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Funny Incidents - हास्य घटनाये

Started by एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720, November 02, 2007, 04:22:29 PM

धनेश कोठारी

सरकार ने नौकरशाहों की सुविधायें बहाल करते हुए उनके लिए हवाई यात्राओं का रास्ता आसान कर दिया है।

सरकार के फायदे-
'हवाई प्लानिंगस' का आडिइया।
हवाई घोषणायें करने का अनुभव।
२०१२ तक जनता के मसलों को 'हवा' करने में कामयाबी।
मलाईदार रास्ते।
मेहरबानियों के बदले मेहरबानियों के लड्डू।

Devbhoomi,Uttarakhand

 एक कथा है की... एक बार  एक आदमी को बोला  गया की  तकलीफ  में रहते हो  तो "राम"  " राम"  बोला करो
तो वो  अपनी बोली में  बोला   "सब कुछ बोली सकदू...... लेकिन "रा$$$$म"  नि बोली सकदु   
तो देखा आपने  ... राम भी बोलना नहीं चाहता 
जबकि   आखिर कर  राम शब्द  तो फिर भी बोल ही गया न
नवयुवकों का,  (जिनको अपनी बोली नहीं आती  है)   व्यवहार  कुछ ऐसा ही है

हिंदी  बोलेंगे  धड़का  के  और  अंग्रेजी भी   बोलेंगे  फड़का के
"गिट पिट"    "गिट पिट"    लेकिन अपनी बोली बोलने में  सांप सूंघ जाता है
घिघी बंद जाती है   और  भागते हैं  दुम दबा के

अरे भाई .......सोचो जरा
जब तुम अपनी बोली   ही नहीं बोल पावोगे तो  तुम अपने प्रदेश के विकास में क्या योगदान कर सकोगे 

जबकि   हमारी  बोली   बहुत ही आसान है   
ये इतनी क्लिष्ट भी नहीं की समझ में नहीं आपाये
तो करो   फिर अपनी बोली का  श्री गणेश   एक  बार  और   फिर देखो  चमत्कार
शुरू शुरू में  करो   आसान और छोटे छोटे वाक्यों का  प्रयोग    और जहाँ पे नहीं .बोल पावो .. तो हिंदी बोल दो..

कोई नहीं करेगा हंसी मखोल,   
ये  भ्रम है  आपका
क्योंकि सामने वाला भी तुम से ज्यादा नहीं जानता है

From:
"Mukund Dhoundiyal"

धनेश कोठारी

इन्दौर में बृहस्पतिवार को भाजपा के राष्ट्रीय अधिवेशन के दौरान मुख्यमंत्री निशंक ने साइकिल चलाने की कोशिश की।
   
माननीय सीएम साहब आप के कन्धों पर 'कमल' खिलाने का जिम्मा है। 'साइकिल' को समाजवादी विनोद बड़थ्वाल जी के लिए छोड़ दीजिए। यों भी पहाड़ों पर साइकिल नहीं चलती है। सो साइकिल के चक्कर में ऐसा न हो कि '२०१२' में पहाड़ों पर ब्रेक ही न लगें और आप हल्द्वानी-देहरादून में 'समतल पहाड़' के विकास से भी महरुम हो जायें।

हेम पन्त

नेपाल के लोग बहुत सीधेसादे होते हैं. गरीबी के कारण उत्तराखण्ड के सीमान्त इलाकों में कुल्ली बनकर या खेतों में काम करके कुछ पैसे कमा लेते हैं. इन पर भी लोगों ने कई किस्से गढे हैं-

1. एक नेपाली किसी बड़े सेठ या अफसर के घर पर काम करता था. जब वो अपने गांव गया तो बड़ी ऎंठ दिहाने लगा, लोगों से बात भी नहीं करता था. एक बार उसके पुराने दोस्त ने कहा- भाई तू हमसे तो अब बात भी नहीं करता तो वो नेपाली बोला - "सैब सित बात करन्या खापड़ि, तुम संग कि बात करन्या" (मैं बड़े साहब के साथ बात करने वाले इस मुंह से तुम जैसे तुच्छ लोगों से कैसे बात करूँ?)

2. एक नेपाली बिचारा पहली बार भारत आया, उसको जलेबी खिलाई गई तो वह आश्चर्यचकित रह गया और बोला- धन्य हो भारत सरकार, कनका का धुला भितर मो कस्सै कोच्या को हो? (भारत सरकार तू धन्य है. भला तूने गेहूँ के आटे के अन्दर शहद कैसे घुसेड़ दिया?)

धनेश कोठारी

नमक भी होगा मंहगा! (गुजरात में नमक निर्माता कम्पनियों ने कीमतें बढ़ाने की चेतावनी दी)

चलो अच्छा है,
नमक भी मंहगा हो जाये तो नमक खाना ही छोड़ देंगे।
कम से कम फिर कोई नमक का वास्ता तो नहीं देगा।

Ravinder Rawat

bahut badhiya dinesh ji...

Quote from: धनेश कोठारी on March 11, 2010, 12:00:29 AM
नमक भी होगा मंहगा! (गुजरात में नमक निर्माता कम्पनियों ने कीमतें बढ़ाने की चेतावनी दी)

चलो अच्छा है,
नमक भी मंहगा हो जाये तो नमक खाना ही छोड़ देंगे।
कम से कम फिर कोई नमक का वास्ता तो नहीं देगा।


धनेश कोठारी

होली के बाद से चीनी के दामों में १० रुपये की कमी हुई।

यों तो मंहगाई ने आम आदमी के जायके को कड़वा बना डाला है। लेकिन चीनी की कीमतों में गिरावट के चलते अब आगत मेहमान भी बेहिचक कह पायेंगे कि- कुछ मीठा हो जाये।

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720


परसों में ETV में एक खबर देख रहा है था मंच पर नेता के गले में पहले से बहुत माला पडी हुयी थी!

एक कार्यकर्ता को आगे से माला नेता जी के गले में डालने के मौका नहीं मिला तो भाई सब ने पीठ पीछे से ही

से ही नेता के गले में माला डाल दी! .. ...


पिछली दिपावली को मै घर गया था तो हमारे गांव के गोपका के किस्से भी बडे हास्य होते है. तो गोपका ने चमुवां देवता की पुजा का प्रोग्राम बनाया पहले दिन से ही निमंत्रण देने पहुचे गांव के बहार यानी गांव वालो मे एक दो लोग ही बुलाए बाकी सब बहार के पहले दिन से ही पी कर टल्ली बकरी का इंतजाम तो उन्होने बहुत पहले से ही कर रख्खा था तो अब क्या था सुबह होते ही गोपका ने अपना रोल दिखाना सुरू कर दिया सबसे पहले पंडीत जी ने शुभ आशीष ली फिर बारी आई बहार वालो की लोगो ने बोला इस तरह गाली दे रहा है बुलाया ही क्यो हमे तो इस पर गोपका ने गुस्सा होकर कहा बकरी काटो खाओ पीयो मौज करो सब खुश हो गये लेकिन गोपका की हरकतो पर सक तो होने ही वाला हुआ बकरी काटी गई साफ कराई गई सब काम हो गया तो गोपका ने कहा किसी को कुछ नही मिलेगा सब अपने घर भागो सबकी खिसाणी हो गई

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720


ही ही .. कितने बार ढोंगी खेल भी शुरू हो रहे है देवताओ के नाम पर aajkal

Quote from: sunder singh negi/तनहा इंसान on September 15, 2010, 03:24:51 PM
पिछली दिपावली को मै घर गया था तो हमारे गांव के गोपका के किस्से भी बडे हास्य होते है. तो गोपका ने चमुवां देवता की पुजा का प्रोग्राम बनाया पहले दिन से ही निमंत्रण देने पहुचे गांव के बहार यानी गांव वालो मे एक दो लोग ही बुलाए बाकी सब बहार के पहले दिन से ही पी कर टल्ली बकरी का इंतजाम तो उन्होने बहुत पहले से ही कर रख्खा था तो अब क्या था सुबह होते ही गोपका ने अपना रोल दिखाना सुरू कर दिया सबसे पहले पंडीत जी ने शुभ आशीष ली फिर बारी आई बहार वालो की लोगो ने बोला इस तरह गाली दे रहा है बुलाया ही क्यो हमे तो इस पर गोपका ने गुस्सा होकर कहा बकरी काटो खाओ पीयो मौज करो सब खुश हो गये लेकिन गोपका की हरकतो पर सक तो होने ही वाला हुआ बकरी काटी गई साफ कराई गई सब काम हो गया तो गोपका ने कहा किसी को कुछ नही मिलेगा सब अपने घर भागो सबकी खिसाणी हो गई