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जय प्रकाश डंगवाल-उत्तराखंड के लेखक JaiPrakashDangwal,An Author from Uttarakhand

Started by Rajneesh, October 28, 2007, 12:30:29 AM

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

Jai Prakash Dangwal
September 19 at 8:32pm · Delhi · Edited ·

मेरी कलम से© Jai Prakash Dangwal:-

हमने, कब कहा, चलने को, दो चार कदम एक साथ,
चौराहे पर बेसहारा छोड़ने की तेरी फितरत पुरानी है.
इतना कम अक्ल हूँ, दो राहे पर भी जो छोड़ दे साथ,
तो भटक जाऊँगा भटकने की मेरी फितरत पुरानी है.

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

Jai Prakash Dangwal

सभी स्वजनो को, सभी मित्रों को सपरिवार दीपावली पर्व पर बधाई एवं शुभ कामनाये.
इस पावन पर्व पर मेरी कलम की ओर से मंगल कामना सहित सादर भेंट © Jai Prakash Dangwal

आज धरा के प्रांगण में आओ हम सब मिल कर दीप जलाये और तिमिर भगाये,
और हृदय के प्रांगण में दीप ज्ञान का जलाकर विश्वं में सौहार्द्य का प्रकाश फैलाये.

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

Jai Prakash Dangwal

From my pen© Jai Prakash Dangwal:-

प्रकृति जन्य कर्म में लिप्त रहता हूँ पाप पुन्य के भ्रम में उलझता रहता हूँ,
स्वयं को स्वयं में, ढूँढता रहता हूँ, स्वयं से स्वयं का पता, पूछता रहता हूँ.

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

Jai Prakash Dangwal
October 17 at 2:39pm · Delhi · Edited ·

From my pen© Jai Prakash Dangwal:-

अब मिलेंगे अजनबियों की तरह, तुझे भी सकूं मिलेगा मुझे भी, सकूं मिलेगा,
फालतू की, इंत्जारी में, न तो तुझे सकूं मिलेगा, और न मुझे ही सकूं मिलेगा.

जब कोई ख़ास मिल जाता है जिंदगी में, पुराना दोस्त, दोस्त नहीं रह जाता है.
यही सत्यं है जीवन का जिसमें किसी को भी कोई दोष नहीं दिया जां सकता है.

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

Jai Prakash Dangwal
October 25 at 10:26am · Delhi ·

From my pen© Jai Prakash Dangwal:-
We travel life with near and dear ones who are great support in hard time and enhance our joy by their pleasant company in good time.

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

Jai Prakash Dangwal
October 21 at 8:55am · Delhi · Edited ·

From my pen© Jai Prakash Dangwal:-

प्रकृति जन्य कर्म में लिप्त रहता हूँ पाप पुन्य के भ्रम में उलझता रहता हूँ,
स्वयं को स्वयं में, ढूँढता रहता हूँ, स्वयं से स्वयं का पता, पूछता रहता हूँ.

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

Jai Prakash Dangwal
October 4 at 11:18pm · Delhi · Edited ·

मेरी कलम से© Jai Prakash Dangwal:-

मत पूछना कभी उसका नाम, जिसको मैने देखा नहीं, जिससे हूँ मैं बेखबर,
जो अहसास बन कर मेरे साथ रहतीं है, बहुत क़रीब, अपने आप से बेखबर.

जो नग़में मुहब्बत के गाती है, लेकिन ख़ुद, मुहब्बत से है अनजान, बेखबर,
वह् मुझको क्या पहचान पायेगी, वह् तो ख़ुद से भी है अनजान और बेखबर.

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

Jai Prakash Dangwal
October 4 at 10:45pm · Delhi · Edited ·

मेरी कलम से© Jai Prakash Dangwal:-

किसी गुनाह की ग़र सजा दी होती, तो मुझे, कोईं शिकायत नहीं होती,
मगर, किसी बेगुनाह को, सजा देना, जुल्म होता है इनायत नहीं होती.

मुहब्बत में आशा के दीप जलाने से, खुदा की शान की पहचान होती है,
आशाओं के, दीप जला कर, उन्हे बुझा देने से मुहब्बत बदनाम होती है.

इसलिए ऐ मेरे नादान दोस्त मुहब्बत के दीप जला कर उन्हें मत बुझा,
मेरे लिए न सही, अपने चमन की, बहार के खातिर, यह दीप मत बुझा.

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

Jai Prakash Dangwal
October 31 at 12:04pm · Delhi · Edited ·

जामा मस्जिद के इमाम के विद्रोही बयान पर हर भारतीय की ओर से मेरी कलम से एक प्रतिक्रिया © Jai Prakash Dangwal:-

नफरत भरी है जिसके दिल में वह् नफरत ही घोलेगा,
दंत विष जिसके नहीं तोड़े वह् भुजंग विष ही उगलेगा.

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

Jai Prakash Dangwal
October 5 at 12:18am · Delhi · Edited ·

मेरी कलम से© Jai Prakash Dangwal:-

मत पूछना कभी उसका नाम, जिसको मैने देखा नहीं, जिससे हूँ मैं बेखबर,
जो अहसास बन कर मेरे साथ रहतीं है, बहुत क़रीब, अपने आप से बेखबर.

जो नग़में मुहब्बत के गाती है, लेकिन ख़ुद, मुहब्बत से है अनजान, बेखबर,
वह् मुझको क्या पहचान पायेगी, वह् तो ख़ुद से भी है अनजान और बेखबर.