• Welcome to MeraPahad Community Of Uttarakhand Lovers.
 

How Much Migration From Uttarakhand- कितना पलायन हुआ उत्तराखण्ड से

Started by पंकज सिंह महर, July 20, 2010, 11:21:41 AM

पंकज सिंह महर

साथियो,
पलायन उत्तराखण्ड की नियति बन चुका है। इस बारे में सरकारी आंकड़े कुछ और कहते हैं, वास्तविक आंकड़े कुछ और। मेरा आप सभी से अनुरोध है कि आप सब अपने-अपने गांवों के पलायन का डाटा इस टापिक में प्रस्तुत करें। कि आपके गांव से कितने परिवार वास्तविक और स्थाई रुप से पलायन कर गये हैं, अर्थात कितने परिवार मैदानी क्षेत्रों की ओर स्थाई तौर पर जाकर बस चुके हैं।

सादर,
मेरा पहाड़ टीम

पंकज सिंह महर

मेरा गांव जनपद पिथौरागढ़ की बाराबीसी पट्टी के देवलथल में अवस्थित है, ग्राम सभा का नाम उड़ई है, जिसमें एक छोटा सा गांव है, खोला। जंगल के नजदीक बसा यह गांव कभी भरा-पूरा रहता था, लगभग ३५-३६ परिवार यहां पर रहते थे। लेकिन जंगल और पानी के नजदीक होना इस गांव के लिये अभिशाप हो गया, क्योंकि यहां तक आज तक सड़क नहीं पहुंची। बिजली भी यहां ७ साल पहले ही पहूंची, जब कि उप तहसील देवलथल से यह मात्र ३ कि०मी० है, जिसमें १ कि०मी० की सीधी चढ़ाई है।

१९८० से ही इस गांव में पलायन शुरु हो गया, बच्चों की पढ़ाई और दुर्गम खेती और कम उपज के चलते २-३ परिवारों ने यहां से बनबसा-चकरपुर-खटीमा-झनकट आदि सस्ती और उपजाऊ क्षेत्रों की ओर पलायन किया। जहां पर इससे भी कम मेहनत में ज्यादा अनाज उत्पादित होता था। धीरे-धीरे यह एक चलन बन गया और सक्षम लोग धीरे-धीरे पलायन के मजबूर होते रहे, आज यह स्थिति है कि इस छोटे से गांव से १६ परिवार स्थाई रुप से उक्त क्षेत्र में पलायन कर चुके हैं। एक परिवार बरेली, एक परिवार लखनऊ, एक परिवार कुछ दूर खनाली नामक गांव में पलायित हो चुके हैं। कुल मिलाकर १९ परिवार इस गांव से स्थाई रुप से पलायित हो चुके हैं। एक परिवार फिलहाल देवलथल कस्बे में रह रहा है और २-३ परिवार पलायन के लिये तैयार हैं। इस गांव में अब वह ही बच गये हैं, जिनके रोजगार का कोई सहारा नहीं है, जो कहीं और भूमि लेने में अक्षम हैं।

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720



My village name is  jarti.. Comes under District Bageshwar, Tahseel Kapkot.  I have been closing observing the migration rate in the village. In last one decade, the migration rate has very rapidly increased. Since the village is mostly inhabited by Ex-army personnel or 90% serving in army, people have started migrated because good education to their children. Most of the people have settled in Haldwani. 

The main reason behind this poor infrastructure and education. Light has just come 5 yrs ago in the village. 

पंकज सिंह महर

मेहता जी हमें वास्तविक आंकड़े चाहिये कि कुल कितने परिवार अभी तक आपके गांव से स्थाई पलायन कर चुके हैं। प्रतिशत के आंकडे तो बाजीगरी के काम आते हैं, सबके।



हेम पन्त

उत्तराखण्ड के पहाड़ी इलाकों से पलायन के कुछ मुख्य कारण इस तरह हैं - स्थानीय स्तर पर रोजगार की शून्यता सुदृढ शिक्षा व्यवस्था का अभाव, पेयजल की कमी और भौगोलिक स्थिति के कारण आवागमन / परिवहन में कष्ट.

मेरा गांव भड़कटिया, पिथौरागढ जिला मुख्यालय के पास ही मुख्य मार्ग पर है इस कारण पेयजल, शिक्षा और आवागमन की ऐसी कोई खास परेशानी नहीं है. लेकिन रोजगार और उच्च/तकनीकी शिक्षा के लिये युवाओं के पास दिल्ली, देहरादून आदि शहरों में जाने के अलावा कोई अन्य विकल्प नहीं है.

पहाड़ के दुर्गम क्षेत्रों में बसे गांवों की तरह पलायन के कारण गांव खाली होने के लक्षण हमारे गांव में नहीं हैं लेकिन पिछली पीढियों में रोजगार के लिये गांव से मैदानों की तरफ गये लोगों में से सेवानिवृत्ति के बाद इक्का-दुक्का ही वापस गांव में आकर बसे हैं. बाहर रह रहे लगभग आधा दर्जन लोग ऐसे हैं जिन्होंने अपनी पुश्तैनी जमीन/मकान बेचने शुरू कर दिये हैं, शायद उनका अब गांव लौटने का कोई विचार नहीं है.   

सत्यदेव सिंह नेगी

              Mahadev sain village map 1982        Head of femily  members  Position now(20-07-10)    Budhdhi Singh Arya(Negi)  9  2    Raje singh negi  7  1    Bachan singh negi  6  0    Bhupal singh negi  5  2    Puran singh Negi  8  0    Chankhi singh Bisht  4  2    Budhdhi singh bisht  3  2    Gabar singh Bisht  7  2    Meharban singh bisht  5  5    Kripal singh bisht  5  0    Bachan singh bisht  5  5    Mohan Singh Negi  3  0    Jagdish Prasad Barthwal  6  0    Maheshanand Barthwal  4  0    Mangat ram Barthwal  7  0    Badreedatt barthwal  2  0    Surender singh Negi  0 closed  0    Mahender Singh Negi  2  2    Mangeen Singh Negi  1  0    Kishan singh Negi  5  0    Balwant Singh negi  5  4    Sain singh Negi  6  5    Tul Singh Negi  4  3    Sachidanad barthwal  8  4    Mahanad barthwal  3  0    Dr Pram Singh Bisht  8  5    Shankar singh bisht  6  4    Prabhudayal singh bisht  4  0    Umed singh bisht  2  0    Anand singh bisht  7  0    Gobardhan Prasad Barthwal  3  0    boothi devi Bisht  1  0    Chaman Singh Negi  4  2    Manbar Singh negi  5  0    Dilwar Singh negi  0  0    Thebi Ram  6  4    Ghansyam Lal  7  0    Jagatram  3  0    Bhagatram  2  0    Bihari Lal  9  6    Sundar Lal  5  5    Kuli Lala  2  0    Bichhana Devi  3  0    Shym singh  5  0    Total  202  65

Meena Rawat

मेरा गाँव चम्पावत जिले के लोहाघाट से कुछ दुरी पर मल्ला खतेरा है

आज से करीब ८-९ साल पहले जब मैं गाँव जाती थी तब्ब हमेशा वहा पे लोगो की अच्छी  खासी भीड़  देखने को मिलती थी...लेकिन आज जब मैं गाँव जाती हु तो वहा पे कितने ही ऐसे परिवार है जो गाँव छोड़ के जा चुके है,
हमारे गाँव में कुल मिलकर २५ परिवार रहते है लेकिन आज २५ की जगह मुश्किल से १६-१८ परिवार ही रह गए है, और कुछ परिवारों में तो ऐसा है की बस बूढ़े माँ-बाप रह गए है घर में, उनके बच्चे उन्हें छोड़  के शहर को चले गये है कुछ लोग बनबसा, टनकपुर, दिल्ली इन् सब जगह में जाकर बस गए है
गाँव के मकान को बेचकर किसी दूसरी जगह में मकान लेने लग गए है लोग

ये सब समस्या  वहा पे पर्याप्त रोजगार सुविधा नहीं है इस वजह से होती है.....हमारे परिवार में ही मेरे बड़े भाईयो ने वहा पे पढाई करी है लेकिन अब्ब वो अच्छे रोजगार के लिए गाँव से दूर किसी शहर में जाना चाहते है ...
पता नहीं कब ये समस्या दूर होगी :(

एम.एस. मेहता /M S Mehta 9910532720


मेरे एक अनुमान के हिसाब से लगभग ३० परिवार इस गाव से १० सालो के अन्दर विस्थापित हो चुके है!

और यह आंकड़े आने वाले समय में बढ sakte है!