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VOCABULARY OF KUMAONI-GARHWALI WORDS-कुमाऊंनी-गढ़वाली शब्द भण्डार

Started by एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720, August 11, 2009, 10:40:53 AM

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

Risky Pathak (facebook)

कुमाउनी भाषा के कई शब्द हिंदी, गढ़वाली, नेपाली एवं संस्कृत भाषा की शब्दवाली में पाए जाते है। पर अगर कुछ शब्द अन्य भाषाओं में भी मिले तो मन रोमांचित हो उठता है। इस समानता के कई मायने हो सकते है जैसे
1. ये शब्द जो समुदाय बाहरी क्षेत्र से कुमाउँ में आया वह अपने साथ लाया
2. एक ही भाषा परिवार होने से शब्दों का समान होना
यहां हम चर्चा कर सकते है उन शब्दों की जो कुमाउनी भाषा के साथ ही अन्य भाषाओं (हिंदी, गढ़वाली, नेपाली व संस्कृत को छोड़कर) में भी उपलब्ध है।
तुलसीदास रचित रामचरितमानस जो अवधी भाषा में है, उसमें कुछ शब्द है जो कुमाउनी शब्दों से मेल खाते है।
ठाड़ : खड़ा (ठाड़ भयु कर जोरि)
लुकाई : छुपाना (तरु पल्लव महु रहा लुकाई)
ब्रज भाषा में भी एक शब्द है
गरु: जिसका मतलब भारी है
आदरणीय Suresh Pant जी ने तमिल शब्दों के कुमाउनी शब्दों के समान होने का कई बार जिक्र किया है। उन्ही पोस्ट्स से में से एक शब्द याद आ रहा है
उड़ : जिसका अर्थ रिहायश है।
और यही शब्द हमारे यहाँ प्रत्यय लगकर जोश्यूड़, भुल्यूड़ जैसे शब्द बनाता है।

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

ल्याख न लगून? -ल्याख न लगून--सुणी-अनसुणी कर

ह्याल बणून? - -ईज्जत नीं करन

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720


Vinita Tiwari (facebook)
May 23 · 
कुमाऊनी शब्दकोष ~
कुछ कुमाऊँनी क्रिया शब्द
( एक प्रयास न्यूनताओं पर सुधार आपेक्षित )
१. अलबलाट :- जल्दीबाजी
२. इतराट :- ओछापन
३. कचकचाट :- व्यर्थ बोलना
४. कुकाट :- बहुत ज्यादा बोलना
५. खितखिताट :- जोर से हँसना
६. चिचाट :- डर कर चिल्लाना
७. चिङचिङाट :- व्यर्थ का क्रोध
८. छलबलाट :- इतराना
९. टिटाट। :- जोर-जोर से रोना
१०. टपटपाट :- लगातार टपकना/कुछ खाने की लगातार इच्छा होना
११. तरतराट :- लगातार एक धारा के रूप में बहना
१२. थरथराट :- डर/कमजोरी के कारण पाँव काँपना
१३. दल्दिराट :- दरिद्रता प्रकट करना
१४. धकधकाट :- डरना
१५. नौराट :- कराहना
१६. बलबलाट :- उच्छृखलता
१७. बिलबिलाट :- दर्द के कारण रोना
१८. भिभाट :- जोर-जोर से रोना
१९. भुभाट :- जोर की आवाज
२०. मचमचाट :- मन्द स्वर में लगातार बोलना
२१. मणमणाट :- लगातार बोलना
२२. सकपकाट :- घबराजाना
२३. सकसकाट :- अधिक रोने के कारण साँस लेने में दिक्कत होना
२४. सुसाट :- हवा चलने की आवाज
२५. लटपटाट :- समय बर्बाद करना
२६. लरबराट। :- हङबङी

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नमस्कार
अति सुंदर

अति ज्ञानवर्धक जानकारी
वन्देमातरम ll
ओम हर हर महादेव ll जय माँ ll

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Quote from: एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720 on May 09, 2017, 10:32:26 PM
Risky Pathak (facebook)

कुमाउनी भाषा के कई शब्द हिंदी, गढ़वाली, नेपाली एवं संस्कृत भाषा की शब्दवाली में पाए जाते है। पर अगर कुछ शब्द अन्य भाषाओं में भी मिले तो मन रोमांचित हो उठता है। इस समानता के कई मायने हो सकते है जैसे
1. ये शब्द जो समुदाय बाहरी क्षेत्र से कुमाउँ में आया वह अपने साथ लाया
2. एक ही भाषा परिवार होने से शब्दों का समान होना
यहां हम चर्चा कर सकते है उन शब्दों की जो कुमाउनी भाषा के साथ ही अन्य भाषाओं (हिंदी, गढ़वाली, नेपाली व संस्कृत को छोड़कर) में भी उपलब्ध है।
तुलसीदास रचित रामचरितमानस जो अवधी भाषा में है, उसमें कुछ शब्द है जो कुमाउनी शब्दों से मेल खाते है।
ठाड़ : खड़ा (ठाड़ भयु कर जोरि)
लुकाई : छुपाना (तरु पल्लव महु रहा लुकाई)
ब्रज भाषा में भी एक शब्द है
गरु: जिसका मतलब भारी है
आदरणीय Suresh Pant जी ने तमिल शब्दों के कुमाउनी शब्दों के समान होने का कई बार जिक्र किया है। उन्ही पोस्ट्स से में से एक शब्द याद आ रहा है
उड़ : जिसका अर्थ रिहायश है।
और यही शब्द हमारे यहाँ प्रत्यय लगकर जोश्यूड़, भुल्यूड़ जैसे शब्द बनाता है।

संस्कृत भाषा की शब्दवाली से ही  हिंदी, गढ़वाली, कुमाउनी एवं नेपाली बोली में यह सब शब्द आएं है। बाकी अपभ्रंश हैं।  8)

Bhishma Kukreti

गढ़वाली भाषा की शब्द शक्ति
By Mahesha Nand
गढ़वाली भाषा की शब्द शक्ति अनुपम व अतुलनीय है.
#घातु अर्थात् शब्द का वह मूल रूप जिससे क्रिया बनती है।
#हड़्याण धातु से बनने वाले क्रिया तथा अन्य शब्द.........
हड़बड़ाँ (क्रि0वि0)- तिरछे में/बाजु के बल. हड़ब्यड़ाँ
हड़ाँ (क्रि0वि0)- बाजु के सहारे/बाजु के बल.
हड़ु-हड़ु (क्रि0वि0)- कई जगह से/जगह-जगह से/इस बाजु की तरफ से, उस बाजु की तरफ से.
हड़्ययूँ (वि0)- आँच में तपायी हुई वस्तु/जिस रोटी के तलों को सेका गया हो #हड़्ययीं (स्त्री0) #हड़्ययाँ (ब0व0)
हड़्यांद (क्रि0)- किसी वस्तु को आँच में तपाते हुए/रोटी के तलों को सेकते हुए. #हड़्यांदु (ए0व0) #हड़्यांदि (स्त्री0) #हड़्यांदा (ब0व0)
हड़्याण (क्रि0)- किसी वस्तु को आँच में तपाना/रोटी के तलों को सेकना.
हड़्याणु (क्रि0)- किसी वस्तु को आँच में तपा रहा/रोटी के तलों को सेक रहा. #हड़्याणि (स्त्री0) #हड़्याणा (ब0व0)
हड़्यालु (क्रि0भवि0)- किसी वस्तु को आँच में तपाएगा/रोटी के तलों को सेकेगा. #हड़्यालि (स्त्री0) #हड़्याला (ब0व0)
हड़्ये यालि (क्रि0भूत0)- किसी वस्तु को आँच में तपा लिया/रोटी के तलों को सेक लिया.
हड़्यौंदरु (वि0)- किसी वस्तु को आँच में तपाने वाला/रोटी के तलों को सेकने वाला. #हड़्यौंदरि (स्त्री0) #हड़्यौंदरा (ब0व0)
हड़्यौ (क्रि0आज्ञ0)- किसी वस्तु को आँच में तपा/रोटी के तलों को सेक.
हड़्यौण्य (पु0)- किसी वस्तु को आँच में तपाने की क्रिया/रोटी के तलों को सेकने का काम.
हौड़ (पु0)- तल/करवट/बगल/बाजू. { सदनि दैंणा हौड़ सींण चयेंद.}
हौड़-हौड़ (वि0)- सभी तल/दोनों बाजू. { हौळ लगै कि म्यारा हौड़-हौड़ दुख्णा छन.}
लोकोक्ति--
हड़ु-हड़ु डड्ये ग्या बल किड़ांण कथैं आ।
मुहावरे---
हड़ु-हड़ु लमडंण- अनेक विपत्तियों से गुजर जाना.
हड़ु-हड़ु लमडांण- बुरी स्थिति में पहुँचा देना या/ अनेक विपत्तियों में पहुँचा देना.
हौड़ आण- रोटी के तल का पक जाना.
Copyright@ Mahesha Nand

Bhishma Kukreti


भरच्यांद , भड्यांद  तून लगांद , पित्यांद  अंग्रेजी-शब्द  -     गढ़वाली में  परिभाषित करते व्यंग्य  शब्दकोश  B - 80   

(English -Garhwali  Dictionary of Satire , Sarcasm,  Aggravating , Galling , Roasting  Definitions   )
(गढ़वाली ,  व्यंग्य,  हंसी, जोक्स ,  चिढ़ाते , धृष्टता करते ,ठट्टा लगाते  , ताना मारते , झिड़कते शब्द -परिभाषा शब्दकोश , व्यंग्यकोश     )
-
संकलन - भीष्म कुकरेती 
-
Volunteer , स्वयंसेवक = चूसक
Vote वोट = इथगा तागतवर नि हूंद जथगा समजे जांद
Voter वोटर - ढिबरुं  की अलग जाति
Voucherवाउचर = बौगाणो कागज जु बेवकूफ बणान बरोबर ही हूंद
Vulture गिद्ध = जु बि विज्ञापन से जुड्युं  हो

-
Copyright@ Bhishma Kukreti , 2020
गढ़वाली हास्य , गढ़वाली व्यंग्य , ताना मारते , चिढ़ाते , जलाते , गढ़वाली,  व्यंग्य, मजाक उड़ाते गढ़वाली व्यंग्यकोश  , Roasting Garhwali satire , Sarcastic definitions in Garhwali , Sarcasm from  North  India Garhwal ,Garhwali  South Asian Satire , भारतीय सभ्य हंसी व व्यंग्य , South Asian satire, Mid Himalayan  satire,


Bhishma Kukreti

Lost Garhwali words and their meaning

चळयां गढवाली शब्द या कठिन  शब्द  अर माने  मतबल
[
size=12pt] महेशा नन्द  [/size][/color]
By Mahesha Nand
असौंगा सब्द-
ब्येया-माँ के।
उबड्याँ-उत्पन्न किए हुए।
म्याला-बीज (शब्द)।
फुरफुरा-स्वस्थ व अच्छी तरह से सुखाए हुए।
भुतगिला-छोटे पेड़ जो पत्तों-शाखाओं से लदे हों।
अंगर्येनि-अंग-प्रत्यंगों से (शाखा-उपशाखाओं) लदे।
सगंढ-विशाल। घड़मड़ा-जिसने अपने आप को चारों तरफ से किसी वस्त्र या रजाई से ढका हो तथा अधिक जगह घेरी हो।
खुरक्यूँन्-खुंदक खाने वालों ने, बैर भावना रखने वालों ने।
दमळैनि-आधा चबाए और फेंक दिए।
च्वैलि-छीलकर।
कठब्यड़ि-काठ का बना सामान रखने का बक्सा।
सारा-स्वस्थ, गिरीदार।

छिछैनि-नष्ट हो गए।
उडणौन-उड़ने वाले छोटे जीव (हल्की-फुल्की मानसिकता वाले।)

छुल्येनि-दोनों हाथों से इधर-उधर बिखेर दिए।
दळ्ये-दल-दल में समा गए, दल दिए।
चळ्ये-खो गए।
दुब्द-दुब्द-छुप-छुपकर पीछा करते हुए। निसता-सारहीन। सैरि-फैल। पुणयाँ-पणयाँ- सार-फटक कर साफ किए हुए। गब्त-दफन।
Copyright@ Mahesha Nand  2020

Bhishma Kukreti

विलुप्त होतेहुए  कुछ गढ़वाली शब्द
-
संकलन – महेशा नन्द  गढवाली के प्राचीन शब्दों के  ज्ञाता

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#कंप्यरु (पु0)- जमीन से बाहर निकला हुआ नुकीला पत्थर.
#कछ्वळा (पु0)- आमाश्य.
#खांड्यूँ (पु0)- अत्यन्त उपजाऊ भूमि.
#गबदाट (पु0)- अनेक लोगों का एक साथ बोलने-बतियाने का अस्पष्ट शोर/पंजों से किया जाने वाला मर्दन या नोचन/दोनों हाथों से सामान को टटोल कर किया जाने वाला निरीक्षण.
#घत्वड़ु (पु0)- तरल पदार्थ के अधिक मात्रा में लगातार पिए जाने की क्रिया.
#घिंघऽघ्यळि (स्त्री0)- ऐसे शिशुओं का समूह जो खुद चल-फिर नहीं सकते/रोकर अपनी ओर आकर्षित करते हुए शिशुओं का समूह.
#चटक्वांस (स्त्री0)- किसी वस्तु की भारी कमी.
#चड़ऽ (पु0)- जाँघ.
#छूपुण (पु0)- चूल्हे में रखे बर्तन के पानी को जल्दी उबालने के लिए उसमें डाला गया मंडवे का आटा/ओड़ा जाने वाला झीना कपड़ा/ढकने या आच्छादित करने वाला झीना कपड़ा.
#छैतु (पु0)- कुछ समय के लिए उधार माँगा गया सोना या चाँदी का गहना. (बीस-तीस साल पहले यह परम्परा थी. जो गरीब लोग होते थे वे जब अपने बेटे के लिए बहु माँगने जाते थे तब अपने सक्षम हितैषी से सोना या चाँदी का गहना माँगते थे. वह गहना माँगी गयी बहु को पहनाया जाता था. जब शादी हो जाती थी तब वह गहना लौटा दिया जाता था.)
#जुख्यला (पु0)- बीज/अखरोट की गिरी.
#झिड़बिड़ि (स्त्री0)- घृणा/घिन.

Bhishma Kukreti

उलणा और जळतुंगा के पौधे.....
(
बिलुप्त होते या होने वाले -गढवाली शब्द श्रृंखला )
महेशा नन्द (भाषा विशेषग्य )
जब पहाड़ों का जीवन सीधा प्रकृति से जुड़ा था तब इन पौधों की बहुत मान्यता थी। इन प्रकृति प्रेमियों ने प्रकृति से सीखकर अपना जीवन सरल बनाया।
आज स्थिति यह है कि लोग इन पौधों के नाम तक नहीं जानते होंगे। ये दोनों पौधे नम स्थानों में होते हैं।
1- #उलणा- यह एक फर्न की प्रजाति है। फर्न की पहाड़ों में मुख्य तीन प्रजातियाँ हैं
(a)- #लिंगुड़ा- लिंगुड़ा छायादार नम स्थानों में होता है। मुख्यता यह पौधा गधेरों में, पानी के नम छायादार स्थानों में होता है। बरसात में इसके कोमल तने लम्बे होकर गोल घंड़ी के आकार जैसे हो जाते हैं जो सब्जी बनाने के काम आते हैं।
(b)- #कुथड़ा- कुथड़ा भी फर्न प्रजाति का है जो चीड़ या बाँज के जंगल के नमीदार स्थानों में होता है। इसके तनों की भी सब्जी बनायी जाती है। इसके तने भी लिंगुड़ा जैसे होते हैं किन्तु वे बारीक होते हैं। लिंगुड़ा और कुथड़ा के स्वाद में यदि तुलना करें तो लिंगुड़ा अधिक स्वादिष्ट होता है।
(c)- #उलणा- यह फर्न की मुख्य प्रजाति है। उलणा बाँज के जंगल में नम किन्तु किसी भी स्थान में कहीं भी उग जाता है। यह #जहरीला पौधा है। इसका उपयोग पहाड़ों के कच्चे घरोंं की छतों को छाने के लिए किया जाता था। क्यों किया जाता है ? फिर कभी....
2- #जळतुंगा- जळतुंगा चारा देने वाला पौधा तो है ही, साथ ही इसके तने से मिट्टी, गोबर, पत्थर आदि ढोने के कण्डे बनाए जाते थे। इस कला के माहिर थे रुड़िया। इस बात का भी ध्यान रखा जाना चाहिए कि रुड़िया लोग उत्तराखण्ड के मूल निवासी हैं जो बाँस, रिंगाळ से कुन्ने, डुखरे आदि बनाते थे। इन शिल्पियों को मै हृदय से आभार व्यक्त करता हूँ।