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Funny Incidents - हास्य घटनाये

Started by एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720, November 02, 2007, 04:22:29 PM

Lalit Mohan Pandey

Mehta ji.. wakae mai tab pahad mai condition aesi hi hoti thi.. sayad aaj ka bachcha jalebi ke liye itna na lalchaye ki Seeta ka role use jalebi ke samne chota dikhe.. lekin tab aesa hi hota tha.. villages mai jab mele lagte the sal mai ek bar, tabhi jalebi khane ko milti thi.. yaad hoga aapko.. mele mai jake jisne jalebi nahi khayi.. uska mela jana bekar.... ha ha ha....ye sab hone ke bad bhi bachpan bahut pyara tha... I do miss it a lot.... Wo gay(cow) charane jangle mai jana... wo bailu (ox) ki ladayi... jis din hamara bail ladae mai jeet jata tha..mai itna khush hota tha.. aaj utni khusi kisi bade project deal ke successfull hone mai bhi nahi hoti....tab ham Ama (grandmother) and Iza (mother) se chura ke gay (cow) ke liye rakha hua Dala ( Gehu ko peesh ke banaya jata tha).. bail (ox) ko khila dete the...

खीमसिंह रावत

pandey ji sachmuch aapane sahi kaha hai "mele mai jake jisne jalebi nahi khayi.. uska mela jana bekar.... aur  jis din hamara bail ladae mai jeet jata tha..mai itna khush hota tha.. aaj utni khusi kisi bade project deal ke successfull hone mai bhi nahi hoti...."
Great pandey ji great

Quote from: Lalit Mohan Pandey on January 17, 2009, 10:39:27 AM
Mehta ji.. wakae mai tab pahad mai condition aesi hi hoti thi.. sayad aaj ka bachcha jalebi ke liye itna na lalchaye ki Seeta ka role use jalebi ke samne chota dikhe.. lekin tab aesa hi hota tha.. villages mai jab mele lagte the sal mai ek bar, tabhi jalebi khane ko milti thi.. yaad hoga aapko.. mele mai jake jisne jalebi nahi khayi.. uska mela jana bekar.... ha ha ha....ye sab hone ke bad bhi bachpan bahut pyara tha... I do miss it a lot.... Wo gay(cow) charane jangle mai jana... wo bailu (ox) ki ladayi... jis din hamara bail ladae mai jeet jata tha..mai itna khush hota tha.. aaj utni khusi kisi bade project deal ke successfull hone mai bhi nahi hoti....tab ham Ama (grandmother) and Iza (mother) se chura ke gay (cow) ke liye rakha hua Dala ( Gehu ko peesh ke banaya jata tha).. bail (ox) ko khila dete the...

सुधीर चतुर्वेदी

ek bar gaon k primary school mai ek teacher ek chottay bacchay ko ghatna sikha rahai thay puch rahai thay 2 may say 2 gaya kat bhay bachha bol raha tha 4 kabhi 7 kabhi 5 , master ji k rish aa gay unul ek tarkib laga bair ek parshan puscha bayali rat tari ija lay taikay 2 rot diyain aur tail 2 k 2 kha diyain ab bato ki bacchyo ..... u nintan jor lay ko matsabh maithai sag bacchyo.............

Lalit Mohan Pandey

Sudhir bhai bahut badiya...ha ha ha...
हमारे माशाप भी हमें सिखाते थे "स्किन" .. स्किन माने त्वचा, त्वचा किसे कहते है जिस मै चिगोटी काटते है.

Quote from: Sudhir Chaturvedi on February 17, 2009, 04:05:19 PM
ek bar gaon k primary school mai ek teacher ek chottay bacchay ko ghatna sikha rahai thay puch rahai thay 2 may say 2 gaya kat bhay bachha bol raha tha 4 kabhi 7 kabhi 5 , master ji k rish aa gay unul ek tarkib laga bair ek parshan puscha bayali rat tari ija lay taikay 2 rot diyain aur tail 2 k 2 kha diyain ab bato ki bacchyo ..... u nintan jor lay ko matsabh maithai sag bacchyo.............

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720


This is really a laughing incident ha.. ha..

Quote from: parashargaur on December 12, 2008, 03:06:10 AM
दोस्तों
आज मै आप को अपने जीवन के ओ अनछुई हास्य क उस पल आप के साथ बाँटना चाहूँगा .... जो लगभग आज से ३० ३२ साल पहेले  मेरे साथ घटी थी ..
" पहाड़ में सांस्क्रतिक कार्यकर्मो नाम पर अक्षर राम लीला ही एक येसा मंच ही हुआ करता था जो लोगो का मनोरजन करता आ रहा था !  मेरे अंदर के कलकार की सुरवात भी इसी मंच से हुयी .. यूँ कहना श्रये कर होगा  रामलीला का मंच मेरे लिए तो ये किसी अन एस डी से कम नही  क्यूँ की मेरे कला की पहले ट्रेनिंग यही से सुरू होती है !  आप की जानकारी लिए बता देना चाहूंगा कि मै एक बहुत अछा हास्य कलकार भी हूँ  ! मेरा तब उपनाम था "  खा माँ खा " जनता जितनी रामलीला देखने आती थी उतनी ही ओ सब मुझे सुनने और देखने भी आती थी !  जनता मुझे और मेरे आवाज़ से बड़ी वाकीफ थी ! हर एक के कान में मेरे आवाज़ बैठी हुयी थी !   

     तो किस्सा ये है जनाब ,  जो आदमी  दसरथ का पाट खेल रहा था अचानक बीमार होगया ! सीन था राम कि बनवास जाने के बाद दसरथ बड़े दुखी होते है और राम राम कहकर अपने परान त्याग देते है ! उस समय उनकी तीनो रनिया उनके पास बैठकर विलाप करती है ! डारेक्टर साब के सामने बड़ी समस्या ये थी कौन खलेगा .. किसने कहा गौर जी , याने मै , बोले तो खा माँ खा ! डारेक्टर ने आओ देखा न ताओ ,  झट  से कह्देया बिल्कुल सही ...मेरे पास आकर बोले देखो ,  इस सीन मै दसरथ लेटा है चेहरा तो देखी नही देगा !  तुम्हे तो केवल हाए राम .., हाए राम तो कहना है बस !  मैंने कहा सो तो टीक है लकिन लोग मेरे आवाज़ को पहिचानते है वो पचा नही पायेगे ! वो बोली ऐ सब मुझ पर छोड़ो ! मैंने कहा जैसे आप के मर्जी ... सीन तैयार हुया , मै दसरथ के वेश  रूप मै आकर लेट गया  और तीनो रनिया आकर बैठ गयी ! परदा खुला  सीन सुरू हुआ  मैंने जैसे ही हे राम
कहा ही था कि जनता मै खुसबुसाहट सुरु हो गयी जैसे मै हाए राम कहता जनता वैसे ही खी खी कर हसने लगती  !  जनता से आवाज़ आने लगी " अबे ये तो खमा खा है " दसरथ कहा गया कहने के साथ हे जनता  जोर जोर से हंसने लगी ! सारा पंडाल ठको से गुजने लगा !
     बात यही खतम नही होती जो तीन रनिया थी उन सबने काची दब के पी राखी थी उनके मुह से काची शाराब बदबू मुझे साँस लेन मै दिखत कर रहे थी और रोते भी तो बिल्कुल मेरे मुह के पास आकर जब मुझे से साह नही गया मने एक रानी को धका देकर कहा ,  अबे ..., परे होकर रोना ! तेरे मुहसे इतनी बुरी  बॉस आ रही कि साँस लेन भी मुस्किल होरही है !  ये देख कर जनता चिला उठी " अरे अरे  देखो देखो ... दशरथ मरकर भी राने को मर रहा है  " सब हंसते  हंसते लोट पोअट हो रहे थे और बेचार डारेक्टर का मुह देखने लायक था ओ परदा गिराने का ईशारा  करने मै लगा होया था !       
  


umeshbani

बचपन में एक  बार एक शादी में गया था घर से कुछ दूर वहां पे हमारे साथी के बिरादर भी रहते थे सुबह शादी के बाद हम लोग उनके बिरादर के वहां खुमानी और पुलम लेना गए हमारे साथ कई लड़के थे उनमे से एक बन्दे ने कहा कि उनके वहां एक बहुत खतरनाक कुता है मगर वह एक बात जनता है बस तुम बोलना कि " कि  हर कि  हर " बस वह तुम्हे नहीं काटेगा हमें सोचा कि शायद यह सही बोल रहा है क्यों कि यह उन्हें जनता है फिर क्या था चल दिया हम उनके यहं ..... हम उनके बखाई में पहुंचे ही थे कि हम से दुगनी ऊंचाई का कुता हम में झफत गया ...... जिसने बोला था कि बोलना  " कि  हर कि  हर "  वह सबसे पहले पेड पर चढ़ गया .......... हम में से एक लड़के को कुते ने पीछै से पकड़ लिया वो बेचारा रोता और बोलता  " कि  हर कि  हर "  लकिन कुता तो बस उसे घसीट रहा था या देख सभी साथी भाग गए कुछ पेड में चढ़ गए मै ने भी खूब तेज भाग कर निचे  खेत मै कूद  मार दी ......... बाद मै जब कुते का मालिक आया तब जाकर उस बेचार कि जान में जान आई हमारी भी ............
अभी भी हम कभी आपस में मिलते है तो इस बात को काफी यद् करते है " कि  हर कि  हर "  .......... हा हा

Risky Pathak

Bahot Badiya :D
Quote from: parashargaur on December 12, 2008, 03:06:10 AM
दोस्तों
आज मै आप को अपने जीवन के ओ अनछुई हास्य क उस पल आप के साथ बाँटना चाहूँगा .... जो लगभग आज से ३० ३२ साल पहेले  मेरे साथ घटी थी ..
" पहाड़ में सांस्क्रतिक कार्यकर्मो नाम पर अक्षर राम लीला ही एक येसा मंच ही हुआ करता था जो लोगो का मनोरजन करता आ रहा था !  मेरे अंदर के कलकार की सुरवात भी इसी मंच से हुयी .. यूँ कहना श्रये कर होगा  रामलीला का मंच मेरे लिए तो ये किसी अन एस डी से कम नही  क्यूँ की मेरे कला की पहले ट्रेनिंग यही से सुरू होती है !  आप की जानकारी लिए बता देना चाहूंगा कि मै एक बहुत अछा हास्य कलकार भी हूँ  ! मेरा तब उपनाम था "  खा माँ खा " जनता जितनी रामलीला देखने आती थी उतनी ही ओ सब मुझे सुनने और देखने भी आती थी !  जनता मुझे और मेरे आवाज़ से बड़ी वाकीफ थी ! हर एक के कान में मेरे आवाज़ बैठी हुयी थी !   

     तो किस्सा ये है जनाब ,  जो आदमी  दसरथ का पाट खेल रहा था अचानक बीमार होगया ! सीन था राम कि बनवास जाने के बाद दसरथ बड़े दुखी होते है और राम राम कहकर अपने परान त्याग देते है ! उस समय उनकी तीनो रनिया उनके पास बैठकर विलाप करती है ! डारेक्टर साब के सामने बड़ी समस्या ये थी कौन खलेगा .. किसने कहा गौर जी , याने मै , बोले तो खा माँ खा ! डारेक्टर ने आओ देखा न ताओ ,  झट  से कह्देया बिल्कुल सही ...मेरे पास आकर बोले देखो ,  इस सीन मै दसरथ लेटा है चेहरा तो देखी नही देगा !  तुम्हे तो केवल हाए राम .., हाए राम तो कहना है बस !  मैंने कहा सो तो टीक है लकिन लोग मेरे आवाज़ को पहिचानते है वो पचा नही पायेगे ! वो बोली ऐ सब मुझ पर छोड़ो ! मैंने कहा जैसे आप के मर्जी ... सीन तैयार हुया , मै दसरथ के वेश  रूप मै आकर लेट गया  और तीनो रनिया आकर बैठ गयी ! परदा खुला  सीन सुरू हुआ  मैंने जैसे ही हे राम
कहा ही था कि जनता मै खुसबुसाहट सुरु हो गयी जैसे मै हाए राम कहता जनता वैसे ही खी खी कर हसने लगती  !  जनता से आवाज़ आने लगी " अबे ये तो खमा खा है " दसरथ कहा गया कहने के साथ हे जनता  जोर जोर से हंसने लगी ! सारा पंडाल ठको से गुजने लगा !
     बात यही खतम नही होती जो तीन रनिया थी उन सबने काची दब के पी राखी थी उनके मुह से काची शाराब बदबू मुझे साँस लेन मै दिखत कर रहे थी और रोते भी तो बिल्कुल मेरे मुह के पास आकर जब मुझे से साह नही गया मने एक रानी को धका देकर कहा ,  अबे ..., परे होकर रोना ! तेरे मुहसे इतनी बुरी  बॉस आ रही कि साँस लेन भी मुस्किल होरही है !  ये देख कर जनता चिला उठी " अरे अरे  देखो देखो ... दशरथ मरकर भी राने को मर रहा है  " सब हंसते  हंसते लोट पोअट हो रहे थे और बेचार डारेक्टर का मुह देखने लायक था ओ परदा गिराने का ईशारा  करने मै लगा होया था !       
  


Lalit Mohan Pandey

मुझे आज अपने स्कूल के दिनु के कुछ किस्से याद आ रहे है, उनमे से एक नीचे लिख रहा हु,
हमारे स्कूल मै English teacher थे Sri Lal Singh Bhandaji  (शायद पंकज दा जानते होंगे इन्हे), कनालीछीना स्कूल मै टीचर थे. एक दिन सर ने ब्लैक बोर्ड मै एक स्पेलिंग लिखी और एक लड़के से पुछा की ये स्पेलिंग सही है की ग़लत, अब लड़का टीचर की लिखी स्पेलिंग को ग़लत कैसे बोल देगा (waise bhi ham logu ki english bahut kamjoor hoti thi and speeling to bilkul bhi yaad nahi hoti thi). तो बच्चे ने जबाब दिया की सर सही है. टीचर ने उसे एक जोर से चांटा मारा और कहा "साला ग़लत स्पेलिंग को सही कह रहा है".
अब टीचर ने उस लड़के को बैठने को बोल के दूसरे लड़के से पुछा की तू बता ये स्पेलिंग सही है की ग़लत. वो लड़का खड़ा हुआ और बोला सर स्पेलिंग ग़लत है, टीचर ने कहा very good, अब सही स्पेलिंग लिख बोर्ड पे. अब ये बेचारा फस गया क्युकी सही स्पेलिंग तो आती नही थी, उसने तो ग़लत है सिर्फ़ इसलिए बोल दिया था क्युकी पहले वाले को सही है कहने मै मार पड़ी थी. अब ये डरते डरते बोर्ड तक पंहुचा लेकिन कुछ लिख नही पाया. उसके बाद टीचर ने ये कहते हुए की "साला मेरी लिखी हुए स्पेलिंग को ग़लत कहता है" कहकर जो मार लगायी वो लड़का बहुत टाइम तक उसको भूल नही पाया होगा.

Lalit Mohan Pandey

इन्ही सर की एक बात और याद है,
एक दिन सुबह सुबह इन्होने अपने wife से कहा, Pen देना जरा, पत्नी ने पुछा, " की करछा पेनेले ये रात्ते रात्ते ", इनका जबाब था "लाकडा फाडी दिछु तो खिन, और की करनान पेनेले"

daju

mast hai...yaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaa.haaaaaaaaaaaaa