बयार चली.

भव्य  प्रकृति का आच्छादन
नाचे धरती इठलाये गगन,
हुयी वसुंधरा पल्लवित पुष्पित
बिछ गयी रंगोली वन उपवन.

वासंती चादर ओड़ खड़ी
पीली सरसों उल्लास जड़ी,
बौराती हलचल चहक उठे
एक छटा निराली निखर पड़ी.

ये वसंत में कैसी एक आहट!
दस्तक खतरे की सन्नाहट,
अतुलित दोहन से आज हुआ
पर्यावरण व्यथित भय थर्राहट.

ये कैसा अज्ञान कैसा अविवेक
जहर उफनती भट्टी अनेक,
मुर्झाता जीवन भय संतप्त
विकास का ऐसा प्रतिफल देख.

यों भू में उत्सर्जन बिखरेगा
जलवायु चक्र नित बदलेगा,
खिलवाड़ प्रकृति सह पाए कहाँ
फिर कैसे वसंत यहाँ महकेगा

Pooran Chandra Kandpal

शिखर पुरुष 

मुझ से कोई क्यों जला करे
भगवन आपका भला करे
आपने घोटालों के आरोप माफ़ किये
मन के कई संशय साफ़ किये
जैसा कहा जा रहा है
मैंने वैसा नहीं किया
न उत्तर न  दक्खिन
न घर न बहार किया 
जब आता है गर्दिश का फेर
मकड़ी के जाल में फसता है शेर
कल तक आपने मुझ पर कीचड उछाला था
जीते जी मेरा जनाजा निकला था
आज मुझे पवित्र पापी समझ रहे हो
मेरे चरणों में सिर नवा रहे हो
अपने लौह पुरुषों से कतरा रहे हो
मुझे जबरदस्ती शिखर पुरुष बना रहे हो
मेरे साथ बड़ी शान से अपना फोटो खीचा रहे हो
शायद तुम दो हजार बारह के लिए मुझे मना रहे हो.

पूरन चन्द्र कांडपाल

Pooran Chandra Kandpal

होली 

हिरन्यकश्यप  सुत मारन चाहे
बहन होलिका पास बुलावे,
लेकर गोद इसे बैठ पावक में
भष्म हो जाये पलक झपक में.

अग्नि ज्वाल प्रकटी भयंकर
चीत्कारी होलिका रुदन कर ,
हुयी भष्म बनी क्षण में राख
वरदान मिला था टूटी शाख .

भक्त प्रहलाद को आंच न आयी
टूटा गर्व पिता आततायी ,
तब से होली चमन में छायी
फागुन मॉस मादक ऋतु आयी.

वसंत ऋतु रंग पर्व निराला
सत-रंगी त्यौहार मतवाला ,
पवन वसंती राग की होली
गाये फाग मस्तों की टोली.

भीगे चोली बरसे फुहार
रंगीली पिचकारी धार,
मृदंग तबला ढोलक बाजे
झूम झूम होलीयारे नाचे.

भूल राग-द्वेष  सब मन हरषे
रंग गुलाल   अबीर चहुँ बरसे ,
रंग-बिरंगे   फूल   वन-उपवन 
कर देते प्रफुल्लित जन तन-मन.

बादल उड़ते रंग गुलाल
लाली जित देखो तित लाल ,
जन मानस हर्षित हो जाता
उमड़े स्नेह क्लेश मिट जाता.

बहे बयार आनंद उमंग
नाच उठे होली  हुडदंग ,
एक दूजे को गले लगाते
झूमते गाते और इतराते.

होली है  त्यौहार मिलन  का
निश्छल पावन प्रेम तपन का,
मिले न इसमें भंग  धतूरा 
इन्द्रधनुषी रंग छाये पूरा. 

वसंत फागन कहीं डोल पूर्णिमा
होला मोहल्ला  राग   रंगमा,
रंग पंचमी कहीं रंगोली
खेले सारा भारत होली.

पूरन चन्द्र कांडपाल

Himalayan Warrior /पहाड़ी योद्धा


Kandpal sir.

Very good poems you have composed. I like each of your article.

God bless you sir. Keep posting.

Pooran Chandra Kandpal

अन्ना हजारेआमरण  अनसन पर 
०५ अप्रैल २०११ से

सचमुच देश को भ्रष्टाचार के अजगर ने लपेट लिया है.
महात्मा अन्ना हजारे जी भ्रष्टाचार मिटाने के लिए जन लोकपाल
बिल लाने हेतु जंतर मंतर नई दिल्ली पर आमरण अनसन पर
बैठे हैं. आज मैं  उस स्थान पर गया और अपरान्ह ०४ बजे से
०६ बजे तक वहां रहा.  उनके समर्थन में जनमानस का  ज्वार
एक जनसैलाब का रूप ले चुका था. बड़े धैर्य से लोग उन्हें सुन रहे
थे. इस दौरान स्वामी अग्निवेश जी ने भी उनके समर्थन में आवाज
बुलंद की.

    भ्रष्टाचार के अजगर को कुचलने के लिए हम सब को आगे
आना होगा, तभी इस नासूर से छुटकारा पाया जा सकता है.
इस अजगर को कुचलने हेतु कुछ पंक्तियाँ जन जागरण को
समर्पित-
लाइलाज भ्रष्टाचार खूब फल फूल रहा
बचे कैसे देश अब प्रश्न एक गूँज रहा.

कमाई में लगे रहे नोट गिने टक टक
मिल बाँट खाई रहे ऊपर से नीचे तक.

तमाशबीन बने हम मसमसाते रह गए
ताला जड़े मुंह पर कसमसाते रह गए.

देश का जो भला चाहो मुंह को खोलना होगा
चाहे कोई  बुरा  माने  सच  तो बोलना  होगा.

एक कुण्डली

भ्रष्टाचार के दलदल में फसता जा रहा देश
रोकने  वाला कोई नहीं ह्रदय को पहुंचे ठेस,
ह्रदय को पहुंचे ठेस चहुँ ऑर चुस्त लुटेरे
बची नहीं कोई जगह जहाँ नहीं इनके डेरे ,
कह 'पूरन' उठ फैंक भ्रष्टों की नकाब उतार
बजे बिगुल विरोध में उखड़ जाये भ्रष्टाचार .

पूरन चन्द्र कांडपाल

Pooran Chandra Kandpal

क्या कहते हैं अन्ना हजारे?

अन्ना हजारे का  जन लोकपाल बिल बनाने  के लिए
आमरण अनशन ०५ अप्रैल २०११ से आरम्भ है.
पंद्रह वर्ष सेना में रह कर देश सेवा कर चुके ७२ वर्षीय
गांधीवादी अन्ना हजारे अब तक आठ बार आमरण अनशन कर
चुके हैं. जन्तर मंतर पर  उनकी बुलंद आवाज क्या कहती है?

१. भ्रष्टाचार की आग में देश झुलस रहा है.
२. भारत बचाओ, भ्रष्टाचार मिटाओ.
३. संसद में बैठे लोग लोकतंत्र का पाठ भूल गए हैं.
४. जन लोकपाल विधेयक का प्रारूप तैयार करने के लिए एक
    अधिसूचना के जरिये संयुक्त समिति  बनाई जाय.

जंतर मंतर पर शब्द जो गूँज रहे हैं

१. अन्ना का आन्दोलन भ्रष्टाचार को डुबोने की सुनामी है .
२.अन्ना नहीं आंधी है, आज के युग का गाँधी है.
३. पूरा भारत साथ है , अन्ना तुम संघर्ष करो.
४.जंतर मंतर पर गाँधी जिन्दा है. देख कर ऐसा अहसास होता है.
५.करोड़ों भारतीयों की आवाज है अन्ना.
६. देश की आवाज अन्ना के मुंह से निकल रही है.

पूरन चन्द्र कांडपाल


एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

बिलकुल सही कांडपाल जियु!

Whole nation is supporting Anna. After all he is fighting for public.

Quote from: Pooran Chandra Kandpal on April 08, 2011, 04:25:39 AM
क्या कहते हैं अन्ना हजारे?

अन्ना हजारे का  जन लोकपाल बिल बनाने  के लिए
आमरण अनशन ०५ अप्रैल २०११ से आरम्भ है.
पंद्रह वर्ष सेना में रह कर देश सेवा कर चुके ७२ वर्षीय
गांधीवादी अन्ना हजारे अब तक आठ बार आमरण अनशन कर
चुके हैं. जन्तर मंतर पर  उनकी बुलंद आवाज क्या कहती है?

१. भ्रष्टाचार की आग में देश झुलस रहा है.
२. भारत बचाओ, भ्रष्टाचार मिटाओ.
३. संसद में बैठे लोग लोकतंत्र का पाठ भूल गए हैं.
४. जन लोकपाल विधेयक का प्रारूप तैयार करने के लिए एक
    अधिसूचना के जरिये संयुक्त समिति  बनाई जाय.

जंतर मंतर पर शब्द जो गूँज रहे हैं

१. अन्ना का आन्दोलन भ्रष्टाचार को डुबोने की सुनामी है .
२.अन्ना नहीं आंधी है, आज के युग का गाँधी है.
३. पूरा भारत साथ है , अन्ना तुम संघर्ष करो.
४.जंतर मंतर पर गाँधी जिन्दा है. देख कर ऐसा अहसास होता है.
५.करोड़ों भारतीयों की आवाज है अन्ना.
६. देश की आवाज अन्ना के मुंह से निकल रही है.

पूरन चन्द्र कांडपाल



Pooran Chandra Kandpal

जंतर मंतर पर गाँधी 

         बीते सप्ताह ५ अप्रैल से ९ अप्रैल  २०११ तक राष्ट्र ने देश की राजधानी
नई दिल्ली स्तिथ संसद की चौखट जंतर मंतर पर एक बार फिर गाँधी को
देखा.   गाँधी के रूप में थे आठ बार आमरण अनशन कर चुके बहत्तर वर्षीय
पूर्व सेनानी सुप्रसिद्ध  समाजसेवी अन्ना बाबू राव हजारे. अन्ना हजारे का जंतर
मंतर पर आमरण अनशन शुरू होते ही पूरा राष्ट्र स्वतः  फूर्त उनके समर्थन में
उतर आया.  जन  लोकपाल बिल बनाकर भ्रष्टाचार के भष्मासुर को मारने के लिए
अन्ना आमरण अनशन पर बैठे थे.   भ्रष्टाचार से त्रस्त राष्ट्र स्वतः ही जंतर मंतर
पहुँच गया.  बच्चे,वृद्ध, स्त्री-पुरुष ,अपंग-अपाहिज,समाज के सभी वर्ग भलेही वह किसी
जाती, धर्म, सम्प्रदाय का था , जनसैलाब का हिस्सा बन गया.  लोकतंत्र का मजाक
उड़ाने वालों, भ्रष्टों, लुटेरों के विरोध में उठी आवाज से संसद हिलने लगी.  लोगों ने
एक-एक पत्थर तबीयत से उछाला और आसमान में छेद हो गया और हिमालय
से एक नई गंगा निकल आयी.  बदलाव की आहट से सरकार हिल गयी . अनगिनत
हजारे  संसद के समीप दिखाई देने लगे.  अंततः राष्ट्र की जीत हुयी जिसके सूत्रधार
बने अन्ना हजारे.  इस बीच पांच राज्यों में चुनाव के दौरान चुनाव आयोग ने वोट
खरीदने के लिए बांटे जाने वाली करोड़ों रुपये की नकदी छापामार कर पकड़ी.
राष्ट्र उम्मीद करता है स्वतंत्रता दिवस से पहले भ्रष्टाचार के कालिया नागों का फन
कुचलने वाला जन लोकपाल बिल संसद में पारित हो जायेगा.

पूरन चन्द्र कांडपाल
बैशाखी ,१४.०४.2011

Pooran Chandra Kandpal

 नि आई रेल

आजादी मिलन है पैली बात चली रैछी
उत्तराखंड में लै  रेल चलन चैंछी
अंग्रेजों जमान में कतु ता सर्वे लै हई
अंग्रेज सैतालिस में न्हें गाय योजना लटके  रै गेई
अंग्रेजों लै पुजाई रेल उत्तराखंडक  नगर चार
काठगोदाम    रामनगर    टनकपुर    कोटद्वार 
आजदिक चौसठ वर्ष बाद  लै नि आई कभे उ घड़ी
जब उत्तराखंड में रेल एक इंच लै अघिल बढ़ी
य दौरान बार पंचवर्षीय योजना बन ,पन्नर बन सरकार 
रेल कैल नि चलाई आश्वासनों कि भरमार
नई राज्य बनि गोय नौ नवम्बर सन द्वि हजार
इग्यार साल में नि लागी यसी धाद जो पुजो दिल्ली द्वार
उत्तराखंडक कतु नेता केंद्र में लै रईं
कैल नि सोच रेला बार में सब चाइये रईं
जतु लै रेल मंत्री बनी सब 'होई होई' फरमाते गईं
'सर्वे' क नाम पर सब पहाड़ियों कें  टरकाते रईं
क्वे यसी बात लै न्हें जो उत्तराखंड  में रेल रोकें रै
यां है बेर लै ज्यादै ऊँची जगा में रेल चलें रै
शिमला ऊटी दार्जिलिंग अरुणाचल इटानगर
उधमपुर कश्मीर कोरामंडल त्रिपुरा राजेंदेरनगर
उत्तराखंड है ज्यादै दुर्गम छीं यों सबै जाग 
पै उत्तराखंड कै लिजी रेल पर ताव क्याले लाग
राज्य में छीं आठ सांसद और सत्तर विधायक
रेला लिजी नि उठै सक क्वे  कदम निर्णायक
पार बै पड़ोस वालां कि रेल ऐगे सीमा तक
उनरि उटपटांग  हरकते कि लागते रैं भनक
उत्तराखंड में रेल पुजली कतु समस्या सुलझाल
रुजगार मिलल पलायन रुकल पर्यटन सुगम है जाल
देशाक कर्णधारों ! राष्ट्रहित में थ्वाड  दूरदृष्टि द्यखौ 
देशै कि सुरक्षा लिजी त उत्तराखंड में रेल पुजौ.

पूरन चन्द्र कांडपाल
बैसाखी १४.०४.2011

Himalayan Warrior /पहाड़ी योद्धा

Excellent Kandpal Ji.

Uttarakhand has been neglected by Ministry of Ralway. The demands many decades long but it has not been fulfilled so far. Shame-2


Quote from: Pooran Chandra Kandpal on April 14, 2011, 12:57:51 PM
नि आई रेल

आजादी मिलन है पैली बात चली रैछी
उत्तराखंड में लै  रेल चलन चैंछी
अंग्रेजों जमान में कतु ता सर्वे लै हई
अंग्रेज सैतालिस में न्हें गाय योजना लटके  रै गेई
अंग्रेजों लै पुजाई रेल उत्तराखंडक  नगर चार
काठगोदाम    रामनगर    टनकपुर    कोटद्वार 
आजदिक चौसठ वर्ष बाद  लै नि आई कभे उ घड़ी
जब उत्तराखंड में रेल एक इंच लै अघिल बढ़ी
य दौरान बार पंचवर्षीय योजना बन ,पन्नर बन सरकार 
रेल कैल नि चलाई आश्वासनों कि भरमार
नई राज्य बनि गोय नौ नवम्बर सन द्वि हजार
इग्यार साल में नि लागी यसी धाद जो पुजो दिल्ली द्वार
उत्तराखंडक कतु नेता केंद्र में लै रईं
कैल नि सोच रेला बार में सब चाइये रईं
जतु लै रेल मंत्री बनी सब 'होई होई' फरमाते गईं
'सर्वे' क नाम पर सब पहाड़ियों कें  टरकाते रईं
क्वे यसी बात लै न्हें जो उत्तराखंड  में रेल रोकें रै
यां है बेर लै ज्यादै ऊँची जगा में रेल चलें रै
शिमला ऊटी दार्जिलिंग अरुणाचल इटानगर
उधमपुर कश्मीर कोरामंडल त्रिपुरा राजेंदेरनगर
उत्तराखंड है ज्यादै दुर्गम छीं यों सबै जाग 
पै उत्तराखंड कै लिजी रेल पर ताव क्याले लाग
राज्य में छीं आठ सांसद और सत्तर विधायक
रेला लिजी नि उठै सक क्वे  कदम निर्णायक
पार बै पड़ोस वालां कि रेल ऐगे सीमा तक
उनरि उटपटांग  हरकते कि लागते रैं भनक
उत्तराखंड में रेल पुजली कतु समस्या सुलझाल
रुजगार मिलल पलायन रुकल पर्यटन सुगम है जाल
देशाक कर्णधारों ! राष्ट्रहित में थ्वाड  दूरदृष्टि द्यखौ 
देशै कि सुरक्षा लिजी त उत्तराखंड में रेल पुजौ.

पूरन चन्द्र कांडपाल
बैसाखी १४.०४.2011