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जय प्रकाश डंगवाल-उत्तराखंड के लेखक JaiPrakashDangwal,An Author from Uttarakhand

Started by Rajneesh, October 28, 2007, 12:30:29 AM

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

Jai Prakash Dangwal
July 23 near Delhi
मेरी कलम की दुआ:

मेरे खुदा! कबूल हो दुआ, हर एक नेक इनसान की,
और कहर बर्पे तेरा, हर चाल पर हर एक हैवान की.

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

Jai Prakash Dangwal
July 23 near Delhi
From my pen:

Every creation of God is beautiful but the one that becomes main attraction among all other beauties is the beauty that warms mind, body and soul.

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

Jai Prakash Dangwal
July 22 near Delhi
From my pen what I feel:-

Those who live in mind and soul are either the most dear ones or God.

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

Jai Prakash Dangwal
5 hrs · Delhi ·

मेरी कलम से:-
यह मुहब्बत भी कैसी मुहब्बत है कि कभी देखा नहीं कभी मिले नहीं,
न जाने कैसे पता चल जाता है कि आज की रात तुझे नींद आई नहीं.

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

Jai Prakash Dangwal

मित्रता दिवस पर हर मित्र को तहे दिल से शुभ कामना ....

हरेक मित्र जो आज है या कभी था मेरे दिल और दिमाग में सदा बना रहता है,
फेसबुक पर अनफ्रेंड करना आसान है, दिल से अनफ्रेंड करना मुश्किल होता है.

मित्रता दिवस पर हर मित्र को तहे दिल से शुभ कामना ...

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

Jai Prakash Dangwal

मेरी कलम से:-

सम भाव धर्म है प्रकृति का और धर्म के नाम पर भेद भाव धर्म है मनुश्य का,
पशु किसी भी धर्म का नहीं होता है, जीवन के लिए संघर्ष यही धर्म है पशु का

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

Jai Prakash Dangwal

एक अनुभूति, एक विचार.-

सेक्युलर का अर्थ बहुत व्यापक है लेकिन जिन्हें इनका अर्थ मालूम नहीं है वह् अपने राजनैतिक लाभ के लिए हर आतंकवादी तरीका अपनाते हैं और उसके दमन पर अपनी सुरक्षा के लिए तथा कथित राजनैतिक सेकुलरजिम की शरण लेते हैं. इस तरह के विकृत सेकुलरजिम का फायदा सबसे अधिक राजनैतिक दल उठाते हैं.
मोदी जी का सेकुलरजिम सही माने में सबसे उत्तम सेकुलरजिम है जिसकी बुनियाद है: सब समान, सबका उत्थान और सबका सम्मान.
आइए हम सब मिल कर देश में और विश्वं में एक सच्चे सेकुलरजिम की स्थापना करें और मानवता को गौरान्वित करें.

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

Jai Prakash Dangwal

मेरी कलम से:-

तरस नहीं आता है अपने बुने गम के जाल में घुट घुट कर जीने वालों पर,
इस तरह अपनी नायाब शख़्शियत को चंद गम के लह्मो में खोने वालों पर.

तुमको, चह्चहाते और गुनगुनाते देखा था मैंने कभी, ग़मों को ठुकरा कर,
एक मुस्कान देखी थी तेरे चेहरे पर अपने सभी मसलों को धुँए में उड़ा कर.

अरे कौन कहता है तुझसे कि मुझे पहचान कर, मुझ पर एक एहसान कर,
इतनी इल्तजा है तुझसे कि अपनी हसीं सख्सियत को न यों गुमनाम कर.

एक बार, बस एक बार, अपने ग़मों के, बुने जाल को जरा तू देख् तोड़ कर,
तेरी हसीं शख्सियत खड़ी है बाहर, तुझे गले लगाने, अपनी बाहें फैला कर.

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

Jai Prakash Dangwal
August 18 near Delhi · Edited
मेरी कलम से:-

जीवन का, निरंतर विस्तार, तुम उस पार, हम इस पार,
बीच में, सघन अंधकार, आशा की किरण का है आधार.

जो देता संबल हमको हर बार, तिमिर से मत मानो हार,
सहज सुरम्य बनो फिर, प्रकाश पुंज, कर रहा है इंतजार.

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

Jai Prakash Dangwal
August 18 
मेरे मनोभाव:-

भिन्न होते हुए भी जो इस ब्रह्मांड में अभिन्न हैं वह राधे कृष्ण हैं.
नवनीत सा, निर्मल मन है जिनका, वह हम सबके प्यारे कृष्ण है.

सभी मित्रों को जन्माष्टमी की अनन्त शुभ कामनाएँ...