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Vishwanath Ghati Akhodi Tehri Garhwal, Uttarakhand,विश्वनाथ घाटी अखोडी,उत्तराखंड

Started by Devbhoomi,Uttarakhand, October 21, 2009, 08:50:43 PM

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दोस्तों विश्वनाथ घाटी का नाम सायद ही किसी ने सुना होगा क्यों की ये एक ऐसी घाटी हैं जहाँ उत्तराखंड के गाँधी श्री इंद्रमणि बडोनी जी का जन्म हुआ

यह विश्वनाथ घाटी टेहरी गढ़वाल में अखोडी गाँव के पास पड़ती है. वेसे गढ़वाल में यहाँ स्थान भगवान बिस्वानाथ के नाम से भी जाना जाता है. यहाँ पर स्वामी रामतीर्थ जी ने घोर तपस्या की थी .और यहाँ पर इन्होने शिव लिंग की स्थापना की थी. और आज यहाँ पर एक खूब सूरत मन्दिर बना हुआ है ..
इस मन्दिर को देखने के लिए लोग दूर से जाते है . जो भी भगत यहाँ पर भगवान शिब से मागता है उसकी मनो कामना पुरी होती है.. वेसे पुराणों में कहते है की केदार नाथ जी के ७ वी अध्याय में भगवान बिस्वानाथ का बर्णन  किया हुआ है.

यहाँ पर और कुछ भी नही है लेकिन जब यहाँ पर  भगत लोग जाते है तो उनको यहाँ पर बहुत शान्ति मिलती है और जिन्दी में अगर शान्ति मिले तो इससे बड़ी और कोई चीज़ नही है ..बडोनी जी का तो स्वप्ना था की भगवान बिश्वनाथ उत्तराखंड का पाचवा तीर्थस्थल बनेगा . बद्रीनाथ,केदारनाथ.
गंगोत्री-जमनोत्री और बिश्वनाथ .. लेकिन ओ अधुरा ही रह गया . मेरी आप सभ लोगो से बिनिती है की आप अपने देव भूमि के पांचवे तीर्थस्थल का प्रचार करे और अपने उत्तराखंड के गाँधी जी का स्वपन सहकार करे ..



M S JAKHI
DEVBHOOMI UTTRAKHAND

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मोना भैरू देवता मंदिर अखोडी विश्वनाथ घाटी


आज से ५० साल पहले यहाँ मन्दिर केवल १ पत्थर की गुफा का हुआ करता था.. लेकिन आज !! श्री मुंडा भेरू देवता का नाम टेहरी गढ़वाल बहुत प्रसिद है!

इस मोना भेरू देवता की आज भी लोगो पर बहुत कृपा है .. जो भी लोग इस मन्दिर से गुजरते है उनको इस मन्दिर में कुछ न -२ भेंट चादनी पड़ती है . चाहिए ओ घास की पत्ति ही हो लेकिन चढ़नी  जरूर पड़ती है .

अगर इस देवता का किसी पर दोस् भी होता है तो इस देवता में केवल १ रोटी और १ राख की गोली चढा दो और यहाँ देवता इसी में संतुष्ट हो जाता है ..



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ये मन्दिर ताल की भगवती का है, यहाँ मन्दिर भी बिस्वनाथ घाटी (अखोडी) के रस्ते में ही पढता है .इस मन्दिर की भी प्राचीन कहानी है .. लोग कहते है की यहाँ पर प्राचीन काल में मनुष्य की बलि चढाई जाती थी .. १ टाइम एसा  आया की १ औरत का १ ही लड़का था .

.और उस टाइम उसकी बारी थी तो ओ अपने बेटे को बलि चढाने के लिए सजा रही थी तो १ साधू उसके घर में आया तो ओ ओंरत रो रही थी तो साधू ने पूछा की बेटी क्यो रो रही हो तो  औरत ने सारी अपनी बय्था उसे सुना दी ..तो साधू ने बोला ठीक है बेटी तुम इस लड़के को वहां ले चलो में तुमारे साथ वहां चलता हूँ तो ओ लोग वहां पर पहुंचे तो ताल की भगवती पराकट हो गई ..तो साधू बोला की हे !

माँ तुम इस लड़के के बदले में कुछ भी ले लो में देने को तैयार  हूँ  तो देवी ने कहा की ठीक है तुम मेरे को आज से Asht बलि (८ बलि ) देना ,, तो उस दिन से devi को ८ बलि चढाई जाती है .. लेकिन कुछ सालो से आज देवी माँ पूजा पाठ में ही संतुष्ट है !

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ऐन्चुवा अछरी मंदिर विश्वनाथ घाटी अखोडी


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नरसिंह देवता मंदिर विश्वनाथ घाटी अखोडी