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Save Trees & Plant Trees Initiative by Merapahad-पेड़ बचाओ पेड लगाओ

Started by एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720, June 02, 2010, 07:58:13 AM

हेम पन्त

स्व. गोपाल बाबू गोस्वामी जी ने वृक्षों को बचाने का आह्वान करता हुआ यह गाना गाया था-

आज यो मेरी सुणो पुकारा, आज यो मेरी सुणो पुकारा, धात लगुंछो आज हिमाला

www.apnauttarakhand.com/aaj-meri-sun-lo-pukaara-gopal-babu-goswami

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720


Some message through Facebook
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Namitha Kumar
Hi Mahipal, Please let me know how i can help your campaign. I live in Bangalore


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Sanjeev Saurabh
Hi Dear Mahipal, Please let me know how could I help in your campaign. I live in New Delhi & I am always with U......
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Mahipal Singh Mehta

Thanks Namitha g and Sanjeev G. We are planning to conduct some camps in rural areas educating people about the importance of trees and would also encourage them for plantation. In the mean while, we are spreading this message through banner and posters in pahad. For net users, we sending mails generating the awareness.

dayal pandey/ दयाल पाण्डे

एक सन्देश गाने के रूप मैं
पुरुष स्वर- धुपरी घामा गाव सुकीगो ओ शीला पाडी पिलैदे ,
स्त्री स्वर - म्योर पहाडा पाडी सुकीगो ओ हीरू पाडी नि माँगा ,
दुवारा.....................................................................
स्त्री स्वर- धरा नौला छवाई सब बुझी गिन,
                 गाद -गधेरा सब सुकी गिन,
                 हाई पाडी हाई पाडी हाई पाडी हैगे, ओ हीरू पानी नि माँगा
                 म्योर पहाडा पाडी सुकीगो ...............
पुरुष स्वर - डाली न काटो पेड़ लगाओ,
                     पाडी बचाओ पराड़ी बचाओ.
                      जाग - जाग नौला और छवाई फुटेला ओ शीला पाडी पिलैदे
                      दुपारी धाम गाव सुकीगो ..................

continue.......remaining part of song come soon
copy right with mera pahad

नमो नारायण!
अति उत्तम बिचार ॥
बृक्ष न केवल मानव के लिये किंतु सम्पूर्ण प्राणियों के लिये अत्यंत आवश्यक हैं ।  अधिकाधिक बृक्ष लगाओ, उनकी देखभाल करो, उनसे मित्रता करो यह भी ईश्वर की आराधना का एक स्वरूप है और ऐसा करने वाले को भी नारायण वही फल प्रदान करते है जो कि उनकी निस्वार्थ भक्ति करने वाले को। 

नमो नारायण ।

खीमसिंह रावत

पारा का भिड़ा कोछे घयारी मालू ये तू मालू न काटा

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

 

Make a Resolution To save and plant Trees.

"Where is the will, there is way".

पेड़ औलाद से कम नहीं ?

खीमसिंह रावत

   मेहता जी १० पेड़ लगाने का संकल्प तो ठीक है पर लगाने मात्र से कुछ नहीं होता है जब तक की उसकी सुरक्षा न की जांय | चराने वाले जानवरों, घस्यारियो व् आग से बचाना ज्यादा महत्वपूर्ण है |

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

 


Friends,

Today is a World Environment Day. Plant maximum trees to save the forest.

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720

 
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गोपेश्वर (चमोली)। अड़सठ साल की उम्र में भी न उनका जज्बा कम हुआ और न ही जुनून। इस 'सफर' की शुरुआत उन्होंने अकेले ही की और आज भी एकला चलो रे की तर्ज पर बिना किसी हमसफर के अपने जुनून में मस्त हैं। सड़कों के किनारे पौधे रोपना और उन्हें सींचना ही इस शख्स के जीवन का मकसद बन गया है। उन्हें ढूंढना कोई मुश्किल कार्य नहीं, बदरीनाथ की यात्रा करते हुए सड़क के किनारे वे पौधों की निराई करते मिल जाएंगे। हालांकि, उनके जज्बे और जुनून को न तो पहचान मिल सकी न सम्मान। गैरों की छोड़िए अपने भी उन्हें 'बौराया' हुआ मान बैठे। बावजूद इसके चक्रधर तिवारी रोड साइड में खाली जमीन पर पौधे रोपते जा रहे हैं। आज उनके 'पसीने' से सींचे 14 जंगल 'जवान' होकर लहलहा रहे हैं।
चमोली जनपद के टंगसा गांव निवासी चक्रधर तिवारी ने अपना जीवन पर्यावरण को समर्पित कर रखा है। उनमें बचपन से ही समाज सेवा व पर्यावरण संरक्षण की ललक थी। लिहाजा, स्कूल में किसी भी राष्ट्रीय त्योहार के मौके पर आयोजित कार्यक्रम में वे भाषण के दौरान श्रोताओं को पर्यावरण संरक्षण का संदेश देना नहीं भूलते थे। जब भी श्री तिवारी को मौका मिलता तो वह एक नई पौध जरूर रोपते थे। महज 22 वर्ष की उम्र में वह एक संस्था से जुड़ गए और शराब के खिलाफ आंदोलन के साथ-साथ उन्होंने पर्यावरण के प्रति जागरूकता अभियान भी चलाया। उनके अभियान को मंजिल मिलती तब दिखाई दी, जब वे अपने गांव टंगसा के ग्रामप्रधान निर्वाचित हुए। सिरौं, टंगसा व कठूड़ तीनों राजस्व गांवों के ग्रामीणों को जागरूक कर उन्होंने आसपास के क्षेत्र में छोटे-छोटे 14 मानवकृत वनों को विकसित करने में सफलता हासिल की। पहले खेती बाड़ी कर वह अपने गुजारा कर लेते थे। आयु अधिक होने पर जब शरीर की साम‌र्थ्य कम होने लगी तो वर्ष 2007 में श्री तिवारी ने सोचा कि जिला मुख्यालय गोपेश्वर में सेवानिवृत्त कर्मचारियों का संगठन बनाकर सड़क के किनारे वृक्षारोपण किया जाए, लेकिन उन्हें अफसोस है कि एक सेवानिवृत्त फौजी राजेन्द्र सिंह नेगी के अलावा कोई अन्य व्यक्ति उनकी इस सोच का साथी नहीं बना। फिर भी हौसला रखते हुए उन्होंने राजेन्द्र सिंह के साथ गोपेश्वर में मिशन शुरू किया। इनके रोपे 630 वृक्ष तेजी से फलफूल रहे हैं। उनका कहना है कि वृक्षारोपण के बाद उनकी देखरेख व सुरक्षा करना एक बड़ी जिम्मेदारी है। शायद यही वजह है कि वो अपने पैसों से पानी का टैंकर मंगवाकर रोपे गए पौधों की सिंचाई करते हैं। उनकी पत्‍‌नी का कहना है कि उनके पति को अपने बच्चों से अधिक वृक्षों से प्यार है।

http://in.jagran.yahoo.com/news/local/uttranchal/4_5_6465959.html

Bhopal Singh Mehta


This is a good initiative by Merapahad Team.

This is need of the hour to save forest and minimize cutting of trees.