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Mahakumbh-2010, Haridwar : महाकुम्भ-२०१०, हरिद्वार

Started by हेम पन्त, November 21, 2009, 10:27:04 AM

Devbhoomi,Uttarakhand

                   शिवमूर्ति चौक की रंगाई-पुताई करता मजदूर।

                   

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                    सिगरेट का कश खींचता साधु।

                   

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तो महीनों कैद रहेंगे गजराज!

राजाजी नेशनल पार्क में भी गजराज चार महीने स्वछंद विचरण नहीं कर सकेंगे। वह भी उस जगह, जो उनका सबसे महत्वपूर्ण गलियारा है। महाकुंभ में चीला-मोतीचूर कोरीडोर के मोतीचूर रो [नदी] में अस्थाई पार्किंग बनाई जा रही है। इसके चलते चार महीने तक हाथियों को अपना रास्ता बदलना होगा।

अस्थाई पार्किंग के निर्माण के चलते नदी के प्राकृतिक स्वरूप से भी छेड़छाड़ की जा रही है। नेशनल पार्क की सीमा में बुलडोजर चलाया जा रहा है। वन्य जीव विशेषज्ञ इससे चिंतित हैं। वे सुप्रीम कोर्ट में गुहार लगाने की तैयारी में हैं। हालांकि पार्क प्रशासन सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के तहत पार्किंग बनाने की बात कर रहा है।

राजाजी नेशनल पार्क के मोतीचूर रेंज अंतर्गत चीला-मोतीचूर कारीडोर है। कारीडोर से हाथियों सहित अन्य वन्य जीवों की एक जंगल से दूसरे जंगल में आवाजाही होती है। इस बार महाकुंभ में अस्थाई पार्किंग के लिए मोतीचूर रो [नदी] के बड़े क्षेत्र को चिह्नित किया गया है।

मोतीचूर रो में बुलडोजर से नदी के प्राकृतिक स्वरूप के साथ छेड़छाड़ की जा रही है। नदी से पत्थर निकालकर उसकी दिशा मोड़ दी गई है। हालांकि प्रमुख वन संरक्षक [वन्य जीव] की ओर से जो आदेश सुप्रीम कोर्ट के अनुपालन में निदेशक राजाजी सहित अन्य को भेजा गया है, उसमें स्पष्ट है कि पार्क क्षेत्र में वनों, वन्य जीवों व वन्य जीव उत्पाद का विदोहन नहीं किया जाएगा। यदि ऐसा होता है तो इसकी पूर्ण जिम्मेदारी कार्यदायी संस्था की होगी। इन आदेशों की पूरी अवहेलना हो रही है।

सूत्रों के मुताबिक मोतीचूर रेंज से मोतीचूर रो के लिए पार्किंग के लिए रास्ता बनाया जा रहा है। इसमें दस हरे पेड़ों को काटने का प्रस्ताव भी भेजा गया है। मजेदार बात यह है कि प्रमुख वन संरक्षक [वन्य जीव] के अधिशासी अभियंता लोक निर्माण विभाग हरिद्वार को प्रेषित पत्र में यह उल्लेख है कि इस दौरान वन्य जीवों को जान माल की हानि होती है तो पार्क प्रशासन जिम्मेदार नहीं होगा।

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इतिहास रचने को बेकरार महाकुंभ का शहर   

26 जनवरी 1950 का दिन उत्सव मनाने का था। देश में हर्ष और उल्लास का वातावरण था। चहुंओर शान से तिरंगा लहरा रहा था। खुले और शांत वातावरण में आजादी के बाद संविधान का हक जो इस दिन मिला था। आज, कल और परसों शान से तिरंगा इस दिन लहराता रहेगा। निश्चित रूप से यह दिन देश और दुनिया के इतिहास में ऐतिहासिक रहा।

लेकिन 21वीं सदी में महाकुंभ भी इतिहास लिखने जा रहा है। 26 जनवरी को जहां देश में तिरंगा आन-बान और शान से लहरा रहा होगा, ठीक उसी समय हरिद्वार में महाकुंभ का विधिवत आगाज होगा।

तीर्थनगरी की धरती पर तीन अखाड़ों की धर्मध्वजाएं लगाई जाएंगी, जो एक अद्भुत संयोग है। राष्ट्र और धर्म का यह अनूठा मिश्रण ऐतिहासिक होगा। इस दिन से महाकुंभ का विधिवत आगाज भी हो जाएगा। अखाड़ों में तैयारियां अंतिम चरण में पहुंच चुकी हैं।

देश 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस के रंग में देश रंगा होगा, लेकिन तीर्थनगरी गणतंत्र दिवस के साथ ही महाकुंभ का पावन पर्व का आगाज भी कर रही होगी। 26 जनवरी को जूना, अग्नि और आह्वान तीनों अखाड़े की धर्मध्वजा भी इसी दिन लगाई जाएगी। देश में राष्ट्र और धर्म का यह बेजोड़ मेल होगा। वातावरण में जहां देश भक्ति के गीत से हम शहीदों को नमन करेंगे वहीं अखाड़े की धर्मध्वजाओं में पूजा-पाठ होगा।

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महाकुंभ में साधुओं के आने का सिलसिला जारी है। अपर रोड पर चहलकदमी करते साधु।

                   

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तीन अखाड़ों में धर्म ध्वजा की स्थापना होनी है। इसकी तैयारी को अंतिम रूप देते साधु संत।

                       

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                    महाकुंभ में शिवमूर्ति को भी नया रंग-रूप दिया गया।
                     
                 

                       

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                     हरिद्वार के पुल जटवाड़ा के नजदीक से बह रही गंगा आज भी मैली है।

                       

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                नील धारा में अपने अनुयायियों के लिए एक आश्रम में बन रही आधुनिक सुख-सुविधाओं से युक्त कुटिया।

                             

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                    हर की पैड़ी पर गंगा से पैसे व सोना चांदी ढूंढने वालों की इन दिनों मौज है।