पौड़ी में नहीं जली गैरसैंण की मशाल
Oct 02, 10:21 pm
पौड़ी गढ़वाल। राज्य की स्थायी राजधानी गैरसैंण बनाने को लेकर शुक्रवार को प्रस्तावित प्रदेश बंद को लेकर पौड़ी में किसी भी संगठन ने रुचि नहीं दिखाई। इससे पौड़ी में गैरसैंण की मशाल बुझी रही।
राज्य आंदोलन को परवान देने वाली पौड़ी अब राज्य की राजधानी गैरसैंण समेत अन्य मुद्दों पर साइलेंट मोड पर पहुंच चुकी है। शुक्रवार को विभिन्न संगठनों ने प्रदेश बंद का आह्वान किया था, लेकिन पौड़ी में एक भी संगठन बंद के लिए आगे नहीं आया, इससे पौड़ी बाजार अन्य दिनों की भाति ही खुला रहा। पौड़ी में उक्रांद तक ने बंद को लेकर पहल नहीं की। पौड़ी की राजधानी मुद्दे पर खामोशी से बुद्धिजीवी एवं आंदोलनकारी चिंतित है। लोक गायक नरेद्र सिंह नेगी ने पौड़ी की खामोशी को बेहद दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि गैरसैंण में राजधानी बनाने को लेकर एक बार फिर आंदोलन चलाने की नितांत आवश्यकता है। श्री नेगी ने कहा कि हालांकि राज्य गठन के बाद पौड़ी की लगातार उपेक्षा होती रही है, लेकिन पौड़ी के साथ-साथ समूचे राज्य के विकास के लिए राज्य की राजधानी पहाड़ में बननी जरूरी है। राज्य आंदोलनकारी गणेश चंद्र नैथानी, चंद्रमोहन डोभाल, बाबा मथुरा प्रसाद बमराड़ा का कहना है कि शहीदों के सपनों के अनुरूप का राज्य का विकास नहीं हो रहा है। अधिवक्ता शालिनी नौटियाल, लक्ष्मी रावत, अमित सजवाण एवं महेद्र असवाल ने भी पौड़ी की उपेक्षा को ही पौड़ी की खामोशी का कारण बताया। व्यापार संघ के अध्यक्ष वीरेद्र रावत ने भी राज्य में विकास का पहिया थमने के साथ ही पौड़ी की उपेक्षा को ही यहां की खामोशी का कारण बताया।