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Mahakumbh-2010, Haridwar : महाकुम्भ-२०१०, हरिद्वार

Started by हेम पन्त, November 21, 2009, 10:27:04 AM

Devbhoomi,Uttarakhand


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पूर्णिमा स्नान पर लाखों ने लगाई डुबकी



हरिद्वार। भास्कर देव की कृपा और रविवार अवकाश के चलते पूर्णिमा स्नान को श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी। मेला प्रशासन के अनुसार देर सायं तक पांच लाख लोगों ने गंगा में पुण्य की डुबकी लगाई।

रविवार का अवकाश होने के चलते बड़ी संख्या में लोग बीती रात्रि को ही धर्मनगरी हरिद्वार पहुंचने लगे थे। वहीं, पिछले कुछ दिनों से तपिश बढ़ी है। यही कारण रहा कि पूर्णिमा स्नान को धर्मनगरी में गंगा स्नान को श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी।

महाशक्ति ज्योतिष अनुसंधान संस्थान भूपतवाला के योगाचारी विवेक शास्त्री ने बताया कि सुबह 10.51 बजे सूर्य और गुरु ग्रह दोनों एक ही सीध में आ गए। सूर्य और गुरु की ऊर्जा मिश्रित होकर पृथ्वी पर पहुंची।

इस कारण स्नान का विशेष महत्व रहा, लेकिन इससे पहले ही सुबह से लोग हरकी पैड़ी पर गंगा स्नान को पहुंचने लगे थे। दिन जैसे-जैसे आगे बढ़ा, स्नान करने श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ती गई। मेला डीआईजी आलोक शर्मा ने दावा किया कि देर सायं तक करीब पांच लाख लोगों ने गंगा स्नान किया।

उधर, पूर्णिमा स्नान को लेकर पुलिस ने सुरक्षा के लिए व्यापक प्रबंध किए थे। हरकी पैड़ी पर स्नान को जाने वालों को चेकिंग से गुजरना पड़ा।


http://in.jagran.yahoo.com/news/local/uttranchal/4_5_6222428.html

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महाकुंभ: एक हजार से अधिक नागाओं को संन्यास दीक्षा



हरिद्वार। बिरला घाट के गंगा तट पर बड़ी तादाद में साधुओं की जमात जुटी हुई थी। करीब तीन दर्जन से अधिक नाई अपनी-अपनी जगह तलाश रहे थे। अखाड़े से पहुंचे साधु उनके सामने एक-एक कर पहुंच रहे थे। उनका मुंडन संस्कार किया जा रहा था।

फिर सभी एक साथ गंगा में स्नान करने पहुंचे। ये सब नागा साधु बनने के लिए जुटे थे। प्रक्रिया आरंभ होते ही नागा संन्यासियों का सबसे शक्तिशाली अखाड़ा जूना शुक्रवार को और मजबूत हो गया। जूना अखाड़े के 1000 से अधिक नागा साधुओं को संन्यास दीक्षा दी गई। नागा साधुओं ने पिंडदान सहित अन्य संस्कारों को विधि विधान से पूरा किया। शनिवार की सुबह तक नागा बनने की प्रक्रिया जारी रहेगी।

जूना अखाड़े की चार मढि़यां जिनमें चार, सोलह, तेरह और चौदह शामिल हैं, के साधु सुबह करीब आठ बजे बिरला घाट के सामने गंगा तट पर एकत्रित हुए। नागा बनाने की प्रक्रिया प्रारंभ की गई। हजार से अधिक साधु नागा बनने की जमात में शामिल हुए। नागा साधुओं के संस्कार करने को करीब चालीस नाईयों की व्यवस्था की गई थी।

महापुरुष से नागा बनाने के दौरान गंगा तट पर सभी का मुंडन संस्कार हुआ। फिर विजया होम का आयोजन किया गया। नागा साधुओं ने पिंडदान किया। इनमें 21 पीढि़यो का पिंडदान भी शामिल था। पिंडदान सहित अन्य विधि-विधान के उपरांत उन्होंने गंगा में करीब 108 डुबकी लगाईं। यहीं पर दंड और कोपीन धारण कराया गया। मुंडन और गंगा में डुबकी लगाने के बाद वे जूना अखाड़े में लगी धर्मध्वजा की चारों तनी पर पहुंचे और यहीं पर बैठ गए।

ऊं नम: शिवाय का सभी जाप करने लगे। अखाड़ों की ओर से जानकारी दी गई कि रात्रि में गुरु के पास सभी पहुंचेंगे। चोटी काटी जाएगी। करीब ढाई बजे रात में आचार्य महामंडलेश्वर दीक्षा देंगे। दीक्षा लेने के उपरांत तड़के मंत्र लेने की प्रक्रिया होगी। प्रक्रिया के बाद करीब 1000 से अधिक नागाओं की संन्यास दीक्षा पूरी हो जाएगी। कुछ विशेष चीजें रह जाती हैं जो शाही जुलूस निकलने से पहले प्रात:काल पूरी की जाती हैं।

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प्रचार-प्रसार धर्मनगरी में शांतिकुंज भी प्रचार-प्रसार में जुटा हुआ है।


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मस्ती हरिद्वार में चल रहे महाकुंभ में रंग में सराबोर विदेशी श्रद्धालु।