Author Topic: Rajula Malushahi Immortal Love Story - राजुला मालूशाही: अमर प्रेम गाथा  (Read 67596 times)

Anubhav / अनुभव उपाध्याय

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Thanks Dinesh ji for shedding some more light on the Love ballad. Hope you'll be a regular contributor. One thing is sure this Ballad has awaken many a dormant members :)

प्रहलाद तडियाल

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khimsrawat  ju belkool sahe kahte ho (Gujrokoot) wo mere gaowan se satha howa hai........Jaha tak mander Nerman ka kaam hai wo pehle to pata nahi kesne bana per aab jo naya mandeer bana hai wo sare janta ke mahnat ka nateeja hai........raja haru heet ke kahane ko aap ekdam pream khata bhi nahi kah saktee............

AshokMall

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hariom, sir rajula-malu wala topic pada apne vichar likhe is main thoda sudhaar chahta hun, maine likha hai ki iss topic main film banane ko i am ready yadi koie producer mile to,mai bana nahi rahahu. yadi koie producer mile to script ready hai.par kaam kafi kharchee ka hai.

Anubhav / अनुभव उपाध्याय

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Thanks Sir for clarifying waise 1 request hai aap bhi jara prakaash daaliye is story pai.

hariom, sir rajula-malu wala topic pada apne vichar likhe is main thoda sudhaar chahta hun, maine likha hai ki iss topic main film banane ko i am ready yadi koie producer mile to,mai bana nahi rahahu. yadi koie producer mile to script ready hai.par kaam kafi kharchee ka hai.

AshokMall

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abhi rajula ka bairaat pahuchne tak ka recoted sound suna thanx to u..

savitanegi06

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हरु हीत की कहानी तो मैंने भी सुनी है लेकिन  अब जयादा याद नही,
धुर गाँव के एक कवि ने इसको एक पुस्तक में लिख कर संजोया था, लेकिन वह पुस्तक आज नही मिलती है,
८-१० वर्ष पहले  तराड नमक गाँव में एक मूर्ति निकली थी जिसे हरु हीत का माना जाता है और अब वहां भी एक खूब सूरत मन्दिर बन गया है राजा हरु हीत का ,

Anubhav / अनुभव उपाध्याय

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Thanks for the info Savita ji.

हरु हीत की कहानी तो मैंने भी सुनी है लेकिन  अब जयादा याद नही,
धुर गाँव के एक कवि ने इसको एक पुस्तक में लिख कर संजोया था, लेकिन वह पुस्तक आज नही मिलती है,
८-१० वर्ष पहले  तराड नमक गाँव में एक मूर्ति निकली थी जिसे हरु हीत का माना जाता है और अब वहां भी एक खूब सूरत मन्दिर बन गया है राजा हरु हीत का ,


खीमसिंह रावत

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सविता जी आपने ठीक लिखा है शायद कवि का नाम खिमानंद है कुमाउनी पुस्तकों का मिलाने का केन्द्र देल्ही में कुमाउनी साहित्य सदन (चिंतामणि ) सीताराम बाजार था अब ठीक ठीक से पता नही है की अब भी वहां कुमाउनी साहित्य मिलाता है ya nahi , पता लगा कर बताऊंगा /  :)
एक और किताब लिखी गई है श्री केसरसिंह बिष्ट जी द्वारा /  उत्तरायण प्रकाशन बी ३६७ नेहरू विहार दिहली से प्रकाशित है श्री केसरसिंह बिष्ट रचित किताब मेरे पास मौजूद है /
जहाँ तक तराड में मूर्ति मिलाने की बात है मूर्ति नही बल्कि एक पत्थर पर चित्र सा बना हुवा है और एक और पत्थर पर सात औरतो के चित्र है ऐसा मन जाता है की ये उनकी सात भाभिया है/ उसका भी फोटो मेरे पास है सकैन करके फॉरम में डाल दूंगा /

khim

Anubhav / अनुभव उपाध्याय

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Dhanyavaad Rawat ji is jaankaari ke liye aur aapse aur details ki pratiksha main :)

सविता जी आपने ठीक लिखा है शायद कवि का नाम खिमानंद है कुमाउनी पुस्तकों का मिलाने का केन्द्र देल्ही में कुमाउनी साहित्य सदन (चिंतामणि ) सीताराम बाजार था अब ठीक ठीक से पता नही है की अब भी वहां कुमाउनी साहित्य मिलाता है ya nahi , पता लगा कर बताऊंगा /  :)
एक और किताब लिखी गई है श्री केसरसिंह बिष्ट जी द्वारा /  उत्तरायण प्रकाशन बी ३६७ नेहरू विहार दिहली से प्रकाशित है श्री केसरसिंह बिष्ट रचित किताब मेरे पास मौजूद है /
जहाँ तक तराड में मूर्ति मिलाने की बात है मूर्ति नही बल्कि एक पत्थर पर चित्र सा बना हुवा है और एक और पत्थर पर सात औरतो के चित्र है ऐसा मन जाता है की ये उनकी सात भाभिया है/ उसका भी फोटो मेरे पास है सकैन करके फॉरम में डाल दूंगा /

khim

 

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