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Here We will Talk Only in our Language-याँ होलि सिर्फ अपणी भाषा-बोलि में बात

Started by एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720, December 22, 2009, 08:14:32 AM

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720


दोस्तों,

आपुन बोली में आगिल बढूँण क लीजी यो एक प्रयास छो! यो थ्रेड के हामी लोग उत्तराखंड क बार में और कोई ले सामान्य बात, उत्तराखंड का भाषा में करूँन!

यो प्रयास ले थोडा सा आपुन भाषा के नयी पीढ़ी के सीखूंन एक मौक मिलौल! आशा छो तुमि सभी लोग, आपुन-२ भाषा में यो थ्रेड में बात कराला.. !

(Englsih)

Friends, in order to promote our Uttarakhand regional language, we will only write all the sentences in our language only. Those who have less knowledge about the language, they can try here).



तुमार आपुन भुला,

एम् एस मेहता

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

तो महराज शुरू है जाओ,

यो थ्रेड में कोई ले सामान्य बात आपुन भाषा में कर सक्छा
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Achha ek bhe paile Mukund jewo ke message tumi sab logo k leeji

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From : ml.dhoundiyal@gmail.com>


पहाड का  भोला भाला लोको 

 

हमारी पहाड़ी बोलियों कु इस्तेमाल पहाड़ी इलाकों तक  ही सिमित ह्वेगी 
जू  भी  स्यकुंद (नीचे मैदानी इलाकों में) एक दां उतरी जांदू वू अपणी बोली यखी छोड़ी जांदू  ..

उत्तराँचल माँ,  पहाड़ी बोली बुलान वोला अब्ब कम ही दिखेंदा
अपणी बोली ता अपणी ही होंदा     ना
यानी अपणी माँ की बोली  ...अर्थात   मातृभाषा (बोली) ...और  भूलो एक बात  और की   "जाती" कवी भी हो पछ्याण ता  बोली से होंदी ना ?     


प्रत्येक  उत्तरांचली यानी की गडोली, कुमयाँ, 
जौनसारी हो चमोल्याण हो  या फिर टिरी वलु हो
बात ता   आसानी से  अपनी अपनी बोली  माँ कैरी ही सकदा न ..

अरे नि बोली सकदा आसानी से एक दूसरा की बोली  लेकिन  बींगी (समझी) ता  सकदा ही न?..

हमारी बोली ता सिर्फ एक ही च "पहाड़ी बोली" जू हर पांच मील अंतर माँ  वैका  इस्तेमाल से  लहजा (dilect) माँ मामूली फर्क ता एई ही जांदू 
लेकिन यु फर्क जब एक किनारा का लोग
दूसरा किनारा का लोगु तैं मिल्दन तब महसूस होन्दु   

हमारी  पछ्याण  निर्भर च हमारी अपनी  "बोली" पर   बोली कु ता लोप  च होनु   

हमारा संस्कृति का वास्ता हमारी बोली ज़रूरी च
  ता  भै  बंदौ  शुरू कैरी द्यावा अपणी बोली माँ  बच्यान (बुलान)   
 


हमारी बोली मा सौम्यता,विनम्रता,गोपनीयता और मिठास  च..साथ साथ अपना विचार प्रकट करना की सुगमता  भारी   मयल्दी (प्यारी)च हमारी बोली


.
आज ही  बीटी. ..ना...ना...ना....  बल्कि  अब्बी बीटी शुरू करा  फ़िर  देखा चमत्कार "जै बद्री विशाल लाल"  कु

अपणु  कवी गढ़देशी अब्ब जब भी मिलु ता  अपणी बोली कु आनंद लेवा
ओ  भैजी .. एक दां जरा ..शुरू त  करा मुस्कान का साथ.
देखा धौं..... क्या जी ....हुन्द 

सुधीर चतुर्वेदी

 मेहता जी आज तुमरो जनम्बार छ बल बधाई हो खुब फल्या - फुल्या और यो दिन के भैटने रिया , मीठा कब खवाला

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720



महराज.. यां के ले चीज तुमि पहाड़ी में बात कर सकचा..(पर यो सब चीज शालीनता में होंन छे) मकसद केवल भाषा के जिन्द रखना लीजी छो..

नयी मेम्बर जेके पहाड़ी में बोली नी उन वो, प्रयास कर सकू.. छोटी मोटी गलती हामी सुधारी दियूंन
अच्छा अब बताओ,...
बताओ यो साल उत्तरायनी कौतिक को-२ जाण रछा बागेश्वर में... 

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720


सुधीर जीयु,

धन्यवाद महराज.. आशीष दिनक लीजी..


Quote from: सुधीर चतुर्वेदी on December 22, 2009, 11:36:49 AM
मेहता जी आज तुमरो जनम्बार छ बल बधाई हो खुब फल्या - फुल्या और यो दिन के भैटने रिया , मीठा कब खवाला

सत्यदेव सिंह नेगी

Mehta ji tumal yu manch bhaut bhau banaii aakhir kakhi ta ini jaga hun chaini jakha jaiki ham apuri bhasha ma bachya sako

ap bachyaye kya ja yu bhi ham sabi log hi tay karla

basa ma katga apuri boli wha ar katga hindi, english taki jara dhabnya bachyaye ja saku taki sabyon thai samajha ma ai saku