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Funny Incidents - हास्य घटनाये

Started by एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720, November 02, 2007, 04:22:29 PM

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

दोस्तो,

आप ने बचपन और कई प्रकार के हास्य घटनाएं सुनी होगी या कभी आकस्मिक कई हास्य घटनाये आप के साथ घटी हो..

आप एक प्रकार की हास्य घटनायी आपने फॉरम मे share कर सकते है.

एम् एस मेहता.



मै बताऊंगा क्या हुवा जब किसी पहाडी भाई ने सबसे पहले tourch देखी और उसे उसको switch off करना नही आया...??


कृपया सभी पेजों को पड़े ! ( पेजों का नम्बर सबसे नीचे लिखा है बाई तरफ़)

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720


यह कहानी मैंने आपनी गाँव मे सुनी थी, जो की सत्य है...

एक बार एक फौजी घर आया होता है.. किसी रात्रि function मे लौटते समय आपने पिताजी को tourch दी. ! लेकिन घर मे पहुच कर उसके पिताजी touch  बंद न कर पाये.. देखिये अब हुआ.

   -    पहला प्रयास - - पहली बार बुडे जी ने tourch के ग्लास पर फूक मारी लेकिन touch बंद नही हुआ.

   -     दूसरा प्रयास  - tourch को पानी की बाल्टी मे डाला लेकिन स्टील की body होने के वह नही बुझा..

   -     तीसरा प्रयास -   बुडा tourch को दिवार पर पटक देता है.. लेकिन tourch फिर भी जलती रहती है...


   -     चौथा बार ---  tourch का अन्तिम संस्कार..... बुडा tourch से आगे का ग्लास तोड़ देता है जिससे tourch का बल्ब टूट जाता है.... और तब बुदा कहता है... ओह ... इसको ऐसे बंद करते है.....

There must have a case of ignorant about the technology...

Anyway.. i would request no one should follow this way.... ha ha.. ha... ha... [/b]

हेम पन्त

मेरा एक दोस्त एक घटना सुनाता था. पता नहीं ये सच है या नहीं?

उनके गांव में नये बिजली के कनेक्शन लगे थे. उसकी आमा को एक रात को बल्ब बुझाना था, लेकिन उन्हें तो दिया/बत्ती या मोमबत्ती बुझाना आता था. वो बल्ब को जोर-2 से फूकने लगी. हा हा हा हा!!!!!

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

मुझे एक बार याद है...

जब की प्राईमरी स्कूल था... ,..

Teacher ने एक गणित प्रशन पूछा. भिन्न किसे कहते है इसकी परिभाषा बताओ... ?

Ans. .. Front Row मे लड़का कहता है.. मसाफ...  दीदी के मालिक (Husband) को भिन्न कहते है...
हा... हा... हां......

suchira

agar ye sach to buddeji ko bahut mehnat karni padi torch bhujane k liye
ha ha ha
Quote from: M S Mehta on November 02, 2007, 04:42:21 PM

यह कहानी मैंने आपनी गाँव मे सुनी थी, जो की सत्य है...

एक बार एक फौजी घर आया होता है.. किसी रात्रि function मे लौटते समय आपने पिताजी को tourch दी. ! लेकिन घर मे पहुच कर उसके पिताजी touch  बंद न कर पाये.. देखिये अब हुआ.

   -    पहला प्रयास - - पहली बार बुडे जी ने tourch के ग्लास पर फूक मारी लेकिन touch बंद नही हुआ.

   -     दूसरा प्रयास  - tourch को पानी की बाल्टी मे डाला लेकिन स्टील की body होने के वह नही बुझा..

   -     तीसरा प्रयास -   बुडा tourch को दिवार पर पटक देता है.. लेकिन tourch फिर भी जलती रहती है...


   -     चौथा बार ---  tourch का अन्तिम संस्कार..... बुडा tourch से आगे का ग्लास तोड़ देता है जिससे tourch का बल्ब टूट जाता है.... और तब बुदा कहता है... ओह ... इसको ऐसे बंद करते है.....

There must have a case of ignorant about the technology...

Anyway.. i would request no one should follow this way.... ha ha.. ha... ha... [/b]

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720


Suhira Ji.

Natually, this was one kind science invention which this old man must have seen first time but got confused to switch off ...

I have many such stories which i used to listen from my  Dadi ji.. and others. A few i have seen persoanlly, which i would share it regulary.

Quote from: suchira on November 02, 2007, 04:55:50 PM
agar ye sach to buddeji ko bahut mehnat karni padi torch bhujane k liye
ha ha ha
Quote from: M S Mehta on November 02, 2007, 04:42:21 PM

यह कहानी मैंने आपनी गाँव मे सुनी थी, जो की सत्य है...

एक बार एक फौजी घर आया होता है.. किसी रात्रि function मे लौटते समय आपने पिताजी को tourch दी. ! लेकिन घर मे पहुच कर उसके पिताजी touch  बंद न कर पाये.. देखिये अब हुआ.

   -    पहला प्रयास - - पहली बार बुडे जी ने tourch के ग्लास पर फूक मारी लेकिन touch बंद नही हुआ.

   -     दूसरा प्रयास  - tourch को पानी की बाल्टी मे डाला लेकिन स्टील की body होने के वह नही बुझा..

   -     तीसरा प्रयास -   बुडा tourch को दिवार पर पटक देता है.. लेकिन tourch फिर भी जलती रहती है...


   -     चौथा बार ---  tourch का अन्तिम संस्कार..... बुडा tourch से आगे का ग्लास तोड़ देता है जिससे tourch का बल्ब टूट जाता है.... और तब बुदा कहता है... ओह ... इसको ऐसे बंद करते है.....

There must have a case of ignorant about the technology...

Anyway.. i would request no one should follow this way.... ha ha.. ha... ha... [/b]

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

Quote from: हेम पन्त on November 02, 2007, 04:44:53 PM
मेरा एक दोस्त एक घटना सुनाता था. पता नहीं ये सच है या नहीं?

उनके गांव में नये बिजली के कनेक्शन लगे थे. उसकी आमा को एक रात को बल्ब बुझाना था, लेकिन उन्हें तो दिया/बत्ती या मोमबत्ती बुझाना आता था. वो बल्ब को जोर-2 से फूकने लगी. हा हा हा हा!!!!!

Right.. ha.....ha..

Daily 2 bulb chhiye hoge..


एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

दोस्तो...


यह एक सच्ची कहानी है...  मर्चिस की तिली जलाओ -  कुत्ता नौ दो 11 


मेरे गाव मे एक आदमी के पास बहुत खतरनाक कुत्ता था. लोग उसके घर के आसपास जाने से डरते थे ! एक दिन एक आदमी अनीभिग्य होकर उसके घर से सामने से बीडी जलाते हुए निकल रहा था. एक व्यकित को यह पता नही था कि यह खतरनाक कटाने वाला कुत्ता है.

अब क्या होता है.. कुत्ता इस आदमी को देखर काटने को आता है. ... ...असमंजस मे आदमी अपने बचाव मे जलती मर्चिस की तिली कुत्ते की ओर फेकी .. जो गलती से कुत्ते के नाक मे चले गयी...

अब कुत्ते की हालत .. कुत्ते के नाख मे दम ...कुत्ता अपना नाख रगड़ता रहा लेकिन कोई राहत नही...

बहुत समय कुत्ते को होश आयी होगी..

सबक.

उस दिन से अगर किसी ने कुत्ते को मर्चिस की तिली भी दिखायी तो कुत्ता 9 दो ११..

mahender_sundriyal

नमस्कार,

मुझे भी एक घटना याद आ रही है जो मुझे मेरे बचपन में बताई थी.  ऐसा हुआ कि रामनगर से रोड बनते बनते मछोड़ तक आ गई थी.  पहली बार उस रोड पर एक बस तथा एक कार में सरकारी अधिकारी और कर्मचारी मछोड़ तक आए हुए थे.  तभी एक बूढी औरत वहाँ आई जिस ने पहले कभी बस या कार नहीं देखि थी.  बस को देखते ही वो बोली कि "क्य भलि भैंस छू यो, भौत दूध दिन हनेली".  और कार को देख कर बोली "यो भैंसकि थोरी हनेली, कतु चिफई छू यो, कतु दिनुकि हनेली यो"...

वाकई कैसा ज़माना रहा होगा जब ऐसे सीधे सादे लोग होते थे.
नमस्कार

Anubhav / अनुभव उपाध्याय

Bahut hi majedaar ghatna sunai aapne Sundariyal ji :)

Quote from: mahender_sundriyal on November 03, 2007, 05:48:13 PM
नमस्कार,

मुझे भी एक घटना याद आ रही है जो मुझे मेरे बचपन में बताई थी.  ऐसा हुआ कि रामनगर से रोड बनते बनते मछोड़ तक आ गई थी.  पहली बार उस रोड पर एक बस तथा एक कार में सरकारी अधिकारी और कर्मचारी मछोड़ तक आए हुए थे.  तभी एक बूढी औरत वहाँ आई जिस ने पहले कभी बस या कार नहीं देखि थी.  बस को देखते ही वो बोली कि "क्य भलि भैंस छू यो, भौत दूध दिन हनेली".  और कार को देख कर बोली "यो भैंसकि थोरी हनेली, कतु चिफई छू यो, कतु दिनुकि हनेली यो"...

वाकई कैसा ज़माना रहा होगा जब ऐसे सीधे सादे लोग होते थे.
नमस्कार