• Welcome to MeraPahad Community Of Uttarakhand Lovers.
 

Funny Incidents - हास्य घटनाये

Started by एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720, November 02, 2007, 04:22:29 PM

पंकज सिंह महर

Quote from: Lalit Mohan Pandey on April 30, 2008, 03:33:16 PM
एक बार कनालीछीना मै रामलीला हो रही थी, रामलीला से वापस जाते हुए कुछ लोगु ने कीसी के खेत से अदरक चुरा दीयी. तों उसने आके रामलीला कमेटी मै सीकायत कर दीयी. अब रामलीला कमेटी वाले परेशान थे की क्या कीया जाय, क्युकी रामलीला बीच मै रोकी नही जा सकती और अगर लोग यही करते रहे तों अलग अलग गाव मै झगरा होने का डर था, क्युकी कनालीछीना की रामलीला को देखने के लीये आसपास के बहुत गाव से लोग आते है, झगरा होने का डर इसलिए भी ज्यादा था की सब एक दूसरे गाव मै आरोप लगा रहे थे की फलाफला गाव वाले चोरी करते है,  और ये चोरी के शिकायतऐ बहुत दीनु से आ रही थी, तों उन्होंने सोचा वहा एक पर्शिद कथा वाचक थे उन्हें बुलाया जाय और उनसे लोगु को चोरी न करने का उपदेश दील्वाया जाय.
तों दूसरे दिन कथावाचक जैसे ही मंच मै आये, तों सबने तालिया बजायी और कथावाचक जोर से बोले "सज्जनो"  पीछे से कीसी ने उतनी ही जोर से उत्तर दिया "उऊऊ" (जैसे पहाड़ मै कीसी को आवाज लगाओ और वो दूर हो तों वो वहा से जोर से लंबा ऊ बोल कर उत्तर देते है, जैसे कोए बच्चा अपनी मम्मी को आवाज लगता है "इजजजा" और माँ दूर से कहती है "उऊऊ")
खेर वाकये मै लौटता हू - तों उसी तरह कीसी ने पीछे से उत्तर दिया  "उऊऊ". तों वो कथावाचक कुछ देर तक चुप रहे अपने दुबारा बोले "सज्जनो", अपने उस आदमी ने भी दुबारा वैसे ही बोला "उऊऊ", कथावाचक जी कुछ देर फ़िर से चुप रहे और अपने गुस्से को दबाते हुए  फ़िर बोले "सज्जनो",  उस आदमी ने फ़िर से बोल दिया  "उऊऊ" , कथावाचक जी से रहा नही गया और बोले "अन्न खाते हो या गू"
उस दिन से उस आदमी ने शायद कीसी को भी "उऊऊ" करके उत्तर नही दिया होगा. (अन्न means अनाज)

लल्दा, उस आदमी का नाम सज्जन सिंह तो नहीं था, क्योंकि हमारी तरफ नाम के आगे "ओ" लगाकर भी पुकारा जाता है। जैसे होशियार को होशियारोऽऽऽऽ

Lalit Mohan Pandey

HA HA... ye ho sakta hai sahi ho.. use laga ho muje hi pukar rahe hai.. kyuki kyon tha or uska nam kya tha muje bhi pata nahi hai, bheed mai peeche se kyon bola pata nahi chala or katha wachak ka answer ""अन्न खाते हो या गू" sunane ke bad to koe yah accept karne ke liye ready nahi tha ki "उऊऊ" kahne wala mai tha. warna uski badi khichayi hoti, wo katha wachak mitarigav (gav ka nam hi mitarigav hai) ke Shri Devi datt Pant ji the.


Quote from: पंकज सिंह महर on April 30, 2008, 05:12:09 PM
Quote from: Lalit Mohan Pandey on April 30, 2008, 03:33:16 PM
एक बार कनालीछीना मै रामलीला हो रही थी, रामलीला से वापस जाते हुए कुछ लोगु ने कीसी के खेत से अदरक चुरा दीयी. तों उसने आके रामलीला कमेटी मै सीकायत कर दीयी. अब रामलीला कमेटी वाले परेशान थे की क्या कीया जाय, क्युकी रामलीला बीच मै रोकी नही जा सकती और अगर लोग यही करते रहे तों अलग अलग गाव मै झगरा होने का डर था, क्युकी कनालीछीना की रामलीला को देखने के लीये आसपास के बहुत गाव से लोग आते है, झगरा होने का डर इसलिए भी ज्यादा था की सब एक दूसरे गाव मै आरोप लगा रहे थे की फलाफला गाव वाले चोरी करते है,  और ये चोरी के शिकायतऐ बहुत दीनु से आ रही थी, तों उन्होंने सोचा वहा एक पर्शिद कथा वाचक थे उन्हें बुलाया जाय और उनसे लोगु को चोरी न करने का उपदेश दील्वाया जाय.
तों दूसरे दिन कथावाचक जैसे ही मंच मै आये, तों सबने तालिया बजायी और कथावाचक जोर से बोले "सज्जनो"  पीछे से कीसी ने उतनी ही जोर से उत्तर दिया "उऊऊ" (जैसे पहाड़ मै कीसी को आवाज लगाओ और वो दूर हो तों वो वहा से जोर से लंबा ऊ बोल कर उत्तर देते है, जैसे कोए बच्चा अपनी मम्मी को आवाज लगता है "इजजजा" और माँ दूर से कहती है "उऊऊ")
खेर वाकये मै लौटता हू - तों उसी तरह कीसी ने पीछे से उत्तर दिया  "उऊऊ". तों वो कथावाचक कुछ देर तक चुप रहे अपने दुबारा बोले "सज्जनो", अपने उस आदमी ने भी दुबारा वैसे ही बोला "उऊऊ", कथावाचक जी कुछ देर फ़िर से चुप रहे और अपने गुस्से को दबाते हुए  फ़िर बोले "सज्जनो",  उस आदमी ने फ़िर से बोल दिया  "उऊऊ" , कथावाचक जी से रहा नही गया और बोले "अन्न खाते हो या गू"
उस दिन से उस आदमी ने शायद कीसी को भी "उऊऊ" करके उत्तर नही दिया होगा. (अन्न means अनाज)

लल्दा, उस आदमी का नाम सज्जन सिंह तो नहीं था, क्योंकि हमारी तरफ नाम के आगे "ओ" लगाकर भी पुकारा जाता है। जैसे होशियार को होशियारोऽऽऽऽ

Risky Pathak


Lalit Mohan Pandey

एक पंडीत जी हमारे गाव के ठाकुरु के यहा बीरती करते थे मतलब पंडीताई करते थे, और वो sanskirt बहुत अच्छी जानते थे, और अच्छे श्लोक गाते थे. तो वह महिलाऊ के समझ मैं नही आता था. एक बार वो बीमार पड़ गए और उन्होंने अपने लड़के को शादी करवाने के लिए भेज दीया, उसे बिल्कुल भी कुछ नही आता था.. और वो  बीच मैं श्लोक मैं गड़बदा गया तो उसने "हरे गुलाबी लाल बैगनी, लाया हू जी मैं गुबारे" वाली पोएम गा दीयी.   ये चीज महिलाऊ को थोड़ा समझ मैं आ गई क्युकी कभी न कभी किसी बच्चे के मुह से उन्होंने ये सुनी होगी. वो दूसरे दिन वो आपस मैं बात कर रही थी. और मेन पंडित जी के लिए कह रही थी "हा उन त तैसा हुन, जीजय क्योन हुन के समझ मैं न उनो, उनारा चेलान्लेत बहुत बडिया गाछ, सब समझ मैं उनमरीथ्यो".     

Risky Pathak

Lo + 1 Karma Pandey Jee..... Is Topic Par to aap apna swamitva bnaaye rakhe hai...  ;D

Lalit Mohan Pandey

Ha yaar Himanshu bhai, Jitna bhi time milta hai mai kosish karta hu ki kuch na kuch yogdan kiya jay forum mai...
ये घटना तब की है जब महाभारत सीरियल आया करता था. हमारे गाव मै तब एक ही TV हुआ करता था, और पूरा गाव उन्ही के घर जा के महाभारत देखा करते थे वैसे लगभग हर गाव की यही कहानी थी.
आप लोगु ने सुना होगा गाव मै दरवाजा बंद करने के लिए एक आगोलो होता है, ये एक लकड़ी का 2feet लंबा टुकडा होता है, ये अन्दर से दरवाजा बंद करने के काम आता है, और जब दरवाजा खोलते है तो इसे दरवाजे के पीछे रख दिया जाता है. इस घटना मै आगे आगोलो का ज़िक्र आयेगा.

तो जीनके घर tv थी sunday को उनके घर मै बहुत भीड़ हो जाती थी, ये घटना उस दीन की है जब द्रोपती का चीरहरण हो रहा था.. ये सीन देख कर हमारे गाव की एक आमा भड़क गई, ये आमा दरवाजे के पास मै बैठी थी, तो दरवाजे के पीछे से आगोलो नीकालती हुए जोर से चिल्लाई, "मै बर्सुछु,  ते रानका का खोरा ला, सीबो सीब, ते नन्तीनी को कम कार्यो बदनाम, तो कानो (Dhirtrast ke liye) रानको ले क्या की चुप छ, तुमन (सभी बैठे हुए लोगु से ) ले नी भे श्रम चाsss रीछा, कहती हुए वो TV की तरफ़ लपक पड़ी हाथ मै आगोलो लेते हुए"
इतने मै जीनकी tv थी वो चिल्ला पड़े, "थाम थाम तीनन, आज फोडी हालनान मेरी TV"  तो लोगु ने पकड़ के आमा को बड़ी मुश्किल के समझाया वरना उस दीन आमा टीवी फोड़ की देने वाली थी. 
मुझे आज भी ये घटना जब याद आती है तो हसी फूट पड़ती है, वो सीन देखने लायक था, और जीनकी tv थी उनका घबराया हुआ चेहरा ना कहो, वैसे उन्दिनु tv खरीद पाना बहुत मुश्किल था

Quote from: Himanshu Pathak on May 01, 2008, 08:21:48 PM
Lo + 1 Karma Pandey Jee..... Is Topic Par to aap apna swamitva bnaaye rakhe hai...  ;D

Rajen

Achcha hai G   ;D

Quote from: Lalit Mohan Pandey on May 01, 2008, 07:40:38 PM
एक पंडीत जी हमारे गाव के ठाकुरु के यहा बीरती करते थे मतलब पंडीताई करते थे, और वो sanskirt बहुत अच्छी जानते थे, और अच्छे श्लोक गाते थे. तो वह महिलाऊ के समझ मैं नही आता था. एक बार वो बीमार पड़ गए और उन्होंने अपने लड़के को शादी करवाने के लिए भेज दीया, उसे बिल्कुल भी कुछ नही आता था.. और वो  बीच मैं श्लोक मैं गड़बदा गया तो उसने "हरे गुलाबी लाल बैगनी, लाया हू जी मैं गुबारे" वाली पोएम गा दीयी.   ये चीज महिलाऊ को थोड़ा समझ मैं आ गई क्युकी कभी न कभी किसी बच्चे के मुह से उन्होंने ये सुनी होगी. वो दूसरे दिन वो आपस मैं बात कर रही थी. और मेन पंडित जी के लिए कह रही थी "हा उन त तैसा हुन, जीजय क्योन हुन के समझ मैं न उनो, उनारा चेलान्लेत बहुत बडिया गाछ, सब समझ मैं उनमरीथ्यो".     

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720


Hi hi hi.. Yah to wahi wali ghatna se milta hai. Jo maine pahne dali thee.. Ek admi torch ko band nahi kar paya, usne torch to pani ki balti mai dal diya.

Phir bhi torch band nahi huwa.. to use tood dala.


Quote from: Lalit Mohan Pandey on May 05, 2008, 02:15:48 PM
Ha yaar Himanshu bhai, Jitna bhi time milta hai mai kosish karta hu ki kuch na kuch yogdan kiya jay forum mai...
ये घटना तब की है जब महाभारत सीरियल आया करता था. हमारे गाव मै तब एक ही TV हुआ करता था, और पूरा गाव उन्ही के घर जा के महाभारत देखा करते थे वैसे लगभग हर गाव की यही कहानी थी.
आप लोगु ने सुना होगा गाव मै दरवाजा बंद करने के लिए एक आगोलो होता है, ये एक लकड़ी का 2feet लंबा टुकडा होता है, ये अन्दर से दरवाजा बंद करने के काम आता है, और जब दरवाजा खोलते है तो इसे दरवाजे के पीछे रख दिया जाता है. इस घटना मै आगे आगोलो का ज़िक्र आयेगा.

तो जीनके घर tv थी sunday को उनके घर मै बहुत भीड़ हो जाती थी, ये घटना उस दीन की है जब द्रोपती का चीरहरण हो रहा था.. ये सीन देख कर हमारे गाव की एक आमा भड़क गई, ये आमा दरवाजे के पास मै बैठी थी, तो दरवाजे के पीछे से आगोलो नीकालती हुए जोर से चिल्लाई, "मै बर्सुछु,  ते रानका का खोरा ला, सीबो सीब, ते नन्तीनी को कम कार्यो बदनाम, तो कानो (Dhirtrast ke liye) रानको ले क्या की चुप छ, तुमन (सभी बैठे हुए लोगु से ) ले नी भे श्रम चाsss रीछा, कहती हुए वो TV की तरफ़ लपक पड़ी हाथ मै आगोलो लेते हुए"
इतने मै जीनकी tv थी वो चिल्ला पड़े, "थाम थाम तीनन, आज फोडी हालनान मेरी TV"  तो लोगु ने पकड़ के आमा को बड़ी मुश्किल के समझाया वरना उस दीन आमा टीवी फोड़ की देने वाली थी. 
मुझे आज भी ये घटना जब याद आती है तो हसी फूट पड़ती है, वो सीन देखने लायक था, और जीनकी tv थी उनका घबराया हुआ चेहरा ना कहो, वैसे उन्दिनु tv खरीद पाना बहुत मुश्किल था

Quote from: Himanshu Pathak on May 01, 2008, 08:21:48 PM
Lo + 1 Karma Pandey Jee..... Is Topic Par to aap apna swamitva bnaaye rakhe hai...  ;D

Risky Pathak

haha.. Pandey Jee....

Hasya ke Sath Sath aap Pahaad ki cheezo ka bhi vivran dete ho.. Ye Ulekhniya Hai...

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720


एक बार हमारे भुलाकड़ आदमी एक बारे गेहू लाने के लिय बाजार मे, किट के बजाय जल्दी मे अपनी घरवाली का घाघरा ले गया !