• Welcome to MeraPahad Community Of Uttarakhand Lovers.
 

Chakrata Hill Station Uttarakhand,चकराता उत्तराखंड

Started by Devbhoomi,Uttarakhand, December 06, 2009, 09:32:15 PM

Devbhoomi,Uttarakhand

चकराता अपने शांत वातावरण और प्रदूषण मुक्त पर्यावरण के लिए जाना जाता है। समुद्र तल से 7000 फीट की ऊंचाई पर स्थित यह नगर देहरादून 98 किमी. दूर है। चकराता प्रकृति प्रेमियों और ट्रैकिंग में रूचि लेने वालों के लिए एकदम उपयुक्त स्थान है।



यहां के सदाबहार शंकुवनों में दूर तक पैदल चलने का अपना ही मजा है। चकराता में दूर-दूर फैले घने जंगलों में जौनसारी जनजाति के आकर्षक गांव हैं। यह नगर उत्तर पश्चिम उत्तराखंड के जौनसर बवार क्षेत्र के अंतर्गत आता है। चकराता का स्थापना कर्नल ह्यूम और उनके सहयोगी अधिकारियों ने की थी।

उनका संबंध ब्रिटिश सेना के 55 रेजिमेंट से था। यहां के वातावरण को देखते हुए अंग्रेजों ने इस स्थान को समर आर्मी बेस के रूप में इस्तेमाल किया। वर्तमान में यहां सेना के जवानों को कमांडों की ट्रैनिंग दी जाती है। दोस्तों अगर आप लोगों को चकराता के बारें मैं कुछ जानकारी हो तो आप यहाँ पोस्ट करें !



Devbhoomi,Uttarakhand

चकराता, बाँज-बुरांश-देवदार के घने जंगलों में बादलों की छायाएँ उड़ने लगी थीं। मुख्य नगर से 7 किमी दूर एक छोटे और बिल्कुल शांत होटल पहुँचते-पहुँचते बारिश होने लगी। यात्रा की थकान उड़नछू हो गई। स्थानीय युवक बिट्टू चौहान ने पुलम और अखरोट के अपने बगीचे के बीच 7-8 कमरों का यह होटल विशाल चट्टानों वाली पहाड़ी की गोद में इस तरह बनाया है कि अतिथि ज्यादातर समय कमरा छोड़कर आंगन में ही बैठने-टहलने को मजबूर हो जाते हैं।




हम फौरन बगीचे की सैर कर आए। अधपके पुलम लचकती शाखों से तोड़कर खाए। वनकाफल और हिसालू ढूँढ-ढूँढकर चखे और कच्चे किलमोड़े के हरे दानों को देखकर बचपन की यादों में बहुत पीछे तक जाते रहे। शाम बहुत ठण्डी हो गई थी लेकिन मन उतना ही सुकून से भर रहा था। साफ आसमान में चमकते तारों का ऐसा नजारा शहरों में दुर्लभ ही है और हमने दमकते सप्तऋषि मण्डल के ठीक नीचे बैठकर रात का खाना खाया। बिल्कुल घरेलू खाना।

Devbhoomi,Uttarakhand

एशिया में चीड़ एवं देवदार प्रजाति के वृक्षों में उत्तराखंड के जंगलों का दबदबा रहा है। एशिया का सबसे मोटा देवदार वृक्ष जनपद उत्तरकाशी के टौंस वन प्रभाग अंतर्गत कोठिगाड़ रेंज के बालचा वन खंड में स्थित है। यह वन क्षेत्र जनपद देहरादून की सीमांत तहसील त्यूणी से सटा हुआ है। देवदार के इस महावृक्ष की मोटाई (गोलाई) 8.25 मीटर और ऊंचाई 48 मीटर है। इस वृक्ष की आयु 400 साल से अधिक बताई जाती है।

वर्ष 1994 में वन एवं पर्यावरण मंत्रालय भारत सरकार द्वारा इसे महावृक्ष के रूप में पुरस्कृत किया गया था। भारतीय वन अनुसंधान संस्थान (एफआरआई) के म्यूजियम में देवदार वृक्ष की जो सबसे अधिक गोलाई की अनुप्रस्थ काट प्रदर्शित की गई है, वह वृत भी इसी खंड में स्थित थी, जिसके अवशेष अभी भी मौजूद हैं। देहरादून जिले के चकराता वन प्रभाग अंतर्गत कनासर रेंज में स्थित देवदार का एक और वृक्ष महावृक्ष बनने की होड़ में अपना आकार फैलाए जा रहा है।

चकराता-त्यूणी मोटर मार्ग पर कोटी-कनासर वन खंड में स्थित इस देवदार वृक्ष की मोटाई (गोलाई) 6.35 मीटर है। इस वृक्ष की अनुमानित आयु 600 साल से अधिक बताई जाती है। देवदार एवं चीड़ प्रजाति के वृक्षों की चाहे ऊंचाई की बात रही हो या मोटाई की, महावृक्ष का खिताब पाने में पूरे एशिया में उत्तराखंड के जंगलों का ही दबदबा रहा है।

एशिया के सबसे ऊंचे चीड़ महावृक्ष में भी उत्तराखंड राज्य के टौंस वन प्रभाग ने अपनी पहचान बनाई। 8 मई 2008 को क्षेत्र में आए भीषण आंधी-तूफान से यह महावृक्ष धराशायी हो गया था। मोटे वृक्ष की रोचक है

Devbhoomi,Uttarakhand

उत्तरकाशी के चौरंगी खाल तथा नचिकेता ताल में तो टिहरी के महाराजा एक सदी पहले भी स्कीइंग का आनंद लेने जाते थे।

देहरादून जिले के चकराता, कनासर, कथियार, त्यूणी आदि स्थानों के साथ-साथ हर की दून की पूरी घाटी में जबर्दस्त बर्फबारी होती है। अब ये जगहें भी धीरे-धीरे पर्यटकों की पसंद में शुमार होती जा रही हैं।





Devbhoomi,Uttarakhand


Devbhoomi,Uttarakhand

पाटी गाँव चकराता

पाटी गॉंव जनपद देहरादून की चकराता तहसील के अन्‍तर्गत खत बनगॉंव में पड़ता है। यह चकराता से पैदल मार्ग द्वारा 05 कि0मी0 तथा सड़क मार्ग द्वारा 25 कि0मी0 की दूरी पर, पूर्व दिशा की ओर स्‍थित है।

गांव में 19 परिवार है तथा गांव की कुल जनसंख्‍या लगभग 225 है। ग्राम वासियों का मुख्‍य व्‍यवसाय कृषि है। गांव के अधिकार में बड़ी मात्रा में कृषि भूमि, नीजि वन, चरागाह तथा जल स्रोत हैं।

Devbhoomi,Uttarakhand

उत्तराखंड के गढ़वाल हिमालय पर केदारनाथ मठ का 14 किलोमीटर लंबा रास्ता तीर्थयात्रियों के लिए चुनौती भरा रहा है।

राज्य में केदारनाथ (3,584 मीटर लंबा) ही अकेला ऐसा तीर्थ नहीं है जहां सड़क नहीं जाती  चकराता क्षेत्र में टाइगर फॉल और उत्तरकाशी जिले में यमुनोत्री तीर्थस्थलों का रास्ता भी बहुत दुर्गम है।

राज्य पर्यटन विभाग अब तीर्थयात्रियों की परेशानियों को ध्यान में रखते हुए इन तीर्थस्थलों को रोपवे से जोड़ने की योजना बना रहा है। रोपवे निर्माण की इस परियोजना में निजी क्षेत्र की भागीदारी होगी। कई रोपवे के लिए बोली लगाने का काम शुरू हो चुका है।

Devbhoomi,Uttarakhand

टाइगर फॉल




चकराता से 5 किमी पैदल चलने पर 50 मीटर ऊंचा टाइगर फॉल है। उंचें जगह से एक छोटे तालाब में गिरता हुआ झरने का दृश्‍य बडा खूबसूरत लगता है। समुद्र तल से 1395 मीटर की ऊंचाई पर स्थित यह झरना चकराता के उत्तर पूर्व में है।

http://a1samud.sulekha.com/blog/post/2008/02/tiger-falls-chakrata.htm

Devbhoomi,Uttarakhand



Chakrata, was originally a cantonment of British Indian Army settled in 1869. Today it is an access-restricted military cantonment and foreigners face severe restrictions in visiting. Notably, it is the permanent garrison of the secretive and elite Establishment 22 (called "Two-Two"), the only ethnic Tibetan unit of the Indian Army, which was raised after the Indo-China War of 1962.

Myriad weapons and survival training are also imparted by RAW and other intelligence services in Chakrata, in support of India's foreign policy goals, especially pertaining to other countries in the Indian Subcontinent.

The Research and Analysis Wing, India's primary foreign intelligence agency, operates intelligence collection aircraft through the intelligence agency's aviation unit, the Aviation Research Centre (ARC).

The aircraft are fitted with state-of-the-art electronic surveillance equipment and long range cameras capable of taking pictures of targets from very high altitudes.

Devbhoomi,Uttarakhand

 चकराता उत्तराखंड में शांत वातावरण के लिए जाना जाता है