• Welcome to MeraPahad Community Of Uttarakhand Lovers.
 

Funny Incidents - हास्य घटनाये

Started by एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720, November 02, 2007, 04:22:29 PM

मदन मोहन भट्ट

बाखई टुक पर एक अनारौ बोट मैं खूब अनार पाक राछी हो महाराज.  रोज़ रात खान खैबैर कुछा अनार चोरुहू जाने भाय.  जैक बोट छि उकनी मालूम है गिनौल तो उ वां लुक रौई महाराज.  जसिकै एक एक अनार तोड़ सक्छी कुछा, उसिकै उ आवाज लगौन भै गोई "चोर चोर". आब नान नान नानतिन लै कैन चोर हुनी महाराज. दौड़ लगे बेर गौं बै दूर जंगल मैं भाजी ग्याय.  कई लोग पकडो पकडो कैबेर महाराज जंगल मैं ए ग्याय. उन लोगों मैं अनारौ बोट वालूंक बाप लै छि जो थोडा सासै बीमार छि.  उ महाराज कैन भै गिनाल.  जब अन्यार मैं उनरी साँसे आवाज कैलै सुन हनली तो उनूल सोचो महाराज की  चोर पकड़ है.  जोरल चिल्ला की पकड़ है पकड़ है.  जब ख्वार मैं बुडैल लाठी मारि, तब जबेर महाराज उनुकौं पत्त लाग कि को पकड़ दे.  बस महाराज तब तक हम तो घर पूज ग्याय. अनार खाय हमून और लाठी खाय उनून.

मदन मोहन भट्ट

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720


Hi hi. hi. .. ha ha. ha.

Thanks Bhatt Ji and Pandey Ji.

Bachpan ki hamari bahut-2 shararate hai. baad mai likhunga..




Quote from: Madan Mohan Bhatt on March 28, 2009, 10:58:24 AM
बाखई टुक पर एक अनारौ बोट मैं खूब अनार पाक राछी हो महाराज.  रोज़ रात खान खैबैर कुछा अनार चोरुहू जाने भाय.  जैक बोट छि उकनी मालूम है गिनौल तो उ वां लुक रौई महाराज.  जसिकै एक एक अनार तोड़ सक्छी कुछा, उसिकै उ आवाज लगौन भै गोई "चोर चोर". आब नान नान नानतिन लै कैन चोर हुनी महाराज. दौड़ लगे बेर गौं बै दूर जंगल मैं भाजी ग्याय.  कई लोग पकडो पकडो कैबेर महाराज जंगल मैं ए ग्याय. उन लोगों मैं अनारौ बोट वालूंक बाप लै छि जो थोडा सासै बीमार छि.  उ महाराज कैन भै गिनाल.  जब अन्यार मैं उनरी साँसे आवाज कैलै सुन हनली तो उनूल सोचो महाराज की  चोर पकड़ है.  जोरल चिल्ला की पकड़ है पकड़ है.  जब ख्वार मैं बुडैल लाठी मारि, तब जबेर महाराज उनुकौं पत्त लाग कि को पकड़ दे.  बस महाराज तब तक हम तो घर पूज ग्याय. अनार खाय हमून और लाठी खाय उनून.

मदन मोहन भट्ट

Lalit Mohan Pandey

Ha ha ha.. bhatt ji ye to wahi bat ho gayi maharaj..
बिरालु ले ढूध पियो, डढुवा झ्ठायो
बिरालु (बिल्ली)
डढुवा (बिल्ला)
झ्ठायो (लकड़ी से मारना)       

Quote from: Madan Mohan Bhatt on March 28, 2009, 10:58:24 AM
अनार खाय हमून और लाठी खाय उनून.



umeshbani

भात खानी का खा ज्ञान पनव चाटनी पकड़ी गयो

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720



एक समय कि बात है कुछ भक्तगण भगवान् के मंदिर मे बलि के लिए बकरा ले जा रहे थे ! जैसे कि पहाडो में महिंद्रा गाडिया काफी चलती है जहाँ कि जिसे पीछे वाले सीट दो दो लोग आमने सामने बैठ सकते है और बीच में कुछ जहाँ खाली होती है!

भक्तो ने इस बीच वाले जगह पर बकरे को रख दिया !  लेकिन पहाड़ के घुमाव दार रोड और उलटी करने वाले ज्यादे ! 

अब क्या हुवा
-==========

जैसे ये लोग घर से चले उलटी करने वालो के संख्या बाद गयी और बीच मे बकरा क्योकि महिंद्रा गाडी के पीछे खिड़की नहीं होती, और एक ही पीछे का दरवाजा !

अब सारे लोग उल्टी आये तो बकरे का पीठ मे !  थोडी देर में सफ़ेद बकरी का रंग ही बदल गया! 

हा हा हा........ ...

फिर जा के मंदिर से पहले बकरे को धुलाया और वास्तविक रंग में लाने के कोशिश की !

कभी -२ -२ हो जाता है महराज येसी प्रस्थिति !!!!

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

Yesha ho jaata hai kitni baar.

Quote from: एम् एस मेहता /M S Mehta on March 31, 2009, 04:22:41 PM


एक समय कि बात है कुछ भक्तगण भगवान् के मंदिर मे बलि के लिए बकरा ले जा रहे थे ! जैसे कि पहाडो में महिंद्रा गाडिया काफी चलती है जहाँ कि जिसे पीछे वाले सीट दो दो लोग आमने सामने बैठ सकते है और बीच में कुछ जहाँ खाली होती है!

भक्तो ने इस बीच वाले जगह पर बकरे को रख दिया !  लेकिन पहाड़ के घुमाव दार रोड और उलटी करने वाले ज्यादे ! 

अब क्या हुवा
-==========

जैसे ये लोग घर से चले उलटी करने वालो के संख्या बाद गयी और बीच मे बकरा क्योकि महिंद्रा गाडी के पीछे खिड़की नहीं होती, और एक ही पीछे का दरवाजा !

अब सारे लोग उल्टी आये तो बकरे का पीठ मे !  थोडी देर में सफ़ेद बकरी का रंग ही बदल गया! 

हा हा हा........ ...

फिर जा के मंदिर से पहले बकरे को धुलाया और वास्तविक रंग में लाने के कोशिश की !

कभी -२ -२ हो जाता है महराज येसी प्रस्थिति !!!!


Lalit Mohan Pandey

MEHTA JI, thek kyun richha, kabhi kabhar nahi, har bar hota hai ho, Gadi mai baithne ke sath hi sir bahar nikalna pad jata hai ulti karne ke liye, tabhi to pahad mai chalne wali jyadatar gadiyu ki khidkiyu mai ulti ke nisan lage rahte hai...

1) Ab ek bar ki bat batata hu, ek gadi mai bheed bahut thi... log jaldi mai chadne lage seat pe kabja karne ke lye, Ek admi seat ke pass ja ke dekh raha tha, to doosre ko laga chance hai isase pahle ki ye baith jaye mai baith jata hu soch ke bina dekhe hai baith gaya, maharaj jor se Chhap ki awaj hue, tab use mahsoos hua ki oho pahle wala baith kyu nahi raha tha sirf dekh kyu raha tha...Bechare ki poori paint mai ulti lag gayi....kyuki kisi ne pahle seat pe hi ulti kiyi hue thi...

2) Ek bar kya hua, ek gadi pe bheed bahut thi, to ek banda khidki mai baite doosre ko bol raha tha ki mujhe khidki pe baitne do, ulti hone wali hai... per khidki wala mana nahi (kyuki bahut log ise khidki wali seat pane ke liye bahane ke liye use karte hai), bhai sabah thodi der mai us bande ne ulti kar diyi..or jaldi waji mai khidke se muh bahar karne ke chakar mai..adi se jyada , khidke mai baite bande ki god mai kar diyi....


मदन मोहन भट्ट

Ab koi ulti se seedhi ki baat bhi likho bhai.  Bahut ulti ho gayi hain.

Lalit Mohan Pandey

Ek Movie ka Naya Title hai "Ali Baba and 30 chor".... Ab aap soch rahe honge ki 30 chor kaise ho gaya... 40 se...

Maharaj Recession aya hai recession... sunane mai aya hai choru ke sardar ne bhi cost cutting ke chakar mai 10 choru ko nikal diya hai...

पंकज सिंह महर

एक घटना याद आई, हमारे एक अनूप दा थे, स्कूल की परीक्षायें हो रही थी। उनको नकल करने की नई विधियों का मास्टर माना जाता था, उन दिनों सुरेन्द्रा पाकेट बुक्स से गैस पेपर निकला करते थे। वे उस किताब का एक इंडेक्स तैयार किया करते थे, जैसे वेबसाईट्स का साईट मैप होता है, वैसा ही। एक-एक प्रश्न को वे प्रश्न संख्या और उसका जबाब कौन से पेज को किस लाईन में है तथा किताब की कौन सी साईड में है, लिखा करते थे। जैसे ही पेपर मिला, उनका साईट मैप खुला और सारे आन्सर फाड़ लिये।
     उनकी एक और खासियत थी कि वे नकल के लिये जो भी सामग्री बनाते थे, कार्बन पेपर से उसकी ७-८ प्रतियां जरुर बनाते, ताकि अगर एक कागज पकड़ा जाय तो दूसरा काम आ जाये।
     इसी प्रकार से वे किसी प्रचलित प्रश्न का उत्तर ले जाते थे तो वह भी ७-८ कापीज में। एक बार परीक्षा में वे कबीर दास की जीवनी को वे नकल कर रहे थे, मास्साब ने पकड़ लिया, थोड़ी देर में फिर वे पकड़े गये, इसी प्रकार जब वे छ बार पकड़े गये और एक ही मैटर हर बार उनके पास से बरामद हो रहा था, तो मास्साब ने झल्ला कर उनको नकल वापस दे दी और कहा कि यार अनूप सिंह इतना दिमाग पढ़्ने में लगाता तो फर्स्ट क्लास आ जाता।