• Welcome to MeraPahad Community Of Uttarakhand Lovers.
 

Articles By Shri Pooran Chandra Kandpal :श्री पूरन चन्द कांडपाल जी के लेख

Started by एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720, August 03, 2009, 09:34:13 PM

Pooran Chandra Kandpal

शेरदा कैं श्रधांजलि 
एक चिठ्ठी शेरदा नाम

धात लगै  बेर बतैगो शेरदा,
जुवारी-लबारी घतैगो शेरदा.
मरि-मरि तराण लगै गो शेरदा,
कुमाउँनी पर पराण टगै गो शेरदा.

परु इज कें चप्पल पैरैगो शेरदा,
मुस-बिराव दगडै़   भैटैगो शेरदा.
नेताओं कें चुथरौव बतैगो शेरदा,
कवियों कें पतरौव बनैगो शेरदा.

निगुरा कें गाई फंडैगो शेरदा,
हरामी च्याला कें डंडै गो शेरदा.
अल्झी गांठा    कें सुल्झैगो  शेरदा,
गीत-भगनौल खूब सुणैगो  शेरदा.

कांणी च्याला कें समझै गो शेरदा,
नका्ट सावा कें टमकै गो शेरदा.
बेशरमों कें औकात बतैगो शेरदा.
'उकाव-होराव' द्यखै गो शेरदा.

फकोटियां   कें हड़कै  गो शेरदा,
बेसउरियों  कें नड़कै  गो शेरदा.
आपूं कें 'अनपढ़' बतैगो शेरदा,
'लिख-पढियाँ' कें नवैगो शेरदा.

कविता  क फर्ज निभैगो शेरदा,
क्यकडा़  की दुलैंच हिलैगो शेरदा.
औछन  कविताक लगैगो शेरदा,
हमरि भाषा मस्याव जगैगो  शेरदा.

हंसे-हंसे भांट दुखैगो शेरदा,
दिल में कविता घुसैगो  शेरदा.
धात लगै बेर बतैगो शेरदा,
कवियों कें पतरौव बनैगो शेरदा.

पूरन चन्द्र कांडपाल
शेरदा क निधन २० मई २०१२, उनरी उम्र ८४ साल छी.

Pooran Chandra Kandpal

शेरदा "अनपढ़' कें दिल्ली में  श्रधांजलि 

   कुमाउँनी कवि शेर सिंह बिष्ट ' शेरदा' अनपढ़' ज्यू क
२० मई २०१२ हुणि हल्द्वानी में निधन कि खबर पर यां
उत्तराखंडी समाज कें भौत दुःख हौछ.  २६ मई हुणि अणुव्रत
भवन नई दिल्ली में प्रेक्षाध्यापक रमेश कांडपाल ज्यू और
पत्रकार चारू तिवारी ज्यू क सहयोग ल शेरदा कि स्मृति में
एक श्रधांजलि सभा आयोजित करिगे. य सभा में कयेक
लेखक, कवि, साहित्यकार, पत्रकार और गणमान्य लोग
मौजद छी जनूल शेरदा कि सामाजिकता, मानवीय व्यवहार ,
चिंतन और उनर काव्य कें याद करौ.  य मौक पर चारू तिवारी,
रमेश कांडपाल, पी सी नैलवाल, हीरा सिंह राणा, पूरन चन्द्र
कांडपाल, चन्द्र सिंह राही, शिवदत्त पंत, देव सिंह रावत, डा.
जालंधरी, पृथ्वी सिंह केदारखंदी सहित भौत लोग मौजूद छी.

पूरन चन्द्र कांडपाल ,28.05.2012

Risky Pathak

sherda ko shradhanajali swaroop ye anupam kavita pesh ki hai aapne..

Quote from: Pooran Chandra Kandpal on May 25, 2012, 09:47:23 AM
शेरदा कैं श्रधांजलि 
एक चिठ्ठी शेरदा नाम

धात लगै  बेर बतैगो शेरदा,
जुवारी-लबारी घतैगो शेरदा.
मरि-मरि तराण लगै गो शेरदा,
कुमाउँनी पर पराण टगै गो शेरदा.

परु इज कें चप्पल पैरैगो शेरदा,
मुस-बिराव दगडै़   भैटैगो शेरदा.
नेताओं कें चुथरौव बतैगो शेरदा,
कवियों कें पतरौव बनैगो शेरदा.

निगुरा कें गाई फंडैगो शेरदा,
हरामी च्याला कें डंडै गो शेरदा.
अल्झी गांठा    कें सुल्झैगो  शेरदा,
गीत-भगनौल खूब सुणैगो  शेरदा.

कांणी च्याला कें समझै गो शेरदा,
नका्ट सावा कें टमकै गो शेरदा.
बेशरमों कें औकात बतैगो शेरदा.
'उकाव-होराव' द्यखै गो शेरदा.

फकोटियां   कें हड़कै  गो शेरदा,
बेसउरियों  कें नड़कै  गो शेरदा.
आपूं कें 'अनपढ़' बतैगो शेरदा,
'लिख-पढियाँ' कें नवैगो शेरदा.

कविता  क फर्ज निभैगो शेरदा,
क्यकडा़  की दुलैंच हिलैगो शेरदा.
औछन  कविताक लगैगो शेरदा,
हमरि भाषा मस्याव जगैगो  शेरदा.

हंसे-हंसे भांट दुखैगो शेरदा,
दिल में कविता घुसैगो  शेरदा.
धात लगै बेर बतैगो शेरदा,
कवियों कें पतरौव बनैगो शेरदा.

पूरन चन्द्र कांडपाल
शेरदा क निधन २० मई २०१२, उनरी उम्र ८४ साल छी.


Pooran Chandra Kandpal

      ३१ मई हुणि विश्व तम्बाकू निषेध दिवस मनाईगो.
य मौक पर बीडी, सिगरट, खनी, गुट्क, सुर्ती, तमाकु क
कारण हुणी बीमारियों  क बा्र में लोगों कें जानकारी दीइगे.
यूँ  चीजों क प्रयोग ल केंसर, ह्रदय रोग, फेफड़ा रोग, पाचन
रोग सहित शरीरक सबै तंत्रों पर असर पढूं . विश्व स्वस्थ्य
संगठन क अनुसार दुनिय में हर साल करीब साठ लाख लोग
और भारत में छै लाख लोग तमाकु जनित रोगों ल बेमौत
मरि जा्नी.  तमाकु में निकोटिन नामक खतरनाक
जहर हुंछ. एक रिपोट क अनुसार हमा्र देश में ३३
करोड़ लोग तमाकु (बीडी,सिगरट,गुट्क, अत्तर, गांज)
क सेवन करनी.  ईनू में ७०% लोग बीडी पीनी. यूं
बीडी-सिगरट पिड़ियाँ में १५ लाख लोग केंसर ल मरनी.

      देवभूमि में त बीडी-सिगरटों क फुकाट सबूं कें
मालुम छ.  लोग बीडी-सिगरट लै पी रईं, गुट्क-खनी
लै खां रईं, अत्तर-गांज लै पी रईं, शराब- शिकार क
भोग लै करैं रईं, मंदिरों में खुन्योव लै करें रईं. य
सबकुछ करण क बाद कूँ रईं य देवभूमि छ.

   आब जो लोग य ऐब में फंसी रौछा और ये है
मुक्ति पाण चांछा त येक लिजी के दवाई करण कि
जरवत न्हें. एक बात सोचण कि छ कि जब हा्म
पैद हयूं तब हा्म के लै नश नि करछी. सब यां यी
ऐ बेर सिखौ, उ लै संगत क असर ल.  'जब जागो तब
सबेरा' वालि बात छ. य जहर कें हमूल जल्दी त्याग दींण
चैंछ.  जब लै तलब उठीं , द्वि गुद (बीं) जवाण क गिच में
खितो  और कसम खै लियो कि आज बै य जहर नै गिच
में खितूं, नै खरीदूं और नै कैहुणि मांगूं.

पूरन चन्द्र कांडपाल 31.05.2012

Pooran Chandra Kandpal

 हिंदी दिवस १४ सितम्बर


   कुछ लोग यह समझते हैं कि जो साहित्यकार उत्तराखंडी
भाषाओँ, कुमाउँनी या गढ़वाली  में रचना करते हैं या इन
भाषाओँ की बात करते हैं, उन्हें हिंदी से स्नेह नहीं है.  यह
बात सर्वथा गलत है.  हिंदी हमारी राजभाषा है, संपर्क भाषा
है.  यह कश्मीर से कन्याकुमारी और कच्छ से लोंग्लेह तक
बोली-समझी जाती है. हिंदी दिवस पर प्रस्तुत है एक कुंडली -

हिंदी अपने राज  भाषा है पढ़ लिख नेह लगाय
सीखो चाहे और कोइ भी हिंदी नहीं भुलाय,
हिंदी नहीं भुलाय मोह विदेशी त्यागो
जन जन की ये भाषा हे राष्ट्र-प्रेमी जागो,
कह 'पूरन' कार्यालय में बनी यह चिंदी
बीते पैंसठ बरस अपनाई नहीं हिंदी.

पूरन चन्द्र कांडपाल
१४ सितम्बर 2012

Pooran Chandra Kandpal

 गुट्क पर प्रतिबन्ध

   य भौत ख़ुशी कि बात छ कि दिल्ली में लै गुट्क क
बिक्री, उत्पादन, विपणन और भण्डारण पर पुरि तौर पर
१३ सितम्बर २०१२ बटी प्रतिबन्ध लैगो.  आब दिल्ली सहित
देशा क इग्यार राज्यों - राजस्थान, महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश , गोवा,
केरल, सिक्किम, गुजरात, हरयाणा, बिहार  और हिमाचल प्रदेश
में गुट्क पर पुरि तौर पर प्रतिबन्ध लैगो. देश में गुट्क क
बीस हजार करोड़ क व्यौपार छ.  दिल्ली में २० % गुट्क क
उत्पादन हुंछ.   देश में करीब १६ करोड़ लोग गुट्क खानी जमै
५० लाख बच्च छीं.  डाक्टर बतूं रईं कि लगातार तमाकू उत्पादों
क सेवन करि बेर ३०% युवा नपुंसक बनि जानी.  क़ानून क हिसाब
ल आब गुट्क कानून टोड़णियां  कें छै महैण  जेल और द्वि लाख
रुपें क जुर्वान ह्वल.  गुट्क बेचणी दुकानदार कूँ रईं आब हा्म
क्ये और चीज बेचुल. भारतीय चिकित्सा परिषद् ल य
प्रतिबन्ध क स्वागत करि है.  सार्वजानिक जगां पर धुम्रपान
पर उच्चतम न्यायलय ल पैलीकै प्रतिबन्ध लगे रौ पर क़ानून
कि अनदेखी करणियां हमार देश में कमी न्हें .  उत्तराखंड
सरकार य शुभ काम में देर क्यलै करैंरै, य बात समझ में
नि आई.  मुख्य मंत्री ज्यू आब देर नि करो और देवभूमि में
य जहर कें बंद करो.

    दिल्ली में १२ सितम्बर २०१२ बटी प्लास्टिक क बैगों पर लै
प्रतिबन्ध लै गो. य लै भौत भलि बात छ.

पूरन चन्द्र कांडपाल
१४.०९.2012

Pooran Chandra Kandpal

विजय दशमी की शुभ कामनाएं

हम कब तक रावण के पुतलों को जलाकर पर्यावरण को प्रदूषित
करते रहेंगे ? क्या हमने कभी अहंकार, अकर्मण्यता और भ्रष्टाचार
रुपी उस  रावण के बारे में सोचा है जिसने हमारे अन्दर अड्डा
बना रखा है . विजया दशमी मानाने का सबसे अच्छा तरीका यही
है कि हम आज से अपने अन्दर छुपे हुए इस रावण को बहार
निकालने का प्रयास करें.  विजयादशमी की हार्दिक शुभकामनायें.

पूरन चन्द्र कांडपाल
२४.१०.2012

Pooran Chandra Kandpal

रोना नहीं

रोने से कभी
कुछ नहीं मिलता,
रह नहीं  गए अब
आंसू  पोछने वाले .
.
राह में तू जरा
चल संभल के,
ताक पर बैठे हैं
राह रोकने वाले.

दूर क्यों जाते हो
ढूढने उन्हें,
सामने ही हैं
पीठ पीछे बोलने वाले.

भरोसा मत कर
दिल अजीज कह कर,
शरीफ से लगते हैं
छूरा घोपने वाले.

संभाल अपने को
मतलब परस्तों से,
दे नहीं लगायेंगे
भेद खोलने वाले.

साथ देने की
कसम पर यकीन मत कर,
बहाना ढूढ़ लेते हैं
साथ छोड़ने वाले.

धर्म और मजहब सब
एक ही सीख देते हैं,
मतलब जुदा  निकल लेते हैं
समाज तोड़ने वाले.

घर की बात
घर में ही रहने दो,
लगाकर कान बैठे हैं
घर को फोड़ने वाले.

होकर अडिग चलता चल
राह पर अपनी,
बड़बड़ाते  रह जायेंगे,
तुझ से चौकने वाले.

दो बोल प्रेम के
बोल संभल के
नुक्ता ढूढ़ ही लेंगे
तुझे टोकने वाले.

पूरन चन्द्र कांडपाल
22.10.2012


Pooran Chandra Kandpal

 एक प्रण  नव वर्ष

अपनी मौत से हमें जगा गई  वो
'भूल न जाना मुझे' कह गई  वो
एक लड़की हर घर से  गई  है आज
पुरे देश को शोक में डुबा  गई  वो।

हमारी तरह जीना चाहती थी वो
वहशियों की मौत देखना चाहती थी वो 
भलेही वह जिन्दगी की जंग हार गई 
आँख में पानी, सीने में आग लगा गयी वो।

इन्साफ  की आवाज लगा गई  वो
क़ानून को आईना दिखा गई  वो
हमारे इर्द-गिर्द किस कोटि के जानवर हैं
इन्हें शूली पर लटकाना कह गई  वो।

जग ने 'दामिनी' कहा उसको
जंग का जज्बा सिखा गई जग को
करें प्रण  तमाशबीन रहें न हम
यह सच्ची श्रधांजलि होगी उसको।

पूरन चन्द्र कांडपाल
31.12.2012
अलबिदा 2012
अलबिदा 'दामिनी'
nav varsh ki shubhkamnayen

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

Quote from: Pooran Chandra Kandpal on December 31, 2012, 04:29:15 PM
एक प्रण  नव वर्ष

अपनी मौत से हमें जगा गई  वो
'भूल न जाना मुझे' कह गई  वो
एक लड़की हर घर से  गई  है आज
पुरे देश को शोक में डुबा  गई  वो।

हमारी तरह जीना चाहती थी वो
वहशियों की मौत देखना चाहती थी वो 
भलेही वह जिन्दगी की जंग हार गई 
आँख में पानी, सीने में आग लगा गयी वो।

इन्साफ  की आवाज लगा गई  वो
क़ानून को आईना दिखा गई  वो
हमारे इर्द-गिर्द किस कोटि के जानवर हैं
इन्हें शूली पर लटकाना कह गई  वो।

जग ने 'दामिनी' कहा उसको
जंग का जज्बा सिखा गई जग को
करें प्रण  तमाशबीन रहें न हम
यह सच्ची श्रधांजलि होगी उसको।

पूरन चन्द्र कांडपाल
31.12.2012
अलबिदा 2012
अलबिदा 'दामिनी'
nav varsh ki shubhkamnayen

Happy New Year to you and your family Kandpal jiyu.