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आवा हम तुम थैं गढ़वालि सिखौंला- Learn Garhwali here

Started by पंकज सिंह महर, August 04, 2009, 12:12:25 PM

पंकज सिंह महर

साथियो,
      उत्तराखण्ड में मुख्यतः चार बोलियों का चलन है, गढ़वाली, जौनसारी, भोटिया और कुमाऊंनी। इन बोलियों में लगभग समानता है, कुछ शब्द ही अलग हैं, इस टोपिक के अन्तर्गत गढ़वाली बोली के कुछ शब्द और वाक्य दिये जायेंगे। जिससे आप आसानी से इस बोली को बोल और समझ पायेंगे।
      त आवा हम तुम थैं गढ़वालि सिखौंला..............।

पंकज सिंह महर

गढ़वाली           हिन्दी
मैं औंदू         मैं आता हूं।
हम औंदा       हम आते हैं।
तु औंदु         तू आता है।
सु औंदू         वह आता है।
मैं आणू छौं      मैं आ रहा हूं।
हम औंणा छन    हम आ रहे हैं।
तु औणू छ        तू आ रहा है।
तुम अयां छन      हम आये हैं।
मैं आयूं           मैं आया।
हम अयां          हम आये।
तुम आंया         तुम आये।
सु आये           वह आया
सी आंया छन      वे आये हैं।

पंकज सिंह महर

मैं पढ़नू छौ          मैं पढ़ रहा था।
हम पढ़णा छा        हम पढ़ रहे हैं।
तू पढ़णू छौ          तू पढ़ रहा है।
सु पढ़णू छा          वह पढ़ रहा है।
सी पढ़णा छा         वे पढ़ रहे थे।
मैं गे छौ             मैं गया था।
हम गे छा            हम गये थे।
तुम गे छा            तुम गये थे।
सु गे छा             वह गया था।
सी गे छा             वे गये थे।

पंकज सिंह महर

मैन पढियालि      मैने पढ़ लिया है।
हमुन पढि़यालि     हमने पढ़ लिया।
त्वेन पढियाली      तूने पढ़ लिया।
तुमुन पढियालि      तुमने पढ़ लिया।
वैन पढियालि        उसने पढ़ लिया।
ऊन पढियालि        उन्होंने पढ़ लिया।
कभि-कभि पढियालि   कभी-कभी पढ़ता है।
मैं औंलु            मैं आऊंगा।
हम औंला           हम आयेंगे।
तुम औला           तुम आओगे?
सु औला             वह आयेगा।
सी औला            वे आ जायेंगे।

पंकज सिंह महर

बरखा होलि त फसल होली    वर्षा होगी तो फसल होगी।
बाटो ठिक होलु त पौंछि जौंला    रास्ता ठीक होगा तो पहुंच जायेंगे।
मैं जाणु होलु          मैं जा रहा हूंगा।
हम जाणा होला        हम जा रहे होंगे।
तु जाणु होला          तू जा रहा होगा।
सु जाणा होला         तुम जा रहे होगे  (तुम जाणा ह्वेला, भी कहा जा सकता है।)
जवा या जावा         जाइये
औंन या आवन        आइये
इनु न कर्या           ऐसा मत करना।
इनो न कर्यान         ऐसा मत करो।
मैं खाइस आंयू        मैं खाकर आया हूं।
सू रामू सणी पीटिक आयो   वह राम को पीटकर आया।
उ किताब पढ़नु छा         वह किताब पढ़ रहा है।

पंकज सिंह महर

वे सणी किताब पढ़ाई गये      उसको किताब पढ़ाई गई।
मैन स्वर्ग देखे        मैंने स्वर्ग देखा।
मैं सणी स्वर्ग दिखाई गए   मुझको स्वर्ग दिखाया गया।
नौना सणी बुला       बच्चे को बुलाओ
नौना                लड़का
नौनी                लड़की
बोई                 मां
तै सणी बुला          उसको बुलाओ
गोरु सणी मेलि दया    गाय को खोल दो।
घास काटा            घास काटो।
रोटि खा              रोटी खाओ।
पोथी बांचा            किताब पढ़ो।

पंकज सिंह महर

बाबा/बुब्बा        पिता
कका            चाचा
मामजी          मामा तथा फूफा
ज्योरजी         जेठ जी
घरवालि/ब्वारि     बीबी/पत्नी
(घरवालि का प्रयोग पति करता है, यथा- यो मेरी घरवालि छ। ब्वारि शब्द का प्रयोग और लोग करते हैं, यथा- यो प्रकाश की ब्वारि छा।)
कूड़ो-   मकान
कैन-    किसने
कैयो-    कितने
जन्न कि-    जैसे कि
दगड़ी-     दोस्त
मैं से जनो-कनो काम नि हुंदू- मुझसे जैसा-तैसा काम नहीं होता है।
जु क्वी औला त मीं सणीं खबर दी दया-  अगर कोई आयेगा तो मुझे खबर कर देना।
सब भैर जयां छन-   वे सब बाहर गये हैं।

पंकज सिंह महर

गद्यांश
गढ़वाली बोली-
कमजोर सरकार कवि राज्य को भलो नि कैर सकदि। ई दुर्भाग्य छा उत्तराखण्ड को कि, ये नयु-नवेलो राज्य तै अवि तलक मजबूत सरकार हासिल नि होई। पैली पांच साल कांग्रेस सरकार रैई त तब भि मुख्यमंत्रि अर संगठन का बीच तालमेल नि रैई अर अब भाजपा भि वै ही बाटो पर चलीकि अपणो सत्यानाश कन लागिन।

हिन्दी अनुवाद- कमजोर सरकार कभी भी राज्य का भला नहीं कर सकती है। ये उत्तराखण्ड का दुर्भाग्य है कि इस नये-नवेले राज्य को अब तक कोई मजबूत सरकार नहीं मिली। पिछले पांच साल में जब कांग्रेस की सरकार रही, तब भी मुख्यमंत्री और संगठन के बीच तालमेल नहीं रहा और अब भाजपा भी उसी रास्ते पर चलकर अपना सत्यानाश कर रही है।

पंकज सिंह महर

यख- यहां
वख- वहां
कख- कहां
जख- जहां
तख- वहां/तहां
को- कौन
सैरया- सारा
ऐई- आना  (समणी ऐई- सामने आना)
सुपिण्या- सपना
पैलि- पहले
पौछिंगेनि- पहूंच गये
तौंथे- उसे
अगन्नै- आगे
पिछन्नै- पीछे
मनखी- मनुष्य

Meena Rawat