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Marriage Wishes to Mahenra Singh Dhoni & Sakshi Rawat !!

Started by एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720, July 04, 2010, 02:23:17 PM

Devbhoomi,Uttarakhand

                              धौनी-साक्षी कोलंबो के लिए रवाना
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भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान महेंद्र सिंह धौनी हाल में शादी करने के बाद शनिवार को श्रीलंका के लिए रवाना हो गए जहां वह 18 जुलाई से शुरू हो रही तीन टेस्ट और ट्राई वन डे सीरीज के लिए टीम के अन्य खिलाड़ियों के साथ जुड़ेंगे।

धौनी के साथ उनकी पत्नी साक्षी भी श्रीलंका गई हैं। भारतीय कप्तान शुक्रवार को टीम के साथ नहीं गए थे और मद्रास क्रिकेट क्लब की मानद सदस्य लेने के लिए शुक्रवार शाम यहीं रुक गए थे। इस समारोह का अयोजन धौनी की अगुआई में इंडियन प्रीमियर लीग थ्री में चेन्नई सुपरकिंग्स की खिताबी जीत के लिए किया गया था।

भारत श्रीलंका में तेज गेंदबाज जहीर खान के बिना गया है जो कंधे की चोट से उबर रहे हें। टेस्ट सीरीज के बाद भारत को ट्राई वन डे सीरीज में भी हिस्सा लेना है जिसकी शुरूआत 10 अगस्त से होगी। सीरीज की तीसरी टीम न्यूजीलैंड है।

http://in.jagran.yahoo.com/news/sports/cricket/7_32_6558906.html

Charu Tiwari

धोनी की शादी में पगलाये सभी पहाड़वासियों को टीवी पर छद्म उत्तराखंड़ी संस्कृति के बीच बेगाने की शादी में बाराती बनने की हार्दिक शुभकामनायें। उन लोगों को भी जिन्हें पहाड़ की संस्कृति उस समय याद आयी जब बाजार बनते एक खेल के कमाउ व्यक्ति की शादी को भी सब लोगों ने बाजार के रूप में इस्तेमाल किया। आपकी संस्कृति को भी। क्योंकि किसी पत्रकार की औकात नहीं थी जो इस शादी का सीधे प्रसारण कर पाता। पहाड़ियों की तो छोड़ों। इसलिये उन्होने धौनी कहां बैठा था, किस कमरे में रहा था, इसकी वीडियोग्राफी की। जो उसे अपनी दुकान चलाने के लिये चहिये था वह चैनलों ने पहाड़ के कुछ लोगों को अपने स्टूडियों बैठाकर पूरा कर लिया। धौनी के बारे में आप लोग पता नहीं क्यों इतने आग्रही हैं कि उसे पहाड़ी बनाकर छोड़ोगे। उसने देहरादून में आकर शादी की, उसने पहाड़ी रीति-रिवाज से शादी की, उसकी दुल्हन ने पहाड़ी गलोबंद पहना और भी बहुत सारी परीलोक की कहानियां आप सब लोगों ने सुनी और सुनाई लेकिन इस सबके बीच आपके पहाड़ी होने के गौरव को कैसे सम्मान मिला यह मेरी समझ में नहीं आया।

धौनी के पहाड़ी होने पर गर्व करने वाले पहाड़ियों के सामने एक सवाल रख रहा हूं आप लोग शायद अन्यथा नहीं लेंगे। यह सवाल है देश के सबसे बड़े नर पिशाच कोली का जो उत्तराखंड के सल्ट विकास खंड का रहने वाला है। एक सीधा-साधा पहाड़ी। अपनी रोटी और बच्चों को पालने की गरज से दिल्ली चला गया मेरी और आपकी तरह। एक कोठी में काम करने लगा। अपने मालिक के लिये उल्टे-सीधे काम। असली अपराधी उसका मालिक है। उसके पास अपार पैसा है। वह लगातार हर केस में बरी होता जा रहा है। अभी किसी को यह पता भी नहीं है कि कोली ने यह अपराध किया भी था या नहीं। जिसके घर में कथित रूप से कोली बच्चों को मार रहा था उसके मालिक को पता ही नहीं है। सीबीआई और जांच एजेन्सियां और न्यायालय हर तीसरे महीने में कोली को हर केस में मृत्युदंड दे रही है और हर केस में पंडेर को बरी किया जा रहा है। पंडेर के साथ एक जमात खड़ी है। एक अपराधी के साथ।

मैं यह नहीं कह रहा हूं कि आप कोली के साथ खड़े होइये। पहाड़ मे उसकी बीबी और वह बच्चा है जिसे वह पेट में छोड़ आया था। बूढ़ी मां है जो पूरे जीवन भर उस अपराधी की मां का कलंक ढो रही है जिससे बड़ा अपराधी दुनिया में और कोई नहीं। धौनी की शादी का जश्न मनाने वाले पहाड़ी क्या कोली की मां और बीबी को भी वैसा ही अपराधी मानते हैं जैसा कोली है? जिस प्रकार धौनी जैसी पूरी पहाड़ी कौम नहीं हो सकती वैसे ही कोली की तरह पूरी पहाड़ी कौम नहीं हो सकती। इसलिये धौनी के लिये जश्न मनाने वाले लोगो आइये अपने मानवता धर्म और आपकी भाषा में पहाड़ के हितैषियो हम आगे आकर पहाड़ की उस बेबा की मदद करें जो पूरी संसार से बेवजह तिरस्कार ही नहीं जीवन का संघर्ष भी कर रही हैं। क्या आप और हम सच्चे पहाड़ी हैं जो इस सत्य को स्वीकार करने के लिये तैयार हैं। यदि हां तो फिर पहाड़ी धौनी और पहाड़ी कोली के परिवार के फर्क को पाटिये।

Himalayan Warrior /पहाड़ी योद्धा



चारू जी नमस्कार...

आपके विचार में सच्चाई है! लेकिन शायद लोग उगते सूरज को ही नमन करते है ! यही पहाड़ के लोग धोनी के लिए कर रहे है

Charu Tiwari

जिस दिन महेन्दz सिंह धोनी की शादी के जश्न में देश मीडिया और पहाड़ डूबा था उसी समय पहाड़ के एक युवा पत्रकार और बेहतर समाज के बारे में सोचने वाले हेम पांडे को आन्ध्z प्रदेश की पुलिस ने पफर्जी मुठभेड़ में हत्या कर दी। हेम पिथौरागढ़ का रहने वाला था और दिल्ली में रहकर एक कंपनी में नौकरी करता था। वह कई अखबारों और पत्रिाकाओं के लिये लिखता भी था। लंबे समय से वह वामपंथी छात्रा संगठन आइसा से भी जुड़ा रहा। हेम माओवादी नेता और प्रवक्ता आजाद का इंटव्यू लेने नागपुर गया था जिसे पुलिस ने आजाद के साथ उठाकर आन्धz के अलिहाबाद ले जाकर पफर्जी मुठभेड़ में मार गिराया। बताया गया कि वह माओवादी था। जिस समय आप लोग धौनी की शादी में उस समय हम लोग हेम को न्याय दिलाने की लड़ाई लड़ रहे थे। दिल्ली में उनके शव को स्वामी अग्निवेश के निवास से निगमबोध घाट ले जाकर अन्त्येष्टि की। पहाड़ के लोगों पर गर्व करने वाला कोई वहां नहीं था। पहाड़ के वे पत्राकार भी नहीं जो धौनी की शादी की कवरेज धैनी के देहरादून से निकल जाने के बाद खाली होटल के पफर्नीचर को दिखा कर कर रहे थे। इस लोकतंत्र में जहां आपको अपनी बात किसी भी विचारधारा से जुड़कर कहने की आजादी है वहां माओवादी बताकर पुलिस द्वारा की गयी हत्या पर सवाल उठाने की हिम्मत धौनी को पहाड़ पुत्रा बताने वाले किसी व्यक्ति में नहीं है।

राजेश जोशी/rajesh.joshee

चारू जी
नमस्कार, धोनी के प्रति आपके विचारों से मैं पूरी तरह से सहमत नही हूं, वैसे व्यक्तिगत रूप से मैं भी धोनी का उत्तराखण्ड का मानने को तैयार नही, यह बात मैने पहले भी इस फ़ोरम के माधयम से कही थी।  पर अपनी शादी से उसने अपने माता-पिता तथा पहाड़ी संस्कृति के प्रति अपने लगाव को जरुर प्रदर्शित किया है।  बांकि आजकल मिडिया ने जनता को इस तरह से बहलाना शुरु कर दिया है कि वह वही देखती है जो मिडिया के दर्पण से उसे दिखाया जाता है।  किसी की शादी वैसे भी एक व्यक्तिगत विषय है मिडिया कवरेज का नही।
जहां तक कोली को सजा देने का प्रश्न है, आपसे मैं पूर्णत: सहमत हूं कि जैसे होता आया है एक सर्मायेदार ने अपना सारा पाप एक गरीब से सर मढ़्कर उसे जिन्दगी को बरबाद कर दिया। मैं चाह्ता हूं कि उसकी जितनी हो सके सहायता की जानी चाहिऎ।  अगर उसके परिवाज के लिए कुछ किया जा सके तो वह और भी अच्छा होग क्योंकि वे लोग तो किसी भी रूप में दोषी नही है।  जिस दिन अदालत का निर्णय हुआ था उसी दिन मैने ट्विटर पर मैने इस सम्बन्ध में घोषित किया था
"दलित कोली को फ़ांसी और जेल, बाहुबली पन्ढेर को ईज्जत और बेल, सब खामोश हैं न्याय की देवी, दलितो के मसीहा, पिछड़ों के संरक्षक और शायद भगवान भी     8:17 AM May 13th  via web "
https://twitter.com/rajeshjoshee

Quote from: Charu Tiwari on July 10, 2010, 04:50:05 PM
धोनी की शादी में पगलाये सभी पहाड़वासियों को टीवी पर छद्म उत्तराखंड़ी संस्कृति के बीच बेगाने की शादी में बाराती बनने की हार्दिक शुभकामनायें। उन लोगों को भी जिन्हें पहाड़ की संस्कृति उस समय याद आयी जब बाजार बनते एक खेल के कमाउ व्यक्ति की शादी को भी सब लोगों ने बाजार के रूप में इस्तेमाल किया। आपकी संस्कृति को भी। क्योंकि किसी पत्रकार की औकात नहीं थी जो इस शादी का सीधे प्रसारण कर पाता। पहाड़ियों की तो छोड़ों। इसलिये उन्होने धौनी कहां बैठा था, किस कमरे में रहा था, इसकी वीडियोग्राफी की। जो उसे अपनी दुकान चलाने के लिये चहिये था वह चैनलों ने पहाड़ के कुछ लोगों को अपने स्टूडियों बैठाकर पूरा कर लिया। धौनी के बारे में आप लोग पता नहीं क्यों इतने आग्रही हैं कि उसे पहाड़ी बनाकर छोड़ोगे। उसने देहरादून में आकर शादी की, उसने पहाड़ी रीति-रिवाज से शादी की, उसकी दुल्हन ने पहाड़ी गलोबंद पहना और भी बहुत सारी परीलोक की कहानियां आप सब लोगों ने सुनी और सुनाई लेकिन इस सबके बीच आपके पहाड़ी होने के गौरव को कैसे सम्मान मिला यह मेरी समझ में नहीं आया।

धौनी के पहाड़ी होने पर गर्व करने वाले पहाड़ियों के सामने एक सवाल रख रहा हूं आप लोग शायद अन्यथा नहीं लेंगे। यह सवाल है देश के सबसे बड़े नर पिशाच कोली का जो उत्तराखंड के सल्ट विकास खंड का रहने वाला है। एक सीधा-साधा पहाड़ी। अपनी रोटी और बच्चों को पालने की गरज से दिल्ली चला गया मेरी और आपकी तरह। एक कोठी में काम करने लगा। अपने मालिक के लिये उल्टे-सीधे काम। असली अपराधी उसका मालिक है। उसके पास अपार पैसा है। वह लगातार हर केस में बरी होता जा रहा है। अभी किसी को यह पता भी नहीं है कि कोली ने यह अपराध किया भी था या नहीं। जिसके घर में कथित रूप से कोली बच्चों को मार रहा था उसके मालिक को पता ही नहीं है। सीबीआई और जांच एजेन्सियां और न्यायालय हर तीसरे महीने में कोली को हर केस में मृत्युदंड दे रही है और हर केस में पंडेर को बरी किया जा रहा है। पंडेर के साथ एक जमात खड़ी है। एक अपराधी के साथ।

मैं यह नहीं कह रहा हूं कि आप कोली के साथ खड़े होइये। पहाड़ मे उसकी बीबी और वह बच्चा है जिसे वह पेट में छोड़ आया था। बूढ़ी मां है जो पूरे जीवन भर उस अपराधी की मां का कलंक ढो रही है जिससे बड़ा अपराधी दुनिया में और कोई नहीं। धौनी की शादी का जश्न मनाने वाले पहाड़ी क्या कोली की मां और बीबी को भी वैसा ही अपराधी मानते हैं जैसा कोली है? जिस प्रकार धौनी जैसी पूरी पहाड़ी कौम नहीं हो सकती वैसे ही कोली की तरह पूरी पहाड़ी कौम नहीं हो सकती। इसलिये धौनी के लिये जश्न मनाने वाले लोगो आइये अपने मानवता धर्म और आपकी भाषा में पहाड़ के हितैषियो हम आगे आकर पहाड़ की उस बेबा की मदद करें जो पूरी संसार से बेवजह तिरस्कार ही नहीं जीवन का संघर्ष भी कर रही हैं। क्या आप और हम सच्चे पहाड़ी हैं जो इस सत्य को स्वीकार करने के लिये तैयार हैं। यदि हां तो फिर पहाड़ी धौनी और पहाड़ी कोली के परिवार के फर्क को पाटिये।

Devbhoomi,Uttarakhand

दोस्तों सायद हम इस टोपिक पर अपना समय बर्बाद कर रहे हैं,मैं नहीं कहता की धोनी के बारें मैं हमें कुछ जानकारी नहीं होनी चाहिए,लेकिन जब धोनी अप्निआप को उत्तराखंडी मानता ही नहीं तो सायद हमें इस टोपिक को बंद कर देना चाहिए!

इस बोर्ड पर हमें उस इंसान को जगह देनी चाहिए जो कि- दुनिया के किसी भी कोने में रहकर या किसी भी राज्य में बसने के बाद भी अपनी संसकिरती और सभ्यता को नहीं भूल पाटा है और जिसने कि इस देवभूमि के लिए कुछ किया हो , अब इस टोपिक पर ज्यादा सम्स्य न बर्बाद करके कुछ और सोचें और जानने कि कोशिस करें !

और अब रही सुरेन्द्र कोली कि बात वो तो गुनहगार है उसे सजा तो मिलनी ही चाहिए,भले वो कहीं का भी हो देवभूमि उत्तराखंड हो या झारखंड का,उसने गुन्ह किया है तो सज्ज तो जरूर मिलगी ,पण्डेर कि जहन तक बात है उसके पास पैसा है तो वो पैसे के दम पर बेल  से छूट जाता है !

लेकिन एक दिन ऐसा भी आयेगा जब उसको वही पैसा मोत सजा सुनाएगा और कोई भी कुछ भी नहीं बचेगा उसके पास बेल करवाने के लिए जो भी गुनाह करता है उसको सजा भी जरूर मिलेगी चाहे वो कितना भी बचने कि कोशिस करे,सबका हिसाब-किताब इस दुनिया से जाने से ही पहले हो जाता है !

जाने से पहले अबको अच्छे बुरे का हिसाब इस दुनिया को छोड़ने से पहले करके जाना पड़ता है ,फर्क सिर्फ इतना होता है कि-किसी का हिसाब जल्दी हो जाता है और किसी का देर लग जाती है !

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720


मेरा परिवार मूलत: अल्मोड़ा (उत्तराखंड) के एक गाँव में बसा हुआ था, लेकिन मेरा जन्म रांची में हुआ। दरअसल नौकरी के सिलसिले में मेरे पिता रांची आकर बस गए थे। इसी शहर में 7 जुलाई, 1981 को मेरा जन्म हुआ।

[बहुत पसंद था दूध]

बचपन में मुझे अगर कोई चीज सबसे ज्यादा पसंद थी तो वह था दूध। हम तीन भाई-बहन थे और पिताजी इस बात का खास ख्याल रखते थे कि हमको ताजा दुहा हुआ दूध पीने को मिले। पता है, वे इसको सामने खड़े होकर निकलवाते थे। आज भी मुझे दूध बहुत पसंद है। जब मैं बड़ा हुआ और क्रिकेट मैचों के सिलसिले में बाहर के शहरों में जाने लगा तो वहाँ मुझे पैकेटबंद दूध मिलता था। शुरुआत में मैं इसको पीने में बहुत नाक-भौं सिकोड़ता था, लेकिन बाद में आदत पड़ गई। अब भी जब कभी रांची में होता हूँ तो ताजा दूध पीने का मोह नहीं छोड़ पाता। नन्हे दोस्तों, तुमको एक राज की बात बताऊँ? दूध पीना बहुत जरूरी है, यह न केवल संपूर्ण आहार है, बल्कि इससे स्टैमिना भी मजबूत होता है।

[सबसे छोटा-सबका लाड़ला]

मेरे परिवार में हम सभी लोग मिल-जुल कर रहते थे। मैं सबसे छोटा और सबका लाड़ला था। खास तौर पर मेरी बहन जयंती और माँ मुझे बहुत प्यार करती थीं। पिताजी बहुत अनुशासनप्रिय थे, लेकिन उनका प्यार भी कुछ कम नहींथा। अब भी मैं कोशिश करके दो माह में कम से कम एक बार रांची जरूर जाता हूँ। पता है, वहाँ पर मेरे दो प्यारे डॉग्स जारा और सैम भी हैं।

[पसंदीदा खेल था फुटबॉल]

आज तुम मुझे क्रिकेटर और टीम इंडिया के कैप्टन के रूप में पहचानते हो, पर पता है, बचपन में मैं बहुत सारे खेलों में रुचि रखता था। हमारे घर के बगल में ही स्टेडियम था और पिताजी बताते हैं कि मैं 5-6 साल की उम्र से क्रिकेट खेलने लगा था। खैर, मेरी रुचि बैडमिंटन में भी थी और मेरा सबसे पसंदीदा खेल था फुटबॉल। फुटबॉल में मैं स्कूल की टीम का गोलकीपर था। अब तुम सोच रहे होगे कि मैं क्रिकेट में कैसे आ गया? हुआ ये था कि जब मैं डीएवी जवाहर विद्यामंदिर में क्लास सेंवेंथ में था, तो स्कूल की क्रिकेट टीम को एक विकेटकीपर चाहिए था और कोई खिलाड़ी उपलब्ध नहीं था। हमारे पी.टी. टीचर बनर्जी सर को पता था कि मैं बढि़या गोलकीपिंग करता हूँ तो उन्होंने मुझे क्रिकेट टीम का विकेटकीपर बना दिया। यहीं से मेरा क्रिकेट करियर शुरु हुआ। 15 साल की उम्र में मैंने जीवन का पहला बड़ा क्रिकेट टूर्नामेंट सी.के. नायडू इंटरस्टेट स्कूल टूर्नामेंट खेला और आज यहाँ तक आ पहुँचा हूँ।

[मेहनत से मिलेगा मुकाम]

खेलकूद में बेहद रुचि के बावजूद मैंने कभी इसका असर पढ़ाई पर नहीं पढ़ने दिया। मैं क्लास में टॉपर तो नहीं था, पर हर बार फ‌र्स्ट डिवीजन जरूर लाता था। मैं तुमसे भी यही कहना चाहता हूँ कि जिंदगी में संतुलन बनाकर चलो। खूब खेलो और खूब पढ़ो। मैं भी एक साधारण सा बच्चा था। अगर कड़ी मेहनत के बल पर मैं आज इस मुकाम तक पहुँच सकता हूँ , तो तुम क्यों नहीं?

[मनीष त्रिपाठी]

http://in.jagran.yahoo.com/news/features/general/8_14_6593360.html

Raje Singh Karakoti

We all have send tonnes of wishesh to Mr Dhoni for his successful marrige life but Dhoni's honeymoon seems to be over even bofore its starting. His team was thrased by Lankan's by 10 wickets in first test and in second test match also his team is struggling as Lankan team is sailing at 292/2.

May be money wise mrs dhoni is lucky for him but in cricket term she is not luky for mahi.

May GOD help mahi & his team.

हेम पन्त