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Maanila Devi Mandir Uttarakhand-मानिला उत्तराखंड का एक रमणीक स्थल

Started by Devbhoomi,Uttarakhand, January 27, 2010, 11:35:42 PM

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मानिला मल्ला मंदिर के सामने योगासन करने हेतु साधक एवं साधिकायें आ चुके हैं और उन्होंने मंदिर के बरामदे में रखी आलमारी से अपने आसन निकालकर हरी हरी घास पर बिछा लिये हैं।

ग्रीष्म ऋतु की प्रातः बड़ी सुहानी है। आकाश स्वच्छ एवं नीला है परंतु पूर्व दिशा में रवि के उदय की सूचना देते हुए रक्ताभ हो रहा है। चीड़ के वृक्षों की नुकीली पत्तियों के बीच से होकर आने वाली मंद बयार की शीतलता शरीर को रोमांचित कर रही है एवं चीड़ की पत्तियों में कम्पन उत्पन्न कर ऐसी कोमल सरगम की ध्वनि निकाल रही है जैसे कोई कुशल वादक सितार के सातों तारों को एक साथ बहुत हल्के हल्के झंकृत कर रहा हो।

मानिला मंदिर के चारों ओर पसरे वन में निर्द्वंद्व होकर रात्रि विश्राम करने वाले पक्षी अपने कलरव से प्रातःवेला का स्वागत कर रहे हैं। योगी भुवनचंद्र एवं योगिनी मीता के मंदिर से बाहर आने की प्रतीक्षा है


अल्मोड़ा शहर से १२७ किमी और रामनगर से ७२ किमी दूर प्राकृतिक वादियों में स्थित मानिला एक रमणीक स्थल है, १६०० मीटर की ऊंचाई पर स्थित यह स्थल माँ मानिला मंदिर के लिए ें विश्व विख्यात है, यह मंदिर कत्यूरी लोगो की पारिवारिक देवी मानिला का मंदिर है,

यहाँ की प्राकृतिक सुन्दरता देखते ही बनती है, देवदार , चीड़ और बांज के वृक्षों से आच्छादित यहाँ के वन ग्रीष्म ऋतू में तन और मन को शीतलता प्रदान करते हैं, कुछ कथाओ के अनुसार माना जाता है की कुछ वरस पूर्व अज्ञात चोरो ने इस मंदिर की मूर्ति को चुराने की कोशिश की, लेकिन मूर्ति भरी होने के कारन चोर यहाँ से देवी का हाथ काटकर ले गए,

कुछ दूर जाने पर जब वे थक गए तो उन्होंने एक जगह पर विश्राम किया और जब वहाँ से वे आगे बढ़ने लगे तो वो हाथ वहाँ से नही उठा सके, तभी से वहाँ पर एक मंदिर का निर्माण हुआ जिसे अब माँ मानिला देवी के शक्ति पीठ के रूप में जाना जाता है,


http://www.merapahad.com/forum/tourism-places-of-uttarakhand/manila-simply-heaven/

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कहा जाता है की एक समय कुछ चोर माता के मन्दिर से उनकी अष्ट धातु की प्रतिमा चुराने गए पूरी प्रतिमा तो वे नही चुरा पाए परन्तु देवी का एक हाथ वे चुरा कर ले गए बहुत दूर चलने के बाद वे थक गए जब वे विश्राम करके उठे तो वे देवी के उस हाथ को नही उठा सके ,तब तक भोर हो चुकी थी किसी को पता चलने के डर से वे उसे वही छोड़ कर भाग गए बाद में स्थानीय लोगो ने वह पर माता मानिला के मन्दिर की स्थापना की ,

आज यह शक्तिपीठ मल्ला मनीला के नाम से जाना जाता है माता मानिला का प्राचीन शक्तिपीठ तल्ला मनीला नामक गाँव में है जिसे तल्ला मानिला माता शक्तिपीठ के नाम से जाना जाता है यह मल्ला मानिला माता शक्तिपीठ से करीब 10 किलोमीटर दूर स्थित है देवदार, चीड बाँज व बुरांस के जंगलो के बीच यह मन्दिर वास्तव में अनुपम है अनेको बुगयालो के बीच यह शक्तिपीठ देख कर आत्मा को चिर आनंद की अनुभूति होती है तथा माता के दर्शन पा कर भक्तगण मन की शान्ति व आशीष पाने का अनुभव करते है

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एक और खास बात है इस मंदिर की, मंदिर के परिसर मे एक विशाल पेङ है जो हमेशा हर मौसम मे हरा रहता है उसमे कोई फल नहीं लगते अभी तक ये एक रहस्य है कि वो पेङ किस चीज़ का है, जो आज तक कई रिर्सचों के बाद भी रहस्य बना हुआ I

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यहाँ पर जाने के लिए अक्टूबर से लेकर जून तक का महिना बहुत ही उचित है, मानसून में आपको यहाँ से हिमालय के दर्शन नही भी हो सकते हैं,
यहाँ पर ठहरने के लिए अभी केवल उत्तराँचल बन विभाग का गेस्ट हाउस और कुमाओं मंडल विकास निगम का गेस्ट हाउस है, कुमाओं मंडल का गेस्ट हाउस विस्तार के लिए अभी विचाराधीन है, जिसके लिए जमीन का अधिग्रहण किया जा चुका है
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