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Mahakumbh-2010, Haridwar : महाकुम्भ-२०१०, हरिद्वार

Started by हेम पन्त, November 21, 2009, 10:27:04 AM

Devbhoomi,Uttarakhand

                            हर की पैड़ी पर गंगा में दूध चढ़ाने के लिए श्रद्धालुओं के लिए दूध लिए युवक।


                                 

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                             हर की पौड़ी पर स्नान करतीं महिला श्रद्धालु।

                           

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                     हर की पैड़ी में जलस्तर कम होने से श्रद्धालुओं द्वारा प्रवाहित मूर्तियां भी दिखने लगी हैं।


                   

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                       हर की पैड़ी में चल रही हवा में साड़ी सुखाती महिला श्रद्धालु।

                     

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                      गंगा में डुबकी लगाने के लिए धर्मनगरी पहुंचा साधु।

                         

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                        हरकी पैड़ी में स्नान के बाद जटाएं संवारता साधु।


                         

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तीर्थनगरी पहुंचा रमते पंचों का काफिला 

सोमवार को दशनाम संन्यासी परंपरा के दो अखाड़ों श्री पंचायती निरंजनी अखाड़ा और श्री पंचायती महानिर्वाणी अखाड़ा के रमते पंचों ने तीर्थनगरी में प्रवेश किया। सुबह करीब साढ़े नौ बजे श्री निरंजनी अखाड़ा मायापुर से करीब दो सौ रमता पंचों का काफिला कनखल बाईपास और दादूबाग से होता हुआ नत्थावाला बाग में पहुंचा।

रास्ते में कई जगहों पर निरंजनी अखाड़े के रमता पंचों का स्वागत किया गया। नत्था वाला बाग को फूलों की मालाओं और बिजली की लडि़यों से सजाया गया था।

श्री निरंजनी अखाड़ा के रमता पंचों के श्रीमहंत नीलकंठ वन महाराज, महंत रविंद्र पुरी, महंत अजय भारती, महंत बृजराज गिरि, महंत अरविंद पुरी निरंजनी अखाड़े के सचिव महंत त्रयंबक भारती, महंत ललता गिरि, महंत रामानंदपुरी, सहित बड़ी संख्या में संत महंत उपस्थित थे।

रमता पंचों के जुलूस के आगे एक घोड़े पर अखाड़े के निशान देवता और दूसरे घोड़े पर नगाड़े को लकर दो महात्मा चल रहे थे। तुरही, नागफनी, शंखघंट बजाते हुए अखाड़े के साधु पारंपरिक अस्त्र शस्त्र लेकर चल रहे थे।

कनखल दादूबाग में स्थित नत्थावाला बाग पहुंचने पर स्थानीय नागरिकों ने संतों का फूल मालाओं से जोरदार स्वागत किया। वैदिक विधि विधान के साथ रमता पंचों ने अपने डेरे में अपने देवता का अस्थाई मंदिर स्थापित किया। रमता पंचों का डेरा साढ़े बारह बजे दोपहर नत्थावाला बाग पहुंचा।

श्री पंचायती महानिर्वाणी अखाड़ा का डेरा दोपहर बारह बजे संन्यास मार्ग कनखल स्थित रामबाग से रामकिशन मिशन चौराहे से होता हुआ महात्मा गांधी स्थित गंगा बाग में पहुंचा, जहां पर अखाड़े के साधु संतों और स्थानीय नागरिकों ने रमता पंच का स्वागत किया।

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गंगाजल में विराजेंगे भगवान नारायण 

जब कर्क राशि में चंद्रमा और मकर राशि में सूर्य का प्रवेश हो, तब माघ पूर्णिमा का योग बनता है। ज्योतिष शास्त्र में इसे 'पुण्य का योग' कहा गया है, क्योंकि इस मौके पर गंगा में स्नान करने से समस्त पाप एवं संताप कट जाते हैं।

ऐसी भी मान्यता है कि माघ पूर्णिमा का स्नान सूर्य एवं चंद्रमा के दोषों से मुक्ति दिलाता है। फिर इस बार तो यह स्नान कुंभपर्व में पड़ रहा है, जिसे मन एवं आत्मा को शुद्ध करने वाला माना गया है।

सनातनी परंपरा में माघ मास का विशिष्ट महात्म्य है। देखा जाए तो संयम का महीना है यह। इस महीने घोर तामसी प्रवृत्ति के लोग भीठेठ सात्विक नजर आने लगते हैं।

दरअसल सूर्य के मकरस्थ होते ही प्रकृति में बदलावों की शुरुआत भी हो जाती है। डालियों पर कोंपले फूटने लगती हैं और चारों दिशाओं में गूंजने लगता है पक्षियों का कलरव। कहने का मतलब प्रकृति नवसृजन के लिए तैयार हो उठती है और प्राणिमात्र में होने लगता है 'नवजीवन' का संचार। इसीलिए ऋषि-मुनियों ने माघ में मांस भक्षण को निषिद्ध किया है। प्रयाग में इस अवधि को 'कल्पवास' में बिताने की परंपरा सदियों से चली आ रही है, जिसका विश्राम माघी पूर्णिमा स्नान के साथ होता है।

'ब्रह्मवैवर्तपुराण' में उल्लेख है कि माघी पूर्णिमा पर स्वयं भगवान नारायण गंगाजल में निवास करते हैं। इस पावन घड़ी में कोई गंगाजल का स्पर्शमात्र भी कर दे तो उसे बैकुंठ की प्राप्ति होती है। आचार्य डा. संतोष खंडूड़ी कहते हैं कि इस बार माघी स्नान के कुंभ पर्व में पड़ने से उसका महात्म्य कई गुना बढ़ गया है।

पुराणों के अनुसार बारह साल के अंतराल में माघी स्नान का फल ऐसा हो जाता है, जैसे एक लाख वाजपेय स्नान करने का है।

डा. खंडूड़ी कहते हैं कि शुक्र-शनि पुष्य नक्षत्र में पूर्णिमा के पड़ने से 30 जनवरी को 'सर्वार्थ सिद्धि' का योग बन रहा है। ऐसे में गंगा स्नान करने से सहस्त्रों यज्ञों के बराबर पुण्य की प्राप्ति होती है। गुरु के कुंभ राशि में विराजमान होने के कारण मन एवं आत्मा को शांति प्रदान करने वाला स्नान भी है यह।

ज्योतिषाचार्य प्रतीक मिश्रपुरी कहते हैं कि कुंभ व मीन लग्न में सूर्य होने के कारण यह स्नान धर्म एवं कामनाओं की सिद्धि देने वाला भी है। महत्वपूर्ण बात यह कि ऐसे समय में गंगा को शुद्ध एवं पवित्र रखने के विचार मात्र से ही कई जन्म धन्य एवं पवित्र हो जाते हैं।

कुंभ लग्न में श्रेयस्कर होगा स्नान

हरिद्वार। माघी पूर्णिमा का पर्व 30 जनवरी को पड़ रहा है, लेकिन 29 जनवरी को अपराह्न तीन बजकर 11 मिनट से यह आरंभ हो जाएगा और शनिवार 11 बजकर 48 मिनट तक रहेगा। हालांकि गंगा स्नान इस अवधि में कभी भी किया जा सकता है, लेकिन शनिवार को कुंभ लग्न में प्रात: काल स्नान करना श्रेयस्कर होगा। यह स्नान समस्त रोगों को शांत करने वाला माना गया है।

क्षीर सागर का रूप हैं गंगाजी

माघ पूर्णिमा को पृथ्वी का दुर्लभ दिन माना गया है। मान्यता है कि इस दिन भगवान नारायण क्षीर सागर में विराजते हैं और पृथ्वी पर गंगाजी क्षीर सागर का ही रूप हैं। इसलिए इस पावन पर्व पर 'ॐ नम: भगवते वासुदेवाय' का जाप करते हुए स्नान-दान का पुण्य अर्जित करना चाहिए।

माघी पूर्णिमा का फलादेश

मेष : दुविधायुक्त चित्त, क्रोध पर नियंत्रण रखें

वृष : नए आयोजन पूर्ण होंगे

मिथुन : वाणी व विचारों में परिवर्तन

कर्क : नौकरी-व्यापार में लाभ

सिंह : आर्थिक दृष्टि से लाभदायी

कन्या : व्यक्तिगत संबंधों में लाभ, सफलता

तुला : प्रत्येक क्षेत्र में संघर्ष व तनाव

वृश्चिक : आकस्मिक धन प्राप्ति का योग

धनु : शुभ समाचार की प्राप्ति से मन हर्षित

मकर : किसी स्त्री से नजदीकी लाभदायी

कुंभ : व्यवसाय में प्रगति, उत्तम धन लाभ

मीन : मित्र-शुभचिंतकों से शुभ समाचार


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श्रद्धालुओं के लिए पतंजलि धर्मशाला तैयार

पतंजलि योगपीठ ने पतंजलि धर्मशाला का निर्माण कराया है। पतंजलि धर्मशाला में महाकुंभ में आने वाले श्रद्धालुओं की नि:शुल्क व्यवस्था पहली बार की गई है।

पतंजलि योगपीठ महाकुंभ को लेकर तैयारियों में जुटी हुई है। पतंजलि योगपीठ के द्वितीय फेज की एडवांस बुकिंग इसी लिहाजा से महाकुंभ के दौरान बंद कर दी गई है। पतंजलि ने श्रद्धालुओं की सेहत के लिए वैद्य और बेहतर इलाज की व्यवस्था को अंतिम रूप दे दिया है। माना जा रहा है कि महाकुंभ में आने वाले पांच करोड़ श्रद्धालुओं में से हजारों श्रद्धालु पतंजलि पहुंचेंगे। इसलिए इनकी व्यवस्था के लिए पतंजलि के लोगों को जिम्मेदारी सौंप दी गई है।

इसी कड़ी में पतंजलि योगपीठ ने पहली बार हजारों श्रद्धालुओं के लिए नि:शुल्क ठहरने की व्यवस्था पतंजलि योगपीठ के ठीक बगल में की है। इसका नाम पतंजलि धर्मशाला दिया गया है। पतंजलि धर्मशाला को श्रद्धालुओं की सुविधा से युक्त बनाया गया है। सैकड़ों कमरों के अलावा बड़े-बड़े हाल हैं, जिनसे गंगा में डुबकी लगाने आने वाले श्रद्धालु पतंजलि की मनमोहक छटा भी देख सकते हैं। लगभग 1000 आवास की व्यवस्था है। इसमें एक समय में चार से पांच हजार श्रद्धालु रह सकते हैं। इतने ही लोग पतंजलि का शुद्ध भोजन भी ग्रहण कर सकते हैं।

पतंजलि योगपीठ के आचार्य बालकृष्ण ने बताया कि महाकुंभ के मद्देनजर पतंजलि धर्मशाला का निर्माण कराया गया है। पतंजलि धर्मशाला का निर्माण पूरा हो चुका है। व्यवस्था यहां की प्लानिंग के तहत कर दी गई है। पतंजलि के लोगों को जिम्मेदारी सौंप दी गई है।

उन्होंने बताया कि पतंजलि योगपीठ महाकुंभ में अपने स्तर से हर तरह का सहयोग दे रही है। वह चाहे स्वास्थ्य से संबंधी हो या फिर ठहरने या भोजन की व्यवस्था, सभी में पतंजलि अपना श्रेष्ठ योगदान कर रही है।