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Funny Incidents - हास्य घटनाये

Started by एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720, November 02, 2007, 04:22:29 PM

umeshjoshi

EK KISSA HAMARE GAON KA HAI....
HAMARE GAON KE EK AADMI JAJMAANI KARTE THE LEKIN THE BAHUT LALCHI...EK BAAR EK JAJMAAN KE YAHA KHANA BANANE GAYE JAJMAAN NE UNKO KHUB SAARA GHEE DIYA SABJI, DAAL CHAUKNE KE LIYE PANDIT JI NE AGAL BAGAL DEKHA AUR ADHE SE JYADA GHEE KHUD PEE GAYE...PAR UNKO GHEE HAJAM NAHI HUWA AUR MAHARAJ GHEE NIKALNA SHURU HO GAYA...PANDIT JI PARESHAN KI KYA KARE..UNHONE DHOTI SE HAATH DALKAR GHEE POCHKAR SIR MAIN LAGANA SHURU KAR DIYA..EK NE PANDIT JI YE SAB KARTE DEKH LIYE...USNE KAHA "JOSHI JYU KI KARNA CHA TAU" PANDIT JI BOLE.. "KE KHA JE KI RAKHO NINAR PET AA RAI RATTE RATTE" USKE BAAD UNKO KAHI BHI JAJMAANI MAIN NAHI BULAYA GAYA
AISE BHI HAI PANDIT JI

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720


मेरा एक दोस्त गाव मे बहुत ही शैतान था ! एक बार एक चाचा जी मक्के भून रहे थे ! उसने उनसे कहा चाचा जी मुझे में दे दो एक मक्का !चाचा जी ने उसे भगा दिया !

थोडी देर बाद वह दूकान से पटाखे खरीद के ले आया और फिर वही आ गया ! वह उस चाचा जी से फिर अनुरोध करेने लगा मक्का देने के लिए !  फिर इस चाचा जी ने मक्का नही दिया !

अब देखिये शरारत,..

बोला चाचा मे आग फूकने मे आप की मदद कर हूँ.

और उसने वहां पटाखे डाल कर भाग निकला..

थोडी देर मे धमाका .. . धमाका..

अब खावो चाचा आप मक्के !!!

प्रहलाद तडियाल

एकदम सच्ची घटना है :-

एक बार की बात है..सज्ञान थी...ओरते घर में सज्ञान बना रहे थी और आदमी लोग खेत हाल जूट रहे थे.....हमरे एक चाचा है महीपाल सिंह (मह्पू का) गोवन में सबके चाचा लगते है तो हम उनको मह्पू का करके बोलते है.......... अब सज्ञान बना कर उनकी माता जी खेत में चली  गयी और उनको सज्ञान देने अपनी दीदी के वहा जाना था....दीदी के लिये सज्ञान पेक करके जोले (बैग) को दीवर पर टाग दीया था.........और उनसे कहा गया की तू घर जा और सज्ञान कहा लेना और दीदी के वहा चला जाना.....दीदी क लिये सज्ञान टाग कर रख दी है..............देर हो गयी थी मह्पू का जल्दी - जल्दी खेत से आये और एक बैग ले कर आये  जेसमें की बैल के मुह पर लगने वाला म्हवो, एक नसुड और और रसी वगेरा राखी थी उन्होंने   उस बेग को भी उसके बगल में टाक दीया और जल्दी से खाना खाया और जल्दी - जल्दी में उस बेग को ले गए जीसमें को वो खेत से लेकर आये थे......जब दीदी क वहा ज्या कर देखा तो ..............................पुरे गो में मह्पू का की खूब मजाक बनी........लूग अभी तक मह्पू का से मजे लेते है.........  ;D ;D ;D  :o :o:o :o :o 

Anubhav / अनुभव उपाध्याय


एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720


Great bhai,

ha ha.. ha.. h
Quote from: prahlad.tadiyal on July 18, 2008, 03:57:57 PM
एकदम सच्ची घटना है :-

एक बार की बात है..सज्ञान थी...ओरते घर में सज्ञान बना रहे थी और आदमी लोग खेत हाल जूट रहे थे.....हमरे एक चाचा है महीपाल सिंह (मह्पू का) गोवन में सबके चाचा लगते है तो हम उनको मह्पू का करके बोलते है.......... अब सज्ञान बना कर उनकी माता जी खेत में चली  गयी और उनको सज्ञान देने अपनी दीदी के वहा जाना था....दीदी के लिये सज्ञान पेक करके जोले (बैग) को दीवर पर टाग दीया था.........और उनसे कहा गया की तू घर जा और सज्ञान कहा लेना और दीदी के वहा चला जाना.....दीदी क लिये सज्ञान टाग कर रख दी है..............देर हो गयी थी मह्पू का जल्दी - जल्दी खेत से आये और एक बैग ले कर आये  जेसमें की बैल के मुह पर लगने वाला म्हवो, एक नसुड और और रसी वगेरा राखी थी उन्होंने   उस बेग को भी उसके बगल में टाक दीया और जल्दी से खाना खाया और जल्दी - जल्दी में उस बेग को ले गए जीसमें को वो खेत से लेकर आये थे......जब दीदी क वहा ज्या कर देखा तो ..............................पुरे गो में मह्पू का की खूब मजाक बनी........लूग अभी तक मह्पू का से मजे लेते है.........  ;D ;D ;D  :o :o:o :o :o 


Dinesh Bijalwan

एक बार की बात है हुम कुछ लड्के  फुट्बाल खेल्ने के बाद कपडे  बद्ल रहे थे / हम मे से सभी पहाड से थे , कुछ नेपाल से भी थे /अचानक दो व्यक्ति कार से उतर कर  हमारी तरफ आये / उन्मे से एक हमारे नेपाली साथी से बोला  - हमारे पास रहेगा ? बता  क्या लेगा ? हमारा साथी असमन्जस मे था तभि एक दूसरा साथी बोल पडा/ जितने फेरे आगे रहुन्गा हजार लुन्गा और जितने फेरे पीछे रहुगा दो हजार  इस पर वह व्यक्ति  बोला क्या फेरे -फेरे कर्ते हो / मैने सुना  है कि पहाडी अछ्छे नौकर होते है / हमारा दोस्त बोला  सरजी, पहाडी घरजवाइ  भी अच्छे होते है/  सबने  ठहाका लगाया / दोनो सज्ज्न खिसिया कर  चले गये /

पंकज सिंह महर

Quote from: dinesh bijalwan on July 18, 2008, 04:50:16 PM
एक बार की बात है हुम कुछ लड्के  फुट्बाल खेल्ने के बाद कपडे  बद्ल रहे थे / हम मे से सभी पहाड से थे , कुछ नेपाल से भी थे /अचानक दो व्यक्ति कार से उतर कर  हमारी तरफ आये / उन्मे से एक हमारे नेपाली साथी से बोला  - हमारे पास रहेगा ? बता  क्या लेगा ? हमारा साथी असमन्जस मे था तभि एक दूसरा साथी बोल पडा/ जितने फेरे आगे रहुन्गा हजार लुन्गा और जितने फेरे पीछे रहुगा दो हजार  इस पर वह व्यक्ति  बोला क्या फेरे -फेरे कर्ते हो / मैने सुना  है कि पहाडी अछ्छे नौकर होते है / हमारा दोस्त बोला  सरजी, पहाडी घरजवाइ  भी अच्छे होते है/  सबने  ठहाका लगाया / दोनो सज्ज्न खिसिया कर  चले गये /

gr8888888 दिनेश जी,

      बहुत अच्छा जबाब दिया आप लोगों ने।

Uttarakhand Admin

खीम सिंह जी का लिखा

फैमिली

अकसर जब दो पहाडी भाई मिलते है सेवा सलाम के बाद पूछते हैं तुम्हर नन दगडे छै या घर (पहाड से मतलब) मा छै । आज अग्रेजी का मिश्रण से कहते है कि फैमिली साथ मा छा या घर मा। यह घटना तो नही है अग्रेजी के फैमिली पर एक हास्य सा हैः-

चनीदा दिल्ली मे नौकरी कनेर हय दिवाई टैम पर उनर गौवक भौया घर जाहुय। चनीदा सोच कि घर जणम ज्याधौ डबल खर्च हैल तहाँ त म्यर फैमिली यक दगड आ जाली। चनीदा ल एक चिठी लेखी आपण बाज्यू हुणी कि हयून लगण हौच य पौरे बाखईक भईया दिवाई हू घर आहूर तो तुम मेरी फैमिली कै यक हात भेज दिया। बाबूल चिठी पडी और य सोचण लाग कि चनी घर क्य भूल गोय जो हयून हूणी मंगा हू।

पैली सारे भतेर चहाय के नी मिल फिर ब्वारी हूई कय ब्वारी तकैणी खबर छा चनी फैमिली घर छोड गो । ब्वारी लै कय ना हो सौरज्यू मकणी नीछ खबर। फिर मनम सोच कि हयून में जाड लागण हनल तो 'शायद खातड़ (रजाई) कै फैमली कहनल वा। त खातड मंगाण हनल।  

चनीदा बाज्यू चिठी लेखी च्यला यक फैमली हय उकै पार हती (हयातसिंह) आपण पहौणों (मेहमान) लिजीक लिगो, एक महैन तक वोती हय और जब वापिस दी आधुक जवै (जलाना) दी । तू एक दूसरी फैमली बजार बै आजी खरीद ले।
===


हेम पन्त

मज्ज्जा आ गया.....

Quote from: Pankaj/पंकज सिंह महर on July 18, 2008, 03:10:48 PM
हमारे रोंगटे खड़े हो गये कि भूत उम्मेद दा की आवाज में बोल रहा है। सबके सिट्टी-पिट्टी गुम। हमने पलट के नहीं देखा.. तो फिर चिल्लाने की आवाज...ओ ईजा, मैसे लागी गिछ मसाण, पकड़ि हाल्यू, ओ बबा, आज भटे नै ऊ.....। हमने हिम्मत करके पीछे देखा तो उम्मेद दा काफी दूर खड़े चिल्ल रहे थे और रो रहे थे। हम भाग कर गये तो उम्मेद दा ने बताया कि उन्हें किसी भूत ने पकड़ लिया है और मान-विनती करने पर भी नहीं छोड़ रहा है। हमने टार्च लगाकर देखा तो उम्मेद दा का कुर्ता घिंघारु की झाड़ी में फंसा था  :D  ;D  :D  ;D

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हेम पन्त

गांव में सामुहिक भोज (लौर) के दौरान छुआ-छूत का विशेष ध्यान रखा जाता है. लोग एक पंक्ति में बैठ जाते हैं और चूल्हे से खाना बांटने वाले दूर से ही थालियों में खाना डालते हैं.

एक बार भात (चावल) थोडा गीला बन गया था. बार-२ पण्योले(खाना बांटने का बडा सा चम्चा) में चिपक जा रही थी. एक बच्चे की थाली में खाना परोसा जा रहा था तो भात देने के लिये बांटने वाला पण्योले को झटकने लगा. बच्चा संभवत: कुछ ज्यादा ही भूख से आतुर था. उसने अपने हाथ से ही पण्योले से भात छुडा दिया.

लेकिन वह बिचारा बडी भारी भूल कर बैठा. अब सभी लोगों के लिये खाना दुबारा बनाया गया, तब वह भोज का कार्यक्रम संपन्न हो पाया.