Author Topic: Wild Animal Menace In Uttarakhand-उत्तराखण्ड में जंगली जानवरों का आतंक  (Read 25902 times)

Devbhoomi,Uttarakhand

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EK OR DUKHAD GHTNAA

मौत बाघ की, संकट में वनगुर्जर


कालागढ़ वन प्रभाग के निकट पिछले माह हुई बाघ की मौत ने आसपास के इलाके में रह रहे वन गुर्जरों को संकट में डाल दिया है। इस घटना के बाद विभाग ने एक दर्जन वन गुर्जर परिवारों को इलाका छोड़ने का फरमान बगैर विस्थापन व्यवस्था के ही कर दिया है। मामला संज्ञान में आने के बाद शासन ने विभाग से रिपोर्ट मांगी है।

पौड़ी गढ़वाल जिले के गौजेडा वन क्षेत्र में कई वर्षो से काफी संख्या में वनगुर्जरों के परिवार रह रहे हैं। ये मुख्य रूप में दुग्ध व्यवसाय से जुडे़ हैं। 11 जनवरी को यहां से सटे कालागढ़ वन प्रभाग क्षेत्र में एक बाघ का शव मिला। जनवरी के अंत में विभाग के एक दल ने घटनास्थल का मुआयना कर आसपास में रह रहे कई गुर्जरों से पूछताछ भी की।

 विभाग को शक है कि घटना के पीछे वनगुर्जरों का ही हाथ है। विभाग ने 12 फरवरी को इन परिवारों को मवेशियों समेत वहां से हटने का न केवल नोटिस जारी कर दिया, बल्कि बलपूर्वक खाली कराने की चेतावनी भी दी गई है।

 रोजी-रोटी और आसरे के छिनने से भयभीत गुर्जर परिवारों ने पहले वन विभाग और अब शासन का दरवाजा खटखटाया है। पीड़ितों ने विभागीय सचिव एमएच खान को बताया कि इस घटना से उनका कोई लेना-देना नहीं है। इसके बाद भी विभाग उनके विस्थापन की कोई व्यवस्था किए बगैर ही हटा रहा है। मामले को गंभीरता से लेते हुए सचिव ने विभाग से रिपोर्ट मांगी है।


http://in.jagran.yahoo.com/news/local/uttranchal/4_5_6206330.html

Devbhoomi,Uttarakhand

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IN JANGALI JANVARON E TO GARIBON KA JEENA HRAAM KAR DIYA KYA KAREN BAICHARE GAREEB BHI INKO KUCHH KISMAT NE MARA OR AB JANGALI JANVAR BHI PICHHE PADE HAIN

बाघ ने किशोर को बनाया शिकार

सुरई रेंज के जंगल में मवेशी चराने गए किशोर को बाघ ने शिकार बना लिया। करीब बारह घंटे बाद किशोर का क्षतविक्षत शव बरामद हुआ। शव को पोस्टमार्टम के बाद परिजनों को सौंप दिया गया। इधर बाघ के हमले में एक और मौत से वन सीमा से लगे गांवों में दहशत बढ़ गई है।

गुर्जर बस्ती जमौर का अब्दुल अजीज (15) पुत्र अब्दुल मुजीज बुधवार की अपराह्न कु छ अन्य बच्चों के साथ सुरई रेंज के जंगल में मवेशी चराने गया था। देर शाम तक वह वापस नहीं लौटा, इस पर परिजनों ने उसकी खोजबीन शुरू की।

 देर रात किशोर का एक पैर जंगल में झाडि़यों के बीच मिला। गुरुवार की सुबह परिजनों ने ग्रामीणों की मदद से फिर से शव की खोजबीन शुरू की। घटनास्थल से काफी दूर जंगल में किशोर के धड़ का कुछ हिस्सा व सिर पड़ा मिला। शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया।

उपप्रभागीय वनाधिकारी जेबी सिंह, वन क्षेत्राधिकारी गोपाल राम ग्वासीकोटी, डब्ल्यूडब्ल्यूएफ के परियोजना अधिकारी डा.डीएस चौहान, महेश पुनेठा, त्रिलोक जोशी आदि ने घटनास्थल का निरीक्षण कर जानकारी ली। हमले के शिकार किशोर के परिजनों को पांच हजार की सहायता राशि प्रदान की गई।


http://in.jagran.yahoo.com/news/local/uttranchal/4_5_6213718.html

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मवेशीखोर का आतंक, कई पशुओं को बनाया निवाला

तहसील क्षेत्र के अनेक गांवों में मवेशीखोर बाघ का आतंक छाया हुआ है। पिछले दो दिनों में न्याय पंचायत ठौनीगाड़ के ग्राम नैकाना से लगे डोटीगाड़ के जंगल में बाघ ने दो गाय व एक बैल को अपना निवाला बना लिया।

गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन कर रहे नैकाना के माधो राम तथा कुंवर राम की दुधारु गाय तथा तारा चन्द्र के बैल को बाघ ने मौत के घाट उतार दिया। बाघ के हिंसक होने से ग्रामीण दहशत में हैं, चरवाहे जंगल जाने से भी डरने लगे हैं।

 ग्राम प्रधान भीम राम ने शासन-प्रशासन से बाघ के आतंक से निजात दिलाने व पीड़ित ग्रामीणों को उचित आर्थिक मुआवजा दिए जाने की मांग की है।

इधर चनौदा क्षेत्र के खकोली, माला, बनौड़ा से लगे जंगलों में भी बाघों का आतंक फैला हुआ है। ग्रामीणों ने कई बार जंगल में बाघों को देखा है। इन क्षेत्रों में भी कई मवेशियों तथा पालतू कुत्तों को बाघ ने अपना निवाला बनाया है।

 खकोली सहित अनेक गांवों के ग्रामीण शाम ढलते ही बाघ के डर से घरों के चारों ओर शोरगुल कर जाग कर रहे हैं। क्षेत्र के अनेक पंचायत प्रतिनिधियों तथा ग्रामीणों ने बाघ सहित अन्य जंगली जानवरों के नुकसान की क्षतिपूर्ति किसानों को दिए जाने की मांग की है।


http://in.jagran.yahoo.com/news/local/uttranchal/4_5_6231663.html

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खोली गांव में बाघ ने पांच मवेशियों को निवाला बनाया
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बागेश्वर: विकासखंड के खोली गांव में कई दिनों से बाघ का आतंक बना हुआ है। बाघ ने गांव के कई मवेशियों को अपना शिकार बना लिया है। बाघ के भय से ग्रामीणों का सायं घर से निकलना मुश्किल हो गया है। ग्रामीणों ने वन विभाग से बाघ के आतंक से निजात दिलाने की मांग की है।

ग्रामीणों ने बताया कि गांव में लम्बे समय से बाघ का आतंक बना हुआ है बाघ द्वारा दिन में भी गांव में प्रवेश किया जा रहा है। साथ ही सायं होते ही वह लोगों के घरों के आंगन में डेरा जमा रहा है। बाघ द्वारा गांव के खेम सिंह, लाल सिंह, चंदन सिंह व कुंदन सिंह की दुधारु गाय व रघुनाथ सिंह के बछडे़ को अपना शिकार बना दिया इसके अलावा अन्य कई अन्य पालतू जानवरों को भी अपना शिकार बनाया है। ग्रामीणों ने बताया कि बाघ के आतंक से वे सायं होते ही घरों से निकलने में घबरा रहे हैं, जबकि महिलाएं घास लेने के लिए जंगल व खेतों में जाने में घबरा रहे हैं। पूर्व जिला पंचायत सदस्य कुंदन सिंह परिहार, राजेंद्र परिहार आदि ने बाघ के आतंक से निजात दिलाने की मांग की है।


http://in.jagran.yahoo.com/news/local/uttranchal/4_5_6719552.html

lpsemwal

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एक तरफ बारिश की मर तो दूसरी और जंगली जन्बरों का अत्याचार, खेती किसानी करके जो भी आस लगे थी उसका परिणाम अपनी आँखों के सामने समाप्त होते देख रहे हैं पहाड़ के किसान. मदद कर भगवन.

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ये जो न्यूज़ है वो mere  गाँव क है

गुलदार के आंतक से ग्रामीण दहशत में
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घनसाली(टिहरी)। भिलंगना प्रखंड के ग्यारहगांव पट्टी के दर्जनों गांवों में गुलदार के आतंक से ग्रामीण दहशत में हैं। सायं ढलते ही गुलदार गांव में दस्तक दे रहा है, जिससे लोगों में भयजदा हैं। रविवार को ही गुलदार ने जाख निवासी लालमणी जोशी पर हमला कर घायल कर दिया। ग्रामीणों ने वन विभाग से गुलदार को पकड़ने की मांग की है।
प्रखंड के जाख, शांताखाल, भेटी, पाख, दोणी, खसेती, डांग और मुंडेती सहित दो दर्जन से अधिक गांव में गुलदार ने आतंक मचा रखा है। ग्रामीणों ने बताया कि गुलदार ने अब तक दो दर्जन से अधिक मवेशियों को अपना निवाला बना चुका है। जबकि कई बच्चों और महिलाओं को भी अब तक घायल कर चुका है।

रविवार को गुलदार ने जाख निवासी लालमणी जोशी पर हमला कर घायल कर दिया। ग्रामीणों के शोर मचाने पर गुलदार भाग निकला। ग्रामीण प्यारे लाल डंगवाल, पुरुषोत्तम सिंह पंवार, प्रताप सिंह सजवाणा, दुर्गा कंसवाल और सूरत सिंह ने बताया कि क्षेत्र में गुलदार के भय से ग्रामीण अपने बच्चों को स्कूल नहीं भेज पा रहे हैं। उन्होंने कहा कि गुलदार सुबह-शाम को गांव में धमक जाता है। उन्होंने कहा कि शीघ्र गुलदार को पकड़ने के लिए पिंजरा नहीं लगाया गया तो ग्रामीणों को आंदोलन के लिए बाध्य होना पड़ेगा।

http://www.amarujala.com/city/Tihri/Tihri-5747-16.html

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गुलदार की दस्तक से दहशत
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रामनगर: कॉर्बेट पार्क से सटे कोटद्वार रोड क्षेत्र में गुलदार की मौजूदगी से लोग दहशत में हैं। हालांकि सीटीआर प्रशासन ने सीमा पर ऊंची दीवार खड़ी की है। मगर सांझ पड़ते ही गुलदार क्षेत्र में आ धमकता है और पूरी रात आबादी के ठीक सामने दीवार पर बैठ आने-जाने वालों पर नजर रखता है। हालांकि अभी तक गुलदार ने कोई नुकसान नहीं पहुंचाया है पर आशंका से इनकार भी नहीं किया जा सकता।

दरअसल, सीटीआर की दीवार के सामने ही आवासीय मकान हैं। लोगों की आवाजाही भी यहां देर रात तक रहती है। इधर दीपावली की रात आतिशबाजी के शोर और लोगों की आवाजाही के बीच गुलदार के बेधड़क क्षेत्र में घुस आने से लोग भयभीत हैं। रात लगभग 9:30 बजे कार से अपने घर लौट रहे वन विकास निगम के लेखाकार भुवन चंद्र बिष्ट की नजर जब गुलदार पर पड़ी तो खासे डर गये। हालांकि साहस जुटा कर उन्होंने कार की हेडलाइट के सहारे वाहन के अंदर से ही गुलदार की कई फोटो खींची। इस बीच गुलदार अपनी जगह से हिला ही नहीं।

जब इस बारे में पास ही आबादी में रहने वालों को पता चला तो वे भी खौफ में आ गये। दीवार के सामने रहने वाले अविनाश व सुनीता रस्तोगी ने बताया, लोग देर रात तक घर पहुंचते हैं। ऐसे में खतरा बढ़ गया है। उन्होंने सीटीआर प्रशासन से सुरक्षा के पुख्ता बंदोबस्त करने का आग्रह किया है।

..जब पुलिस कर्मी ही भाग निकले

पेट्रोलिंग पर पुलिस कर्मियों के साथ निकले दरोगा एजाज आलम को यही गुलदार रात को एक घर के बरामदे में बैठा मिला। घबराये चालक ने वाहन की हेडलाइट व हूटर की आवाज का सहारा ले
कर गुलदार को हटाने की कोशिश की मगर वह बेखौफ आराम से बैठा रहा। उसके तेवर देख उल्टा पुलिस कर्मियों को ही वाहन भगाना पड़ा। दूसरे दिन एसआई ने मोहल्ले में पहुंच लोगों से रात में अतिरिक्त सतर्कता बरतने को कहा।

http://in.jagran.yahoo.com/news/local/uttranchal/4_5_6882622.html

दैवीय आपदाओं के साथ - साथ ये जंगली जानबर भी लोगों का जीन हराम कर दिया है

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In jangali janvaron main bhi hoti haii jindagi or maut ki jang

सुअर से संघर्ष में जख्मी बाघिन की मौत
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हल्द्वानी/ बैलपड़ाव: सुअर से संघर्ष में घायल बाघिन ने दम तोड़ दिया। उसे गंभीर हालत में पंतनगर विश्वविद्यालय स्थित पशु चिकित्सालय में उच्च चिकित्सा के लिए रखा गया था। चिकित्सकों के मुताबिक बाघिन की मौत हाइपोथर्मिया व पैरालाइसिस की वजह से हुई। पोस्टमार्टम के बाद उसका बिसरा जांच के लिए आईवीआरआई बरेली भेजा जायेगा।

बताते चलें कि बीती बुधवार को तराई पश्चिमी वन प्रभाग के गढ़ीनेगी गांव से सटे दक्षिणी जसपुर प्लॉट संख्या-23 में एक बाघिन घायल अवस्था में मिली थी। वन विभाग के मौका मुआयना करने के बाद अंदेशा जताया था कि बाघिन जंगली सुअर से संघर्ष में घायल हुई।

घटना स्थल पर सुअर के बाल भी पड़े थे। बाद में बाघिन को गंभीर हालत में पंतनगर पशु चिकित्सालय पहुंचाया गया। मगर बाघिन के शरीर का पिछला हिस्सा सुन्न पड़ गया था। रविवार दोपहर बाघिन की उपचार के दौरान मौत हो गई। उसकी उम्र करीब चार वर्ष बताई जा रही है। चिकित्सकों का पैनल सोमवार को पोस्टमार्टम करेगा। पोस्टमार्टम के बाद बाघिन का बिसरा बरेली स्थित आईवीआरआई भेजा जायेगा। चिकित्सीय परीक्षण में पशु चिकित्सकों ने बाघिन के शरीर में हाइपोथर्मिया व पैरालाइसिस की पुष्टि की है।


http://in.jagran.yahoo.com/news/local/uttranchal/4_5_6954947.html



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उत्तराखंड के हर जिल्ले में जंगली जानवरों ने आतंक मचाया हवा है

वन महोलिया में दिखा बाघ, दहशत
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खटीमा: सीमांत क्षेत्र में बाघ का आतंक बढ़ता जा रहा है। वन महोलिया में बाघ दिखने से गांव में दहशत फै ल गयी। इससे पूर्व बाघ ने पचौरिया व मेलाघाट गांव में हड़कंप मचा रखा है। वन विभाग गांव वालों को बाघ के आतंक से निजात नहीं दिला पा रहा है। जिसकी वजह से ग्रामीण सहमे हुए हैं।

सीमांत क्षेत्र में बाघ की दहाड़ से ग्रामीण भयभीत हैं। आये दिन बाघ किसी न किसी गांव में घुस रहा है। और मवेशियों को अपना शिकार बना रहा है। ग्रामीणों को भय है कि बाघ अभी तो मवेशियों को निवाला बना रहा है। वह कभी भी उन पर भी हमला कर अपना शिकार बना सकता है। मंगलवार की रात बाघ वन महोलिया गांव आबादी के पास घुस आया, इससे गांव मे दहशत फैल गयी। ग्रामीणों का कहना है इससे पूर्व मे भी बाघ कई बार गांव में घुस चुका है जिसकी जानकारी वन विभाग को दे दी थी। फिर भी विभाग ने बाघ से बचाव के कोई इंतजाम नहीं किए हैं। इससे ग्रामीणो मे रोष व्याप्त है। वहीं बाघ ने मेलाघाट व पचौरिया गांव मे भी अपना आतंक मचा रखा है। आबादी में बाघ के आने से क्षेत्रवासी भयभीत हैं।


http://in.jagran.yahoo.com/news/local/uttranchal/4_5_7033342.html

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बाघ आदमखोर घोषित, मारने के आदेश
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,रामनगर: मुख्य वन्य जीव प्रतिपालक श्रीकांत चंदोला ने बाघ द्वारा महिला को निवाला बनाने के मामले में चिंता जाहिर की है। उन्होंने कहा कि यह वाकई एक बुरा हादसा है। बाघ को आमदखोर घोषित कर दिया गया है।

श्री चंदोला ने बताया कि सीटीआर के निदेशक को वन्य जीव संरक्षण अधिनियम 1972 की धारा 11 से प्रदत्त अधिकारों के तहत बाघ को मारने के आदेश दे दिये गये हैं। अब आदमखोर बाघ को चिन्हित कर उसे मारा जायेगा। जिससे कि वह बाघ फिर आगे किसी पर हमला न कर सके। उन्होंने बताया कि जंगल में गश्त के लिए तीन टीमें लगाई गई है। श्री चंदोला ने कहा कि जंगल की सीमा में दीवार आदि बनाने से ज्यादा ग्रामीणों के सहयोग की आवश्यकता है। उल्लेखनीय है कि बुधवार को आदमखोर बाघ ने देवीचौड़ सुदंरखाल निवासी पैंतालिस वर्षीय देवकी देवी पत्‍ि‌न धनी राम को अपना निवाला बना लिया था। देवकी घटना वाले दिन गांव की पांच- छह महिलाओं के साथ कार्बेट टाइगर रिजर्व के सर्पदुली रेंज में घास लेने गई थी। सभी महिलाएं घास काट रही थी कि इसी दौरान घात लगाये बैठे बाघ ने देवकी देवी पर हमला बोल दिया था। बाघ के हमले का शिकार हुई महिला की तलाश के लिए सैकड़ों ग्रामीण जंगल की खाक छानते रहे। जंगल में काफी देर बाद उन्हें महिला की दाई टांग, साड़ी, चरेऊ, दरांती पड़ी मिली। जबकि उसका शव बरामद नही हो पाया था। यहां यह भी बता दें कि आदमखोर बाघ ने अब तक छह महिलाओं को अपना शिकार बनाया है। इसमें पांच घटनाएं कार्बेट टाइगर रिजर्व क्षेत्र तथा एक घटना रामनगर वन प्रभाग के अंतर्गत घटित हुई। गत19 जनवरी 2006 को ढेला रेंज में गोदी देवी, कार्बेट टाइर रिजर्व के सर्पदुली रेंज में 4 फरवरी 2009 को भगवती देवी, 6 फरवरी 2010 को सर्पदुली रेंज में ही कांति देवी, बारह नवम्बर 2010 को सर्पदुली रेंज में नंदी देवी को बाघ ने अपना शिकार बनाया। जबकि 18 नवम्बर को रामनगर वन प्रभाग के चुकुम में कल्पना मेहरा बाघ का निवाला बनी थी। फिर बुधवार को कार्बेट टाइगर रिजर्व के सर्पदुली रेंज में ही देवकी देवी को उसने अपना निवाला बना लिया। इस पर ग्रामीणों का आक्रोश बढ़ गया और ढिकाला जोन में ग्रामीणों ने आंदोलन शुरू किया। तब वन विभाग के अधिकारियों ने बाघ को आदमखोर घोषित करने का निर्णय लिया।

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