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जय प्रकाश डंगवाल-उत्तराखंड के लेखक JaiPrakashDangwal,An Author from Uttarakhand

Started by Rajneesh, October 28, 2007, 12:30:29 AM

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

Jai Prakash Dangwal
October 12 at 8:40pm

From my pen© Jai Prakash Dangwal:-

It happens in life many times that the person u like you can not approach to the person
But by strong feelings' mail your love, feelings & your touch to approach to the person.

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

Jai Prakash Dangwal
October 4 at 11:18pm · 

मेरी कलम से© Jai Prakash Dangwal:-

मत पूछना कभी उसका नाम, जिसको मैने देखा नहीं, जिससे हूँ मैं बेखबर,
जो अहसास बन कर मेरे साथ रहतीं है, बहुत क़रीब, अपने आप से बेखबर.

जो नग़में मुहब्बत के गाती है, लेकिन ख़ुद, मुहब्बत से है अनजान, बेखबर,
वह् मुझको क्या पहचान पायेगी, वह् तो ख़ुद से भी है अनजान और बेखबर.

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

Jai Prakash Dangwal
October 4 at 10:45pm · Delhi · Edited ·

मेरी कलम से© Jai Prakash Dangwal:-

किसी गुनाह की ग़र सजा दी होती, तो मुझे, कोईं शिकायत नहीं होती,
मगर, किसी बेगुनाह को, सजा देना, जुल्म होता है इनायत नहीं होती.

मुहब्बत में आशा के दीप जलाने से, खुदा की शान की पहचान होती है,
आशाओं के, दीप जला कर, उन्हे बुझा देने से मुहब्बत बदनाम होती है.

इसलिए ऐ मेरे नादान दोस्त मुहब्बत के दीप जला कर उन्हें मत बुझा,
मेरे लिए न सही, अपने चमन की, बहार के खातिर, यह दीप मत बुझा.

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

Jai Prakash Dangwal


मेरी कलम से© Jai Prakash Dangwal:-

हमने, कब कहा, चलने को, दो चार कदम एक साथ,
चौराहे पर बेसहारा छोड़ने की तेरी फितरत पुरानी है.
इतना कम अक्ल हूँ, दो राहे पर भी जो छोड़ दे साथ,
तो भटक जाऊँगा भटकने की मेरी फितरत पुरानी है.

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

Jai Prakash Dangwal
September 4 · Delhi ·

मेरी कलम से:

अगर कोई गलती हो तो उसके खातिर कानूनन माफी और सजा जायज है,
लेकिन बेवजह बिना गलती के किसी को नजर अंदाज़ कर देना नाजायज है.

आपकी सक्शियत को सलाम करते हैं तो इसको हमारी गुस्ताखी न समझें,
सलाम के ऐवज में सलाम न करें, कोई बात नहीं, इसे बेअदबी तो न समझें.

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

Jai Prakash Dangwal
September 3 · Delhi · Edited ·

मेरी कलम मेरी जान:-

कलम का भी, मन होता है, और कलम की भी, सोच होती है,
लेकिन कलम का मन और सोच उसके लेखक की ही होती है.

लेखक अछा लिखता है, तो उसकी, पुरजोर वाह वाह होती है,
अगर लिखने में कुछ खामियाँ होती हैं वह कलम की होती हैं.

इसमें लेखक का कोई दोष नहीं है गलती मुहब्बत की होती है.
मुहब्बतें कलम, तारीफ लेखक को, खामियाँ ख़ुद ओढ़ लेती है.

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

Jai Prakash Dangwal


From my pen© Jai Prakash Dangwal:-

अब मिलेंगे अजनबियों की तरह, तुझे भी सकूं मिलेगा मुझे भी, सकूं मिलेगा,
फालतू की, इंत्जारी में, न तो तुझे सकूं मिलेगा, और न मुझे ही सकूं मिलेगा.

जब कोई ख़ास मिल जाता है जिंदगी में, पुराना दोस्त, दोस्त नहीं रह जाता है.
यही सत्यं है जीवन का जिसमें किसी को भी कोई दोष नहीं दिया जां सकता है

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

Jai Prakash Dangwal
October 12 at 8:40pm · 

From my pen© Jai Prakash Dangwal:-

It happens in life many times that the person u like you can not approach to the person
But by strong feelings' mail your love, feelings & your touch to approach to the person.

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

Jai Prakash Dangwal
October 4 at 11:18pm · Delhi · Edited ·

मेरी कलम से© Jai Prakash Dangwal:-

मत पूछना कभी उसका नाम, जिसको मैने देखा नहीं, जिससे हूँ मैं बेखबर,
जो अहसास बन कर मेरे साथ रहतीं है, बहुत क़रीब, अपने आप से बेखबर.

जो नग़में मुहब्बत के गाती है, लेकिन ख़ुद, मुहब्बत से है अनजान, बेखबर,
वह् मुझको क्या पहचान पायेगी, वह् तो ख़ुद से भी है अनजान और बेखबर.

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

Jai Prakash Dangwal
October 4 at 10:45pm · Delhi · Edited ·

मेरी कलम से© Jai Prakash Dangwal:-

किसी गुनाह की ग़र सजा दी होती, तो मुझे, कोईं शिकायत नहीं होती,
मगर, किसी बेगुनाह को, सजा देना, जुल्म होता है इनायत नहीं होती.

मुहब्बत में आशा के दीप जलाने से, खुदा की शान की पहचान होती है,
आशाओं के, दीप जला कर, उन्हे बुझा देने से मुहब्बत बदनाम होती है.

इसलिए ऐ मेरे नादान दोस्त मुहब्बत के दीप जला कर उन्हें मत बुझा,
मेरे लिए न सही, अपने चमन की, बहार के खातिर, यह दीप मत बुझा.