Please go through the news and how much your state has developed during these closed to 9 yrs time.
On ground of fast development, everybody wish to have Gairsain as Capital of Uttarakhand.
-------------------------
News. 1..
-------
थैंग गांव न दशा सुधरी न दिशाAug 24, 10:47 pmबताएं
Twitter Delicious Facebook
गोपेश्वर (चमोली)। राज्य बनने के आठ साल बाद भी जनपद का सीमावर्ती थैंग गांव में समस्याओं का अंबार लगा हुआ है। यह गांव आज भी विकास की राह देख रहा है।
विकासखंड जोशीमठ का यह गांव किसी परिचय का मोहताज नहीं है। यह गांव रामदाना, आलू, राजमा दाल, खुमानी व विभिन्न प्रजाति के सेब आदि फलों के उत्पादन के लिए जाना जाता है। दुर्भाग्यपूर्ण यह है कि सड़क मार्ग से 8 किमी की दूरी पर स्थित यह गांव आज भी मूलभूत सुविधाओं से वंचित है। पर्यटन की अपार संभावनाएं संजोए इस गांव में प्रकृति मेहरबान तो रही, लेकिन इस गांव का आज तक विद्युतीकरण नहीं हो पाया। इसके साथ ही पर्यटन के लिहाज से महत्वपूर्ण इस गांव में संचार सुविधा तक बहाल नहीं हो पायी है। गांव में वर्षो पूर्व खुले हाईस्कूल में आज तक अध्यापकों की नियुक्ति नहीं हो पायी। गांव में सड़क मार्ग तो दूर, पैदल मार्ग की भी समुचित व्यवस्था नहीं है। ग्रामीणों के लिए समुचित चिकित्सा व्यवस्था की भी नहीं है। पूर्व जिला पंचायत सदस्य भवान सिंह चौहान व प्रकाश रावत का कहना है कि गांव की दयनीय स्थिति को लेकर वे कई बार शासन प्रशासन से गुहार कर चुके हैं, लेकिन सरकार ने आज तक गांव की सुध ही नहीं ली।
http://in.jagran.yahoo.com/news/local/uttranchal/4_5_5730659.html============
सड़क की दुर्दशा पर भड़के ग्रामीणAug 26, 10:45 pmबताएं
Twitter Delicious Facebook
उत्तरकाशी। सड़क की दुर्दशा पर प्रशासन के खिलाफ संग्राली गांव का गुस्सा आखिर सड़क पर फूट पड़ा। ग्रामीणों ने तेखला-संग्राली मोटर मार्ग को लेकर ढोल-बाजों के साथ जुलूस प्रदर्शन किया। चेतावनी दी कि यदि सड़क की मरम्मत जल्द शुरू न हुई तो वे अनिश्चितकालीन चक्का जाम शुरू कर देंगे।
ढाई सौ करोड़ वरुणावत पैकेज में ट्रीटमेंट सवालों के कटघरे में है, वहीं इस पैकेज ने संग्राली गांव की जिन्दगी में तूफान खड़ा किया हुआ है। गांव तक की सड़क पर ट्रीटमेंट के दौरान भारी वाहनों के चलने से मार्ग पूर्ण रूप से क्षतिग्रस्त है। ग्रामीण कई बार जिलाधिकारी डा. बीवीआरसी पुरुषोत्तम से शिकायत कर चुके हैं, पर अभी तक सड़क निर्माण को लेकर कोई कदम नहीं उठाया जा रहा।
ग्रामीणों ने बुधवार को मुख्यालय में ढोल बाजों के साथ जोरदार प्रदर्शन के साथ ही कलेक्ट्रेट में जमकर हंगामा काटा। जिलाधिकारी को सौंपे ज्ञापन में मांग की गई है कि सड़क शीघ्र दुरुस्त नहीं की गई तो ग्रामीण अनिश्चितकालीन चक्का जाम शुरू कर देंगे। उन्होंने क्षेत्रीय विधायक गोपाल रावत को भी पत्र भेजा है। ग्रामीणों ने कहा कि विधायक प्रशासन पर सड़क निर्माण को लेकर दबाव बनाए अन्यथा संग्राली गांव के आंदोलन में शामिल होकर उनका समर्थन करें। ज्ञापन सौंपने में क्षेत्र पंचायत सदस्य पवना देवी, प्रधान सुख शर्मा, पूर्व प्रमुख सुरेश चौहान, कमल सिंह रावत, सुबोध भट्ट, रविन्द्र भट्ट, जगदीश प्रसाद नौटियाल, मदन लाल, संतोष कुमार, समेत अन्य शामिल रहे।
==================================
news 3
================================
कौन सुनेगा श्रमिकों की परेशानियांAug 24, 10:52 pmबताएं
Twitter Delicious Facebook
नई टिहरी गढ़वाल। कहने को तो सरकार की ओर से श्रमिकों के लिए विभिन्न कानून बनाए गए हैं। श्रमिक व श्रमदाता के बीच बेहतर समन्वय बनाने व कर्मचारियों के शोषण पर नजर रखने व कार्रवाई करने के लिए श्रम विभाग का गठन तो किया गया है, लेकिन संसाधनों के अभाव में यह भी लक्ष्य प्राप्त नहीं कर पा रहे हैं। आलम यह है कि टिहरी व उत्तरकाशी के लिए महज पांच कर्मचारी नियुक्त किए गए हैं, जबकि इन जिलों में विभिन्न जल विद्युत परियोजनाओं में हजारों श्रमिक कार्यरत हैं। ऐसे में यह सवाल उठना लाजिमी है कि आखिर श्रमिकों की समस्याएं कौन सुनेगा।
श्रम कानूनों का कड़ाई से पालन करने के लिए सरकार ने श्रम विभाग तो बना दिया, लेकिन इसका ढांचा ही नहीं बन पाया है। संविधान की समवर्ती सूची में शामिल श्रम टिहरी के श्रम अधिकारी के पास उत्तरकाशी की भी जिम्मेदारी है, लेकिन दोनों जनपदों में विभाग के पास कर्मचारियों का टोटा बना हुआ है। टिहरी में श्रम अधिकारी के साथ एक लिपिक व चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी है, जबकि उत्तरकाशी में भी एक लिपिक व एक चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी तैनात है। खास बात यह है कि इन दोनों जिलों में दर्जनों छोटी-बड़ी लघु जल विद्युत परियोजनाएं चल रही है। जहां बड़ी संख्या में श्रमिक कार्य कर रहे हैं। इन श्रमिकों की कई समस्याएं भी है, लेकिन जब विभाग के पास कर्मचारी ही नहीं हैं तो श्रम कानूनों को लागू कराने के लिए कैसे कार्य हो रहा है, यह गौर करने वाली बात है। इसके अतिरिक्त विभाग के पास बचपन संरक्षण अधिनियम, बंधुवा श्रमिक निवारण सहित कई कार्यक्रम हैं, लेकिन ये भी महज कागजों में ही चल रहे हैं। हद तो यह है कि विभाग के पास अपना वाहन व कंप्यूटर तक उपलब्ध नहीं है। श्रम अधिकारी उमेश चंद्र राय स्वीकारते हैं कि संसाधनों के अभाव में कार्य करने में परेशानी हो रही है। उन्होंने बताया कि गत वर्ष टिहरी में बाल श्रमिकों से संबंधित 60 छापे टिहरी व 30 छापे उत्तरकाशी में मारे गए। दोनों जिलों में पांच-पांच बाल श्रमिकों को मुक्त कराया गया। जिनके पुनर्वास की प्रक्रिया चल रही है। उन्होंने बताया कि भवन एवं अन्य सन्न निर्माण कर्मकार अधिनियम में पंजीकरण के लिए सरकारी व गैर सरकारी निर्माण एजेंसियों को पत्र लिखा गया है। लेकिन अब तक सरकारी एजेंसियों ने इसके लिए पंजीकरण नहीं कराया है। उन्होंने बताया कि पंजीकरण के लिए कार्रवाई की जा रही है।