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Lets Play Uttarakhand Antakshari - आओ उत्तराखंडी गानों की अन्ताक्षरी खेलें

Started by एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720, October 31, 2007, 03:54:49 PM

हलिया

ओ हो! गडबड नि करौ हो महाराज.  "म" बटी गान छु: । यो लोयो नेगी जी को एक बहुत मधुर गीत 'म' बटी:

म्यरा डांडा कांठियौं का मुलुक जैलू
बसन्त ॠतु क जैई....


http://www.esnips.com/doc/963ba4c0-916c-4c59-a52f-c57da862cc8c/N-S-Negi---Mera-Dandi-Kanthiyon-Ka-Muluk

अगला:     "ई"

Quote from: M S Mehta on January 07, 2008, 02:39:58 PM

सुषमा श्रेष्ठ .. यह गाना.

छम घुघुर बजीनी - २ जैलाकोई
धक् धड़क जिकुरी - जिकुरी मेरा कोई ..

इ से महराज.


हेम पन्त


एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

Theek Chu mahraj.. Shabad k pher hai gaye... But shuru karo E bati.

Quote from: राजु दा on January 08, 2008, 11:43:08 AM
ओ हो! गडबड नि करौ हो महाराज.  "म" बटी गान छु: । यो लोयो नेगी जी को एक बहुत मधुर गीत 'म' बटी:

म्यरा डांडा कांठियौं का मुलुक जैलू
बसन्त ॠतु क जैई....


http://www.esnips.com/doc/963ba4c0-916c-4c59-a52f-c57da862cc8c/N-S-Negi---Mera-Dandi-Kanthiyon-Ka-Muluk

अगला:     "ई"

Quote from: M S Mehta on January 07, 2008, 02:39:58 PM

सुषमा श्रेष्ठ .. यह गाना.

छम घुघुर बजीनी - २ जैलाकोई
धक् धड़क जिकुरी - जिकुरी मेरा कोई ..

इ से महराज.


Rajen


एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

लियो ल से यह गाना..

लसका कमर बाँध हिम्मत क साथ ..

थ बाटी .. नया गाना

यह हीरा सिह राणा जी ने उत्तराखंड संघर्ष के दौरान रचा हुवा गाना है !

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720



Tha se koi gana.. ???

Quote from: M S Mehta on January 29, 2008, 10:32:01 AM
लियो ल से यह गाना..

लसका कमर बाँध हिम्मत क साथ ..

थ बाटी .. नया गाना

यह हीरा सिह राणा जी ने उत्तराखंड संघर्ष के दौरान रचा हुवा गाना है !




पंकज सिंह महर

थ से कोई गाना मुझे भी याद नहीं आ रहा है, ऎसा करिये शब्द बदल दीजिये।

पंकज सिंह महर

वैसे "थ" से जनकवि "गिर्दा" का एक गीत है

थातिकै नौ ल्हिन्यू हम बलिदानीन को, धन मयेड़ी त्यरा उं बांका लाल।
धन उनरी छाती, झेलि गै जो गोली, मरी बेर ल्वै कैं जो करी गै निहाल॥
पर यौं बलि नी जाणी चैनिन बिरथा, न्है गयी तो नाति-प्वाथन कैं पिड़ाल।
तर्पण करणी तो भौते हुंनी, पर अर्पण ज्यान करनी कुछै लाल॥
याद धरो अगास बै नी हुलरौ क्वे, थै रण, रणकैंणी अघिल बड़ाल।
भूड़ फानी उंण सितुल नी हुनो, जो जालो भूड़ में वीं फानी पाल।।
आज हिमाल तुमन के धत्यूछौ, जागो-जागो हो म्यरा लाल....!

हिन्दी भावार्थ-

नामयहीं पर लेते हैं उन अमर शहीदों का साथी, कर प्राण निछावर हुये धन्य जो मां के रण-बांकुरे लाल।
हैं धन्य जो कि सीना ताने हंस-हंस कर झेल गये गोली, हैं धन्य चढ़ाकर बलि कर गये लहू को जो निहाल॥
इसलिए ध्यान यह रहे कि बलि बेकार ना जाये उन सबकी, यदि चला गया बलिदान व्यर्थ युगों-युगों पड़ेगा पहचान।
तर्पण करने वाले तो अपने मिल जायेंगे बहुत, मगर अर्पित कर दें जो प्राण, कठिन हैं ऎसे अपने मिल पाना॥
ये याद रहे आकाश नहीं टपकता है रणवीर कभी, ये याद रहे पाताल फोड़ नहीं प्रकट हुआ रणधीर कभी।
ये धरती है, धरती में रण ही रण को राह दिखाता है, जो समर भूमि में उतरेगा, वही रणवीर कहाता है॥
इसलिए, हिमालय जगा रहा है तुम्हें कि जागो-जागो मेरे लाल........!