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Funny Incidents - हास्य घटनाये

Started by एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720, November 02, 2007, 04:22:29 PM

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720


ha ha.ha. great hem da.

Quote from: H.Pant on July 19, 2008, 03:48:32 PM
गांव में सामुहिक भोज (लौर) के दौरान छुआ-छूत का विशेष ध्यान रखा जाता है. लोग एक पंक्ति में बैठ जाते हैं और चूल्हे से खाना बांटने वाले दूर से ही थालियों में खाना डालते हैं.

एक बार भात (चावल) थोडा गीला बन गया था. बार-२ पण्योले(खाना बांटने का बडा सा चम्चा) में चिपक जा रही थी. एक बच्चे की थाली में खाना परोसा जा रहा था तो भात देने के लिये बांटने वाला पण्योले को झटकने लगा. बच्चा संभवत: कुछ ज्यादा ही भूख से आतुर था. उसने अपने हाथ से ही पण्योले से भात छुडा दिया.

लेकिन वह बिचारा बडी भारी भूल कर बैठा. अब सभी लोगों के लिये खाना दुबारा बनाया गया, तब वह भोज का कार्यक्रम संपन्न हो पाया.


एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720


Written by Badola ji.


चल तुमेडी बाटे बाट मैं क्या जानू बुडिये की बात



रात्रि मैं भोजन के पश्चात निद्रा रानी के आव्हान के लिए कहानी सुनना बच्चों की दिन चर्या का एक आवश्यकीय अंग होता है. हम भी बचपन मैं रोज कहानी सुनते थे कहानी सुनते सुनते सो जाना एक साधारण बात थी.

एक दिन की बात है की रात्रि मैं हमारी दादी ने एक कहानी सुनाई 'चल तुमेडी बाटे बाट मैं क्या जानू बुडिये की बात'  दादी ने बताया की एक गाँव मैं एक शेर लगा था वह दिन दहाड़े आकर आदमियों का शिकार करता  था गाँव के लोगो  ने शेर से फरियाद की की वह एक बार मैं एक ही  आदमी को शिकार बनाए  जंगल का राजा शेर राजी हो गया क्योंकि उसे बिना मेहनत के शिकार जो मिल रहा था. तब से बारी बारी लोग शेर का शिकार बनने लगे एक दफा एक चतुर बुडिया की बारी आइ वह शेर का निवाला नहीं बनना चाहती  थी अतः उसने स्वयं को 
एक तुमडी (A hollow gourd)मैं बंद कर लिया तथा गाँव वालों से कहा कि उसे घुरया दें तुमडी घुरीते घुरीते जा रही थी कि शेर कि उस पर नज़र पड़ गयी. उसने तुमडी  को रोका और कहा की मेरा शिकार कहाँ हैं बुडिया बोली  चल तुमेडी बाटे बाट मैं क्या जानू बुडिये की बात इस प्रकार बुडिया बच गई उसने चतुराई से अपनी जान बचा ली

दूसरी कहानी के अनुसार जब शेर नहीं माना तो बुडिया ने शेर को समझाया कि वह अपने नाती के पास जा रही है अभी वह दुबली पतली है नाती के पास जाकर लोटते वक्त काफ़ी मोटी हो जाउंगी तब मुझे खाना शेर राजी हो गया और चतुर बुडिया ने अपनी जान बच्चा ली कहानी सुनते सुनते मैं कब सो गया मुझे पता नहीं. (D.N.Barola)

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

I AM FROM UK : JUDGE STUNNED ???

Yesterday, I was watching the screening of "Indian Idol".  One of the contestants entered in the room and asked to toilet. Screening Judge "Kailash Kher" escorted him and both of them returned back. When Javed Akhtar asked this guy "Where do you belong to"., this gentleman replied from "UK".

All the judge stunned >>

Then this man replied "UK"  means – Uttarakhand.

He said he is from Dharchula, pithorgarh, which falls in UK...

Though he could not impressed the judge and eliminated..

Now none of you should surprise when anyone call UK. It means Uttarakhand not United Kingdom

Lalit Mohan Pandey

भगवान न करे ऐसी Family प्रॉब्लम किसी को भी हो...

दो आदमी एक बार मे बैठे थे एक ने कहा "यार बहुत फॅमिली प्रॉब्लम है"
दूसरा आदमी बोला पहले तू मेरी सुन, फ़िर अपनी बताना
"मैंने एक विधवा महिला से शादी कियी जिसकी एक लड़की थी, कुछ दिन बाद पता चला की मेरे पिताजी को उस विधवा महिला की बेटी से प्यार हो गया .. और उन्होंने इस तरह मेरी ही लड़की से शादी कर लियी ...
अब मेरे पिताजी मेरे दामाद बन गए और मेरी बेटी ही मेरी माँ बन गई... और मेरी ही पत्नी मेरी नानी हो गई!!
ज्यादा प्रॉब्लम तो तब हुए जब मेरे यहाँ लड़का हुआ.. अब मेरा लड़का मेरी माँ का भाई हो गया तो इस तरह मेरा मामा हो गया .....
परिस्थिति तो तब और ख़राब हुए जब मेरे पिताजी का भी लड़का हुआ.. मेरे पिताजी का लड़का यानि की मेरा भाई मेरा ही पोता हो गया ..इस तरह मै स्वयम का ही दादा हो गया और स्वयम का ही पोता बन गया....

और तू कहता है तुजे फॅमिली प्रॉब्लम है.   


Anubhav / अनुभव उपाध्याय

Good one

Quote from: Lalit Mohan Pandey on October 22, 2008, 01:46:19 PM
भगवान न करे ऐसी Family प्रॉब्लम किसी को भी हो...

दो आदमी एक बार मे बैठे थे एक ने कहा "यार बहुत फॅमिली प्रॉब्लम है"
दूसरा आदमी बोला पहले तू मेरी सुन, फ़िर अपनी बताना
"मैंने एक विधवा महिला से शादी कियी जिसकी एक लड़की थी, कुछ दिन बाद पता चला की मेरे पिताजी को उस विधवा महिला की बेटी से प्यार हो गया .. और उन्होंने इस तरह मेरी ही लड़की से शादी कर लियी ...
अब मेरे पिताजी मेरे दामाद बन गए और मेरी बेटी ही मेरी माँ बन गई... और मेरी ही पत्नी मेरी नानी हो गई!!
ज्यादा प्रॉब्लम तो तब हुए जब मेरे यहाँ लड़का हुआ.. अब मेरा लड़का मेरी माँ का भाई हो गया तो इस तरह मेरा मामा हो गया .....
परिस्थिति तो तब और ख़राब हुए जब मेरे पिताजी का भी लड़का हुआ.. मेरे पिताजी का लड़का यानि की मेरा भाई मेरा ही पोता हो गया ..इस तरह मै स्वयम का ही दादा हो गया और स्वयम का ही पोता बन गया....

और तू कहता है तुजे फॅमिली प्रॉब्लम है.  



एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

Quote from: Lalit Mohan Pandey on October 22, 2008, 01:46:19 PM
भगवान न करे ऐसी Family प्रॉब्लम किसी को भी हो...

दो आदमी एक बार मे बैठे थे एक ने कहा "यार बहुत फॅमिली प्रॉब्लम है"
दूसरा आदमी बोला पहले तू मेरी सुन, फ़िर अपनी बताना
"मैंने एक विधवा महिला से शादी कियी जिसकी एक लड़की थी, कुछ दिन बाद पता चला की मेरे पिताजी को उस विधवा महिला की बेटी से प्यार हो गया .. और उन्होंने इस तरह मेरी ही लड़की से शादी कर लियी ...
अब मेरे पिताजी मेरे दामाद बन गए और मेरी बेटी ही मेरी माँ बन गई... और मेरी ही पत्नी मेरी नानी हो गई!!
ज्यादा प्रॉब्लम तो तब हुए जब मेरे यहाँ लड़का हुआ.. अब मेरा लड़का मेरी माँ का भाई हो गया तो इस तरह मेरा मामा हो गया .....
परिस्थिति तो तब और ख़राब हुए जब मेरे पिताजी का भी लड़का हुआ.. मेरे पिताजी का लड़का यानि की मेरा भाई मेरा ही पोता हो गया ..इस तरह मै स्वयम का ही दादा हो गया और स्वयम का ही पोता बन गया....

और तू कहता है तुजे फॅमिली प्रॉब्लम है.  



daju really funny. Thanks

मेरा पहाड़ / Mera Pahad


एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720


This is wonderful.

Quote from: एम् एस मेहता /M S Mehta on September 26, 2008, 05:06:38 PM

Written by Badola ji.


चल तुमेडी बाटे बाट मैं क्या जानू बुडिये की बात



रात्रि मैं भोजन के पश्चात निद्रा रानी के आव्हान के लिए कहानी सुनना बच्चों की दिन चर्या का एक आवश्यकीय अंग होता है. हम भी बचपन मैं रोज कहानी सुनते थे कहानी सुनते सुनते सो जाना एक साधारण बात थी.

एक दिन की बात है की रात्रि मैं हमारी दादी ने एक कहानी सुनाई 'चल तुमेडी बाटे बाट मैं क्या जानू बुडिये की बात'  दादी ने बताया की एक गाँव मैं एक शेर लगा था वह दिन दहाड़े आकर आदमियों का शिकार करता  था गाँव के लोगो  ने शेर से फरियाद की की वह एक बार मैं एक ही  आदमी को शिकार बनाए  जंगल का राजा शेर राजी हो गया क्योंकि उसे बिना मेहनत के शिकार जो मिल रहा था. तब से बारी बारी लोग शेर का शिकार बनने लगे एक दफा एक चतुर बुडिया की बारी आइ वह शेर का निवाला नहीं बनना चाहती  थी अतः उसने स्वयं को 
एक तुमडी (A hollow gourd)मैं बंद कर लिया तथा गाँव वालों से कहा कि उसे घुरया दें तुमडी घुरीते घुरीते जा रही थी कि शेर कि उस पर नज़र पड़ गयी. उसने तुमडी  को रोका और कहा की मेरा शिकार कहाँ हैं बुडिया बोली  चल तुमेडी बाटे बाट मैं क्या जानू बुडिये की बात इस प्रकार बुडिया बच गई उसने चतुराई से अपनी जान बचा ली

दूसरी कहानी के अनुसार जब शेर नहीं माना तो बुडिया ने शेर को समझाया कि वह अपने नाती के पास जा रही है अभी वह दुबली पतली है नाती के पास जाकर लोटते वक्त काफ़ी मोटी हो जाउंगी तब मुझे खाना शेर राजी हो गया और चतुर बुडिया ने अपनी जान बच्चा ली कहानी सुनते सुनते मैं कब सो गया मुझे पता नहीं. (D.N.Barola)

Lalit Mohan Pandey

यह बात बहुत पहले की है, जब गावू मै बहुत गरीबी हुआ करती थी और लोगु के पास खाने को कुछ ज्यादा नही हुआ करता था, और बच्चू को भी कभी कभार ही अच्छा खाना मिला करता था...

हमारे गाव के पास मै ही एक मन्दिर है जयंती माता ka (ध्व्यज  मन्दिर), वहा पे शिवरात्रि के दिन मेला लगता है.  इस मन्दिर मै जाने के दिन वर्त (फास्ट) रखना जरुरी होता है. तो हमारे गाव से एक बच्चा इस मेले मै जा रहा था, दूसरे दिन फास्ट होने की वजह से पहली रात को उसे घर मै भरपूर खाना मिला . जो की नोर्मल्ली अभी भी होता है भाई कल वर्त है तो आज पेट भर खा ले वाली बात.  और वर्त वाले दिन वो सुबह शैच के लिए भी नही गया की पेट खली हो जाएगा तो भूख लगने लगेगी सोच के.
अब मन्दिर पंहुचा तो वहा बहुत भीड़ थी और दरसन करके मै बहुत टाइम लग गया, इस बीच वो अपनी लैटिन को रोक नही पाया और धोती मै ही थोड़ा बहुत निकल गया. फ़िर वो वो हिम्मत करके और जैसे तैसे रोक के खड़ा रहा और मन्दिर तक पंहुचा, तो पुजारी को बहुत बदबू आई तो पुजारी चिलाया की ये बदबू क्यों आ रही है... किसी के पैर मै लैटिन तो नही लगी है.. सब अपने पैर देखने लगे... तो पुजारी को पता चल गया की इस बच्चे ने तो धोती मै ही लैटिन कर रखी है...  और पुजारी ने बच्चे को धक्के मारते हुए कहा की " दूर जा मुल्या तो भट्टे  बास रैछ"   (बास = बदबू). भाई शाहब एक तो लैटिन का जोर उप्पर से पंडित का धक्का दोनु साथ मै बच्चा सम्भाल ना पाया और पूरी लैटिन धोती मै ही निकल आई और वैसे ही उसे घर तक आना पड़ा.  और उस बेचारे का नाम हमेशा के लिए हगवा पड़ गया

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720


Pandey JI,

Really laughing incident. ha.h.a...

Quote from: Lalit Mohan Pandey on December 11, 2008, 03:51:07 PM
यह बात बहुत पहले की है, जब गावू मै बहुत गरीबी हुआ करती थी और लोगु के पास खाने को कुछ ज्यादा नही हुआ करता था, और बच्चू को भी कभी कभार ही अच्छा खाना मिला करता था...

हमारे गाव के पास मै ही एक मन्दिर है जयंती माता ka (ध्व्यज  मन्दिर), वहा पे शिवरात्रि के दिन मेला लगता है.  इस मन्दिर मै जाने के दिन वर्त (फास्ट) रखना जरुरी होता है. तो हमारे गाव से एक बच्चा इस मेले मै जा रहा था, दूसरे दिन फास्ट होने की वजह से पहली रात को उसे घर मै भरपूर खाना मिला . जो की नोर्मल्ली अभी भी होता है भाई कल वर्त है तो आज पेट भर खा ले वाली बात.  और वर्त वाले दिन वो सुबह शैच के लिए भी नही गया की पेट खली हो जाएगा तो भूख लगने लगेगी सोच के.
अब मन्दिर पंहुचा तो वहा बहुत भीड़ थी और दरसन करके मै बहुत टाइम लग गया, इस बीच वो अपनी लैटिन को रोक नही पाया और धोती मै ही थोड़ा बहुत निकल गया. फ़िर वो वो हिम्मत करके और जैसे तैसे रोक के खड़ा रहा और मन्दिर तक पंहुचा, तो पुजारी को बहुत बदबू आई तो पुजारी चिलाया की ये बदबू क्यों आ रही है... किसी के पैर मै लैटिन तो नही लगी है.. सब अपने पैर देखने लगे... तो पुजारी को पता चल गया की इस बच्चे ने तो धोती मै ही लैटिन कर रखी है...  और पुजारी ने बच्चे को धक्के मारते हुए कहा की " दूर जा मुल्या तो भट्टे  बास रैछ"   (बास = बदबू). भाई शाहब एक तो लैटिन का जोर उप्पर से पंडित का धक्का दोनु साथ मै बच्चा सम्भाल ना पाया और पूरी लैटिन धोती मै ही निकल आई और वैसे ही उसे घर तक आना पड़ा.  और उस बेचारे का नाम हमेशा के लिए हगवा पड़ गया