Author Topic: Gairsain: Uttarakhand Capital - गैरसैण मुद्दा : अब यह चुप्पी तोड़नी ही होगी  (Read 175483 times)

सुधीर चतुर्वेदी

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समय के चलते नेट पर बैठने का वक़्त नहीं मिला आज बैठा तो गैरसैण मुद्दे पर चारू दा के विचार पडे उनके लेख को पड़कर एक नया जोश जागा की हा हर हाल मे राजधानी उत्तराखंड की गैरसैण होनी चाहिये . हल ही मे हमारे कुछ मित्र देल्ही से गैरसैण की यात्रा पर गये थे उन सभी लोगो को बधाई (हेम भाई, मोहन दा . दयाल जी  , चारू दा, मुकुल जी  आदि ) ये सच मे एक सराहनीय पहल है हो सकता है  इस यात्रा से अगली बार और जयादा लोग गैरसैण राजधानी के लिये एकजुट होंगे. समय के चलते और पहाडो की वास्तविक हालत को देख कर तो यही लगता है की गैरसैण को जल्द से जल्द पहाड़ (उत्तराखंड) की राजधानी घोषित कर देनी चाहिये लेकिन राजधानी तो पहाडी जनता की मांग है शायद हमारे राजनेता ऐशा कभी नहीं चाहंगे कयोंकि उनको जनता के सुख से मतलब नहीं होता उनको जनता की याद सिर्फ और सिर्फ चुनावो मे ही आती है वैशे भी नेताओ को पहाड़ कहा आच्हा लगेगा उनके बच्चे तो देहरादून के या बहार के स्कूल मे पड़ते होंगे उनके पास सब सुख सुवीदा है .
 राजधानी और पहाडो का विकास तो हमे चाहिये अगर गैरसैण राजधानी बनती है तो पहाडो का विकास शुरू हो जायेगा कुछ नये कॉलेज, विश्विधायाला उस साइड मे भी खुलेंगे . वैशे भी अ़ब जनता की आवाज  को दबाना
मुस्किल है राजधानी तो गैरसैण को ही बनना  है.


जय उत्तराखंड
       

dayal pandey/ दयाल पाण्डे

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Shudhir ji ek chingari jo humane bhadkai thi usaka ashar dikh raha hai, sarkar hamari hai usako to har halat main hamari (janta ki ) baat to manani hi padigi aaj nahi to kal Rajdhani gairsain hi hogi, pahadun main kaya palat ho jayegi.

Devbhoomi,Uttarakhand

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Shudhir ji ek chingari jo humane bhadkai thi usaka ashar dikh raha hai, sarkar hamari hai usako to har halat main hamari (janta ki ) baat to manani hi padigi aaj nahi to kal Rajdhani gairsain hi hogi, pahadun main kaya palat ho jayegi.


PANDEY JI YAHI TO HUMARA SAPNA THA OR SAPNA HAI KI PAHADON MAIN KAYA PALAT HO LEKIN KAB

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गैंरसैंण राजधानी पहाड़ियों की अस्मिता का सवाल: उक्रांद


Sep 12, 10:45 pm

बागेश्वर: उत्तराखंड क्रांति दल के कार्यकर्ताओं द्वारा गांव भ्रमण अभियान जारी है। कार्यकर्ताओं ने कई गांवों का भ्रमण कर जन सभाएं की व नए लोगों को पार्टी की सदस्यता दिलाई।
इस दौरान सभाओं में वक्ताओं ने कहा कि गैंरसैंण राजधानी का मुद्दा ही नहीं बल्कि पहाड़ियों की अस्मिता से जुड़ा मुद्दा है। भाजपा व कांग्रेस के हाथों जनता की समस्याओं के निदान की कल्पना नहीं की जा सकती।
http://in.jagran.yahoo.com/news/local/uttranchal/4_5_5784661.html

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

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This news from Gairsain
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गैरसैंण को राजधानी बनाने का लिया संकल्पSep 20, 09:51 pmबताएं

गैरसैंण (चमोली)। पर्वतीय पत्रकार एसोसिएशन की बागेश्वर में आयोजित बैठक में गैरसैंण को राजधानी बनाये जाने के लिए संघर्ष करने का संकल्प लिया गया।

जनसंगठनों की पहल पर आहुत दो अक्टूबर के बंद और राज्य स्थापना दिवस को गैरसैंण में मनाये जाने की रणनीति पर भी चर्चा हुई। बैठक में मुख्य अतिथि गैरसैंण राजधानी संघर्ष मोर्चा के संयोजक डा. शमशेर सिंह बिष्ट ने गैरसैंण राजधानी के औचित्य पर तथ्यों को सामने रखते हुए जनभावनाओं की अनदेखी का राजनैतिक दलों पर आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि कोशिक समिति की संस्तुति गैरसैंण के पक्ष में होने व दीक्षित आयोग भी जनभावना को इसके पक्ष बताया। इसके बाद भी गैरसैंण राजधानी घोषित न करना दुर्भाग्यपूर्ण है, जिसका प्रदेशवासी आने वाले समय में करारा जबाब देगें। पूर्व काबीना मंत्री रामप्रसाद टम्टा ने कहा कि राज्य बनने के बाद सभी सुख सुविधाओं का उपभोग कर रहे है, लेकिन राज्य के लोगों को उनके अधिकार नहीं मिल रहे है। पूर्व राज्यमंत्री हीरा सिंह धपोला ने भाजपा कार्यकाल में मिले अनुभवों को सामने रख कहा कि दृढ़ इच्छाशक्ति का अभाव व नेताओं में सोच की कमी के कारण जनता की राजधानी अभी तक मूर्तरूप नही ले पायी है।

बैठक में पूर्व मंत्री कुमेद सिंह माजिला, उक्रांद के भुवन कांडपाल, सर्वदलीय सभा अध्यक्ष दिनेश बिष्ट, ब्लाक प्रमुख राजेन्द्र टंगडरिया, वन पंचायत संघर्ष समिति प्रदेश अध्यक्ष रमेश, पर्वतीय पत्रकार एसोसिएशन के अध्यक्ष पुरुषोत्तम असनोड़ा, नगरपालिका अध्यक्ष बागेश्वर सुबोध लाल शाह, महेश कांडपाल सहित कई लोग उपस्थित थे।

http://in.jagran.yahoo.com/news/local/uttranchal/4_5_5805264.html

पंकज सिंह महर

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देहरादून, जागरण संवाददाता: राजधानी गैरसैंण को बनाने की मांग को लेकर गैरसैंण राजधानी संयुक्त मोर्चा ने दो अक्टूबर को प्रदेश बंद का आह्वान किया है। इसी दिन को काला दिवस के रूप में भी मनाया जाएगा। गुरूवार को कचहरी स्थित शहीद स्मारक पर पत्रकारों से बातचीत में मोर्चा के पदाधिकारियों ने यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि आंदोलनकारियों का हमेशा से सपना रहा है कि राजधानी गैरसैंण को छोड़ कहीं और न बनाई जाए लेकिन मौजूदा सरकार राज्यवासियों की भावनाओं को न समझते हुए अपने अडि़यल रूख पर कायम है। उन्होंने दीक्षित आयोग द्वारा दून को राजधानी के लिए उपयुक्त स्थान बताए जाने की सिफारिश का विरोध करते हुए कहा कि इसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। दीक्षित आयोग ने सरकार के इशारे पर काम किया है। उन्होंने कहा कि दून को राज्य की अस्थाई राजधानी बनाने के बाद से दून के आम लोगों का लीवन नरकीय हो गया है। यहां राजधानी निर्माण कर सरकार ने इस राज्य को माफियाओं, नौकरशाहों, भ्रष्ट नेताओं, गुंडे बदमाशों, की झोली में डाल दिया है। देहरादून ऐसे लोगों की ऐशगाह बनता जा रहा है। जरूरत है कि सरकार राज्यवासियों की भावनाओं की कद्र करते हुए गैरसैंण को ही राजधानी मनाए। इसी क्रम में गैरसैंण संयुक्त संघर्ष मोर्चा के आह्वान पर 2 अक्टूबर को उत्तराखंड बंद किया जाएगा। इसी दिन को काला दिवस के रूप में भी मनाया जाएगा। पत्रकार वार्ता में उत्तराखंड महिला मंच की संयोजिका निर्मला बिष्ट, कमला पंत, प्रदीप कुकरेती आदि उपस्थित थे।

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गैंरसैंण राजधानी की मांग को लेकर धरना


Oct 03, 01:04 am


बागेश्वर। पर्वतीय पत्रकार एसोसिएशन साझा मंच द्वारा राज्य की राजधानी गैंरसैंण बनाए जाने की मांग को लेकर तहसील मुख्यालय में धरना दिया। इस दौरान आयोजित सभा में वक्ताओं ने कहा कि नौकरशाह अपनी सुविधा के लिए राजधानी को देहरादून से हटाना नहीं चाहते है तथा राजनेताओं के पास कोई अपनी सोच नहीं है। साझा मंच के आह्वान पर बंद पर अधिकांश दुकानें बंद रही।

गैंरसैंण राजधानी की मांग को लेकर आहूत बंद को देखते हुए अधिकांश व्यापारियों ने आज दुकानें बंद रखी। इधर पर्वतीय पत्रकार एसोसिएशन व साझा मंच ने गैंरसैंण राजधानी की मांग को लेकर एसडीएम कार्यालय में धरना दिया। एडवोकेट गोविंद भंडारी की अध्यक्षता में आयोजित सभा को सम्बोधित करते हुए पीयूसीएल के जिलाध्यक्ष नंदा बल्लभ भट्ट ने कहा कि यह प्रदेश का दुर्भाग्य है कि यहां के जनप्रतिनिधियों के पास अपनी कोई सोच नहीं है तथा वे नौकरशाहों के हाथों में खेलना चाहते है। कहा कि नौकरशाह नहीं चाहते है कि गैरसैंण राजधानी बनाकर जनता की सुविधा के लिए अपना त्याग किया जाय।

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पौड़ी में नहीं जली गैरसैंण की मशाल

Oct 02, 10:21 pm

पौड़ी गढ़वाल। राज्य की स्थायी राजधानी गैरसैंण बनाने को लेकर शुक्रवार को प्रस्तावित प्रदेश बंद को लेकर पौड़ी में किसी भी संगठन ने रुचि नहीं दिखाई। इससे पौड़ी में गैरसैंण की मशाल बुझी रही।

राज्य आंदोलन को परवान देने वाली पौड़ी अब राज्य की राजधानी गैरसैंण समेत अन्य मुद्दों पर साइलेंट मोड पर पहुंच चुकी है। शुक्रवार को विभिन्न संगठनों ने प्रदेश बंद का आह्वान किया था, लेकिन पौड़ी में एक भी संगठन बंद के लिए आगे नहीं आया, इससे पौड़ी बाजार अन्य दिनों की भाति ही खुला रहा। पौड़ी में उक्रांद तक ने बंद को लेकर पहल नहीं की। पौड़ी की राजधानी मुद्दे पर खामोशी से बुद्धिजीवी एवं आंदोलनकारी चिंतित है। लोक गायक नरेद्र सिंह नेगी ने पौड़ी की खामोशी को बेहद दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि गैरसैंण में राजधानी बनाने को लेकर एक बार फिर आंदोलन चलाने की नितांत आवश्यकता है। श्री नेगी ने कहा कि हालांकि राज्य गठन के बाद पौड़ी की लगातार उपेक्षा होती रही है, लेकिन पौड़ी के साथ-साथ समूचे राज्य के विकास के लिए राज्य की राजधानी पहाड़ में बननी जरूरी है। राज्य आंदोलनकारी गणेश चंद्र नैथानी, चंद्रमोहन डोभाल, बाबा मथुरा प्रसाद बमराड़ा का कहना है कि शहीदों के सपनों के अनुरूप का राज्य का विकास नहीं हो रहा है। अधिवक्ता शालिनी नौटियाल, लक्ष्मी रावत, अमित सजवाण एवं महेद्र असवाल ने भी पौड़ी की उपेक्षा को ही पौड़ी की खामोशी का कारण बताया। व्यापार संघ के अध्यक्ष वीरेद्र रावत ने भी राज्य में विकास का पहिया थमने के साथ ही पौड़ी की उपेक्षा को ही यहां की खामोशी का कारण बताया।

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

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Lagta hai Janta haar maan Chuki hai Netao ke aage..

Kya hoga is rajya ka God Save.

पौड़ी में नहीं जली गैरसैंण की मशाल

Oct 02, 10:21 pm

पौड़ी गढ़वाल। राज्य की स्थायी राजधानी गैरसैंण बनाने को लेकर शुक्रवार को प्रस्तावित प्रदेश बंद को लेकर पौड़ी में किसी भी संगठन ने रुचि नहीं दिखाई। इससे पौड़ी में गैरसैंण की मशाल बुझी रही।

राज्य आंदोलन को परवान देने वाली पौड़ी अब राज्य की राजधानी गैरसैंण समेत अन्य मुद्दों पर साइलेंट मोड पर पहुंच चुकी है। शुक्रवार को विभिन्न संगठनों ने प्रदेश बंद का आह्वान किया था, लेकिन पौड़ी में एक भी संगठन बंद के लिए आगे नहीं आया, इससे पौड़ी बाजार अन्य दिनों की भाति ही खुला रहा। पौड़ी में उक्रांद तक ने बंद को लेकर पहल नहीं की। पौड़ी की राजधानी मुद्दे पर खामोशी से बुद्धिजीवी एवं आंदोलनकारी चिंतित है। लोक गायक नरेद्र सिंह नेगी ने पौड़ी की खामोशी को बेहद दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि गैरसैंण में राजधानी बनाने को लेकर एक बार फिर आंदोलन चलाने की नितांत आवश्यकता है। श्री नेगी ने कहा कि हालांकि राज्य गठन के बाद पौड़ी की लगातार उपेक्षा होती रही है, लेकिन पौड़ी के साथ-साथ समूचे राज्य के विकास के लिए राज्य की राजधानी पहाड़ में बननी जरूरी है। राज्य आंदोलनकारी गणेश चंद्र नैथानी, चंद्रमोहन डोभाल, बाबा मथुरा प्रसाद बमराड़ा का कहना है कि शहीदों के सपनों के अनुरूप का राज्य का विकास नहीं हो रहा है। अधिवक्ता शालिनी नौटियाल, लक्ष्मी रावत, अमित सजवाण एवं महेद्र असवाल ने भी पौड़ी की उपेक्षा को ही पौड़ी की खामोशी का कारण बताया। व्यापार संघ के अध्यक्ष वीरेद्र रावत ने भी राज्य में विकास का पहिया थमने के साथ ही पौड़ी की उपेक्षा को ही यहां की खामोशी का कारण बताया।


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Now See this news. Surprise Pauri Distt has been great history for Uttarakhand state Struggle but it shocking that there was protest for Capital issue there yesterday.

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उत्तराखंड बंद का मिलाजुला असर

देहरादून/ गढ़वाल जागरण टीम। गैरसैंण राजधानी संयुक्त संघर्ष मोर्चा के आह्वान पर उत्ताराखंड बंद का गढ़वाल मंडल में मिलाजुला असर रहा। राजधानी देहरादून के मुख्य बाजारों में अधिकांश व्यापारिक प्रतिष्ठान दोपहर तक ही बंद रहे। हालांकि ज्यादातर इलाकों में बंद स्वत: स्फूर्त रहा, लेकिन कुछेक क्षेत्रों में दुकानें बंद कराने को लेकर बंद समर्थकों व पुलिस के साथ तीखी झड़पें व जोर-आजमाइश भी हुई।

बंद समर्थकों ने घंटाघर चौराहे पर प्रदेश सरकार का पुतला फूंका और पुलिस प्रशासन के खिलाफ भी जोरदार प्रदर्शन किया। गढ़वाल मंडल के रुद्रप्रयाग, श्रीनगर, उत्तारकाशी, गैरसैंण शहरी क्षेत्र पूर्ण बंद रहा तो वहीं पौड़ी में कोई भी संगठन बंद को लेकर आगे नहीं आया। इसके अलावा नई टिहरी, कोटद्वार में बंद का असर नहीं दिखा। इस दौरान रुद्रप्रयाग में भले ही बंद पूर्ण रूप से सफल रहा, लेकिन कई पंचायत स्तर के जनप्रतिनिधियों ने स्थायी राजधानी गैरसैंण न बनाने की भी वकालत की। कोटद्वार में भी बंद का असर नहीं दिखा। उधर पौड़ी में बंद को लेकर किसी भी संगठन के आगे न आने को बुद्धिजीवियों ने बेहद दुर्भाग्यपूर्ण करार दिया है। उधर बंद से श्रीनगर व रुद्रप्रयाग में बंद से लोगों को काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ा। लोग आवश्यक वस्तुओं के लिए भी जूझते हुए दिखे।

 

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