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जय प्रकाश डंगवाल-उत्तराखंड के लेखक JaiPrakashDangwal,An Author from Uttarakhand

Started by Rajneesh, October 28, 2007, 12:30:29 AM

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

Jai Prakash Dangwal
May 7 
मेरी कलम से:-

लाख ढा लो सितम, लाख कर लो जुल्म, तुम अनेकों सांप्रदायिक,
अब बर्दास्त न करेंगे, मोदी जी को जितायेंगे जो हैं असम्प्रदयिक.

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

Jai Prakash Dangwal

मेरी कलम से:-
हक़ीक़त की दुनिया में तो, हर कोई जीता है,
खयालो की दुनिया में भी, एक जीना होता है.
मन स्वतंत्र होता है, कोई बंदिश नहीं होती है,
ग़मों को भूल जाओ, मस्ती ही मस्ती होती है.

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

Jai Prakash Dangwal

from my pen:-

Though, Your pain is unbearable, yet your smile is pretty and precious,
Not only for you, but for your family and friends, you are really precious

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

Jai Prakash Dangwal

मेरी कलम से:-

स्व्यं में ही लाख खामियाँ होती हैं, मगर हम दूसरों की खामियाँ गिनाते हैं,
ओढ़ शराफ़त की चादर हम ख़ुद को शरीफ और दूसरों को शैतान बताते हैं.

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

Jai Prakash Dangwal
May 11 
मेरी कलम से:-

कभी खुद से प्रश्न पूछता हूँ कि क्यों पत्थर दिल से हम प्यार करते हैं?
फ़कीर हंसकर कह देते हैं: क्योंकि कुछ पत्थर भी बेशकीमती होते हैं.

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

Jai Prakash Dangwal

सभी धर्मों का होगा आदर और सत्कार, अबकी बार मोदी सरकार.
योग्यता और ईमानदारी का होगा प्रसार अबकी बार मोदी सरकार.

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

Jai Prakash Dangwal

मेरी कलम से:-

कभी इस कदर बेइंतहा मुहब्बत थी उन्हें नाम से मेरे,
एक नायाब मोती नजर आता था उनकों नाम में मेरे.

उनकी इस गलतफहमी पे बड़ी हँसी आतीं थी मुझको,
पत्थर को मोती समझ कर अर्श पे चढ़ा दिया मुझको.

हक़ीक़त पता चली, तो दूर बहुत दूर, दिया मुझे फेंक,
इस सुंदर गलतफह्मी का राज़ खुलने पर गया मैं झेंप.

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

Jai Prakash Dangwal
May 19 

जिस दिन मुझे ख़ुद को पहचानना आ जायेगा,
उस दिन मुझे दूसरों को पहचानना आ जायेगा.

जिस दिन, प्रकृति में, प्रभु का दर्शन हो जायेगा,
उस दिन ही, स्वयं में भी, प्रभु दर्शन हो जायेगा.

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

Jai Prakash Dangwal
May 19 
मेरे विचार से:-
संबंधों की प्रघाड़ता या दुर्बलता का अनुभव भाषा या संदेशों से नहीं होती है वह् तो सात समंदर पार से भी स्वतः अनुभूति करवा देती है. अनुभूति संबंधों की हर पल की प्रघाड़ता या दुर्बलता का अनुभव करवाती रहतीं है.

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

Jai Prakash Dangwal
May 22 near Delhi
My thought:-
The difference between mind and soul is that mind thinks and soul feels in life. Mind presents that feeling as its creation and soul smiles on the cleverness of mind.