Author Topic: Meaning Of Lyrics Of Songs - उत्तराखंडी लोक गीतों के भावार्थ  (Read 12280 times)

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

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MEANING OF UTTARAKHANDI SONGS LYRICS  : उत्तराखंडी लोक गीतों के भावार्थ

Dosto,

There are a lot of Uttarakhandi Folk Songs, which have great social meanings and have been composed on social movement, cultural awareness, environment awareness etc. Often, it is seen that Uttarakhandi born and brought up out of Uttarakhand could understand exact meaning of these songs.

We have already written lyrics of various Uttarakhand. However, we will now write lyrics such songs with (Bhavarth) so that there is no problem in understanding the songs lyrics.

Hope you would also share similar kind of information under this thread.

Regards,


M S Mehta

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

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This is song based on Tehri Dam and Negi ji has himself written (Bhavarth) of this song in Nainital Samachar.


डामा खातीर
लेखक : नरेन्द्र सिंह नेगी
अबारी दा तु लम्बी छुट्टि लेकि ऐई, ऐगे बगत आखीर।
टीरि डूबण लैग्यूँ चा बेटा, डाम का खातीर।।
भेंटीजा यूँ गौला-गवींड़ों जौंमा, खेलिकी सयाणु ह्वें त्,
ग्वाया लगैनी जैं डंड्यालि जै चैंक, जाँ बाटों आणू जाणु रै तू
कखन द्यखण लठ्याला त्वैन जलम भूमी या फीर
टीरि डुबुण…..।।
लसण प्याजे कि बाड़ि संगोड़ि सेरा दोखरी-पंगुड़ी
डूबि जाली पाणी मा भोला, बाब-दादों कि कुणि
आंख्यूंमा रिगणी राली सदानी, हमारी तिबारी-सतीर
टीरि डुबुण…….।।
पितरुकू बसायूँ गौऊं, सैत्यूं पाळ्यूं बण
धारा-मंगारा गुठ्यार चैक, कनुक्वैक छोड़ण
कंठ भरीक औंद उमाळ, औ बांधैजा धीर।
टीरि डुबुण……।।
हे नागराजा हे भैरों तुमारु, हमुन क्याजि ख्वाई
हे बोलांदा बदरी त्वैन, कख मुक लुकाई
हे बिधता कन रुठीनी हमुकू द्याप्तौं का मंदीर।
टीरि डुबुण……।।
रज्जाकु दरबार घन्टाघर, आमू का बग्वान
कनु डुबालो यो टीरि बजार सिंगोरियूं की दुकान
समळौण्या रै जाली भौळ साक्यूँ पुराणी जागीर।
टीरि डुबुण……।।
समझैदे अपिड़ि सरकार, द्वि चार दिन ठैरि जावा
बुझेण द्या यूँ दानि आँख्यूँ, बुढ-बुढ्यऊँ सणि मन्न द्यावा
ज्यँदि आँख्यूँन कनुक्वे द्यखण, परलैकी तसबीर।
टीरि डुबुण……।।

नरेन्द्र नेगी
===========================================

भावार्थ:-
============================================

आखिरी साँस लेता हुआ
डाम के लिए डूब रहा है टिहरी
इस बार तुम लेकर आना लम्बी छुट्टी
जहाँ खेल कर बड़ा हुआ तू / जिस आँगन को नापा घुटनों से
आता जाता रहा जिन गलियारों से

इस गाने को सुनने, इसका हिन्दी अर्थ समझने और इसका वीडियो देखने के लिये यहाँ क्लिक करें
मिल-भेंट जाना इन गलियों-चैबारों को
कहाँ मिलेगा जन्मभूमि का फिर दर्शन
डूब जायेंगे पुरखों के मकान
डूबेगी लहसुन प्याज की क्यारी
डूबेंगे सिंचित खेत / मकान, उनके शहतीर
हमेशा चक्कर काटेंगे / आँखों के आगे।
कैसे छोड़े ंमित्रों का बसा-बसाया गाँव
पाला-पोसा जंगल / कैसे छोड़ें पानी के धारे-नौले
आँगन-चैक कैसे छोड़ें
रह-रह कर भीतर के उबाल से कण्ठ फफकता
तुम आकर धीर बँधा जाना।
हमने क्या जो खोया / हे नागराजा! हे भैरव!!
कहाँ छुपाया मुँह तुमने / ओ बोलान्दा बदरी
कैसे रूठे हमसे देवों के मन्दिर।
कल रह जायेंगे स्मृतियों में
राजा का दरबार-घंटाघर
आम के बगीचे / कैसा मंजर होगा जब
डूबेगा टिहरी बाजार / दूकानें सिंगोरी की
और पुरानी जागीर।
कोई समझा दे यह सरकार
रुक जाये दिन दो-चार
बुझने दे बूढ़ी आँखों की जोत / मरने दे
कैसे देखें जिन्दा आँखों से / प्रलय की तस्वीर।


Source : http://nainitalsamachar.in/dama-khatir-by-narendra-singh-negi-and-rajendra-rawat-raju/


एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

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स्वर्गीय श्री गोपाल बाबू गोस्वामी जी की आवाज मे देवी बराही की स्तुति जिसका हिंदी रूपांतरण भी नीच भावार्थ के साथकिया है:

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ॐ सर्व मंगल मंगालिये, शिवे स्वार्थ सधिगे 
शरणे त्रिमबके  गौरी, नारायणी नमोस्तते
---------------------------------------------

देवी बराही मेरी सेवा लिया
वर दैणा होया..
देवी बराही मेरी सेवा लिया

देवी बराही मेरी सेवा लिया 
वर दैणा होया..
देवी बराही मेरी सेवा लिया हे

अक्षत चन्दन दियो फूल ना पाती
दियो ना बाती
दियो ना बाती... मेरी सेवा लिया हे

देवी बराही मेरी सेवा लिया 
वर दैणा होया..
देवी बराही मेरी सेवा लिया हे

तुमरी शरण आयो भेटोई के लायो
चौल हरिया
चौल हरिया.. मेरी सेवा लिया हे..

देवी बराही मेरी सेवा लिया 
वर दैणा होया..
देवी बराही मेरी सेवा लिया हे..

हम मागणी भैया.. जनम मागन रैया
तुमि दानी होया,  मेरी सेवा लिया हे..

देवी बराही मेरी सेवा लिया 
वर दैणा होया..
देवी बराही मेरी सेवा लिया हे

तुमरी शरण आयो, पञ्च देव मेरा,
कृपा करिया.
कृपा करिया हे..

देवी बराही मेरी सेवा लिया 
वर दैणा होया..
देवी बराही मेरी सेवा लिया हे

इस गाने को esnips मे भी सुन सकते है .

http://www.esnips.com/doc/496fa6d4-bd1a-4e96-aa49-84b1d4252d24/Devi-Varahi-meri-sesa-
-------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------
भावार्थ
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इस भजन में एक निर्धन गरीव व्यक्ति देवी भगवती - बराही के मंदिर मे भेट चडाता है और माता से प्राथना करता है की मेरी रूखी - सूखी सेवा को स्वीकार कर लीजिये..

देवी बराही माता
तुम मेरी सेवा को स्वीकार करिए
और सब का भला कीजिये ..(दैणा ह ोना)

यह गरीब प्राथना करता है
हे देवी माता, मेरी पास ना आपको चडाने के लिए चन्दन
ना तो अक्षत (चावल के दाने है), ना फूल है और ना दिया और बाती 
फिर आप मेरी सेवा को स्वीकार कीजिये

देवी बराही माता
तुम मेरी सेवा को स्वीकार करिए
और सब का भला कीजिये ..(दैणा होना)

मै  आपके शरण मै आया हूँ माँ
भेट स्वरुप चौल हरिया लाया हूँ
मेरी सेवा को स्वीकार करिए ..

फिर यह गरीब कहता है..
हम तो मागने वाली, और जन्मभर आपसे मागते रहेंगे
लेकिन आप दानी. होना.. कृपालु होना.
मेरी सेवा को स्वीकार करना..

देवी बराही माता
तुम मेरी सेवा को स्वीकार करिए
और सब का भला कीजिये ..(दैणा होना)

तुमारी शरण आयो पञ्च देवा मेरा..
हे देवा कृपा करना और हमारा दुःख दूर
कर दो माँ. ..

देवी बराही माता
तुम मेरी सेवा को स्वीकार करिए
और सब का भला कीजिये ..(दैणा होना)

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

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गोपाल बाबू गोस्वामी जी का यह गाना जो भारत माता की सेवा और देव भूमि की देवा के लिए शपथ दिलाता है
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धन मेरो भारत मै तेरी बलाई लियोना..
धन मेरी पहाड़ में तेरी बलाई लियोना..

हे जनम -२ मे तेरी सेवा मै रुना
तेरी सेवा लीजी मे जियूना रूना - मरूना
------------------------------------------------

धन मेरो भारत मै तेरी बलाई लियोना..
धन मेरी पहाड़ में तेरी बलाई लियोना..

हे जनम -२ मे तेरी सेवा मै रुना
तेरी सेवा लीजी मे जियूना रूना - मरूना

धन मेरो भारत मै तेरी बलाई लियोना..
धन मेरी पहाड़ में तेरी बलाई लियोना..  
-----------------------------------------------

तेरी माती चनाण मे खवार लगूना रूना
तेरी पीडा मिटूना.. मै गीत लेखूना रूना. --२
बीटिया  भाई बहिना को.  धात लगुना - २
दुःख देखि भे . शक्ति के जगूना..
त्यार शक्ति पीठो मै ज्योति जगूना रुना..
-------------------------------------------

धन मेरो भारत मै तेरी बलाई लियोना..
धन मेरी पहाड़ में तेरी बलाई लियोना..

हे जनम -२ मे तेरी सेवा मै रुना
तेरी सेवा लीजी मे जियूना रूना - मरूना
---------------------------------------------

मै तेरी सेवा मै रुना..
मै तेरी सेवा मै रुना..

YOU CAN ALSO LISTEN THIS SONG THROUGH ESNIPS :

http://www.esnips.com/doc/4effc5f8-b2ba-4efc-93ab-c766a7e3bee4/Dhan-mero-Bharata-mein-Teri-balai-Leun-lo
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                                TRANSLATION IN HINDI

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इस गाने मै नव युवक को भारत माता की सेवा और अपने देवी उत्तराखंड ( पहाड़)के लिए हर समय सेवा मै रहने के बचन देता है!

धन मेरा भारत मै तुझे हर समय याद करता रहूँगा.
धन मेरा पहाड़ मै तुझे हर समय याद करता रहूँगा.
तेरी सेवा के लिए जनम २ तक काम करता रहूँगा.

तेरा कष्ट दुःख मिटाने के लिए और तेरी सेवा मे
अपनी जिंदगी कुर्वान कर दूंगा..

वह शपथ लेता है की तेरी मिटटी की चन्दन की तरह
सिर पर लगाते रहूँगा..
और एक गायक के और उसकी पीड़ी मिटाने के लिए गीत लिखता रहेगा
और दुखी भाई बहिनों को आपने साथ आगे बढाते रहेगा..
पहाड़ के देवी के शक्ति पीठो मे, सब की पीडा के निवारण हेतु..
दिया जलायेगा..

धन मेरा भारत मै तुझे हर समय याद करता रहूँगा.
धन मेरा पहाड़ मै तुझे हर समय याद करता रहूँगा.
तेरी सेवा के लिए जनम २ तक काम करता रहूँगा.

तेरा कष्ट दुःख मिटाने के लिए और तेरी सेवा मे
अपनी जिंदगी कुर्वान कर दूंगा..

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

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A few lines of Ritu Raina
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दैणा दैणा नरैणा आगे रितु रैणा
फूली गेछा देणा, मेरी बैणा नरैणा आगे रितु रैणा
फूली गेछा देणा, मेरी बैणा नरैणा आगे रितु रैणा
 
HINDI TRANSLATION

फूल गई है दैणा मेरी बहना नरैणा, आ गई ओ ऋतु रैणा
फूल गई है दैणा मेरी बहना नरैणा, आ गई ओ ऋतु रैणा

दैणा - राई  
 

 
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एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

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हई हई हई सुपारी खई खई
सुन माया कैसी अच्छी धूप लगी है

हिसालू की बेल पिया हिसालू की बेल
मुझे बहुत याद आते हैं वो बचपन के खेल


हिसालू - पहाड़ में पाया जाने वाला जंगली फल

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

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This is Negi Ji's Song which is based on Migration
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ना  दौड़  ना  दौड़  ते  उन्दरी  का  बाटा  उन्दरियुं  का  बाटा ...... 2
उन्दरी  कु  सुख  दुई  चार  घडी  कु ,
उकाली  कु  दुःख  सदनी  को  सुख  लाटा ,
ना  दौड़  ना  दौड़  ते  उन्दरी  का  बाटा  उन्दरियुं  का  बाटा ...... 2

सौन्गु  चितेंद  आर  दौडे  भी  जान्द  पैर
उन्दरी  का  बाटा  उन्डू  जान्द  मनखी ,
खैरी  ता  आन्द  पैर  उतेदु  नि  लगदु ,
उब उठादु  मनखी  उकाल  चढ़ी  की ,
ना  दौड़  ना  दौड़  ते  उन्दरी  का  बाटा  उन्दरियुं  का  बाटा ...... २

उन्दरी  कु  सुख  दुई  चार  घडी  कु ,
उकाली  कु  दुःख  सदनी  को  सुख  लाटा ,
ना  दौड़  ना  दौड़  ते  उन्दरी  का  बाटा  उन्दरियुं  का  बाटा ...... 2

एन्च  गोमुख मा जो गंगा पवित्र ,
उन्दरियुं  मा  डंकी  कोजाल होयेगे ,
गदानियुं मा  मिल  गे  जो  हियुं  उन्डू  बोगी
जो  रेगे  हिमालय  मा  वी  चम्कुनु  च

ना  दौड़  ना  दौड़  ते  उन्दरी  का  बाटा  उन्दरियुं  का  बाटा ...... २

उन्दरी  कु  सुख  दुई  चार  घडी  कु ,
उकाली  कु  दुःख  सदनी  को  सुख  लाटा ,
ना  दौड़  ना  दौड़  ते  उन्दरी  का  बाटा  उन्दरियुं  का  बाटा ...... 2

बरखा  बथोदियुं  मा  भी  उंडी  नि  रादिनी  जो ,
तुकु  पुछिगे  नि  खैरी  खे  खे  की ,
जोल नि  बोटी  धरती  मान  फार  अंग्वाल ,
उन्डू  रोडी  गिनी  अपदी  खुशियुं …

ना  दौड़  ना  दौड़  ते  उन्दरी  का  बाटा  उन्दरियुं  का  बाटा ...... 2
उन्दरी  कु  सुख  दुई  चार  घडी  कु ,
उकाली  कु  दुःख  सदनी  को  सुख  लाटा ,
ना  दौड़  ना  दौड़  ते  उन्दरी  का  बाटा  उन्दरियुं  का  बाटा ...... 2
[/size]

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मैं  नी  करदू  तवे  से  बात  ..
हट  छोड़   दे  मेरु  हाथ
 
महिला :
 
मैं  नी  करदू  तवे  से  बात  ..हट  छोड़  दे  मेरु  हाथ
मैं  नी  करदू  तवे  से  बात  ..हट  छोड़  दे  मेरु  हाथ  -
मैं  नी  करदू  तवे  से  बात  ..हट  छोड़  दे  मेरु  हाथ se baat....
बोल  चिठ्ठी  किले  ने  भेजी ...
पुरुष :
तवे  खुट   जुदियाँ  चीं  हाथ  ...सुन  सुन  जा  मेरी  बात
बदनामी  की  डर  नी  भेजी
महिला :
मुख  सामने  त  खूब  स्वांग  भरदी ,
परदेस  जा  के  याद  भी  नी  करदी ...2
रुंदु -रुंदु  रो  दिन  रात  सौन -भादो से  barsaat 
बोल  चिट्टी  किले  ने  भेजी ...
पुरुष :
तेरा  गाँव  कु  डाक्वान  चिट्टी  देनु  आन्दु ,
तू  रेंडी  बदूमा  वो  केमा  दे  जांदू ....2
मुंड माँ  धेअर  की  जो  हाथ 
सोची  -सोची  मिल  या  बात    ...2
बदनामी  की  डर  नी  भेजी
महिला :
मी  नी  करदू  तवे  से  बात  छोड़  - छोड़  दे  मेरो  हाथ  मिल  नी  करने  तवे से बात.. 
निगुर  सारेर  तयार  निठुर  प्राण 
हाली  गयी  तवे  माँ  क्या  माया  लान ... 2
झूठी  मर्दून  की  छि  जात
कण  निभे  ली  तवे  की  साथ ....2.
बोल  चिठ्ठी  किले  ने  भेजी

पुरुष :
तवे  खुन  जुदियाँ  छीन  हाथ  ...सुन  सुन  जा  मेरी  बात
बदनामी  की  डर  नी  भेजी
मेरी  साँची  माया  माँ  सक  के  कु  खंडी
है  चूची  तू  मेरी  आँखों  माँ  रेह्न्दी ....2
ले  के  आनु  छुन  बरात  अब  ता  उमार  भर  का  साथ ...2
मैं  ने  चिठ्ठी  इले   नी  भेजी ,मैं  ने  चिट्टी  इले  नी  भेजी ...2

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यह  गाना फिल्म : घर जवाई से है :

गायक नरेन्द्र सिह नेगी और सुषमा क्ष्रेष्ट की आवाज

भावार्थ :  इस गाने में दो प्रेमियों की जुगल बंदी है, ! गाने में महिला प्रेमी अपनी प्रेमी से कहती है उसने प्रदेश जाकर उसे चिट्टी क्यों नहीं भेजी, जब से प्रेमी कहता है है अभी उनकी शादी नहीं है, और शादी में बाद जनम भर का साथ है,  चिट्टी इसलिए नहीं भेजी की, वह गाव में बदनामी से डरता है !

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

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प्रहलाद सिंह महरा, उत्तराखंड के एक प्रसिद्ध लोक गायक का यह गाना आपके लिए प्रतुस्त है!

इस गाने में एक फौजी जिसे दूसरे दिन फ़ौज की नौकरी में बोर्डर के इलाके के जाना है और वह अपने घर वालो की इस प्रकार समझाता है! इस गाने में बहुत ही भाविक रूप से प्रकट किया है! मुझे पूरी उम्मीद है आप गाना सुनने के बाद भाविक हो जावोगे !

इस लिंक से ये गाने सुनिए : http://ishare.rediff.com/music/kumaoni-others-folk/aaja-ka-din/10060621

गाने के बोल :

आजा का दिन छियो घर माजा
भोल जाण छो मील परदेश माजा.
आजा का दिन............

मेरी सुवा तू भली है रिये
इजा बाजियु की सेवा करिए
मेरी भुली जिया, मेरी भुला
मेरी भुला तू ..
मै जाण रियो परदेश, म्यार दिल यही छो .

आजा का दिन छियो
  .......

झन करिया मेरी फिकर
लौटी उना जरुर में घर
ईजा ना मार डाड, बाजियु ना उदास
भारत माता का छियो में च्यल साच
दिन ऊछा जान्छा ..
आजा का दिन छियो

चार दिन का यो जिन्दगी ये जिन्दगी में
झूटी माया की ये दुनिया में
क्वेके का को ना हून
अमर क्वे नि हूना... 2
प्राणी ले उडी जाण , खाली माट ये रूछा

आजा का दिन छियो घर माजा
आजा का दिन छियो घर माजा .
भोल जाण छो मील परदेश माजा.
.
आजा का दिन छियो घर माजा ...
दिन ऊछा जान्छा .
दिन ऊछा जान्छा .
दिन ऊछा जान्छा .

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हिंदी में भावार्थ
--------------

फौजी आपने पत्नी से कहता है:-

आज के दिन वह घर में है,
कल के दिन उसे प्रदेश की नौकरी में जाना है!

पत्नी और अपनी भाई बहिन से कहता है :

मेरी सुवा (पत्नी) तू अपना ख्याल रखने और
मेरी माता पिता (ईजा बाजियु) की सेवा करना
मेरी भुली (बहिन) मेरा भुला (भाई) जी.
तुम अपना ख़याल रखना
मै तू परदेश जा रहा हूँ, लेकिन मेरा दिल यही है.

आज के दिन वह घर में है,
कल के दिन उसे प्रदेश की नौकरी में जाना है!

अब कहता है :

मेरी फिकर नहीं करना, मै घर लौट के जरुर आवूंगा.
मेरी ईजा (माँ) तू रो मत, मेरे बाज्यू (पिता) आप उदास मत हो
भारत माँ का में सच्चा लाल हूँ,

दिन आते है और जाते है. ...

आज के दिन वह घर में है,
कल के दिन उसे प्रदेश की नौकरी में जाना है!

चार दिन की यह दुनिया है
सब झूठी माया मोह है,
किसका कोई नहीं है..
मिटटी यही रहेगी, प्राणी (आत्मा) को उड़ के जाना है

आज के दिन वह घर में है,
कल के दिन उसे प्रदेश की नौकरी में जाना है!

दिन आते जाते है..
दिन आते जाते है..
दिन आते जाते है..

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

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पहाड़ी गांवों में बहु बेटियों के अकेलेपन के साथी हैं लोकगीत. वे गीत इस तरह ज़िंदा हैं. उनमें उन स्त्रियों की ख़ुशियां, अवसाद और तक़लीफ़ें हैं. वे करुण गीत पहाड़ी स्त्री की आत्मा की पुकार हैं. ऐसा ही एक लोकगीत ये हैः

रात घनघोर मांजी!

रात घनघोर मांजी रात घनघोर,
बेटी नी बेवौण मांजी दीप डांडा पोर !
आयूं च खायूं च, आयूं च खायूं च,
जा बेटी सौरयास तेरो जवैं आयूं च !
पेइ च सराब मांजी , पेइ च सराब ,
सैसर नी जाण मांजी,जवैं च खराब !
दली जाली दाल मांजी, दली जाली दाल,
जवैं क्या बोन्न मांजी ,मेरो आयूं च काल !
मारीत मलेउ मांजी, मारीत मलेउ,
सैसर नी जाण मांजी,न बणौ कलेउ
कोठारी का खाना मांजी , कोठारी का खाना,
इननी मरी जाण मांजी, नणदू का बाना!
गुलैरी की गारी मांजी, गुलैरी की गारी,
सासुजीन पकड़ी मांजी,जिठाणीन मारी!
घोड़ी की कमर मांजी, घोड़ी की कमर,
कसीकी बितौलू मांजी,लौंडिया उमर
पाणी को गिलास मांजी, पाणी को गिलास,
तुमू दरु ह्वैगे मांजी,मैं लगदी निसास!
सुखी न संपत्ति नी मांजी, रात घनघोर,
वियोणू नी आइ मांजी, दीप डांडा पोर!

(हिंदी भावार्थः रात घनघोर है। हे मां दीप डांडे के पार बेटी को न ब्याहना। ओ बेटी! ससुराल जा, तेरा पति आया हुआ है। मां! मैं ससुराल नहीं जाऊंगी वह खराब है,उसने शराब पी है। क्या कहूं मां मेरा तो काल आया है।मैं ससुराल नहीं जाऊंगी, मां!मेरा कलेवा मत बना। ननदों के कारण मैं किसी दिन मर जाऊंगीं, सास मुझे पकड़े रहती है और जेठानी मारती है। तुम तो दूर हो, मां! मुझे तुम्हारी याद आती है। न सुख है ,न संपत्ति। रात घनघोर है, अभी तक दीप डांडे के पार से सुबह का तारा नहीं निकला।)

उपरोक्त लोकगीत गोविंद चातक की पुस्तक गढ़वाली लोकगीत से साभार

(Source-hilwani.com)

 

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