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Srujan Se Magazine Published From Sahibabad - त्रिमासिक पत्रिका "सृजन से"

Started by एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720, January 28, 2010, 09:08:51 PM

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720


Dosto,

A three monthly Uttarakhand related magazine has been started publishing from Sahibabad. The magazine has been named as "Srujan Se".

Please go through the detials.
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M S Mehta
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"सृजनात्मक विधाओं की संवाहक" त्रैमासिक पत्रिका
प्रवेशांक- जनवरी-मार्च २०१० अंक की विशेष सामग्री

साहित्य:

कहानियां- महेश दर्पण जी, लालित मोहन थपलियाल जी, डां० शेरसिंह बिष्ट जी एवं नये रचनाकारों की कहानियां

गज़लें- डाक्टर शिव ओम अम्बर, शंकर प्रसाद करगेती जी एवं मीना पांडे जी

कविता- कई प्रतिष्ठित व नये रचनाकारों की कवितायें

साक्षात्कार- दिनेश द्विवेदी जी द्वारा लिया गया प्रख्यात साहित्यकार अमृता प्रीतम जी का साक्षात्कार

चित्रकला:

कलात्मक अनूभूति पर प्रसिद्व चित्रकार मो० सलीम जी का आलेख तथा अनेक प्रतिष्ठित व युवा चित्रकारों की कृतियां इस अंक मे देखी जा सकती हैं.

रंगमंच:

हिन्दी रंगमंच के सशक्त हस्ताक्षर रहे बृजमोहन शाह जी पर आलेख के साथ ही प्रसिद्व रंगकर्मी नईमा उप्रेती जी जी का साक्षात्कार

सामाजिक सरोकार:  

विकास की अवधारणा पर तारा दत्त पांडेय "अधीर" जी तथा डां० वी० के० जोशी जी के विचार

लोककला:

पद्मश्री डां० यशोधर मठपाल जी, डां० आशा पांडे जी, दीपा जोशी जी व राजेश चन्द्र जोशी जी द्वारा लोककलाओं पर विशेष आलेख

इसके साथ ही चित्रकला, रंगमंच, लोक संगीत, लोककला व पर्यटन पर भी विशेष सामग्री
सभी साहित्यकारों, रचनाकारों व कलाकारों से निवेदन है कि पत्रिका के अगले अंको के लिये स्तरीय सामग्री उपलब्ध करायें।

Email id: srujanse.patrika@gmail.com

पता:  एम-3, सी-61, वैष्णव अपार्टमेन्ट,
         शालीमार गार्डन-2, साहिबाबाद,
     गाज़ियाबाद (उ० प्र०)
        पिन कोड -201005




पंकज सिंह महर

पद्म श्री दीप जोशी जी का सृजन से के लिये संदेश


पंकज सिंह महर

सृजन से पत्रिका के प्रवेशांक को पढ़ा, पत्रिका के मुखपृष्ठ को देखकर ही मन प्रफुल्लित हो गया, क्योंकि उसमें भगवान जागेश्वर महादेव के दर्शन हो रहे थे। पूरी पत्रिका में साहित्य की नामचीन हस्तियों के साथ-साथ उत्तराखण्ड के साहित्यकारों की कृतियां पढ़कर और भी अच्छा लगा। ब्रजेन्द्र लाल शाह जी द्वारा लिखित कुमाऊनी रामायण को कुन्दन सिंह मनराल जी द्वारा आगे बढ़ाये जाने के समाचार से राहत मिली, कि आज भी अपनी पुरानी परम्परा को आगे बढ़ाने वालों की कमी नहीं है।

आशा है भविष्य में यह पुस्तक उत्तराखण्ड के साहित्य की प्रतिनिधि पत्रिका के रुप में सफल होगी।
शुभकामनाओं सहित।

Rajen

  'सृजन से' पत्रिका की सफलता के लिए हार्दिक शुभ कामनाएं ||

KAILASH PANDEY/THET PAHADI

त्रैमासिक पत्रिका "सृजन से" पत्रिका के प्रकाशन में जो सहयोग हमें लेखकों व कलाकारों की ओर से मिला है, उसके लिए हम उन सभी महानुभावों का दिल की असीम गहराइयों से आभार व्यक्त करते हैं।

आशा है पाठकगण इस पत्रिका को सराहयेंगे, हमारा आत्मविश्वास बढायेंगे एवं त्रुटियों से हमें अवगत करायेंगे।

भविष्य मे भी आपका रचनात्मक/लेखकीय सहयोग हमें मिलता रहेगा, ऎसा विश्वास है।


KAILASH PANDEY/THET PAHADI

"सृजन से" टीम के कुछ पल प्रख्यात गजलकार डां० कुंवर बेचैन जी के साथ.....