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Here We will Talk Only in our Language-याँ होलि सिर्फ अपणी भाषा-बोलि में बात

Started by एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720, December 22, 2009, 08:14:32 AM

dayal pandey/ दयाल पाण्डे

पाण्डेय ज्यू तुमुल ली कैसी याद दिलाई  घरक निसास लगो भिगो अब , चलो एक दो दिन मैं बगसर जाणी  तुम ली हिटो कौतिक दिखी आला

Devbhoomi,Uttarakhand

जवा भाइयों पहाड़ घूमी आवा और पहाड़ की ठण्ड भी देखिक आवा और उत्तरायणी कु कौथिक भी देखा


एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720


हाँ महराज पहाड़ भे ज्यादे ठण्ड तो आजकल शहरी क्षेत्र में हेगियो !

हमारी टीम जाणी रे उत्तरायनी बागेश्वर में, जहाँ एक पुस्तक विमोचन होल जेके नाम छो, विरासत! एक अलावा एक विचार गोष्टी ले आयोजन होल और कुली बेगार आन्दोलन दगे कुछ महान विभूतियों क पोस्टर के विमोचन होल.

आपु सब लोग यो प्रोग्राम में हमर टीम दगे जुड़े सक्छा ! 

आजी त बफॅ नी पड रै तुम अलै बै चुकाडी फै गीछा भतेर फना
क्ये हैराण आय हो य।


अरे अलवेर पंचांग क्ये कौणौ हो दाज्यु लोगो
कैंलै पढौछ क्ये य़ सालक पंचांग।


सुणो म्येरी बात
चार निमुवा बी ल्याओ चार माल्टा बी ल्याओ जरा एक कटोरी मे दै
और जरा गुड लै ल्याओ नीमु सान बेर खाणी है रौ आज भ्यार।

भाईयो और बैणीयो ददा और दीदीयो.

भ्यार आओ आहाण लागाओ काथ सुणाओ
पहेली सुलझाओ और मीठी-मीठी अन्ताक्षरी खेलो।

फुक माजत य काम रोजै लागीये रौय
असोज जस रोज लागीये रौय