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Water Crisis In Uttarakhand : पानी की समस्या से जूझता उत्तराखण्ड

Started by हुक्का बू, April 05, 2010, 12:52:36 PM

Devbhoomi,Uttarakhand

बारिश के लिए पहुंचे भगवान की शरण में



गोपेश्वर। गरमी की तपिश से राहत पाने के लिए अब गोपेश्वरवासी भगवान की शरण में चले गए हैं। शनिवार को लोगों ने पवन देव मंदिर में पूजा-अर्चना करते हुए पवन देव का आह्वान कर बारिश की मनौैती मांगी। इस दौरान पुरोहित ने मंत्रों के साथ हवन में आहुति देकर पूजा संपन्न कराई।

जंगलों में पिछले एक माह से भड़की आग को गर्मी का मुख्य कारण माना जा रहा है। इस मौके पर कुंती चौहान, आशा कोटवाल, पुष्पा नेगी, विमला तिवारी, मंजू पंवार, विनोद रावत आदि मौजूद थे। लगातार जल रहे जंगलों से क्षेत्र में धुंध कम होने का नाम नहीं ले रही है। अब लोगों की आस इंद्र देव पर टिकी है। शनिवार को भी कर्णप्रयाग और आसपास काफी नीचे तक धुंध बनी रही।
उत्तरकाशी। भागीरथी घाटी के जंगलों में लगी आग बेकाबू होती जा रही है। देवदार, बांज, बुरांश, दुर्लभ भोजपत्र वृक्ष और बुग्याल भी खाक होने लगे हैं। शनिवार दोपहर उत्तरकाशी नगर पालिका क्षेत्र में वरुणावत पहाड़ी पर लगी आग पर वन कर्मियों ने स्थानीय लोगों की मदद से काबू पा लिया। इस समय उत्तरकाशी वन प्रभाग के 25 जंगलों में आग भड़की हुई है। हर्षिल क्षेत्र में लगी आग के बारे में तो विभाग को जानकारी ही नहीं है।


अपर भागीरथी घाटी में नौ से 10 हजार फीट की ऊंचाई पर स्थित पुड़गा, बल्दोरी, सियांगाड और हर्षिल कंपार्टमेंट नंबर चार में शनिवार को भड़की आग की चपेट में देवदार और भोजपत्र के जंगल भी आ गए हैं। पुड़गा में लगी आग तेजी से लमखागा पास से हिमाचल प्रदेश की सीमा की ओर बढ़ रही है।


उत्तरकाशी नगर पालिका क्षेत्र में गोफियारा और भटवाड़ी रोड पर कई घर अब भी जंगल की आग से घिरे हुए हैं। उपप्रभागीय वनाधिकारी नंदावल्लभ शर्मा का कहना है कि धरासू में तापमान 42 और उत्तरकाशी में 40 डिग्री सेल्सियस होने से स्थिति नियंत्रण से बाहर होती जा रही है।


पहाड़ों में प्रलयंकारी दावानल 10 हजार फीट ऊंचाई तक चढ़ गई है। लपलपाती लपटें सब-कुछ लील रही हैं। अब इसकी चपेट में बहुमूल्य देवदार, पवित्र भोजपत्र, उपयोगी बुरांश और हरियाले बुग्याल भी आते जा रहे हैं। जंगल धधकने की वजह से जहां देखो धुएं और धुंध के गुबार नजर आ रहे हैं। कई स्थानों पर तो इसने सूरज को ढक लिया है। बेकाबू आग को बेबस निगाहों से निहारना लोगों की नियति बन गई है।

चढ़े पारे ने कोढ़ में खाज जैसी हालत कर दी है। कुछ स्थानों पर वन विभाग के अधिकारियों ने हालात को देखते हुए हाथ खड़े कर दिए हैं। वन विभाग से खफा लोग आग बुझाने के लिए सेना की मदद मांगने लगे हैं। बारिश के लिए पूजा-पाठ और दुआओं का दौर भी शुरू हो गया है

Amarujala

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हाड़ पर पानी की यही कहानी गर्मी के साथ हर ओर बूंद-बूंद के लिए हो रही मारामारी



रुद्रप्रयाग। गर्मी का प्रकोप बढ़ते ही             जिला मुख्यालय में भी पेयजल संकट गहराने लगा है।जिला मुख्यालय में न्यू मार्केट, गुलाबराय, जागतोली, अपर बाजार समेत कई मोहल्लाें में विगत कई दिनाें से पेयजल आपूर्ति अनियमित बनी हुई है। जल संस्थान के अधिशासी अभियंता आरसी खंडूरी ने बताया कि स्रोत पर पानी की उपलब्धता कम होने से समस्या हो रही है।

इसलिए रोस्टर के अनुसार आपूर्ति की जा रही है। कुछ स्थानाें पर टैंकराें द्वारा आपूर्ति की जा रही है। ज्येष्ठ उप प्रमुख अगस्त्यमुनि मोहन सिंह सिंधवाल ने बताया कि न्यू मार्केट में एक माह से पेयजल संकट बना हुआ है। लोगों ने स्थिति में सुधार न होने पर आंदोलन की चेतावनी दी है।




गोपेश्वर में पानी के लिए लोगों को दर-दर भटकना पड़ रहा है। प्रतिदिन टैंकरों से पेयजल सप्लाई हो रही है। शनिवार को हल्दापानी में टैंकर से पानी समाप्त होने के बाद खाली हाथ वापस लौटते लोग। लोगों ने जल संस्थान के ईई से भेंट कर पेयजल आपूर्ति की मांग की
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देवप्रयाग। महड़ क्षेत्र की ग्राम पंचायतों में कई लोगों को अवैध पेयजल कनेक्शन दिए जाने का आरोप लगाते हुए ग्रामीणों ने तहसील परिसर पहुंचकर प्रदर्शन किया। साथ ही अवर अभियंता पर अभद्रता व्यवहार का आरोप लगाते हुए लोगों ने पेयजल मंत्री व जल संस्थान के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। ग्रामीणों की मांग पर अवर अभियंता ने अपने व्यवहार के लिए खेद भी जताया।

श्रीराम सेवा समिति एवं पेयजल संघर्ष समिति के बैनर तले महड़ क्षेत्र की सात ग्राम पंचायतों से बड़ी संख्या में महिलाएं, बुजुर्गों व बच्चों ने कड़ी धूप के बावजूद तहसील मुख्यालय पर प्रदर्शन किया। पुलिस व प्रशासन की टीम को प्रदर्शनकारियों को बाहर निकालने के लिए खासी मशक्कत करनी पड़ी। ग्रामीणों ने जल संस्थान के जूनियर इंजीनियर पर अवैध जल संयोजन देने व इसका विरोध करने वालों को धमकाने का आरोप लगाया।

ग्रामीणों को समझाने पहुंचे अधिशासी अभियंता आरएसएल बिष्ट का भी ग्रामीणों ने घेराव किया। क्षेत्र में हो रहे अवैध संयोजनों को चिह्नित कर तत्काल प्रभाव से काटे जाने की मांग की गई। प्रदर्शनकारियों ने स्थानीय विधायक व पेयजल मंत्री मंत्री प्रसाद नैथानी को इस संबंध में ज्ञापन भी प्रेषित किया।

जल संस्थान के अधिशासी अभियंता ने अवैध संयोजन करने वालों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने और जन प्रतिनिधियों की मौजूदगी में एक सप्ताह के भीतर कनेक्शन काट दिए जाने का आश्वासन दिया। इस मौके पर किनखोला, गुसांईगांव, आमणी, कांडी गुसांई, कोटी गुसांई, गढ़कोट आदि के ग्रामीण शामिल थे।


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उत्तरकाशी: डुण्डा विकास खंड के बांदू गांव के लोग पानी की बूंद बूंद के लिए तरस रहे हैं। गांव में एक साल पेयजल संकट जारी है। अब तक ग्रामीण प्रशासन से कई बार गुहार लगा चुके, लेकिन पेयजल आपूर्ति बहाल नहीं हो पाई। इस मामले में पेयजल संस्थान की मानें तो गांव मेंसुबह शाम दो-दो घंटे पानी उपलब्ध कराया जा रहा है। भंडास्यूं पट्टी का बांदू गांव बीते साल से पेयजल संकट झेल रहा है। बीते वर्ष मई से ग्रामीण अब तक पांच -छह बार पेयजल संस्थान से लेकर जिलाधिकारी तक गुहार लगा चुके है, लेकिन अब तक भी गांव में पेयजल आपूर्ति बहाल नहीं हो सकी। वहीं, बीते वर्षो में गांव की पेयजल योजना पर प्रशासन लाखों रुपये फूंक चुका है।

ग्रामीणों ने योजना की जांच करने की भी प्रशासन से मांग की थी, लेकिन यह मांग भी प्रशासन ने अनसुनी कर दी। ग्रामीणों की माने तो गांव में पेयजल लाइन की देखरेख के लिए एक फीटर तक नहीं है। पेयजल लाइन की देखरेख चालीस किमी दूर ब्लाक मुख्यालय से की जा रही है।


जब गर्मी चरम पर है तो ग्रामीणों को रोजमर्रा की जरूरतों लायक पानी जुटाने के लिए भी एक से डेढ़ किमी दूर जाना पड़ रहा है। ग्राम प्रधान सरोजनी देवी का कहना है कि ग्रामीण प्रशासन से गुहार लगा कर थक चुके है, लेकिन अब तक कोई समाधान नहीं हो सका है।
'टाइमिंग व्यवस्था के चलते पानी सुबह शाम दिया जा रहा है। ग्रामीण चौबीस घंटे पानी आपूर्ति की मांग कर रहे है, जो संभव नहीं। गांव के निकट हैंडपंप भी लगाया गया है।'




Source Dainik jagran

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[/font]गुप्तकाशी पेयजल योजना को गबनीगाड़ स्रोत से जोड़ने हेतु          1.75 करोड़ रुपये   [/font]ऊखीमठ पेयजल योजना के स्रोत पिंगलापानी से अतिरिक्त              पाइप लाइन बिछाने के लिए 2.00 करोड़ रुपयेज्यादा पानी की जरूरतगर्मियों में गुप्तकाशी और ऊखीमठ में पेयजल किल्लत हो जाती है। काफी पुरानी योजनाओं में पानी की कमी है। जिला प्रशासन के निर्देशानुसार दोनों बाजारों की पेयजल योजनाओं के पुनर्गठन की अनुमानित लागत दी गई थी। -आरसी खंडूरी, ईई जल संस्थानपौड़ी जनपद - देवलखाल, पोखरी, चुडई, पालकोट,  रूडियाली, नैनीडांडा, हल्दूखाल,  आमगांव कांडी, गुडगांव, भैड़गांव, बनास तल्ला। उत्तरकाशी जनपद - देवली, नाल्ड गंगोरी, मनेरा ओर ज्ञानसू।[/font]शासन को भेजा गया है पुनर्गठन का प्रस्तावऊखीमठ, गुप्तकाशी के कई क्षेत्रों में परेशानी

पीठ पर लादकर पानी लाती घनसाली के चानी गांव की महिला।

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एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720


Water crisis in ranikhet.

बूंद-बूंद को तरसा रानीखेत

रानीखेत: पहाड़ों में लगातार पड़ रही गर्मी के साथ ही तहसील के कई गांवों में पेयजल की किल्लत भी बढ़ती जा रही है। सबसे ज्यादा बुरा हाल ग्रामीण क्षेत्रों का है, लेकिन विभाग को इससे कोई लेना-देना नहीं है। हालांकि विभागीय अधिकारी सड़कों के किनारे वाले गांवों में टैंकर से पानी वितरण की बात कर रहा है, इसके इतर सड़क होने के बावजूद भीा चमड़खान क्षेत्र में अभी तक जल संस्थान का टैंकर नहीं पहुंच पाया है।

तहसील के चमड़खान, टानारैली, मासर आदि गांवों के ग्रामीण पानी के तरसने लगे हैं। ग्रामीणों को दूर-दराज क्षेत्रों से पानी ढोने को मजबूर होना पड़ रहा है। गांवों में प्रात:काल से ही लोग अपने प्राकृतिक नौलों, धारों को ओर रुख करने लगे हैं। लंबे समय से उपेक्षित पड़े इन स्रोतों से ग्रामीणों को गंदा पानी पीने को मजबूर होना पड़ रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि विभागीय लापरवाही से उनके नलों में पानी तो नहीं आ रहा है। इसकी जानकारी विभाग को देने के बाद भी अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हो पायी है और न ही जल संस्थान क्षेत्र में अभी तक टैंकर से पानी भेज रहा है। उन्होंने विभागीय अधिकारियों पर क्षेत्र की घोर उपेक्षा का आरोप लगाते हुए आंदोलन की धमकी दी है।

यही हाल तहसील के ताड़ीखेत क्षेत्र का है। यहां जल संस्थान द्वारा गगास पंपिंग पेयजल योजना व ऋषिगाड़ पेयजल योजना से पानी उपलब्ध कराया जाता है। दो-दो योजना होने के बाद भी लोगों को पीने तक का पानी नसीब नहीं हो रहा। लोगों का कहना है कि विभाग क्षेत्र में पहले से ही एक दिन छोड़कर पेयजल उपलब्ध कराता है, लेकिन आजकल यह भी नहीं मिल रहा है। इसलिए लोगों को हैंडपंप में लाइन लगाकर पानी का जुगाड़ करने को मजबूर होना पड़ रहा है। जिससे उनका समय की काफी बर्बादी हो रही है। ग्रामीणों ने शीघ्र ही क्षेत्र में पेयजल उपलब्ध कराने की मांग उठाई है।

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