Author Topic: Save Trees & Plant Trees Initiative by Merapahad-पेड़ बचाओ पेड लगाओ  (Read 36046 times)

पंकज सिंह महर

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पंकज जी  एक request है आप से   जरा उन पेड़ और पोधो की भी जानकारी दे दीजिये जो  आक्सीजन का उत्सर्जन कर सकें और नमी को बचा सकें जिससे हम उस जानकारी को लोगो को बता सके 

सुधीर जी,
आपने बहुत अच्छा प्रश्न पूछा है, मैं आधिकारिक ज्ञाता तो नहीं हूं, लेकिन व्यवहार में पहाड़ों में हमें घाटियों में टुणी, खड़िक, मेल, नाशपाती, माल्टा, नारंगी, नींबू, तिमुल, पीपल, बड़, रीठा, सेमल, बेड़ू, आडू, भीमल आदि के पेड़ लगाने चाहिये और ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बांज, बुरांश, काफल, उतीस, पय्यां, फर, देवदार आदि लगाना चाहिए।
 
पेड़ ही नहीं हमें झाड़ियां भी लगानी चाहिये, क्योंकि झाड़ियां काफी स्थान घेरती हैं और उस स्थान पर नमी को बनाये रखती हैं। इसमें किल्मोड़ा, हिसालू, घिंघारु, भदमाल्यू आदि की झाड़ी लगाई जा सकती है। इसी प्रकार से गिठी, गिलोय आदि की बेल भी अच्छी मानी जाती है। खेतों की बाड़ में रामबांस जैसी झाड़ियों की बजाय हिसालू, किल्मोड़ा, घिंघारु आदि लगाया जाना चाहिये। इसके कई लाभ होंगे, एक तो बाड़ बन जायेगी, दूसरा नमी बची रहेगी, तीसरा चिडि़या और जानवरों के खाने का इंतजाम हो जायेगा, ऐसे पूरी जैव-विविधता बनी रहेगी।
 
इसके अलावा गाड़-गधेरों के किनारे बांस और रिंगाल, निगालू जरुर बोना चाहिये, ये झाडि़यां जितना पानी संचय करती हैं, उतना शायद कोई ऐसी झाड़ी न कर पाये, क्योंकि यह प्रजाति बरसात में पानी का संचयन करती हैं और गर्मियों में उसका उत्सर्जन।

पंकज सिंह महर

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१- पेड़ हमारे अपने हैं, उन्हीं से हमारे सपने हैं।

२- आयेगा नौले-धारे में फिर से पानी, जब आयेगी जंगल पर फिर से जवानी।

३- जंगल बचेंगे, हम बचेंगे।


dayal pandey/ दयाल पाण्डे

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सुधीर जी जितने चौड़े पत्ते उतना ही ज्यादा oxigen का उत्सर्जन बांकी महार जी ने तो बिस्तर पूर्वक लिख ही दिया है
"आज समय की यह पुकार, बच्चा एक और पेड़ हजार, "

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

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As i quoted earlier, the average cutting trees was :
 

1) 4-5 trees for whole year cooking
2) 4-5 Trees for giving support to saplings
3) 6-7 trees for making hay pile (lote)
 
Additionally, if there is any family function like marraige, pooja path etc, again 5-6 trees are required to cut for cooking food.
 
So average reaches - 17 trees per family.
 
If there are 10 marraiges in the village then 60 or 70 more threes will be cut.
This is the situation at present.
 

There is need to think seriously on this rate of cutting trees.

पंकज सिंह महर

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खीमसिंह रावत

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मेहता जी   पहाड़ पर पेड़ पर एक अच्छी शुरुआत की है | पहाड़ों के जंगलों का विनाश ग्रामीणों द्रारा कम ठेकेदारों के द्रारा ज्यादा हुवा है | एक पेड़ की अनुमति लेते है ५ काट डालते हैं | जबकि ग्रामीण लोग अपने खेती में काम आने वाली लकड़ियों को ही कटते हैं | सरकारी प्रयास भी कम नहीं हुए हैं हर साल लाखों रूपया बहाया  जाता है| खेतो की मेढ़ों पर ज्यादा घने पेड़ नहीं लगाए जा सकते है क्योंकि उसकी छाया पड़ने वाली जगह पर फसल कम होती है जिसको असेप कहते हैं   हमारे यहाँ पर एक और झाडी होती है कुरि | जहां पर यह झाडी हो जाती है अन्य पेड़ पौघा नहीं उगता है जानवरों के लिए भी हानि कारक, रीछ, बाघ सूअर के छिपने का बेहतर जगह, इतना जरुर है की जलाने की लकड़ी  मिल जाती है कोयला भी नहीं बनाता है   सरकार भी अपने प्रयासों व योजनावों को ठीक से जनता को नहीं बताती है|

ranbeer

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dear uttaranchaliyo first of all save your tradition & culture than discuss on other topic...................ok

पंकज सिंह महर

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dear uttaranchaliyo first of all save your tradition & culture than discuss on other topic...................ok

रणबीर भाई, जंगलों को बचाना और बसाना उत्तराखण्ड का चलन और संस्कृति दोनो ही है। पेड़ों को कटने से बचाने के लिये अपनी जान की परवाह न कर पेड़ों से चिपक जाना इसी प्रदेश से शुरु हुआ, जिसे अंतर्राष्ट्रीय स्तर तक सराहा गया। जंगलों में ही उत्तराखण्ड बसता, रचता और रमता है, बिना जंगल और पेड़ों के उत्तराखण्ड की कल्पना भयावह है और दिवास्वप्न भी।

ranbeer

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dear brother pankaj ji, mujhe lagta hai kuch difference to hai hi...............mujhe is side ka pahle pata nahi tha mere kisi frind ne bataya.........lagbhag main sabhi uttaranchal websidon ko join kiya hai, aur maine apni tradition aur culture par jyada jor diya hai, lekin kya kahun, bhut dukh huwa hai mujhe, main pahle mumbai main tha ab delhi main hun 7-8 salon se, jab maine pata kiya yahan koi apne tradition aur culture ko nahi janta lagbhag 60%....kher main jyada explain nahi karunga, agar bat karna chaho to main aapse mail ke thru discuss kar sakta hun, phir bataonga kya hal hai apne tradition aur culture ka..............my id is rskuttaranchal@gmail.com......... hope you will contact me...........

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

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Now everyone must make resolution how to spread this message in pahad and your surroundings.

  1.   One must carry this message when ever visit his / her native place. After "Pailag" and sharing well being with each other, also discuss about this issue.

 2.    We are also planning to conduct some programme regarding this issue.

 

 

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