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Enrich Your Knowledge On Uttarakhand - उत्तराखंड के बारे संक्षिप्त जानकारी

Started by एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720, October 23, 2007, 03:06:40 PM

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

जड़ी-बूटियाँ


१. छड़ीला या दगद फूल
२. पद्म
३. दारुहल्दी
४. घुड़बच
५. मुलीम
६. पखानवेद
८. रीठा मीठा दाने का
९. दालचीनी, तेजपात
१०. राजिगरा सफेद व काले छीटे का
११. हंसराज सबज
१२. चिरायता मोटा
१३. कोटू फाफरा दाने का
१४. अमलतास फली व गूदा
१५. सुहागा
१६. बिरोजा
१७. समोया
१८. घासीजीरा
१९. तेजपत्ता
२०. मिर्च दड़ा
२१. सींक
२२. सिंगाड़ा मोटे दाने का
२३. बनफ्सा
२४. ब्राह्मी
२५. बिजसार की छाल
२६. बबूल
२७. खैर
२८. कायफल की छाल तथा रसौद, कुचिला, पुनर्नवा रोहिणी, पिपली, तरुड़, गेठी, लीसा आदि।

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चाय के बगीचे

बज्यूला, ग्वालदम, डूमलोट, ओड़ा, लोध, दुनागिरि, जलना, बिसनर, गौलपालड़ी, बेनीनाग, डोल, लोहाघाट, झलतोला, कौसानी, स्याही देवी, चौकोड़ी, छीड़ापानी आदि में चाय की खेती होती थी। इन सब में कौसानी, बेनीनाग तथा लोध ने खूब नाम कमाया। कौसानी की चाय अब नाम-मात्र को रह गई है। चौकड़ी व बेनीनाग में अभी बहुत कुछ चाय ठा. देवीसिंह व दानसिंह बिष्ट बना रहे हैं। ये ही सबसे बड़ी चाय के बगीचे यहाँ पर रह गये हैं।

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विश्वा प्रसिद पर्यटक स्थल फूलू की घाटी भी इसी खूबसूरत उत्तराखंड राज्य मे शोभायमान है.

फल
घरेलू फल

अखरोट, आलू, बुखार, अलूचा, आम, इमली, अमरुद, अनार, अँगूर, आड़ू, बड़हल, बेर, चकोतरा (इसे अठन्नी भी कहते हैं) चेरी (पयं), गुलाबजामुन, कटहल, केला, लीची, लोकाट, नारंगी, नासपती (गोल, तुमड़िया तथा चुसनी) नींबू, पांगर (chestnut ), पपीता, शहतूत (कीमू) सेब, खरबूज, तरबूज, फूट, खुमानी, काक, अंजीर आदि फल कुमाऊँ में होते हैं।

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जंगली फल

आंचू (लाल व काले हिसालू), अंजीर (बेड़ू), बहेड़ा, बोल, बैड़ा, आँवला, बनमूली, बन नींबू, बेर, बमौरा, भोटिया बादाम, स्यूँता (चिलगोजा), चीलू (कुशम्यारु), गेठी, घिंघारु, गूलर, हड़, जामन, कचनार, काफल, खजूर, किल्मोड़, महुआ, मौलसिरी, मेहल, पद्म (पयं), च्यूरा, कीमू, तीमिल, गिंवाई आदि कुमाऊँ के जंगलों में होते हैं।

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फूल

फूल कुमाऊँ में बहुत होते हैं। मुख्य ये हैं - बेला, चमेली, चंपा, गुलाब, कुंज, हंसकली, केवड़ा, जुही (जाई), रजनीगंधा (हुस्नहाना), गेंदा, गुलदावरी, डलिया, गुलबहार, मोतिया, नरगिस, कमल, सूर्य व चन्द्र तथा अन्य प्रकार के। शिलिंग, जिनकी सुगंध दूर तक फैलती है, इन पर्वतों का एक खआस फूल है। यह सितंबर के बाद फूलता है। बुरांस जब बसंत में जंगलों में खिलता है, तो टेसू से कई गुना सुन्दर दिखाई देता है। गुल बाँक भी कई कि का होता है।


अँग्रेजी फूलों में ऐस्टर, बिगोनिया, डलिया, हौलीहौक, कैलोसिया, कौक्स कौम, टफूशिया, स्वीट विलियम, स्वीट सुल्तान, जीरेनियम, पिट्रेनियाँ, जिनियाँ, डेजी, कागजू फूल आदि होते हैं।

देशी फूल खुशबूदार होते हैं। अँग्रेजी फूल देखने में उत्तम होते हैं, पर विशेषत: निर्गेध होते हैं।

हिमालय के पास तथा जंगलों में नाना प्रकार के जंगली फूल खिलते हैं, जिनमें कई बड़े सुन्दर या खुश्बुदार होते हैं। कुछ जहरीले भी होते हैं।

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झीलें और तालाब

झीलें और तालाब का निर्माण भू-गर्भीय शक्तियों द्वारा परिवर्तन के पश्चात हिमानियों के रुप में हुआ है जो स्थाई है और जल से भरी है। इनकी संख्या कुमाऊँ मण्डल में सबसे अधिक है।

नैनीताल की झील भीमताल जिसकी लम्बाई ४४५ मी. है, एक महत्वपूर्ण झील है। इसके अलावा नैकुनि, चालाल, सातसाल, खुर्पाताल, गिरीताल मुख्य है जो अधिकतर नैनीताल जिले में है।

गढ़वाल के तालाब व झीलें: डोडिताल, उत्तरकाशी, देवरियाताल, रुद्रप्रयाग जनपद, वासुकीताल, अप्सरा ताल, लिंगताल, नर्किंसग ताल, यमताल, सहस्मताल, गाँधी सरोवर, रुपकुण्ड धमो जनपद, हेमकुण्ड, संतोपद ताल, वेणीताल, नचकेला ताल, केदार ताल, सातताल, काजताल मुख्य हैं।

उतराखंड के प्रमुख हिमनदों में गंगोत्री, यमुनोत्री, चौरावरी, बद्रीनाथ हिमनद महत्वपूर्ण है।

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उतराखंड प्रदेश की नदियाँ

इस प्रदेश की नदियाँ भारतीय संस्कृति में सर्वाधिक स्थान रखती हैं। उतराखंड अनेक नदियों का उद्गम स्थल है। यहाँ की नदियाँ सिंचाई व जल विद्युत उत्पादन का प्रमुख संसाधन है। इन नदियों के किनारे अनेक धार्मिक व सांस्कृतिक केन्द्र स्थापित हैं।

हिन्दुओं की अत्यन्त पवित्र नदी गंगा का उद्गम स्थल मुख्य हिमालय की दक्षिण श्रेणियाँ हैं। गंगा का आरम्भ अलकनन्दा व भागीरथी नदियों से होता है। अलकनन्दा की सहायक नदी धौली, विष्णु गंगा तथा मंदाकिनी है। गंगा नदी भागीरथी के रुप में गोमुख स्थान से २५ कि.मी. लम्बे गंगोत्री हिमनद से निकलती है। भागीरथी व अलकनन्दा देव प्रयाग संगम करती है जिसके पश्चात वह गंगा के रुप में पहचानी जाती है।

यमुना नदी का उद्गम क्षेत्र बन्दरपूँछ के पश्चिमी यमनोत्री हिमनद से है। इस नदी में होन्स, गिरी व आसन मुख्य सहायक हैं।

राम गंगा का उद्गम स्थल तकलाकोट के उत्तर पश्चिम में माकचा चुंग हिमनद में मिल जाती है।

सोंग नदी देहरादून के दक्षिण पूर्वी भाग में बहती हुई वीरभद्र के पास गंगा नदी में मिल जाती है।

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उत्तराचल के चार विरासत या धरोहर के प्रतीक हैं:

(क) राज्य पुष्प ब्रह्म कमल;
(ख) राज्य वन्य पशु कस्तूरी मृग;
(ग) राज्य वृक्ष बुरांस; और
(घ) राज्य पक्षी मोनाल।

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