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Folk Songs Of Uttarakhand : उत्तराखण्ड के लोक गीत

Started by पंकज सिंह महर, September 11, 2009, 03:48:13 PM

Bhishma Kukreti

Hari Kunjo: a Garhwali Folk songs respecting Kunaj an auspicious and aromatic plant
            (Review of Garhwali folk Songs and Traditional Literature)

                  Bhishma Kukreti
[Notes on folk songs about Aromatic plants; Garhwali folk songs about Aromatic plants; Uttarakhandi  folk songs about Aromatic plants; Mid Himalayan folk songs about Aromatic plants; Himalayan folk songs about Aromatic plants; north Indian folk songs about Aromatic plants; Indian folk songs about Aromatic plants; Asian folk songs about Aromatic plants]
[लोक गीत; सुगन्धित पौधा सम्बन्धी लोक गीत; सुगन्धित पौधा सम्बन्धी गढ़वाली लोक गीत;सुगन्धित पौधा सम्बन्धी उत्तराखंडी लोक गीत;सुगन्धित पौधा सम्बन्धी मध्य हिमालयी लोक गीत;सुगन्धित पौधा सम्बन्धी हिमालयी लोक गीत;सुगन्धित पौधा सम्बन्धी उत्तर भारतीय लोक गीत;सुगन्धित पौधा सम्बन्धी भारतीय लोक गीत;सुगन्धित पौधा सम्बन्धी दक्षिण एशियाई लोक गीत;सुगन्धित पौधा सम्बन्धी एशियाई लोक गीत लेखमाला]
               Kunaj is an auspicious plant for Garhwalis and Kumaunis. The small plant is aromatic and is anti insects too. The leaves of Kunaj are used in worshiping rituals. The plant is an essential ingredient for Pooja .
The following folk song is respecting the kunaj plant
हरि कुणजो
हरि कुणजो कै मैना फूललो ? हरि कुणजो कै मैना फूललो ?
हरि कुणजो मौ मैना मौळलो .हरि कुणजो मौ मैना मौळलो
हरि कुणजो मौळण लगि गे ,हरि कुणजो मौळण लगि गे
हरि कुणजो मौळण लगि गे ,हरि कुणजो मौळण लगि गे
हरि कुणजो चैत मा फूललो,हरि कुणजो कै मैना फूललो
हरि कुणजो चैत मा फूललो,हरि कुणजो कै मैना फूललो
हरि कुणजो फूलण लगि गे, हरि कुणजो फूलण लगि गे
हरि कुणजो फूलण लगि गे, हरि कुणजो फूलण लगि गे
हरि कुणजो कै मैना फूललो ? हरि कुणजो कै मैना फूललो ?
हरि कुणजो मौ मैना मौळलो .हरि कुणजो मौ मैना मौळलो
xxxx
जाति- झोड़ा
(तोताराम ढौंडियाल संकलित , गढवाली गीत संग्र , धाद प्रकाशन , देहरादून से साभार)

The meaning of Hari kunaj folk song is –

When will the auspicious kunaj blossom?
Hari kunaj will bud in mau month
When will the auspicious kunaj bud?
The auspicious Kunaj started budding.
The auspicious Kunaj will blossom in Chait month


Copyright@ Bhishma Kukreti 27/7/2012
Notes on folk songs about Aromatic plants; Garhwali folk songs about Aromatic plants; Uttarakhandi  folk songs about Aromatic plants; Mid Himalayan folk songs about Aromatic plants; Himalayan folk songs about Aromatic plants; north Indian folk songs about Aromatic plants; Indian folk songs about Aromatic plants; Asian folk songs about Aromatic plants to be continued..
. लोक गीत; सुगन्धित पौधा सम्बन्धी लोक गीत; सुगन्धित पौधा सम्बन्धी गढ़वाली लोक गीत;सुगन्धित पौधा सम्बन्धी उत्तराखंडी लोक गीत;सुगन्धित पौधा सम्बन्धी मध्य हिमालयी लोक गीत;सुगन्धित पौधा सम्बन्धी हिमालयी लोक गीत;सुगन्धित पौधा सम्बन्धी उत्तर भारतीय लोक गीत;सुगन्धित पौधा सम्बन्धी भारतीय लोक गीत;सुगन्धित पौधा सम्बन्धी दक्षिण एशियाई लोक गीत;सुगन्धित पौधा सम्बन्धी एशियाई लोक गीत लेखमाला जारी

Bhishma Kukreti

Ko chhai Batoi: a Garhwali folk Song for Values of tree Plantation
               Bhishma Kukreti
The following folk song is again proof that Garhwalis understand the importance of tree plantation. The following folk song discusses that every person should plant trees.
को छै बटोई ---- गढ़वाली लोक गीत

---------------१---------------------
को छै बटोई घाम च तैलु ? को छै बटोई घाम च तैलु ?
झट बैठी जा डाळि का छैलु, झट बैठी जा डाळि का छैलु
ठन्डू बथौं घौणु च छैलु ,
झट बैठी जा डाळि का छैलु, झट बैठी जा डाळि का छैलु
को छै बटोई घाम च तैलु ?
घुघति घुरदी डाळि का छैलु,घुघति घुरदी डाळि का छैलु
पाणि पंदेरि , तीस मुजेइ
ठन्डू बथौं , पळेक बिसैई, ठन्डू बथौं , पळेक बिसैई
छैलु बैठिलो डाळि ना तोड़ी
फांकी त रै क्या, पाति ना तोड़ी को छै बटोई घाम च तैलु ?
-------------२----------------
गजना डाळि कु बकुळु छैलु
को छै बटोई डाळि का छैलु,को छै बटोई डाळि का छैलु
छैलु बैठिलो पाति ना तोड़ी , छैलु बैठिलो पाति ना तोड़ी
दाजि कि मेरा डाळि लगयीं च
दादी को मेरि पाणि चार्युं च ,दादी को पाणि चार्युं च ,
बुबा जि कि मेरि डाळि लगयीं च
ब्व़े बैण्यु मेरि पाणि चार्युं च, ब्व़े बैण्यु पाणि चार्युं च,
भैजी कि मेरि डाळि लगयीं च
बौजी कि मेरि पाणि चार्युं च
गजना डाळि कु बकुळु छैलु
को छै बटोई डाळि का छैलु,
----
लय- चौंफळा
(तोताराम ढौंडियाल संकलित , गढवाली गीत संग्र , धाद प्रकाशन , देहरादून से साभार)

पंकज सिंह महर

ऋतु औनी रौली भंवर उडला बलि,
हमारा मुलुका भंवर उडला बलि |
दै खायो पात मे भंवर उडला बलि,
के भलो मानी छो भंवर उडला बलि,
ज्यूनाली रात मे भंवर उडला बलि,
के भलो मानी छो भंवर उडला बलि,
है जा मेरी भैया भंवर उडला बलि,
यो गैली पातला भंवर उडला बलि,
पंछी वांसनया भंवर उडला बलि,
है जा मेरी भैया भंवर उडला बलि,
कविता की लेख भंवर उडला बलि,
सुणो भाई बन्दों भंवर उडला बलि,
मिली रया एक भंवर उडला बलि,
सुणो भाई बन्दों भंवर उडला बलि,
ऋतु औनी रौली भंवर उडला बलि,
हमारा मुलुका भंवर उडला बलि |

- मोहन सिंह रीठागाड़ी

पंकज सिंह महर

बहुत पुराना कुमांऊनी लोक गीत -

हो सरग तारा , जुन्याली रात|
को सुनलो यो मेरी बात ?
पाणी को मसिक सुवा पाणी को मसिक |
तू न्है गये परदेस मैं रूंली कसीक ?
हो सरग तारा ,जुन्याली रात ,को सुनलो यो मेरी बात ?
विरहा कि रात भागी , विरहा की रात |
आखन वै आंशु झड़ी लागी वरसात |
हो सरग तारा ,जुन्याली रात ,को सुनलो यो मेरी बात ?
तेल त निमडी गोछ ,बुझरोंछ बाती |
तेरी माया लै मेडी दियो सरपे कि भांति |
हो सरग तारा ,जुन्याली रात ,को सुनलो यो मेरी बात ?
अस्यारी को रेट सुवा, अस्यारी को रेट |
आज का जईयां बटी कब होली भेंट |
हो सरग तारा ,जुन्याली रात ,को सुनलो यो मेरी बात

पंकज सिंह महर

ए संज्या झुकि गेछ भगवान , नीलकंठ हिवाला |
ए संज्या झुकि गेछ हो रामा, अगास रे पताला|
ए संज्या झुकि गेछ भगवाना ,नौ खंडा धरति मांझा|
नौ खंडा धरति हो रामा , तीन हो रे लोका |
के संज्या झुकि गेछ भगवाना ,के संज्या झुकि गेछ |
के संज्या झुकि गेछ रामा ,कृष्ण ज्यु की द्वारिका |
हो के संज्या झुकि गेछ हो रामा , यो रंगीली वेराटा|
के संज्या झुकि गेछ भगवाना , यो पंचवटी मांझा |
के संज्या झुकि गेछ हो रामा ,रामाज्यु की अजुध्या |
के संज्या झुकि गेछ भगवाना , कौरवुं को बंगला |
के संज्या झुकि गेछ हो रामा ,यो गेली समुन्दरा|
के संज्या झुकि गेछ भगवाना ,पंचचुली का धुरा |
के संज्या झुकि गेछ हो रामा ,हारीहरा हरिद्वारा|
के संज्या झुकि गेछ भगवाना ,सप्ता रे सिन्धु ,पंचा रे नंदा |
ए संज्या झुकि गेछ हो रामा ,सुनै की लंका धामा ||

पंकज सिंह महर

आ लिली बाकरी लिली छ्यू छ्यू |
आ लि लि लि लि ......छ यू छ यू |
बाकरी ऐजा उज्याड न खा , जोडनूँ तिहांडी हाता ,
त्योरो - म्योरो कलि पटवै गुस्याणी तीन पिडिक सरादा |
सभापति ज्यू कैंल रपोटा , बात मान तू - तू -
ज्यांणी छ कती आली जब , एती परतिम चबकारी |
त्यर भी लगाली मेंकणी कच्याली , गाड़ी बे ल्वेकी धारी |
जब लागैली धन्तरैकि , पै भाजैली टू ... टू ....
ते बाकरी बाग लि जो रे त्विल उज्याड खाय |
ओये बाकरी त्यर कारणा काव जै म्यर आय ,
लट्ठ लिबेर ऐ गो पधाना अब कथां हणी जूं .........जूं ..
त्विल नी खांण पय बाकरी धान युं पधानु का ,
मैं भाजुनुं तल गध्यारा टू बुज हना लुका ,
त्विल अपणी चिरि लधोड़ी क्या मैं टिकें खूं....खूं ...
ध्यौ कें जाबेरा आज मैं बौं लै मर्चे धूप दिणी |
ओ रे "हिरुवा " आज का दिना आगेछ तेरी निहुणी |
मार पडैली एसी हो रामा याद एँला बू ........... .बू ...........
जब नि खया मैल बुधुवा मेरि बाकरिल गोव |
ग्वेल्देराणी द्वि डबला भेंट चढौला भोव |
हम ग्वलों की त्वी छै देवी और कै छै कूं............कूं............|

-हीरासिंह राणा

पंकज सिंह महर

कुंमाँऊनी लोक गीत ------

कै करूँ सासू लम चरयो लै रेवती बौज्यू बुड |
चपल पैरछी चुड , चुडे चल मेरी दुकाना ,चपल पैरछी चुड |

खुकुरी को म्याना , जोगी बैठी ध्याना |
च्याल वालौं का च्याला. जीरौं , फकतों की जाना |
कैकी करूँ मनवसी , कैकी अभिमाना |
नानछिना की पिरीति की त्वे नि रूनी फामा |
करी गेछे वो खडयूँणी रुख डावा चाणा |

चपल पैरंछी चुड , चुडे चल मेरी दुकाना ,चपल पैरछी चुड |
कै करूँ सासू ठुल कुडैलै रेवती बौज्यू बुड |

मडुवे की मानी , जतिये की कानी ,
जैकि हूँ फोसडी खोरी पापिणी उ धिनाली नी खानी |
जनम सबूं ले लियो छ पापिण करमै कि खानी |

चपल पैरछी चुड , चुडे चल मेरी दुकाना ,चपल पैरछी चुड |
केलडी को खाना , धुरी पाको आमा |
नानछिना की पिरीति की त्वे धरिये फामा |

चपल पैरछी चुड , चुडे चल मेरी दुकाना ,चपल पैरछी चुड |
कै करूँ सासू लम चरयो लै रेवती बौज्यू बुड |
कै करूँ सासू ठुल कुडैलै रेवती बौज्यू बुड |

भावार्थ
क्या करूँ सास जी , लम्बे मंगल सूत्र से रेवती के पिता जी अर्थात :मेरे पति तो बूढ़े हैं |
चप्पल पहनोगी या चूडियाँ , चलो मेरी दुकान में चलो |
चप्पल पहनोगी या चूडियाँ , चलो मेरी दुकान में चलो |
खुकुरी की म्यान , योगी ध्यान - मग्न बैठा है ,
सन्तान वालों के पुत्र चिरजिंवी हों , और कुवारे दीर्घायु हों |
किस - किस की मर्जी पूरी करूँ और किस पर घमंड करूँ |
तुम्हें तो तुम्हारी वल्यापन की प्रीति याद ही नहीं रहती |
बुरा हो तेरा , मुझे तो तू बिलकुल एकांकी छोड़ गई |
चप्पल पहनोगी या चूडियाँ , चलो मेरी दुकान में चलो |
सास जी , मैं क्या करूँ इस बड़े मकान से , रेवती के पिता जी तो बूढ़े हैं |
मडुवा का भूसा , भैसे के कंधे ,
जिसका भाग्य ही रुखा हो उसे दही - दूध क्या मिलेगा ?|
जन्म तो सभी ने लिया है , पर तुम तो भाग्य की खान जन्मी हो |
चप्पल पहनोगी या चूडियाँ , चलो मेरी दुकान में चलो |
केले के वृक्ष का ताना , बगिया में आम पक गए ,
हमारी बचपन की प्रीति को याद रखना तुम |
चप्पल पहनोगी या चूडियाँ , चलो मेरी दुकान में चलो |
क्या करूँ सास जी , लम्बे मंगल सूत्र से मैं , ओ सास जी , रेवती के पिता जी तो बूढ़े हैं |
सास जी , मैं क्या करूँ इस बड़े मकान से , रेवती के पिता जी तो बूढ़े हैं |

(कुंमाँऊ का लोक साहित्य से

पंकज सिंह महर

काटन्या काटन्या पोली आयो चौमासु को वना |
बगंयाँ पाणी थमी जांछो नी थामीनो मना ||
.............................
हात को रुमाल छुट्यो पाणी का खाल में |
कै पापी लै खिति छू मैं दुणा जंजाल में ||
.............................
बरमा जांछ रेलगाड़ी , मथुरा जान्याँ कार |
बची रौंला चिठ्ठी दुला , मरी जूंला तार ||
....................
धोती मैली टोपी मैली ध्वे दिन्यो क्वे छै ना |
परदेसा मां मरी जूंला रवे दिन्यो क्वे छै ना ||
..........................
कथै कुनुं को सुणाछ , बड दुःख भारी |
घर जानूं सैणि रिसें , भैर करजदारी ||

पंकज सिंह महर

सिलगडी को पाला चाला चमना , गिन खेलुन्याँ गड़ो , झलक्या जोवन |
तैं होये हिसालु तोपों , चमना , मैं उडन्या चड़ो, झलक्या जोवन |
बासमती रोपन्यां सेरो , चमना , श्यामगिरी रोपन्या ,झलक्या जोवन |
म्यारा सुवा का दंतपाटी , चमना , मोत्यूं कसा छना ,झलक्या जोवन |
सैबौं को सवारी घोड़ो , चमना , पानि पिछौ गंग को ,झलक्या जोवन |
तै खिन बिलौज ल्यूंलो , चमना , असमानी रंग को , झलक्या जोवन |
आपुं त रै जानी धुरा , चमना , देवी की मूरत ,झलक्या जोवन |
छै मैना में देख्या द्याला , चमना , कसि भैछ सुरत ,झलक्या जोवन |
त्वे तसौ सिगारा हारा , चमना , कती है ल्ये रैछ ,झलक्या जोवन |
मैं ली आयो उनां नावा , चमना , म्यारा दादी का छ ,झलक्या जोवन |
बार पाट बतीस गजा , चमना , रानी को घागरो ,झलक्या जोवन |
सबै को मानीख होयै , चमना , बली को बाकरी , झलक्या जोवन |

पंकज सिंह महर

यो बाटो कां जान्या होला सुरा - सुरा देवी का मंदीरा |
चमकनी गिलास सुवा रमकनी चाहा छ |
तेरी - मेरी पिरीत को दुनिये ड़ाहा छ |
यो बाटो कां जान्या होला सुरा - सुरा देवी का मंदीरा |
जाई फ़ुली , चमेली फुली, देणा फुली खेत |
तेरो बाटो चानै - चानै उमर काटी मेता |
यो बाटो कां जान्या होला सुरा - सुरा देवी का मंदीरा |
गाडा का गडयार मारा दैत्या पिसचे ले |
मैं यो देख दुबली भ्यूं तेरा निसासे लै |
यो बाटो कां जान्या होला सुरा - सुरा देवी का मंदीरा |
तेरा गावा मूंगे की माला मेरा गावा जंजीरा |
तेरी - मेरी भेंट होली देबी का मंदीरा |
यो बाटो कां जान्या होला सुरा - सुरा देवी का मंदीरा |
अस्यारी को रेट सुवा अस्यारी को रेट |
यो दिन यो मास आब कब होली भेंट |
यो बाटो कां जान्या होला सुरा - सुरा देवी का मंदीरा |